ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 7

ऐल्वारेज़ की परिकल्पना

ऐल्वारेज़ की परिकल्पना यह कहती है कि डैनासोरों और तमाम अन्य पुरातन जीवों का सामूहिक नाश ६.५ करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी से एक बहुत विशाल क्षुद्रग्रह के टकराने की वजह से हुआ था जिसे क्रिटैशियस-पैलियोजीन विलुप्ति घटना कहते हैं। सबूत यह दर्शाते हैं की क् ...

आर्कियाई इओन

आर्कियाई इओन पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास की चार इओन में से एक है। यह वर्तमान से 400 करोड़ वर्ष पूर्व आरम्भ हुई और 250 करोड़ वर्ष पूर्व अंत हुई। इस इओन में पृथ्वी की भूपर्पटी इतनी ठंडी हो चुकी थी कि उसपर महाद्वीप बनने आरम्भ हो गये और पृथ्वी पर जी ...

दृश्यजीवी इओन

दृश्यजीवी या फ़ैनेरोज़ोइक पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक इओन है, जो आज से 54.1 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और आज तक चल रहा है। इस से पहले प्रोटेरोज़ोइक नामक इयोन था। दृश्यजीवी इयोन का आरम्भ केम्ब्रियाई कल्प से हुआ जिसमें कठोर शंखों वाले प्राणी ...

नूतनजीवी महाकल्प

नूतनजीवी महाकल्प या सीनोज़ोइक महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महाकल्प है, जो आज से 6.6 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और आज तक चल रहा है। इस से पहले मध्यजीवी महाकल्प था, जिस से पहले पुराजीवी महाकल्प था। नूतनजीवी, मध्यजीवी और पुराजीवी महाकल ...

नूतनप्राग्जीवी महाकल्प

नूतनप्राग्जीवी महाकल्प या नियोप्रोटेरोज़ोइक पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महाकल्प था, जो आज से 100 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 54.1 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस से पहले मध्यप्राग्जीवी महाकल्प और उस से पहले पुराप्राग्जीवी महाकल्प आया। नूतनप् ...

पुराजीवी महाकल्प

पुराजीवी महाकल्प या पेलियोज़ोइक महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महाकल्प था, जो आज से 54.1 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 25.217 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस के बाद पहले मध्यजीवी महाकल्प आया और फिर नूतनजीवी महाकल्प आया जो आज तक चल रहा है। ...

पुराप्राग्जीवी महाकल्प

पुराप्राग्जीवी महाकल्प या पेलियोप्रोटेरोज़ोइक महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महाकल्प था, जो आज से 250 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 160 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इसके बाद मध्यप्राग्जीवी महाकल्प आया और उसके बाद नूतनप्राग्जीवी महाकल्प आय ...

पृथ्वी का भूवैज्ञानिक इतिहास

प्रारंभ में पृथ्वी चट्टानी, गर्म और वीरान ग्रह थी, जिसका वायुमंडल विरल था जो हाइड्रोजन व हीलीयम से बना था। आज से 460 करोड़ सालों के दौरान इस ग्रह पर जीवन का विकास हुआ। पृथ्वी की संरचना परतदार है। वायुमंडल के बाहरी छोर से पृथ्वी के क्रोड तक जो पदा ...

प्राग्जीवी इओन

प्राग्जीवी या प्रोटेरोज़ोइक पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक इओन जो आज से 250 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और आज से 54.1 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इसके बाद दृश्यजीवी इओन आया, जो आज तक चल रहा है। इस इओन के आरम्भिक भाग में पृथ्वी के वायुमण्डल में ऑक ...

मध्यजीवी महाकल्प

मध्यजीवी महाकल्प या मीसोज़ोइक महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महाकल्प था, जो आज से 25.217 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 6.6 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस से पहले पुराजीवी महाकल्प था और इस के बाद नूतनजीवी महाकल्प आया जो आज तक चल रहा है। न ...

मध्यप्राग्जीवी महाकल्प

मध्यप्राग्जीवी महाकल्प या मीसोप्रोटेरोज़ोइक महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक महाकल्प था, जो आज से 160 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 100 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस के बाद में नूतनप्राग्जीवी महाकल्प और इस से पहले पुराप्राग्जीवी महाकल्प आ ...

हेडियाई इओन

हेडियाई इओन पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास की चार इओन में से सबसे पहला है। इसका आरम्भ आज से 4.6 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी की रचना के साथ हुआ था। इसका अंत आज से 4 अरब वर्ष पूर्व आर्कियाई इओन के आरम्भ के साथ हुआ। हेडियाई इओन के शुरु में पृथ्वी सूरज के ग् ...

आंतरिक क्रोड

आंतरिक क्रोड या अंत:क्रोड, पृथ्वी का अंतरतम या सबसे भीतरी भाग है जिसका पता भूकम्प विज्ञान के अध्ययनों द्वारा लगाया गया है। आंतरिक क्रोड एक ठोस विशाल गोले के आकार का है जिसकी त्रिज्या लगभग 1220 किमी है और यह आकार में चंद्रमा के आकार का लगभग 70% है ...

एस्थेनोस्फीयर

एस्थेनोस्फीयर पृथ्वी के अंतरतम में स्थलमण्डल के नीचे स्थित एक परत है। स्थलमंडल के ऊपरी भाग को भूपपर्टी कहते है । जिसमें कुछ न कुछ अवसादी चट्टाने पायी जाती है। जबकि इसके निचले भाग में, दुर्बल मंडल तथा मध्य मण्डल को सामूहिक रूप से मेन्टल कहा जाता ह ...

बाह्यक्रोड

पृथ्वी का बाह्यक्रोड, 2266 किमी किलोमीटर मोटी एक तरल परत है जो, मुख्यत: लोहे और निकल से बनी है। बाह्यक्रोड, ठोस अंत:क्रोड से ऊपर और प्रवार के नीचे उपस्थित रहता है। इसका बाहरी सिरा पृथ्वी की सतह के 2890 किमी नीचे स्थित है। पृथ्वी की सतह के नीचे लग ...

बेनीऑफ़ ज़ोन

बेनीऑफ़ ज़ोन पृथ्वी के अन्दर एक ऐसा मण्डल है जहाँ प्लेटें क्षेपित होकर पिघलती हैं और इस प्रकार मैग्मा की गतिशीलता के कारण यहाँ भूकम्प मूल अवस्थित होते हैं इसकी खोज दो वैज्ञानिकों ह्यूगो बेनीऑफ़ और कियो वादाती ने अलग-अलग स्वतन्त्र रूप से की थी।

भूतापीय प्रवणता

भूतापीय प्रवणता पृथ्वी में बढ़ती गहराई के साथ बढ़ते तापमान की प्रवणता को कहते हैं। भौगोलिक तख़्तों की सीमाओं से दूऔर पृथ्वी की सतह के पास, हर किमी गहराई के साथ तापमान लगभग २५° सेंटीग्रेड बढ़ता है।

भूप्रावार

भूप्रावार या मैन्टल या प्रावार भूविज्ञान में किसी पथरीले ग्रह या प्राकृतिक उपग्रह की एक परत को कहते हैं। यह सबसे बाहरी भूपटल नामक परत के नीचे लेकिन भूकेन्द्र के ऊपर और उसे ढके हुए होती है। भूपटल के मुक़ाबले में भूप्रावार परत बहुत मोटी होती है। हम ...

महाद्वीपीय भूपर्पटी

महाद्वीपीय भूपर्पटी आग्नेय, अवसादी और कायांतरित पत्थरों की बनी उस परत को कहते हैं जिसके महाद्वीप और उनसे जुड़े हुए लेकिन महासागरों में डूबे महाद्वीपीय ताक बने होते हैं। क्योंकि यह सामग्री सिलिकन व अल्युमिनियम से भरपूर खनिजों की बनी होती है इसलिये ...

महासागरीय भूपर्पटी

महासागरीय भूपर्पटी किसी महासागरीय भौगोलिक तख़्ते की सबसे ऊपरी परत को कहते हैं। इसके विपरीत महाद्वीपीय भौगोलिक तख़्ते की सबसे ऊपरी परत को महाद्वीपीय भूपर्पटी कहते हैं।

निचली पृथ्वी कक्षा

लो अर्थ ऑर्बिट या पृथ्वी की निचली कक्षा 160 किलोमीटर, और 2.000 किलोमीटर के बीच ऊंचाई पर स्थित पृथ्वी के चारों ओर एक कक्षा है। लगभग 160 किलोमीटर या उससे नीचे वस्तुएँ बहुत तेजी से कक्षीय क्षय और ऊंचाई नुकसान का अनुभव करती हैं।

भूकेंद्रीय कक्षा

भूकेंद्रीय कक्षा या पृथ्वी कक्षा का सम्बन्ध किसी भी वस्तु जैसे चंद्रमा या कृत्रिम उपग्रहों के रूप में पृथ्वी की परिक्रमा करने से है। 1997 में नासा के अनुमान के अनुसार लगभग 2465 कृत्रिम उपग्रह पेलोड पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे थे और 6.216 अंतरिक्ष म ...

भूसमकालिक कक्षा

भूसमकालिक कक्षा धरती के चारों ओर स्थित वह दीर्घवृत्ताकार कक्षा है जिसमें घूमने वाले पिण्ड का आवर्तकाल १ दिन होता है। इस कक्षा का आवर्तकाल, धरती के घूर्णनकाल के ठीक बराबर रखने का परिणाम रह होता है कि धरती के सतह पर स्थित किसी प्रेक्षक या व्यक्ति क ...

भूस्थिर कक्षा

भूस्थिर कक्षा अथवा भूमध्य रेखीय भूस्थिर कक्षा पृथ्वी से 35786 किमी ऊँचाई पर स्थित उस कक्षा को कहा जाता है जहाँ पर यदि कोई उपग्रह है तो वह पृथ्वी से हमेशा एक ही स्थान पर दिखाई देगा। यह कक्षा भूमध्य रेखा पर स्थित होगी एवं उपग्रह के घुर्णन की दिशा प ...

मध्य भू कक्षा

मध्य भू कक्षा, जिसे कभी कभी अंतरमाध्यमिक वृताकार कक्षा) भी कहते हैं, पृथ्वी के वायुमंडल में निम्न भू कक्षा से उपर और भू-स्थिर कक्षा से नीचे का क्षेत्र है जो कि लगभग) की ऊंचाई पर स्थित है। इस क्षेत्र में घूम रहे उपग्रहोंं का मुख्य कार्य भ्रमण नैवी ...

एवरेस्ट पर्वत

एवरेस्ट पर्वत दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है, जिसकी ऊँचाई 8.850 मीटर है। पहले इसे XV के नाम से जाना जाता था। माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई उस समय 29.002 फीट या 8.840 मीटर मापी गई। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई प्रतिवर्ष 2 से॰मी॰ ...

बयकाल झील

बयकाल झील दुनिया की सब से प्राचीन और गहरी झील है। यह झील ३ करोड़ वर्ष से लगातार बनी हुई है और इसकी औसत गहराई ७४४.४ मीटर है। हालाँकि कैस्पियन सागर विश्व की सबसे ज़्यादा पानी वाली झील है, बयकाल का स्थान दुसरे नंबर पर आता है। क्योंकि कैस्पियन का पान ...

ग्रहण

ग्रहण एक खगोलीय अवस्था है जिसमें कोई खगोलिय पिंड जैसे ग्रह या उपग्रह किसी प्रकाश के स्रोत जैसे सूर्य और दूसरे खगोलिय पिंड जैसे पृथ्वी के बीच आ जाता है जिससे प्रकाश का कुछ समय के लिये अवरोध हो जाता है। इनमें मुख्य रूप से पृथ्वी के साथ होने वाले ग् ...

खनिज विज्ञान

खनिज विज्ञान भूविज्ञान की एक शाखा होती है। इसमें खनिजों के भौतिक और रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। विज्ञान की इस शाखा के अंतर्गत खनिजों के निर्माण, बनावट, वर्गीकरण, उनके पाए जाने के भौगोलिक स्थानों और उनके गुणों को भी शामिल किया गया है। इ ...

गुफ़ा विज्ञान

गुफ़ा विज्ञान गुफ़ाओं और अन्य कार्स्ट स्थलाकृतियों के अध्ययन को कहते हैं। इसमें उनकी संरचना, ढांचे, भौतिक गुणों, इतिहास, निवासी जीवों, निर्माण प्रक्रियाओं और समय के साथ होने वाले बदलाव शामिल हैं।

ज्वालामुखी विज्ञान

ज्वालामुखी विज्ञान ज्वालामुखियों व उन से सम्बन्धित चीज़ों, जैसे कि मैग्मा, लावा और अन्य सम्बन्धित भूवैज्ञानिक, भूभौतिक और भूरसायनिक पहलुओं के अध्ययन को कहते हैं। ज्वालामुखी वैज्ञानिक का विशेष ध्यान ज्वालामुखियों के निर्माण, ऐतिहासिक अ आधुनिक विस् ...

पृथ्वी-समीप वस्तु

पृथ्वी-समीप वस्तु हमारे सौर मंडल में मौजूद ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है जो सूरज के इर्द-गिर्द ऐसी कक्षा में परिक्रमा कर रही हो जो उसे समय-समय पर पृथ्वी के समीप ले आती हो। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ की परिभाषा के अनुसार ऐसी वस्तुओं को ही पृथ्वी-समीप ...

सेन्ट्री (निगरानी प्रणाली)

सेन्ट्री अमेरीकी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान नासा की एक स्वचालित प्रणाली है जो लगातार क्षुद्रग्रहों पर इस दृष्टि से निगरानी रखती है कि कहीं उनमें से कोई भविष्य के लगभग १०० वर्षों के भीतर पृथ्वी से न आ टकराये। अगर सेन्ट्री को किसी सम्भवित प्रहार का ...

१०३६ गैनिमीड

अगर आप के इस से मिलते-जुलते नाम के बृहस्पति ग्रह के उपग्रह के बारे में जानकारी ढूंढ रहे हैं तो गैनिमीड उपग्रह वाला लेख देखिये १०३६ गैनिमीड सबसे बड़ा पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रह है। इसका व्यास ३२-३४ किमी है। इसकी खोज १९३४ में हुई थी। हालांकि कई अन्य ह ...

१९९१ बीए

१९९१ बीए एक पत्थरीला पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रह है। इसकी खोज १८ जनवरी १९९१ में हुई थी। भूतकाल में यह पृथ्वी से १,६०,००० किमी की दूरी तक पहुँच चुका है, जो धरती-चंद्रमा की दूरी का केवल आधा है। इसका व्यास ५-१० मीटर है। अपने छोटे आकार के कारण यह पृथ्वी ...

४३३ इरोस

४३३ इरोस एक पत्थरीला पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रह है। क्षुद्रग्रह वर्णक्रम श्रेणियों में यह एक S-श्रेणी क्षुद्रग्रह है, यानि पत्थरीला और सिलिका-युक्त। इसका आकार ३४.४×११.२×११.२ किमी है और १०३६ गैनिमीड के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा पृथ्वी-समीप क्षुद्रग्रह ह ...

मरुस्थल और शुष्क क्षुपभूमियाँ

मरुस्थल और शुष्क क्षुपभूमियाँ ऐसे बायोम होते हैं जिनपर बहुत कम मात्रा में नमी पड़ती है। पारिभाषिक रूप से इन स्थनों पर हर साल २५० मिलीमीटर से कम वर्षा और बर्फ़ गिरती है। यह भूमि पर सबसे विस्तृत बायोम है और पृथ्वी के भूमीय इलाक़ों का लगभग १९% भाग इ ...

अयस्क

उन शैलों को अयस्क कहते हैं जिनमें वे खनिज हों जिनमें कोई धातु आदि महत्वपूर्ण तत्व हों। अयस्कों को खनन करके बाहर लाया जाता है; फिर इनका शुद्धीकरण करके महत्वपूर्ण तत्व प्राप्त किये जाते हैं।

अवसादन

किसी तरल में उपस्थित कणों का जमीन पर आकर बैठ जाना अवसादन या तलछटीकरण कहलाता हैं। अवसादन, तरल में निलम्बित कणों पर लगने वाले गुरुत्व बल या अपकेन्द्री बल के कारण होता है। भूविज्ञान में अवसादन को प्रायः अपरदन की विपरीत क्रिया माना जाता है।

आघूर्ण परिमाण मापक्रम

आघूर्ण परिमाण मापक्रम भूकम्पज्ञों द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला मापक्रम है जो किसी भूकंप की तीव्रता को नापने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इसमें भूकंप को उसके द्वारा छोड़ी गई ऊर्जा के संबंध में मापा जाता है। इसका विकास थॉमस सी हैंक्स और हिरो का ...

उत्तर चुम्बकीय ध्रुव

उत्तर चुम्बकीय ध्रुव पृथ्वी सतह के उत्तरी गोलार्ध स्थित एक चलायमान बिन्दु है जो जहाँ पर पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र के बिन्दु उर्ध्वाधर रूप से नीचे की और होते हैं । यह घटना केवल एक स्थान पर ही होती है, जो कि उत्तरी ध्रुव और भूचुम्बकीय उत्तर ध्रुव ...

उष्णोत्स

उष्णोत्स एक प्रकार का पानी का चश्मा होता है जिसमें समय-समय पर पानी ज़ोरों से धरती से शक्तिशाली फव्वारे की भांति फूटता है और साथ में भाप निकलती है। यह पृथ्वी पर कम स्थानों में ही मिलते हैं क्योंकि इनके निर्माण के लिए विशेष भूतापीय व अन्य भूवैज्ञान ...

ऐतिहासिक भूविज्ञान

ऐतिहासिक भूविज्ञान के अन्तर्गत भूविज्ञान के सिद्धान्तों का उपयोग करके पृथ्वी के इतिहास की पुनर्रचना की जाती है और उसे समझने की कोशिश की जाती है। ऐतिहासिक भूविज्ञाउन प्रक्रियाओं पर अपना ध्यान केंद्रित करता है जो पृथ्वी की सतह तथा उपसतह को बदलते है ...

भूवैज्ञानिक कल्प

भूवैज्ञानिक कल्प पृथ्वी के प्राकृतिक भूवैज्ञानिक इतिहास का एक भाग होता है। भूवैज्ञानिकों ने इस इतिहास को चार इओनों में विभाजित करा है, जो सभी आधे अरब वर्ष या उस से अधिक लम्बे हैं। यह इओन स्वयं महाकल्पों में विभाजित हैं, जो आगे कल्पों में बंटे हुए ...

कायांतरित शैल

आग्नेय एवं अवसादी शैलों में ताप और दाब के कारण परिर्वतन या रूपान्तरण हो जाने से कायांतरित शैल का निमार्ण होता हैं। रूपांतरित चट्टानों पृथ्वी की पपड़ी के एक बड़े हिस्सा से बनी होती है और बनावट, रासायनिक और खनिज संयोजन द्वारा इनको वर्गीकृत किया जात ...

कार्बनी कल्प

कार्बनप्रद तंत्र Carboniferous System उन शैलों के समुदाय को कहते हैं जिनसे पत्थर का कोयला और उसी प्रकार के कार्बनमय पदार्थ मिलते हैं। जिस युग में यह तंत्र बना उसे कार्बनी कल्प Carboniferous period कहते हैं।

चिकित्सा भूविज्ञान

चिकित्सा भूविज्ञान उभरता हुआ अन्तरविषयी वैज्ञानिक क्षेत्र है जो प्राकृतिक भूवैज्ञानिक तत्त्वों के जीवों तथा मानवों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करता है।

जलोढ़क

जलोढ़क, अथवा अलूवियम उस मृदा को कहा जाता है, जो बहते हुए जल द्वारा बहाकर लाया तथा कहीं अन्यत्र जमा किया गया हो। यह भुरभुरा अथवा ढीला होता है अर्थात् इसके कण आपस में सख्ती से बंधकर कोई ठोस शैल नहीं बनाते। जलोढ़क से भरी मिट्टी को जलोढ़ मृदा या जलोढ ...

पर्माफ़्रोस्ट

भूविज्ञान में स्थायीतुषार या पर्माफ़्रोस्ट ऐसी धरती को बोलते हैं जिसमें मिट्टी लगातार कम-से-कम दो वर्षों तक पानी जमने के तापमान से कम तापमान पर रही हो। इस प्रकार की धरती में मौजूद पानी अक्सर मिटटी के साथ मिलकर उसे इतनी सख़्ती से जमा देता है कि मि ...

पर्वत निर्माण

विभिन्न प्रकार के पर्वतों का निर्माण विभिन्न प्रकार से होता है, जैसे ज्वालामुखी पर्वतों का निर्माण ज्वालामुखी उद्गारों से तथा ब्लाक पर्वतों का निर्माण भूपटल पर पड़ी दरारों से होता है। भ्रंश के समय आसपास का भाग टूटकर नीचे धंस जाता है तथा बीच का भा ...