ⓘ मलेरिया का मानव जीनोम पर प्रभाव. मलेरिया हाल के इतिहास में मानव जीनोम पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाला रोग रहा है। इसी कारण मलेरिया से बड़ी मात्रा में लोगों की मृ ..

                                     

ⓘ मलेरिया का मानव जीनोम पर प्रभाव

मलेरिया हाल के इतिहास में मानव जीनोम पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाला रोग रहा है। इसी कारण मलेरिया से बड़ी मात्रा में लोगों की मृत्यु होती है| यह मानव जीनोम पर अनेक प्रकार से प्रभाव डालता है।

एचएलए बी 53 की मौजूदगी से गंभीर मलेरिया की संभावना कम हो जाती है। यह एमएचसी श्रेणी 1 का अणु टी-कोशिकाओं को यकृत की संक्रमित कोशिकाओं और बीजाणुओं के एंटीजन दर्शाता है, जिससे टी-कोशिकाएँ इनके विनाश में सहायक होती हैं। क्रियाशील टी-कोशिकाएँ फिर इंटरल्यूकिन-4 का निर्माण करती हैं, जिसकी सहायता से बी-कोशिकाएँ प्रजनन करके और विविधता प्राप्त करके एंटीबॉडी पैदा करती हैं। बुर्किना फासो के फुलानी समुदाय में मलेरिया के मामले बहुत कम होते हैं, इनका अध्ययन करने पर पता चला कि पड़ोसी समुदायों की तुलना में उनमें कहीं ज्यादा आईएल4-524 जीन मौजूद है जिसका सीधा संबंध है रक्त में एंटीबॉडी की अधिक मात्रा से। यह मलेरिया एंटीजन के विरूद्ध काम करती है और इस के चलते मलेरिया के प्रति प्रतिरोध बढ़ जाता है।