ⓘ नरहरिदास. नरहरि का जन्म उत्तर प्रदेश में रायबरेली, जिले के पखरौली नामक गाँव में हुआ था। इनका संपर्क हुमायूँ, शेरशाह सूरी, सलीमशाह तथा रीवाँ नरेश रामचंद्र आदि शा ..

                                     

ⓘ नरहरिदास

नरहरि का जन्म उत्तर प्रदेश में रायबरेली, जिले के पखरौली नामक गाँव में हुआ था। इनका संपर्क हुमायूँ, शेरशाह सूरी, सलीमशाह तथा रीवाँ नरेश रामचंद्र आदि शासकों से माना जाता है। हालांकि इनको सर्वाधिक महत्व अकबर ने प्रदान किया।

                                     

1. गुरु-शिष्य परंपरा

नरहरिदास तुलसीदास 1532-1623 के गुरू माने जाते हैं, हालांकि इस बात के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं। रामानन्द 1299 प्रयाग में जन्म के 12 शिष्य थे, जिनमें मुख्य कबीरदास, रैदास रविदास, नरहर्यानन्द नरहरिदास, धन्ना जाट, सेना नाई, पीपा राजपूत, सदना कसाई थे। रामानन्द से दीक्षा लेने के बाद नरहर्यानन्द से नरहरिदास बन गए।

                                     

2. रचनाएँ

इनके नाम से तीन ग्रंथ - रुक्मिणी मंगल, छप्पय नीति और कवित्त संग्रह प्रसिद्ध हैं जिनमें से केवल रुक्मिणी मंगल ही प्राप्त हो सका है। इनकी कुछ फुटकल रचनाएँ भी मिलती हैं।

                                     
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  • उत तर प रद श, भ रत म त य 1623 ई स वत 1680 व व र णस ग र श क षक नरहर द स दर शन व ष णव ख त ब सम म न ग स व म अभ नवव ल म क इत य द स ह त य क क र य
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