ⓘ इतिहास ..

भारतीय इतिहास की समयरेखा

वैदिक काल प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक काल खंड है, जब वेदों की रचना हुई थी। हड़प्पा संस्कृति के पतन के बाद भारत में एक नई सभ्यता का आविर्भाव हुआ। इस सभ्यता की जानकारी के स्रोत वेदों के आधापर इसे वैदिक सभ्यता का नाम दिया गया। वैदिक काल को दो भागों ऋग्वैदिक काल 1500- 1000 ई. पू. तथा उत्तर वैदिक काल 1000 - 700 ई. पू. में बांटा गया जाता है।

2006 भारत अमेरिका परमाणु समझौता

2006 भारत अमेरिका परमाणु समझौता 18 जुलाई 2006 को भारत और अमेरिका के बीच हुआ परमाणु समझौता है। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने इस समझौते पे हस्ताक्षर किये। 18 जुलाई 2005 को वाशिंगटन में मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने साझा बयान जारी कर इस परमाणु क़रार की घोषणा की थी। मार्च 2006 में जब बुश भारत की यात्रा पर आए तो सैनिक और असैनिक परमाणु रिएक्टरों को अलग करने पर भी सहमति बनी। इसके बाद अमरीकी संसद ने हेनरी हाइड एक्ट पारित किया लेकिन करार को अमली जामा पहनाने से संबंधित 1-2-3 समझौते पर काफी अरसे तक सहमति नहीं बन पाई। १८ जुलाई २००६ को इसे अंतिम ...

अक्ष शक्तियाँ

अक्ष शक्तियाँ या ऐक्सिस शक्तियाँ या धुरी शक्तियाँ उन देशों का गुट था जिन्होनें दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी और जापान का साथ दिया और मित्रपक्ष शक्तियों ऐलाइड शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़े। मध्य १९३० में अपने साम्राज्यवादी हितों को बचाए रखने के लिए जर्मनी, इटली और जापान द्वारा किए गये कूटनीतिक प्रयासों से अक्ष शक्तियों का उदय हुआ। अक्ष शक्तियों का गुट सन् १९३६ में तब शुरु हुआ जब जर्मनी ने जापान और इटली के साथ साम्यवाद विरोधी संधियों पर दस्तख़त किये। रोम-बर्लिन १९३९ स्टील संधि के अन्तर्गत सामरिक गुट बन गये, १९४० के ट्राइपर्टाइल संधि के साथ जर्मनी और उसके गुट के दोनो मित्र देशो के सामरिक लक्ष्य एक ह ...

अग्निमित्र

अग्निमित्र शुंग वंश के राजा थे। कालिदास ने इसको अपने नाटक का पात्र बनाया है, जिससे प्रतीत होता है कि कालिदास का काल इसके ही काल के समीप रहा होगा।

अमर्ण पत्र

अमर्ण पत्र मिस्और मित्तानी सम्राटों के बीच मे दूसरी सहस्राब्दि ईपू के हैं जिनसे उस समय के इतिहास पर बहुत प्रकाश पडता है। इनमें से कुछ पत्र तुष्यरथ और अखेनातेन के बीच के हैं।

अशोकस्तम्भ

अशोक के धार्मिक प्रचार से कला को बहुत ही प्रोत्साहन मिला। अपने धर्मलेखों के अंकन के लिए उसने ब्राह्मी और खरोष्ठी दो लिपियों का उपयोग किया और संपूर्ण देश में व्यापक रूप से लेखनकला का प्रचार हुआ। धार्मिक स्थापत्य और मूर्तिकला का अभूतपर्वू विकास अशोक के समय में हुआ। परंपरा के अनुसार उसने तीन वर्ष के अंतर्गत 84.000 स्तूपों का निर्माण कराया। इनमें से ऋषिपत्तन में उसके द्वारा निर्मित धर्मराजिका स्तूप का भग्नावशेष अब भी द्रष्टव्य हैं। इसी प्रकार उसने अगणित चैत्यों और विहारों का निर्माण कराया। अशोक ने देश के विभन्न भागों में प्रमुख राजपथों और मार्गों पर धर्मस्तंभ स्थापित किए। अपनी मूर्तिकला के कार ...

                                     

आद्यइतिहास

प्रागितिहास प्रागैतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल के बीच के समय में, यह है एक समय था जब मनुष्य ने भोजन प्राप्त करने के लिए खेती शुरू कर दिया था. इस मानव सांस्कृतिक विकास के दौर. यह निम्नलिखित आधापर बांटा गया है, आयात-हड़प्पा संस्कृति. (Import-Harappan culture) हड़प्पा संस्कृति. (Harappan culture) उत्तर हड़प्पा संस्कृति. (North Harappan culture) आद्य इतिहास की अवधि है कि काल करने के लिए, कहते हैं, इस अवधि में lekhan-kaal के प्रचलन के बाद लेख को पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं है ।

                                     

गेंगनीहेस्सू

दरिद्र डहोमी बारह पारंपरिक राजाओं से पहले थे. उनके शासनकाल १६२० के करीब होगा. उनके प्रतीकों थे पुरुष gangnihessou पक्षी, एक ढोल और फेंकने की या शिकार करने के लिए चुन सकते हैं चिपक जाता है । यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह ऐतिहासिक राजा था या नहीं. शायद वह सिर्फ एक नेता का इस्तेमाल किया, जो उनकी सलाह की शक्ति से समाज के लिए अपने छोटे भाई डॉन के द्वारा चलाते थे. अपने छोटे भाई है, तो अपने पिछले जीवन है, जाहिरा तौपर राजा के रूप में जाने जाते थे.

                                     

छबीलेराम नागर

पट्टी सिविल, राजा उल्टा गुजराती ब्राह्मण योद्धा, जो पहले सुल्तान azimute के राज्य में जिला अधिकारी था. इसके बाद कड़ा जहानाबाद की भीड़, नियुक्त किया है । मुहम्मद Farrukhsiyar की ओर से, हाथ के खिलाफ लड़ा. विजयी होने की दीवानी पाया. अपनी योग्यता के कारण, कुछ दिनों के बाद यह राजधानी के साबर पाया और फिर जाँच की सूबेदार बनाया गया था. के 1719 ई. इसे में मृत्यु हो गई ।

                                     

सन् १८५१ की महाप्रदर्शनी

के १८५१ की एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है, जो था के लिए इंग्लैंड में लंदन के हाइड पार्क में १ मई में १८५१ से १५ अक्टूबर १८५१ तक चली.