ⓘ हिन्दी कवि ..

अद्दहमाण

अद्दहमाण ने संदेश रासक नामक प्रसिद्ध काव्य की रचना की है। इनकी जन्मतिथि का अभी तक अंतिम रूप से निर्णय नहीं हो सका है। किंतु संदेश रासक के अंतसाक्ष्य के आधापर मुनि जिनविजय ने कवि अब्दुल रहमान को अमीर खुसरो से पूर्ववर्ती सिद्ध किया है और इनका जन्म १२वीं सताब्दी में माना है। साहित्य के एक अन्य इतिहासकार केशवराम काशीराम शास्त्री के अनुसार अब्दुल रहमान का जन्म १५वीं शताब्दी में हुआ। पर शास्त्री जी ने अपने मत की पुष्टि में कोई साक्ष्य नहीं दिया है। संदेश रासक के छंद संख्या तीन और चार के आधापर इतना अवश्य कहा जा सकता है कि भारत के पश्चिम भाग में स्थित म्लेच्छ देश के अंतर्गत मीरहुसेन के पुत्र के रू ...

अब्दुर्रहमान (कवि)

सन्देश रासक/रासो उनकी प्रसिद्ध कृति है जिसे 1207 ई॰ के लगभग का बताया जाता है। यह एक दूतकाव्य है। हिंदी साहित्य में प्रकृति वर्णन का समावेश करने वाले प्राथमिक कवियों में इनकी गणना की जाती है।

अमोघ नारायण झा

पंडित अमोघ नारायण झा अमोघ जन्म: भद्र कृष्ण द्वितीय, १९२४ इसवी, तत्कालीन पूर्णिया जिले का जयनगर गाव, बिहार शिस्खा: साहित्य भूषण, B.A.C.T. लब्ध स्वर्ण पदक वृत्ति: स्वतंत्रता सेनानी, हिंदी अध्यापक, सम्मानित साहित्यकार कृति: साप्ताहिक विश्वा मित्र, कलकत्ता १९४५ इसवी मे पहली कविता का प्रकाशन १९६५ गीत गंध कविता संग्रह १९९९ मैं तो तेरे पास मे कविता संग्रह राष्ट्र सब्देश, युग्वानी, अवंतिका, नयी धारा, श्रमिक, अनुपमा, विपक्ष, वर्तिका, धर्मयां, सरोकार, U.S.M. पत्रिका सहित अनेक पत्र-पत्रिकाओं मे रचना प्रकाशित।

अयोध्या प्रसाद खत्री

अयोध्या प्रसाद खत्री का नाम हिंदी पद्य में खड़ी बोली हिन्दी के प्रारम्भिक समर्थकों और पुरस्कर्ताओं में प्रमुख है। उन्होंने उस समय हिन्दी कविता में खड़ी बोली के महत्त्व पर जोर दिया जब अधिकतर लोग ब्रजभाषा में कविता लिख रहे थे। उनका जन्म बिहार में हुआ था बाद में वे बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कलक्‍टरी के पेशकार पद पर नियुक्त हुए। १८७७ में उन्होंने हिन्दी व्याकरण नामक खड़ी बोली की पहली व्याकरण पुस्तक की रचना की जो बिहार बन्धु प्रेस द्वारा प्रकाशित की गई थी। उनके अनुसार खड़ीबोली गद्य की चार शैलियाँ थीं- मौलवी शैली, मुंशी शैली, पण्डित शैली तथा मास्टर शैली। १८८७-८९ में इन्होंने "खड़ीबोली का पद्य ...

अरुण मित्तल अद्भुत

डॉ॰ अरुण मित्तल ‘अद्भुत’ एक हिन्दी कवि हैं। पेशे से प्रबंधन के प्राध्यापक अरुण गजल, कविता, कहानी, लघुकथा, संस्मरण, लेख तथा फीचर विधाओं में अपनी लेखनी चला रहे हैं। अरुण अद्भुत का मुख्य स्वर" ओज” है। उनकी लगभग 300 रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। एवं लगभग 50 कविताएँ, गजलें एवं लेख, हिन्दयुग्म, अनुभूति, नई कलम, काव्यांचल, रचनाकार, सृजनगाथा, आदि अंतरजाल पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, उन्हें अग्रवाल सभा, मानव कल्याण संघ, लायंस क्लब, सहित अनेक सामजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं उनकी साहित्यिक प्रतिभा तथा साहित्यिक समर्पण के लिए सम्मानित किया है हाल ही में उन्हें सांस्कृतिक ...

ईश्वरदास (कवि)

ईश्वरदास हिन्दी भाषा के कवि थे जिन्होने सत्यवतीकथा नामक पुस्तक की रचना की। उक्त पुस्तक दिल्ली के बादशाह सिकंदर शाह के समय में लिखी गई। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सत्यवतीकथा को अवधी की सबसे पुरानी रचना माना है । पुस्तक दोहे और चौपाइयों में लिखी गई है। पाँच-पाँच चौपाइयों अर्धालियों पर एक दोहा है। ५८वें दोहे पर पुस्तक समाप्त हो जाती है। भाषा अयोध्या के आसपास की ठेठ अवधी है और कहानी का रूप-रंग सूफी आख्यानों जैसा है जिसका आरंभ यद्यपि व्यास-जनमेजय के संवाद से पौराणिक ढंग पर होता है, तथापि जो अधिकतर कल्पित, स्वच्छंद और मार्मिक ढंग पर रची गई है।

                                     

ⓘ हिन्दी कवि

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कलक्टर सिंह केसरी

कलेक्टर सिंह केशरी का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के एक ग्राम में पैदा हुआ था. वह अंग्रेजी मा. वे समस्तीपुर कॉलेज के संस्थापक थे जो प्रिंसिपल पोस्ट वे २० साल और सुंदर है. वे विश्वविद्यालय सेवा आयोग के सदस्य और उसके अध्यक्ष भी बने. उन्होंने दो बार हराया हिन्दी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की । कोड परिषद के निदेशकों के बोर्ड के सदस्य. उन्हें बिहार सरकार के राजभाषा विभाग को भी पुरस्कृत किया गया.

                                     

वैष्णवदास रसजानि

वाना नाभा जी और प्रशासन गीता टीका nction कर्ता की इस जी के पोते थे, जो वे देखते हैं की उपाधि दी है. इस मास्टर श्रृंखला में जी रहे थे. वह shrimping के बारह पंखों की वकालत की है. Savemail के लिए अनुवाद सं. १८०२ है. जयदेव के gitagovinda की वकालत नहीं. १८१४ में पूरा हो गया है । वे कर रहे हैं, संवत् १७७० से सं. १८३० के लगभग है.