ⓘ माइक्रोएल्ब्यूमिन या माइक्रल टेस्ट परीक्षण मधुमेह का गुर्दों पर प्रभाव जानने के लिए किया जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में माइक्रोएल्ब्युमिन नहीं पाया जात ..

                                     

ⓘ माइक्रोएल्ब्यूमिन

माइक्रोएल्ब्यूमिन या माइक्रल टेस्ट परीक्षण मधुमेह का गुर्दों पर प्रभाव जानने के लिए किया जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में माइक्रोएल्ब्युमिन नहीं पाया जाता। इस टेस्ट में यदि मूत्र में माइक्रोएल्ब्युमिन की थोड़ी भी मात्रा पाई जाती है तो इसका मतलब है कि गुर्दों पर मधुमेह का प्रभाव पड़ना शुरू हो गया है। ऐसे में अगर मधुमेह के साथ-साथ रक्तचाप पर भी नियंत्रण रखा जाए तो बीमारी के बढ़ने की संभावना बहुत कम हो जाती है। ऐसे में खाने में प्रोटीन जैसे दालें, पनीर, अंडे आदि की मात्रा कम कर दें तो बीमारी वहीं पर रुक जाती है। मधुमेह के हर रोगी को साल में एक बार यह परीक्षण अवश्य कराना चाहिए।

                                     

1. परीक्षण

यह एक स्क्रीनींग परीक्षण होता है, इसे करना बहुत सरल है। इसमें रिएजेंट स्ट्रीप का प्रयोग होता है। माइक्रल टेस्ट द्वारा इसे साधारणतः किया जाता है। २४ घंटे में सामान्य मनुष्य में ३० मि.ग्रा. से कम अल्बुमीन मूत्र में निकलता है। यदि रोगी के मूत्र में २४ घंटे में ३० मि.ग्रा. से ज्यादा अल्बुमीन जा रहा है तो माइक्रल टेस्ट पॉजीटीव आता है। स्ट्रीप टेस्ट से यदि पॉजीटिव रिजल्ट आता है तो इसे अन्य विशिष्ट जाँच द्वारा निश्चित करना जरुरी है।

                                     

2. माइक्रोअल्बुमिनुरिया

यदि रोगी को माइक्रोअल्बुमिनुरिया की अवस्था शुरु हो गयी है तो तुरंत सावधानी की आवश्यकता है। इस समय से भी यदि इन उपायों का वे अनुसरण करें तो किडनी फेल्यर से बचने की काफी संभावना रहती है। शुरुआती दौर से ब्लड-सुगर का कठोर नियंत्रण करें। यह सही खान-पान उपयुक्त व्यायाम, दवाइयाँ एवं इन्सुलीन के उचित प्रयोग द्वारा संभव है। इसके लिये आवश्यक है कि अपना वजन घटाएं। नमक कम खाएं। नियमित व्यायाम करें। शराब न पीये और धुम्रपान करें। चिकित्सक के परामर्श के बाद एस -इन्हीबीटर ग्रुप की दवा का नियमित प्रयोग करें।

इसके अलावा इन्हीबीटर ग्रुप की दवा का नियमित प्रयोग करे। हर हाल में रक्त-चाप १२० से ८० के नीचे रखें। उच्च रक्तचाप का रहना मधुमेह के मरीजों में किडनी फेल्यर का महत्वपूर्ण कारण है। छह माह में तीन बार किये गए पेशाब की जाँच में यदि दो बार माइक्रोअल्बुमिनुरिया मिले तभी यह निश्चित होता है कि यह पैथोलाजिकल है। केवल एक बार स्कारात्मक हो तो यह समान्य कारणों से भी हो सकता है।

                                     

3. उपचार

माइक्रोअल्बुमिनुरिया का पता होते ही खास उपायों के द्वारा इस अवस्था को रोका जा सकता है। इस टेस्ट के साकारात्मक होने का मतलब है कि आपको भविष्य में किडनी की खराबी की संभावना है।