ⓘ साहित्यकार ..

आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी

आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी और आचार्य राममूर्ति अलग-अलग व्यक्ति हैं; भ्रमित न हों। आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी जन्म-स्थान: नीवी कलाँ, वाराणसी उ.प्र. जन्म - ४ जनवरी १९२९ निधन- ३० मार्च २००९) शिक्षा: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए., पी-एच.डी.; साहित्याचार्य, साहित्यरत्न। काव्यशास्त्र एवं दर्शन के प्रकांड पंडित। हिन्दी एवं संस्कृत के विद्वान एवं समालोचक थे। वे सागर विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे; विक्रम विश्वविद्यालय में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे तथा कई विश्वविद्यालयों के अतिथि शिक्षक विजिटिंग फैकल्टी भी रहे। वे शब्द शक्ति एवं रस विचार के अप्रतिम व्याख्याकार थे।

इगोर पावलोव

उनकी मां 10 दिनों में अपने जन्म के बाद निधन हो गया। वह अपने दादा और शहर से मां से अपनी दादी के घर में पले Chelm पोलैंड। उन्होंने सैन्य अकादमी में के में अध्ययन सेंट पीटर्सबर्ग, जहां उनके कैरियर के एक लेखक के रूप में शुरू किया। अपनी कविताओं में से कुछ के लिए सज़ा के रूप में, वह एक सजा के रूप में सजा सुनागई थी और टैगा कठिन काम में कुछ समय के लिए किया था। वहाँ वह अपने उसके यूक्रेनी मातृभूमि के लिए तरस से भरा काव्य जारी रखा। यह उसकी रिहाई तक चली. वर्षों में 1986-1992 इगोर पावलोव में पत्रकारिता के संकाय में अध्ययन राष्ट्रीय विश्वविद्यालय Lviv और धार्मिक और एक ही शहर में प्रेस प्रसारण के लिए एक ...

उपन्यासकार

उपन्यास के लेखक को उपन्यासकार कहते हैं। यह साहित्य की एक गद्य विधा है जिसमें किसी कहानी को विस्तृत रूप से कहा जाता है।। यह साहित्य की अत्यंत प्रचिलित विधा है इसलिये उपन्यासकार भी बहुत से मिलते हैं। उनमे से कुछ प्रमुख इस प्रकार से हैं - प्रेमचन्द नरेन्द्र कोहली शिवानी आचार्य चतुरसेन चार्ल्स डिकेंस आचार्य गणपतिचंद्र गुप्त ने उपन्यासों के वैज्ञानिक वर्गीकरण की चर्चा करते हुए निम्न वर्गीकरण किया है।

उपेन्द्र भंज

ओड़िया साहित्य के महान्‌ कवि उपेंद्र भंज सन्‌ 1665 ई. से 1725 ई. तक जीवित रहे। उन्हें कवि सम्राट कहा जाता है। उनके पिता का नाम नीलकंठ और दादा का नाम भंज था। दो साल राज्य करने के बाद नीलकंठ अपने भाई घनभंज के द्वारा राज्य से निकाल दिए गए। नीलकंठ के जीवन का अंतिम भाग नयागढ़ में व्यतीत हुआ था। उपेंद्र भंज के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने नयागढ़ के निवासकाल में ओड्गाँव के मंदिर में विराजित देवता श्रीरघुनाथ को रामतारक मंत्रों से प्रसन्न किया था और उनके ही प्रसाद से उन्होंने कवित्वशक्ति प्राप्त की थी। संस्कृत भाषा में न्याय, वेदांत, दर्शन, साहित्य तथा राजनीति आदि सीखने के साथ ही उन्होंने व् ...

ओक्तवे मिर्बो

Lettres de l’Inde 1991. Le Jardin des supplices 1899. Combats esthétiques 1993. Les affaires sont les affaires व्यापार व्यवसाय है, 1903. Le Calvaire 1886। Le Journal dune femme de chambre 1900. Dingo 1913. Le Foyer 1908. Sébastien Roch 1890. Combats littéraires 2006. LAbbé Jules 1888. Farces et moralités 1904. La 628-E8 1907.

गोपबंधु दास

गोपबंधु दास ओड़िशा के एक सामाजिक कार्यकर्ता, स्वतंत्रतता संग्राम सेनानी एवं साहित्यकार थे। उन्हें उत्कल मणि के नाम से जाना जाता है। ओड़िशा में राष्ट्रीयता एवं स्वाधीनता संग्राम की बात चलाने पर लोग गोपबंधु दास का नाम सर्वप्रथम लेते हैं। उड़ीसावासी उनको "दरिद्रर सखा" रूप से स्मरण करते हैं। उड़ीसा के पुण्यक्षेत्र पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के उत्तरी पार्श्व में चौक के सामने उनकी एक संगमर्मर की मूर्ति स्थापित है। उत्कल के विभिन्न अंचलों को संघटित कर पूर्णांग उड़ीसा बनाने के लिये उन्हांने प्राणपण से चेष्टा की। उत्कल के विशिष्ट दैनिक पत्र "समाज" के ये संस्थापक थे।

                                     

ⓘ साहित्यकार

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