ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 59

आनन्द रामायण

द्वितीय सर्ग - राम जन्म और उनकी शिक्षा नवम सर्ग - हनुमान द्वारा समुद्रलंघन से वापस लौटने तक की कथा। अष्टम सर्ग - सुग्रीव मित्रता से सम्पाति से मिलने की कथा। पंचम सर्ग - राम का अयोध्या निवास। तृतीय सर्ग - ताडका वध से सीता विवाह की कथा एकादश सर्ग - ...

कृत्तिवास रामायण

कृत्तिवास रामायण या श्रीराम पाँचाली, की रचना पन्द्रहवीं शती के बांग्ला कवि कृत्तिवास ओझा ने की थी। यह संस्कृत के अतिरिक्त अन्य उत्तर-भारतीय भाषाओं का पहला रामायण है। गोस्वामी तुलसीदास के रामचरित मानस के रचनाकाल से लगभग सौ वर्ष पूर्व कृत्तिवास राम ...

खोतानी रामायण

खोतानी रामायण मध्य एशिया के खोतान प्रदेश में प्रचलित रामकथा जिसकी रचना संभवत: 9वीं शती ई. में हुई थी। कदाचित यह तिब्बत में प्रचलित किसी रामायण का प्रतिसंस्करण है। एशिया के पश्चिमोत्तर सीमा पर स्थित तुर्किस्तान के पूर्वी भाग को खोतान कहा जाता है ज ...

गायत्री रामायण

वाल्मीकि रामायण में 24000 श्लोक हैं। वाल्मीकि जी ने गायत्री मंत्र के २४ बीजाक्षरों को इन श्लोकों में पाणित्यपूर्ण ढंग से जड़ दिया है। इन २४ बीजाक्षरों से आरम्भ होने वाले श्लोकों के समूह को गायत्री रामायण कहते हैं। कहा जाता है कि इन २४ श्लोकों के ...

गीतरामायण

गीतरामायण रामायण के प्रसंगों पर आधारित ५६ मराठी गीतों का संग्रह है। यह आकाशवाणी पुणे से सन् १९५५-५६ में प्रसारित किया गया था। इसके लेखक प्रसिद्ध साहित्यकार गजानन दिगंबर माडगूलकर थे तथा इसे सुधीर फड़के ने संगीतबद्ध किया था। यह अत्यन्त प्रसिद्ध हुआ ...

गीति रामायण

गीति रामायण असमिया भाषा का प्रसिद्ध रामकाव्य जिसकी रचना दुर्गाधर कायस्थ ने की है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें राम और सीता दैवी न होकर पूर्णत: मानवीय हैं। मनुष्य के सामान्य विचाऔर विकार दोनों को कवि ने उनमें देखा है, इस कारण यह काफी लोकप्रिय हुआ ह ...

गुह

गुह ऋंगवेरपुर के राजा थे, उन्हें निषादराज अथवा भीलराज भी कहा जाता था। वे भील जाति के थे उन्होंने ही वनवासकाल में राम, सीता तथा लक्ष्मण का अतिथि सत्कार किया तथा अपना राज्य पर राज करने को कहा था। उनका क्षैत्र गंगा के किनारे था अत: केवट जाति के लोग ...

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

"जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी", एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक का अन्तिम आधा भाग है। यह नेपाल का राष्ट्रीय ध्येयवाक्य भी है। यह श्लोक वाल्मीकि रामायण के कुछ पाण्डुलिपियों में मिलता है, और दो रूपों में मिलता है। प्रथम रूप: निम्नलिखित श्लोक हिन्दी ...

तुंचत्तु रामानुजन एषुत्तच्छन

तुंचत्तु रामानुजन एषुत्तच्छन सोलहवीं शताब्दी के मलयालम कवि थे। वे मलयालम काव्य के पितामह कहे जाते हैं। इतिहासकार श्री उल्लूर एस परमेश्वर अय्यर के अनुसार उनका जीवनकाल 1495 ई से 1575ई तक है। तुंचत्तु रामानुजन एषुत्तच्छन की कृतियाँ भक्ति आंदोलन का अ ...

तुलसी जयंती

सम्पूर्ण भारतवर्ष में महान ग्रंथ रामचतिमानसके रचयिता गोस्वामी के स्मरण में तुलसी जयंती मनाई जाती है। श्रावण मास की अमावस्या के सातवें दिन तुलसीदास की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 8अगस्त है। गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12पुस्तकों की रचना की है ...

पउमचरिउ

पउमचरिउ रामकथा पर आधारित अपभ्रंश का एक महाकाव्य है। इसके रचयिता जैन कवि स्वयंभू सत्यभूदेव हैं।इसमें बारह हजार पद हैं। जैन धर्म में राजा राम के लिए पद्म शब्द का प्रयोग होता है, इसलिए स्वयंभू की रामायण को पद्म चरित पउम चरिउ कहा गया। इसकी रचना छह वर ...

भट्टिकाव्य

भट्टिकाव्य महाकवि भट्टि द्वारा रचित महाकाव्य है। इसका वास्तविक नाम रावणवध है। इसमें भगवान रामचंद्र की कथा जन्म से लगाकर लंकेश्वर रावण के संहार तक उपवर्णित है। यह महाकाव्य संस्कृत साहित्य के दो महान परम्पराओं - रामायण एवं पाणिनीय व्याकरण का मिश्रण ...

रंगनाथ रामायण

श्री रंगनाथ रामायण तेलुगु में रचित रामायण है। इसकी कथा वाल्मीकि रामायण के अनुरूप है। यद्यपि तेलुगु में ४० से अधिक रामायण हैं जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित हैं, किन्तु इनमें से केवल चार में ही मूल महाकाव्य की सम्पूर्ण कथा कही गयी है। ये चार ये हैं- ...

रघुविलास

रघुविलास एक संस्कृत नाटक है जिसके रचयिता जैन नाट्यकार रामचन्द्र सूरि थे। वे आचार्य हेमचंद्र के शिष्य थे। रामचन्द्र सूरि का समय संवत ११४५ से १२३० का है। उन्होंने संस्कृत में ११ नाटक लिखे है। उनके अनुसार यह उनकी चार सर्वोतम कृतियों में से एक है।

राधेश्याम रामायण

राधेश्याम रामायण की रचना राधेश्याम कथावाचक ने की थी। इस ग्रन्थ में आठ काण्ड तथा २५ भाग है। इस रामायण में श्री राम की कथा का वर्णन इतना मनोहारी ढँग से किया गया है कि समस्त राम प्रेमी जब-जब इस रचना का रसपान करते है तब-तब वे इसके प्रणेता के प्रति अप ...

रामजात्तौ

रामजात्तौ बर्मी भाषा का रामायण है। अघोषित रूप से इसे म्यांमार का राष्ट्रीय महाकाव्य माना जाता है। म्यांमार में रामजात्तौ की नौ प्रतियाँ उपलब्ध हैं।

रामराज्य

हिन्दू संस्कृति में राम द्वारा किया गया आदर्शासन रामराज्य के नाम से प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में रामराज्य का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट शासन या आदर्श शासन के रूपक के t रामराज्य, लोकतन्त्र का परिमार्जित रूप माना जा सकता है। वैश्विक स्तर पर रामराज्य की स् ...

रामशलाका

श्रीरामशलाका प्रश्नावली गोस्वामी तुलसीदास की एक रचना है। इसमें एक 15x15 ग्रिड में कुछ अक्षर, मात्राएँ आदि लिखे हैं। मान्याता है कि किसी को जब कभी अपने अभीष्ट प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने की इच्छा हो तो सर्वप्रथम उस व्यक्ति को भगवान श्रीरामचन्द्र ...

रामायण (बहुविकल्पी)

रामायण मूलतः वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में रचित प्रसिद्ध महाकाव्य है। किन्तु अन्य भाषाओं में रचित अनेकानेक रामकथा काव्य इसी नाम से जाने जाते हैं- रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं शताब्दी में अवधी में रचित सप्तकाण्ड रामायण -- माधव कंदलि ...

रामायण (राजगोपालाचारी)

रामायाण चक्रवर्ती राजगोपालाचारी द्वारा रचित पौराणिक कथा पुस्तक है। इसका प्रथम प्रकाशन १९५७ में भारतीय विद्या भवन में हुआ। यह पुस्तक वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का संक्षिप्त अंग्रेजी पुनर्लेखन है। इससे पहले उन्होंने कंब रामायण की रचना की। राज जी न ...

रामायण नृत्यनाटिका

रामायण नृत्यनाटिका, इण्डोनेशिया में रामायण के कथानक का नृत्य नाटक के रूप में प्रस्तुति है। यह अत्यन्त शैलीपूर्ण नृत्य रूप है। इसमें संगीत, नृत्य, नाटक का सम्मिश्रण होता है और प्रायः कथोपकथन नहीं होते।

अध्यात्म रामायण

सर्वप्रथम श्री राम की कथा भगवान श्री शंकर ने माता पार्वती जी को सुनाया था। उस कथा को एक कौवे ने भी सुन लिया। उसी कौवे का पुनर्जन्म काकभुशुण्डि के रूप में हुआ। काकभुशुण्डि को पूर्वजन्म में भगवान शंकर के मुख से सुनी वह राम कथा पूरी की पूरी याद थी। ...

लक्ष्मणरेखा

रामायण के एक प्रसिद्ध प्रसंग के अनुसार वनवास के समय सीता के आग्रह के कारण राम मायावी स्वर्ण म्रग के आखेट हेतु उसके पीछे गये। थोड़ी देर में सहायता के लिए राम की पुकार सुनाई दी, तो सीता ने लक्ष्मण से जाने को कहा। लक्ष्मण ने बहुत समझाया कि यह सब किस ...

विभिन्न भाषाओं में रामायण

भिन्न-भिन्न प्रकार से गिनने पर रामायण तीन सौ से लेकर एक हजार तक की संख्या में विविध रूपों में मिलती हैं। इनमें से संस्कृत में रचित वाल्मीकि रामायण सबसे प्राचीन मानी जाती है। साहित्यिक शोध के क्षेत्र में भगवान राम के बारे में आधिकारिक रूप से जानने ...

शिवधनुष

शिवधनुष शंकर जी का प्रिय धनुष था जिसका नाम पिनाक था। शिवधनुष राजा जनक के पास धरोहर के रूप में रखा गया था। यह वही धनुष है जो सीता स्वयंवर में राजा जनक द्वारा रखा गया था। भगवान श्रीराम ने इसे तोड़ कर सीता जी से विवाह किया था

संक्षिप्त रामायण

तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस के उत्तर कांड में गरुड़ काक भुशुंडि संवाद है। इसमें श्री काक भुशुंडि जी सम्पूर्ण रामायण को अति संक्षिप्त में कहते हैं। वही अंश यहां प्रस्तुत है। इस अंश के बारे में कहा गया है, कि इसका पाठ, पूर्ण रामायण के ...

संजीवनी

संजीवनी एक वनस्पति का नाम है जिसका उपयोग चिकित्सा कार्य के लिये किया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम सेलाजिनेला ब्राहपटेर्सिस है और इसकी उत्पत्ति लगभग तीस अरब वर्ष पहले कार्बोनिफेरस युग से मानी जाती हैं। लखनऊ स्थित वनस्पति अनुसंधान संस्थान में संजीवन ...

सप्तकाण्ड रामायण

सप्तकाण्ड रामायण असमिया भाषा का रामायण है। इसकी रचना १४वीं शताब्दी में असम के भक्तकवि माधव कंदलि ने की थी। संस्कृत से किसी आधुनिक भारतीय भाषा में अनूदित यह प्रथम रामायण है। इसके साथ ही यह कृति असमी भाषा की सबसे प्राचीन रचनाओं में से एक है। सप्तका ...

बुद्धदास

फ्रा धर्मकोषाचार्य ; साँचा:RTGS ; 27 मई, 1906 – 25 मई, 1993) थाईलैण्ड के २०वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध एवं प्रभावशाली बौद्ध भिक्षु थे। उन्हें बुद्धदास बिक्खु (थाई: พุทธทาสภิกขุ ; साँचा:RTGS, भी कहते हैं।

बोधिधर्म

बोधिधर्म एक महान भारतीय बौद्ध भिक्षु एवं विलक्षण योगी थे। इन्होंने 520 या 526 ई. में चीन जाकर ध्यान-सम्प्रदाय का प्रवर्तन या निर्माण किया। ये दक्षिण भारत के कांचीपुरम के राजा सुगन्ध के तृतीय पुत्र थे। इन्होंने अपनी चीन-यात्रा समुद्री मार्ग से की। ...

भिक्षु जगदीश कश्यप

भिक्खु जगदीश कश्यप बौद्ध भिक्षु तथा पालि के विद्वान थे। उनका जन्म राँची में हुआ था। जन्म का नाम जगदीश नारायण था। सन् १९३३ में उन्होने दीक्षा ली।

लोकक्षेम (बौद्ध भिक्षु)

लोकक्षेम, जन्म लगभग 147 ई), एक बौद्ध भिक्षु थे जो महायान सम्रदाय के संस्कृत ग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद करने वाले प्राचीनतम व्यक्ति हैं। चीनी बौद्ध धर्म में उनका बहुत महत्व है।

पतंजलि आयुर्वेद

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड भारत प्रांत के उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार जिले में स्थित आधुनिक उपकरणों वाली एक औद्योगिक इकाई है। इस औद्योगिक इकाई की स्थापना शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खनिज और हर्बल उत्पादों के निर्माण हेतु की गयी है।

पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क

पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की इकाई है जिसके माध्यम से स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण और स्वदेशी की विचारधारा पर कार्य होता है। हरिद्वार में स्थित पदार्था नामक गांव में पतंजलि फूड एंव हर्बल पार्क लिमिटेड में आवश्यक घरेलू वस्तुओं स ...

बालकृष्ण

बालकृष्ण का जन्म ४ अगस्त १९७२ को हुआ। इनकी माता का नाम सुमित्रा देवी और पिता का नाम जय बल्लभ है। उन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार-प्रसार का कार्य करते रहे हैं। उनका जन्म दिवस प ...

योग ग्राम

योग ग्राम का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री बी.सी.खंडूरी द्वारा 8 जून 2008 को किया गया था। योग ग्राम हरिद्वार में स्थित है और एक ऐसा गाँव है जहाँ शुद्ध प्राकृतिक माहौल है। यहाँ नशामुक्त समाज है और जैविक खेती होती है जो सौ प्रतिशत विष-मुक्त ...

कालीचरन ब्रह्म

कालिचरन ब्रह्म, २०वीं शताब्दी के एक सामाजिक एवं धार्मिक सुधारक थे। उनका मूल नाम कालीचरन मेछ था। उन्होने बोडो लोगों के बीच ब्राह्म धर्म का प्रवर्तन किया।

चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती

जगद्गुरु चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती स्वामिगल काँची कामकोटिपीठम के 68वें जगद्गुरु थे। उन्हे प्रायः परमाचार्य या महा पेरिययवाल कहा जाता है।

जसनाथ

जसनाथी सम्प्रदाय एक हिन्दू सम्प्रदाय है जिसके संस्थापक श्री गुरु जसनाथ जी महराज थे। जोधपुर, बीकानेर मंडलों में जसनाथ मतानुयायियों की बहुलता है। जसनाथ सम्प्रदाय के पाँच ठिकाने, बारह धाम, चौरासी बाड़ी और एक सौ आठ स्थापना हैं। इस सम्प्रदाय में रहने ...

तुकडोजी महाराज

right|thumb|300px|तुकडोजी महाराज तुकडोजी महाराज भारत के महाराष्ट्र के एक सन्त थे। उनका मूल नाम माणिक बान्डोजी इंगळे था। वे अमरावती जिले के यावली ग्राम में एक निर्धन परिवार में जन्मे थे। वे आडकोजी महाराज के शिष्य थे। तुकडोजी महाराज एक महान व स्वयं ...

मत्स्येंद्रनाथ

मत्स्येंद्रनाथ अथवा मचिन्द्रनाथ ८४ महासिद्धों में से एक थे। वो गोरखनाथ के गुरु थे जिनके साथ उन्होंने हठयोग विद्यालय की स्थापना की। उन्हें संस्कृत में हठयोग की प्रारम्भिक रचनाओं में से एक कौलजणाननिर्णय के लेखक माना जाता है। वो हिन्दू और बौद्ध दोनो ...

महानामव्रत ब्रह्मचारी

महानामव्रत ब्रह्मचारी वर्तमान बांग्लादेश में हिन्दू धर्म के महानाम सम्प्रदाय के एक साधु थे। वे दार्शनिक, लेखक एवं धर्म गुरु थे।

युक्तेश्वर गिरि

श्री युक्तेश्वर गिरि महान क्रियायोगी एवं उत्कृष्ट ज्योतिषी थे । वे लाहिड़ी महाशय के शिष्य और स्वामी सत्यानन्द गिरि तथा परमहंस योगानन्द के गुरु थे। उनका मूल नाम प्रियनाथ कांड़ार श्री युक्तेश्वर गिरी ने गुरुपरम्परा को कायम रखते हुए क्रियायोगकी दिक् ...

राम चरण (गुरु)

गुरु राम चरण या रामचरण जी महाराज अठारहवीं सदी के आरम्भ में राजस्थान के जयपुर में उत्पन्न के एक संत थे। इन्होने रामसनेही संप्रदाय की स्थापना की। ये निर्गुण भक्ति शाखा के संत थे।

शारदा देवी

सारदा देवी भारत के सुप्रसिद्ध संत स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक सहधर्मिणी थीं। रामकृष्ण संघ में वे श्रीमाँ के नाम से परिचित हैं।

श्रीनिवासचार्य

श्रीनिवासचार्य के पिता का नाम गंगाधर भट्टाचार्य उपनाम चैतन्यदास था। सं. 1576 में वैशाखी पूर्णिमा को इनका जन्म हुआ था। श्री जीव गोस्वामी के यहाँ श्यामानंद जी तथा नरोत्तमदास ठाकुर के साथ भक्ति के ग्रंथों का बहुत दिनों तक अध्ययन किया। श्री जीव के आद ...

श्रीपाद वल्लभ

श्रीपाद श्री वल्लभ कलियुग में श्री दत्तात्रेय का पहला पूर्ण अवतार है। श्रीपाद श्री वल्लभा का जन्म 1320 में श्री अप्पाराजा और सुमति सारमा के साथ भाद्रपद सुधा चैविथि के दिन पितापुरम में हुआ था। श्रीपाद श्रीवल्लभ चारितामृतम् एक 53 अध्याय की पुस्तक ह ...

स्वामिनारायण

स्वामिनारायण या सहजानन्द स्वामी, हिंदू धर्म के स्वामिनारायण संप्रदाय के संस्थापक थे। भागवत पुराण और स्कंद पुराण ओर पद्मपुराण में स्वामिनारायण के अवतार का संकेत है। | स्वामिनारायण की शिक्षापत्री स्वामिनारायण सम्प्रदाय का मूल ग्रन्थ है।

बारोवारी

बारोवारी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में त्योहारों के अवसर पर जनता से एकत्रित किगए चंदे के साथ आयोजित सामूहिक पूजा और उत्सव को कहते हैं। दुर्गा पूजा के दिनों में बंगाल-भर में कई मोहल्लों में बारोवारियाँ संगठित होती हैं।

रक्षासूत्र

रक्षासूत्र या राखी को रक्षाबंधन के अवसर पर भाई की कलाई में बाँधा जाता है। इसे रेशमी धागे और कुछ सजावट की वस्तुओं को मिलाकर बनाया जाता है। इन राखियों का मूल्य भारतीय बाज़ार में ५ रु. से लेकर १,५०० रु. या उससे अधिक भी हो सकता है। आज कल तो बहने सोने ...