ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 73

२९वीं शताब्दी

16 दिसंबर, 2846: शुक्र पारगमन। 20 जुलाई, 2855, 05:15 UTC: बुद्ध ग्रह बृहस्पति को छुपा देगा। 25 मार्च, 2816, 15:47 UTC: बुद्ध ग्रह बृहस्पति को छुपा देगा। 14 दिसंबर, 2854: शुक्र का आंशिक पारगमन। 2829/2830: मंगल-शनि ग्रहों का तिहरा संयोजन triple con ...

५वीं शताब्दी ईसा

401: कुमारजीव सूत्रों का चीनी में अनुवाद करने वाले बौद्ध भिक्षु चांगआन में पहुंचे। ५वीं का पूर्वार्द्ध: नियॉन के बपतिस्मा, रवेना, इटली का निर्माण। 399 – 412: चीनी बौद्ध भिक्षु फ़ाहियान ने हिन्द महासागर से होते हुए जलयात्रा करते हुए बौद्ध धर्म ग्र ...

माइटोकाण्ड्रियाई डीएनए

माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए माइटोकॉन्ड्रिया में स्थित डीएनए है, यूकेरियोटिक सेल के सेलुलर अंगों के भीतर भोजन से रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करके कोशिकाओं उसे एडेनोसाइन ट्रायफ़ोस्फेट की तरह उपयोग कर सकते हैं। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए 37 जीन लगभग 16.569 आध ...

नोदक

नोदक या प्रोपेलर ऐसे यंत्र या मशीन को कहते हैं जो किसी वाहन पर लगा हो और उसे आगे धकेलने का काम करे। नोदकों के घूर्णन के द्वारा वायु या जल को पीछे फेंकने में मदद मिलती है जिससे यान पर आगे की ओर बल लगता है। समुद्री जहाज़ों और वायुयानों पर लगे पंखेन ...

नोदक (जलयान)

नोदक के अन्य अर्थों के लिए नोदक बहुविकल्पी देखें जलयान के नोदक, जिन्हें अनौपचारिक भाषा में स्क्रू भी कहते हैं, ऐसे पंखेनुमा यंत्र होते हैं जिनसे समुद्री जहाज़ों और नौकाओं के इंजनों द्वारा उत्पन्न घूर्णन का प्रयोग पानी को पीछे की ओर फेंककर नौका को ...

कवई (मछली)

कवई एक मछली है। यह नदी तथा तालाब के जल में मिलती है। इसका शरीर छोटा एवं लगभग आयताकार होता है। इसका शरीर शल्कों से ढँका रहता है। इसकी पुच्छीय पख छोटी एवं गोलाकार होती है। इसकी पृष्ठीय एवं गुदीय पख दो-दो खंडों में विभक्त होती हैं। इसमें गिल्स के आल ...

जल घोंघा

जल घोंघा मीठे जल में पाया जाता है। इसका शरीर बाहरी खोल से ढँका रहता है। बाह्य कंकाल का मुख एक ढक्कन से बन्द रहता है। जिसे अपर कुलम कहते हैं। इसका आकार सेव जैसा होता है अतः इसे एपेल स्नेल कहते हैं।

जलसाही

ईकाइनस इस्कुलेन्टस या सी आर्चिन एक एकलिंगी समुद्री प्राणी है जो प्रायः सर्वत्र पाया जाता है। इसका शरीर गोलाकार या हृदयाकार होता है जो कल्केरियस सेल के अन्दर बन्द रहता है। इसमें प्रचलन की क्रिया ट्यूब फीट के द्वारा सम्पन्न होती है। इनका प्रमुख भोज ...

जेली मछली

जेली मछली सीलेन्टरेटा समुदाय का प्राणी है। इस बहुकोशकीय समुद्री प्राणी का शरीर देखने में छाते जैसा लगता है। इसकी 13 प्रजातियाँ होती हैं।. इसके शरीर में अनेक प्रवर्ध निकले रहते हैं जिन्हें टेन्टकिलस कहते हैं। इसका त्रिज्यक सीमित होता है। इसके शरीर ...

झींगा

झींगा एक जलीय जन्तु है। इसका शरीर सिफैलोथोरैक्स एवं उदर में विभक्त होता है। सिर में एक जोड़ा संयुक्त आँख एवं दो जोड़े एन्टिनी होते हैं। इसमें पाँच जोड़े पैर एवं पाँच जोड़ं शाखांग होते हैं। श्वसन की क्रिया गिल्स द्वारा होती है। चिंराट और झींगा दोन ...

तारामीन

तारा मछली इकाइनोडरमेटा संघ का अपृष्ठवंशी प्राणी है जो केवल समुद्री जल में ही पायी जाती है। इसके शरीर का आकार तारा जैसा होता है, शरीर में डिस्क और पांच भुजाएं होती है जो कड़े प्लेट्स से ढंकी रहता हैं। उपरी सतह पर अनेक कांटेदार रचनायें होती हैं। डि ...

माँगुर

मागुर एक मछली है। यह साधारणतः मीठे एवं खारे जल में पाई जाती है। इसकी त्वचा शल्क रहित एवं धूसर काले रंग की होती है। डारसल फ़िन तथा एनल फिन क्रमशः ऊपर तथा नीचे कुछ दूर तक फैले होते हैं।

रोहू मछली

रोहू पृष्ठवंशी हड्डीयुक्त मछली है जो ताजे मीठे जल में पाई जाती है। इसका शरीर नाव के आकार का होता है जिससे इसे जल में तैरने में आसानी होती है। इसके शरीर में दो तरह के मीन-पक्ष पाये जाते हैं, जिसमें कुछ जोड़े में होते हैं तथा कुछ अकेले होते हैं। इन ...

शूलचर्मी

शूलचर्मा या एकिनोडर्म पूर्णतया समुद्री प्राणी हैं। जंतुजगत्‌ के इस बड़े संघ में तारामीन, ओफियोराइड तथा होलोथूरिया आदि भी सम्मिलित हैं। अंग्रेजी शब्द एकाइनोडर्माटा का अर्थ है, काँटेदार चमड़ेवाले प्राणी। शूलचर्मों का अध्ययन अनेक प्राणिविज्ञानियों न ...

सिंघी मछली

सिंघी पृष्टवंशी हड्डीयुक्त मछली है। इसके सिर के पार्श्व भागों में दो कठोर काँटे की तरह रचनाएँ पायी जाती हैं जिससे यह अपनी सुरक्षा करती है। इसका शरीर चिकना होता है अर्थात इस पर स्केल्स नहीं पाये जाते हैं। शरीर नाव के आकार का होता है। इसमें मुख्य श ...

सीप

सीप एक जलीय जन्तु है। इसका शरीर दो पार्श्व कपाटों में बन्द रहता है जो मध्य पृष्ट पर एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। इसमें चलने के लिए एक मांसल पाव होता है। इसके पैरों के ऊपरी भाग में अनेक सामानान्तर रेखाएँ होती हैं जिन्हें वृद्धि की रेखा करते हैं।

हाँगर

हाँगर या शार्एक पृष्ठवंशी समुद्री जल में रहने वाला प्राणी है। इसका शरीर बहुत लम्बा होता है जो शल्कों से ढका रहता है। इन शल्कों को प्लेक्वायड कहते हैं। त्वचा चिकनी होती है। त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत होती है। इसके शरीर में हड्डी की जगह उपास्थि ...

खटमल

खटमल परजीवी कीट है जो खून पर जिंदा रहता है। इसकी आम प्रजाति मनुष्य के रक्त पर भोजन करती है। यह घर में विशेषकर बिस्तर के पास रहते हैं। ये लाल-भूरे रंग के होते हैं और पाँच चरणों में अपना जीवनकाल पूरा करते हैं। हर चरण में इन्हें इंसान का खून चाहिए ह ...

धनुर्जानु

धनुर्जानु का वैज्ञानिक नाम जीनू वेरम है। इस रोग के अंतर्गत दोनों पैरों की हड्डियाँ विकृत होकर इस प्रकार टेढ़ी हो जाती हैं कि सीधे खड़े होने पर यदि उस के रोगी के दोनों टखने पास-पास हों तो दोनों घुटनों में काफी अंतर रहता है। प्राय: इस विकार में दोन ...

दुर्लभ मृदा तत्व

विरल मृदा या दुर्लभ मृदा धातुएँ धातुओं के उन क्षारक ऑक्साइडों को कहते हैं जिनके तत्वों के आवर्त सारणी के तृतीय समूह में आते हैं। इनमें 15 तत्व हैं, जिनकी परमाणुसंख्या 57 और 71 के बीच है। ये ऐसे खनिजों में पाए जाते हैं जो कहीं कहीं ही और वह भी बड़ ...

कार्बन-१२

कार्बन-१२ कार्बन के प्रचुर उपलब्ध दो स्थिर समस्थानिकों में से एक है। यह कुल प्रांगार मात्रा का ९८.९% है। इसके नाभि में ६ प्रोटोन और ६ न्यूट्रॉन हैं। इनके बाहर ६ इलेक्ट्रॉन रहते हैं।

कार्बन-१४

प्रांगार-१४, १४ C, या रेडियोप्रांगार, प्रांगार का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक है। प्रांगार १४ की खोज २७ फरवरी, १९४० में मार्टिन कैमेन और सैम रुबेन ने कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय विकिरण प्रयोगशाला, बर्कले में की थी। जब प्रांगार का अंश पृथ्वी में दब जा ...

ग्रेफाइट

ग्रेफाइट कार्बन का शुद्धतम एवं स्थाई अतृप्त है इसकी संनरखना षट्फलकीय इसमें कार्बन प्रमाण कार्बन के तीन अन्य प़ प्रसानू के आवंधित होते हैं जिसे सेट कोनी कार्बन परमाणु से दूसरे कार्बन परमाणु तक घूम रुकता है इसलिए सुचालक होता है।

फुलेरेन

फुलेरेन्य कार्बन का बहुत ही उपयोगी अपररूप है। कार्बन के इस जटिल रूप में कार्बन परमाणु एक दूसरे से षटफलाकार या पंच भुजाकार रूप में जुड़ कर एक पिंजड़ा की रचना बनाते हैं। इसे १९९५ ई. में राइस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर इ स्मैली तथा उनके सहकर्मियों ...

विस्कोस

विस्कोस, एक श्यान कार्बनिक तरल है, जिसका प्रयोग रेयान और सेलोफेन आदि को बनाने में किया जाता है। विस्कोस को अक्सर रेयान का पर्याय माना जाता है जो, एक मुलायम तंतु है और सामान्यतः कमीजें, शॉर्ट्स, कोट, जैकेट, जैसे बाहरी वस्त्र बनाने में प्रयुक्त होत ...

सक्रियित कार्बन

सक्रियित कार्बन या सक्रियित काठकोयला कार्बन का वह रूप है जिसमें छोटे-छोटे कम आयतन के खाली स्थान होते हैं। बहुत अधिक मात्रा में सूक्ष्म रन्ध्रों की उपस्थिति के कारण सक्रिय कार्बन के किसी टुकड़े का पृष्त क्षेत्रफल अपेक्षाकृत बहुत अधिक होता है। उदाह ...

अतिकैल्शियमरक्तता

ब्रिटिश अंग्रेजी में अति-कैल्शियम रक्तता रक्त में कैल्शियम स्तर की कमी है. यह एक स्पर्शोन्मुख प्रयोगशाला में पाया जा सकता है, लेकिन क्योंकि एक ऊंचा स्तर कैल्शियम अक्सर अन्य बीमारियों का संकेत है, इस लिए इसका निदान किया जाना चाहिए यदि यह दीर्घा सम ...

कैल्सियम हाइपोक्लोराइट

कैल्सियम हाइपोक्लोराइट एक अकार्बनिक यौगिक है। इसका रासायनिक सूत्र CaOCl2 है। यह एक सफेद बेरवेदार ठोस है। इससे क्लोरीन की तीव्र गन्ध निकलती रहती है। पीने के जल के शु्द्धिकरण में इसका उपयोग किया जाता है। क्लोरोफार्म तथा क्लोरीन गैस बनाने में भी इसक ...

कोबाल्ट-६०

कोबाल्ट-६० कोबाल्ट का एक समस्थानिक है। ये सबसे अधिक प्रयोग में आने वाले रेडियोधर्मी समस्थानिकों में से है। प्राकृतिक रूप में पाया जाने वाला कोबाल्ट अपनी प्रकृति में स्थायी होता है, लेकिन ६० Co एक मानव-निर्मित रेडियो समस्थानिक है जिसे व्यापारिक प् ...

क्लोरीन के समस्थानिक

क्लोरीन Cl के समस्थानिक भार संख्या ३२ g.mol −1 से ४० g mol −1 तक होते हैं। स्थिर समस्थानिकों 35 Cl 75.77% एवं 37 Cl 24.23% की दो सारणियां होती हैं, जिन्हें ३:१ के अनुपात में पाया जाता हाई। इनके कारण क्लोरीन परमाणु का थोक भार ३५.५ होता है मानक परम ...

ताम्र पाषाण युग (चाल्कोलिथिक)

ताम्र पाषाण युग या तांबा युग यह नवपाषाण युग के बाद शुरू होता है लगभग ५००० ईसापूर्व के आस पास साथ ही इसे कांस्य युग का ही एक भाग माना जाता है। इस काल में मनुष्य पत्थर के औजार से तांबे के औजार उपयोग करने लग गया था।

नाइट्रीकरण

नाइट्रीकरण जैव रासायनिक क्रिया है, इसमें अमोनिया के आक्सीकरण से नाइट्राइट एवं नाइट्रेट बनते हैं। यह नाइट्रोजन चक्र की एक महत्वपूर्ण अवस्था है। सर्वप्रथम नाइट्राइट जीवाणु नाइट्रोसोमोनास एवं नाइट्रोकॉकस अमोनिया का ऑक्सीकरण नाइट्राइट में करते हैं। उ ...

हाइड्रोजन के समस्थानिक

हाइड्रोजन या उदजन u) के तीन प्राकृतिक उपलब्ध "समस्थानिक होते हैं: १ H, २ H, and ३ H। अन्य अति-अस्थायी नाभि का निर्माण प्रयोगशालाओं में किया गया है, किंतु प्राकृतिक रूप में नहीं मिलते हैं। हाइड्रोजन एकमात्र ऐसा तत्त्व है, जिसके समस्थानिकों को इसके ...

हाइड्रोजन तकनीकों की समय-रेखा

1679 - Denis Papin - safety valve 1672 - "New Experiments touching the Relation between Flame and Air" by Robert Boyle. 1650 - Turquet de Mayerne obtained by the action of dilute sulphuric acid on iron a gas or "inflammable air". 1662 - Boyles la ...

मृत्तिकाशिल्प

मृत्तिकाशिल्प सिरैमिक्स का हिन्दी पर्याय है। ग्रीक भाषा के कैरेमिक का अर्थ है - कुंभकार का शिल्प। अमरीका में मृद भांड, दुर्गलनीय पदार्थ, कांच, सीमेंट, एनैमल तथा चूना उद्योग मृत्तिकाशिल्प के अंतर्गत हैं। गढ़ने तथा सुखाने के बाद अग्नि द्वारा प्रबलि ...

प्रवेशद्वार: सामग्री

निर्वाचित सामग्री - ये विकिपीडिया द्वारा सर्वोत्तम प्रदेय हैं। प्रकार के अनुसार प्रदर्शित - निर्वाचित लेख निर्वाचित सूचियाँ निर्वाचित चित्र निर्वाचित प्रवेशद्वार निर्वाचित विषय

प्रशीतन

किसी स्थान, या पदार्थ, को उसके वातावरण के ताप के नीचे तक ठंढा करने की क्रिया को प्रशीतन कहते हैं। विगत शती में इन यांत्रिक विधियों का विस्तार बर्फ बनाने से लेकर खाद्य एवं पेय पदार्थो को शीतल रखने तथा अधिक समय तक इन्हें संरक्षित रखने के हेतु किया ...

प्रशीतित्र

घरेलू उपयोग के लिये थोड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थो को ठंड़ा रखने के निमित्त १९१७ ई. से ही प्रशीतित्रों का व्यावसायिक रीति से निर्माण आरंभ हुआ और १९२५ ई. से तो वे सर्वसाधारण के लिये भी सुलभ हो गए। आरंभ में तो गैसचालित यंत्र ही बनाए गए, लेकिन अब कु ...

विहिमीकरण

विहिमीकरण वह प्रक्रिया है जो रेफ्रिजरेटर और फ्रीजर पर नियमित नतराल पर करनी पड़ती है ताकि उनके कार्य करने की दक्षता अच्छी बनी रहे। जब फ्रिज का दरवाजा खोला और बन्द किया जाता है तब उसके अन्दर नयी हवा चली जाती है जो अपने साथ जलवाष्प भी ले जाती है। यह ...

संघनित्र (उष्मा स्थानान्तरण)

संघनित्र एक यांत्रिक युक्ति है जो गैस या वाष्प को ठण्डा करके द्रव में बदल देती है। संघनित्र कई जगह प्रयोग किये जाते हैं। उर्जा संयत्रों में इनका प्रयोग टर्बाइन से निकलने वाले भाप को संघनित करने के लिये किया जाता है। शीतलन संयंत्रों में अमोनिया एव ...

आदर्श गैस

आदर्श गैस एक काल्पनिक सैद्धान्तिक गैस है जिसके कण यादृच्छ गति करने वाले, परस्पर अन्योन्यक्रिया न करने वाले और बिन्दुवत हैं। आदर्श गैस की संकल्पना उपयोगी है क्योंकि आदर्श गैस आदर्श गैस नियम का पालन करती है जो एक सरलीकृत एवं सुविधाजनक समीकरण है। सा ...

गैसों का द्रवण

किसी गैस को द्रव अवस्था में लाने को गैसों का द्रवण कहते हैं। इसमें कई प्रक्र्मों और कलाओं से होकर गुजरना पड़ता है। इसका उपयोग वैज्ञानिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक उद्देश्यों के लिये होता है। बहुत सी गैसों को केवल ठण्डा करके सामान्य वायुमण्डलीय दाब प ...

सल्फर हेक्साफ्लोराइड

सल्फर हेक्साफ्लोराइड एक अकार्बनिक गैस है। यह रंगहीन, गंधहीन, अज्वलनशील गैस है। यह गैस अत्यन्त उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत इंसुलेटर है और उच्च वोल्टता के उपकरणों में इसका उपयोग होता है । यह एक ग्रीनहाउस गैस है। SF 6 का अणु अष्टफलकीय octahedral होता ...

चतुर्ध्रुव चुम्बक

सामान्यत: चतुर्ध्रुव चुम्बक का निर्माण चार चुम्बकों को मिलाकर बनाया जाता है। इसका उपयोग कण त्वरकों में किरण पुँज को एक बिन्दु पर केन्द्रित करने के काम में लिया जाता है।

विरूपण (यांत्रिकी)

सातत्यक यांत्रिकी में विरुप्यण किसी वस्तु का किसी आरम्भिक और मानक आकार से बदलकर किसी अन्य आकार में आ जाने की प्रक्रिया को कहते हैं। यह वस्तु पर किसी तनाव, दबाव, प्रहार, भार, गुरुत्वाकर्षण, तापमान-बदलाव, नमी-बदलाव, रासायनिक अभिक्रिया या अन्य किसी ...

दोलन

दोलन एक लगातार दोहराता हुआ बदलाव होता है, जो किसी केन्द्रीय मानक स्थिति से बदलकर किसी दिशा में जाता है लेकिन सदैव लौटकर केन्द्रीय स्थिति में आता रहता है। अक्सर केन्द्रीय स्थिति से हटकर दो या दो से अधिक ध्रुवीय स्थितियाँ होती हैं और दोलती हुई वस्त ...

गतिपालक चक्र

गतिपालक चक्र या फ्लाईव्हील एक घूर्णन करने वाला वाला चक्र है जिसका उपयोग अनेक यन्त्रों में किया जाता है। घूमते हुए इस चक्र में घूर्णन की गतिज ऊर्जा संग्रहित होती है जिसके कारण यन्त्पर लगने वाले लोड के अचानक परिवर्तन से भी इसकी गति पर विशेष प्रभाव ...

घड़ी

घड़ी वहपूर्ण स्वयंचालित प्रणाली द्वारा किसी न किसी रूप में वर्तमान समय को प्रदर्शित करती है। घड़ियाँ कई सिद्धान्तों से बनायी जाती हैं। जैसे धूप घड़ी, यांत्रिक घड़ी, एलेक्ट्रॉनिक घड़ी आदि Ammu अधिकतर घड़ियों में नियमित रूप से आवर्तक recurring क्रि ...

घड़ी १५०५

घड़ी १५०५ / दुनिया की पहली घड़ी है। इस घड़ी के आविष्कारक,जर्मन, नूर्नबर्ग के ताला बनाने वाले और घड़ीसाज़ पीटर हेनलेन द्वारा, वर्ष 1505 के दौरान, उत्तरी पुनर्जागरण के हिस्से के रूप में शुरुआती जर्मन पुनर्जागरण काल ​​में हुआ। यह दुनिया की सबसे पुरा ...

प्लांचेट

प्लांचेट, आत्मवादियों का एक यन्त्र है जो स्वतः लिखता है और ऐसा माना जाता है कि यह दूसरे लोकों के तथाकल्पित भूतों से सन्देश प्राप्त करने के लिये प्रयुक्त होता है। मुख्यतः १९वीं शताब्दी में यह बहुत लोकप्रिय हो चला था। वास्तव में प्लान चैट होता ही न ...