ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 56

ग़ुलाम क़ादिर

गुलाम कादिर रुहेलखंड का शासक था जो अपने दानवी अत्याचारों के लिए कुख्यात है। गुलाम कादिर ने अपनी अविवेकपूर्ण महत्त्वाकांक्षा तथा युवावस्था के आवेग में न केवल अपने दादा द्वारा अर्जित तथा संगठित राज्य गँवाया, वरन् मराठों से वैर मोल लेकर तथा दिल्ली क ...

ईद के पकवान

ईद के पकवान: मुस्लिम त्योहारों में अक्सर पकाए जाने वाले व्यंजनों या पकवानों में जो प्रमुख रूप से व्यंजन पाए जाते हैं, उनका ब्योरा नीचे देखा जा सकता है।

इफ़्तार

इफ़्थार शाम का खाना है, जब मुसलमान सूर्यास्त पर अपना दैनिक रमजान उपवास समाप्त करते हैं। शाम की प्रार्थना करने के लिए मुसलमानों ने अपने उपवास को पूरा करके तोड़ देना।

सदक़ाह

सदक़ाह या सदक़ आधुनिक संदर्भ में "स्वैच्छिक दान" का संकेत दिया गया है। कुरान के अनुसार, शब्द स्वैच्छिक भेंट का अर्थ है, जिसका धन "दाता" की इच्छा पर है।

द मेसेज (1976 फ़िल्म)

द मेसेज: संदेश 1976 की महाकाव्य ऐतिहासिक नाटक फिल्म है जो मुस्तफ़ा अक्काद द्वारा निर्देशित है, जो इस्लामी पैग़म्बर मुहम्मद के जीवन और समय को पेश करती है। अरबी और अंग्रेजी में जारी, संदेश प्रारंभिक इस्लामी इतिहास के परिचय के रूप में यह फिल्म कार्य ...

हमज़ा इब्न अब्दुल मुत्तलिब

हमज़ा इब्न अब्दुल मुत्तलिब:4 इस्लामी नाबी मुहम्मद साहब के एक साथी और पैतृक चाचा थे। उनके कुनियत चुन लिया नाम जिससे वे प्रसिद्ध हुए "अबू उमर":2 أبو عمارة) और "अबू याला":3 أبو يعلى थी। अन्य नामों में असदुल्लाह:2 أسد الله, अल्लाह का शेऔर असद अल- जन् ...

सलमान फ़ारसी

सलमान फ़ारसी या सलमान अल-फ़ारसी, जन्म रौजबेह, इस्लामी पैगंबर मुहम्मद साहब के साथी थे और जो इस्लाम स्वीकार करने वाले पहले फारसी थे। अन्य सहबाह के साथ उनकी कुछ बाद की बैठकों के दौरान, उन्हें अबू अब्दुल्ला कहा जाता था। उन्हें मदीना के चारों ओर एक खा ...

तल्हा

तल्हा इब्न उबैदुल्लाह इस्लामी पैगंबर मुहम्मद का एक साथी था। ज्यादातर दस वादा किगए स्वर्ग के होने के लिए जाना जाता है। उहूद की लड़ाई और ऊंट की लड़ाई में उनकी भूमिका के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई, उन्हें मुहम्मद द् ...

अवध के नवाब

भारत के अवध के १८वीं तथा १९वीं सदी में शासकों को अवध के नवाब कहते हैं। अवध के नवाब, इरान के निशापुर के कारागोयुन्लु वंश के थे। नवाब सआदत खान प्रथम नवाब थे।

बरार सल्तनत

बरार, दक्खिन की सल्तनतों में से एक थी। यह बहमनी सल्तनत के विघटन के बाद 1490 में स्थापित किया गया था। सबसे पहले बहमनी साम्राज्य से अलग होने वाला क्षेत्र बरार था, जिसे फतहउल्ला इमादशाह ने 1484 ई. में स्वतंत्र घोषित करके इमादशाही वंश की नींव डाली। 1 ...

बीदर सल्तनत

1580 में उनकी मृत्यु के बाद, अली बारिद को उनके बेटे इब्राहिम बारिद द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जिन्होंने 1587 में अपनी मृत्यु तक सात साल तक शासन किया। उसके बाद उसके छोटे भाई कासिम बारिद II उत्तराधिकारी बन। १५९१ में उसकी मृत्यु के बाद, उसके नवजा ...

ज़ुबैर इब्न अल-अवाम

अल-जुबैर का जन्म 594 में मक्का में हुआ था।:75 उनके पिता कुरैशी जनजाति के असद वंश के अल-अवाम इब्न खुवेलीद थे, जिससे अल- जुबयर खडिया के भतीजे थे। उनकी मां हजरत मुहम्मद साहब की चाची थी, सफियाह बिंत अब्द अल-मुतालिब, इसलिए अल-जुबयर मुहम्मद के पहले चचे ...

गुटेनबर्ग बाइबिल

गुटेनबर्ग बाइबिल आधुनिक ढंग के छापाखाने से मुद्रित होने वाली दुनिया की पहली बाइबिल थी। २३ अगस्त, १४५६ को इसका प्रकाशन जर्मनी के माइंस शहर में आधुनिक ढंग का दुनिया का पहला छापामशीन बनाने वाले जर्मन वैज्ञानिक योहानेस गुटेनबर्ग द्वारा किया गया था। ग ...

ग्राहम स्टेन्स

डा. ग्राहम स्टीवर्ट स्टेन्स ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी था जिन्हें और उनके दो बेटों, फिलिप और टिमोथी को ओडिशा में हुई एक घटना में कुछ लोगों ने 22 जनवरी 1999 को जिंदा जलाकर मार डाला था। उस वक्त वो क्योंझर जिले क मनोहरपुर गांव में अपनी स्टेशन वैगन में सो र ...

फोर्ड के बोल्डविन

फोर्ड के बोल्डविन 1185 से लेकर 1190 के बीच कैंटबरी के आर्कबिशप थे। एक पादरी के बेटे, बोल्डविन ने बोलोन्या, इटली में कैनन कानून और धर्मशास्त्र का अध्ययन किया और इंग्लैंड वापस लौटने व एक्सॅटर के बिशप का उत्तरोत्तर पद ग्रहण करने से पहले पोप यूजीन तृ ...

पोप कॅलिक्स्टस तृतीय

पोप कॅलिक्स्टस तृतीय या कॅलिक्स्टस तृतीय 8 अप्रैल 1455 से 1458 में अपनी मृत्यु तक पोप थे, जो कि रोमन कैथोलिक गिरजाघर के राजाध्यक्ष होता है। ये ऐसे अंतिम पोप थे जिन्होंने चुनाव के पश्चात कॅलिक्स्टस नाम ग्रहण किया। चुनाव से पूर्व इनका नाम अल्फोंस ड ...

पोप

रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं। पोप का शाब्दिक अर्थ पिता होता है। यह लैटिन के "पापा" से व्युत्पन्न हा है जो स्वयं ग्रीक के पापास् से व्युत्पन्न है। इस समय pope frncis naye इस पद पर ...

पोप एलेक्ज़ेंडर छठे

पोप एलेक्ज़ेंडर छठे 11 अगस्त 1492 से 18 अगस्त 1503 में अपनी मृत्यु तक रोमन कैथोलिक गिरजाघर के मुख्या पोप रहे थे। इन्हें पुनर्जागरण के समय के सबसे विवादित पोप में से एक माना जाता है। इन्हें एक पादरी से अधिएक राजनयिक, राजनीतिज्ञ और नागरिक प्रशासक क ...

पोप ग्रीगरी प्रथम

पोप ग्रीगरी प्रथम । पोप ग्रीगरी को ईसाई धर्म का सर्वोपरि नेता चुने जाने के पहले रोमन सिनेटर का सम्मान प्राप्त था। राजनीति के क्षेत्र में रहते हुए भी इन्होंने अवश्य ही यश और ख्याति अर्जित की होती लेकिन इन्होंने राजनीति को छोड़कर धर्म के क्षेत्र मे ...

पोप जूलियस III

पोप जूलियस III, जियोवन्नी मारिया सीकोची डेल मोंटे का जन्म, पोप 7 फरवरी 1550 से 1555 में उनकी मौत हो गई थी। एक प्रतिष्ठित और प्रभावी राजनयिक के रूप में कैरियर के बाद, वह पॉल III की मृत्यु के बाद एक समझौता उम्मीदवार के रूप में पोपैसी के लिए चुने गए ...

पोप निकोलस II

पोप निकोलस द्वितीय, जन्र्ड गेरार्ड डी बर्गोगन, 24 जनवरी 10 5 9 से पोप की मृत्यु तक उनकी मौत हुई थी। अपने चुनाव के समय, वह फ्लोरेंस के बिशप थे

पोप फ़्रांसिस

फ्रांसिस कैथोलिक समुदाय के २६६वें पोप चुने गये हैं। पोप फ्रांसिस प्रथम को १३ मर्च २०१३ को पोंटिफ़ के रूप में चुना गया।

ऐनी बोलिन

ऐनी बोलिन या 1533 से 1536 तक इंग्लैंड के हेनरी अष्टम की दूसरी पत्नी और अपने आप में स्वंय और अपने वंशजों के लिए प्रथम मारकेस ऑफ़ पेमब्रोक थी। ऐनी के साथ हेनरी की शादी और उसके बाद उसके वध ने उसे धार्मिक और राजनीतिक उथल-पुथल जो अंग्रेज़ी सुधारान्दोल ...

मंगलोरियन कैथोलिक

वे भारत के कर्नाटक के दक्षिणी तट पर मैंगलोर सूबा से लैटिन संस्कार के बाद कैथोलिक का एक जातीय-धार्मिक समुदाय है।वे कोंकणी लोग हैं और कोंकणी भाषा बोलते हैं। समकालीन मंगलोरी कैथोलिक मुख्य रूप से गोवा कैथोलिक से निकले हैं जो १५६० और १७६३ के बीच दक्षि ...

मैरी ट्यूडर, फ्रांस की रानी

मैरी ट्यूडर, 1514 में 3 महीने के लिये फ्रांस की रानी थी। वह इंग्लैंड के राजा हेनरी अष्टम की बहन थी। मैरी फ्रांस के लुई बारहवें की, जो उनसे 30 वर्ष से अधिक वरिष्ठ थे, तीसरी पत्नी बन गई। उनकी मृत्यु के बाद उन्होनें चार्ल्स ब्रैंडन, सफ़ोल्क के पहले ...

मैरी १, इंग्लैंड की रानी

मैरी प्रथम, इंग्लैंड और आयरलैंड की जुलाई 1553 से अपनी मृत्यु तक रानी थीं। अपने शासनकाल में प्रोटेस्टैंटों को दी गई मौत की जघन्य सजाओं ने उन्हें खूनी मैरी यानि Bloody Mary के नाम से भी बदनाम कर दिया। बचपन पाकर युवा होने वाली मैरी हेनरी अष्टम और उन ...

तिजारा जैन मंदिर

तिजारा जैन मंदिर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक प्रमुख जैन मंदिर है। मंदिर अलवर से ५५ और दिल्ली से ११० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक "अतिशय क्षेत्र" है। यह मंदिर वर्तमान अवसर्पिणी काल के आठवें तीर्थंकर, चन्द्रप्रभ स्वामी को समर्पित है।

दिलवाड़ा जैन मंदिर

दिलवाड़ा मंदिर या देलवाडा मंदिर, पाँच मंदिरों का एक समूह है। ये राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित हैं। इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था। यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथकरों को समर्पित हैं। दिलवाड ...

नकोडा भरवजी

नकोडा भरव जी, नकोड़ा भैरव जी या नकोड़ा भैरव एक सुरक्षित देवता की प्रतिमा है जिसे नकोड़ा में पूजा जाता है जो राजस्थान में एक जैन तीर्थस्थल है। यह विशेष रूप से श्वेतांबर समुदाय में लोकप्रिय है, परन्तु अन्य जैनों को भी इसके बारे में पता है। नकोड़ा भ ...

नारेली जैन मन्दिर

ज्ञानोदय तीर्थ, नारेली जैन मंदिर, अजमेर के बाहरी इलाके में स्थित एक नवनिर्मित जैन मन्दिर है। शहर के केंद्र से 7 किलोमीटर की दूरी पर और जयपुर से 128 किलोमीटर पश्चिम की ओर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर स्थित है।

किज़िल गुफ़ाएँ

किज़िल गुफाएँ या क़िज़िल गुफाएँ जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त में एक बौद्ध गुफ़ाओं का समूह है जहाँ प्राचीनकाल में तारिम द्रोणी में तुषारी लोगों और बौद्ध धर्म से सम्बन्धित चित्र, मूर्तियाँ, लिखाईयाँ व अन्य पुरातन चीज़ें मिल ...

ठानाले गुफाएँ

ठाणाले गुफाएं प्राचीन बौद्ध गुफाएं हैं जिन्हें नाडसूर गुफाएं नाम से भी जाना जाता है। यह गुफाएं महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में पाली नामक गांव के पास १८ कि.मी. पर स्थित है। यहाँ कुल २३ गुफाएँ हैं।

मरातिक गुफा

मरातिक गुफा और Maratika मठ में स्थित हैं Khotang जिला में नेपाल, लगभग 185 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में माउंट एवरेस्टहै। यह एक सम्मानित साइट की तीर्थयात्रा के साथ जुड़े Mandarava, पद्मसंभव और दीर्घायु. Mandarava और पद्मसंभव एहसास हुआ की एक संख्या te ...

की गोम्पा

की गोम्पा हिमाचल प्रदेश की लाहौल स्पीति जिले में काजा से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। इस मठ की स्‍थापना 13वीं शताब्‍दी में हुई थी। यह स्‍पीती क्षेत्र का सबसे बड़ा मठ है। यह मठ दूर से लेह में स्थित थिकसे मठ जैसा लगता है। यह मठ समुद्र तल से 13504 फीट ...

बुद्ध स्मृति पार्क

यह बिहार की राजधानी पटना के पटना रेलवे जंक्शन के पास 22 एकड़ ज़मीन पर 125 करोड़ रुपए की लागत से बना उद्यान है। इसके मध्य में 200 फ़ीट ऊँचा एक स्तूप बनाया गया है। इसमें छह देशों से लागए बुद्ध अस्थि अवशेष की मंजुषाएं रखी गई हैं। 27 मई 2010 को बुद्ध ...

अयोघ्या का महादेव मन्दिर

श्री अनादि पंचमुखी महादेव मन्दिर यह स्थान अयोध्या की शास्त्रीय सीमा के अन्तर्गत गुप्तार घाट पर अवस्थित है, जो कि व्यावहारिक रूप से वर्तमान में फैजाबाद सैन्य क्षेत्र है। अयोध्या के प्रतिष्ठित शिवालय नागेश्वरनाथ व क्षीरेश्वरनाथ की भाँति इस मन्दिर क ...

अयोध्या विवाद

अयोध्या विवाद एक राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-धार्मिक विवाद है जो नब्बे के दशक में सबसे ज्यादा उभापर था। इस विवाद का मूल मुद्दा राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की स्थिति को लेकर है। विवाद इस बात को कर था कि क्या हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद ...

लिब्रहान आयोग

लिब्रहान आयोग, भारत सरकार द्वारा १९९२ में अयोध्या में विवादित ढांचे बाबरी मस्जिद के विध्वंस की जांच पड़ताल के लिए गठित एक जांच आयोग है, जिसका कार्यकाल लगभग १७ वर्ष लंबा है। भारतीय गृह मंत्रालय के एक आदेश से १६ दिसंबर १९९२ को इस आयोग का गठन हुया थ ...

श्री लक्ष्मण किला

श्री लक्ष्मण किला भारत के अयोध्या में स्थित एक आश्रम है। इसे श्री रामानन्द सम्प्रदाय की रसिकोपासना के आचार्यपीठ के रूप में जाना जाता है। मिथिला-भाव के प्राधान्य से श्रीसीताराम की उपासना और उसके माध्यम से आत्मोद्धार का मार्ग उपलब्ध कराना संस्था का ...

नीलकण्ठ महादेव मन्दिर, कालिंजर

कालिंजर दुर्ग के पश्चिमी भाग में यहां के अधिष्ठाता देवता नीलकंठ महादेव का एक प्राचीन मंदिर भी स्थापित है। इस मंदिर को जाने के लिए दो द्वारों से होकर जाते हैं। रास्ते में अनेक गुफाएँ तथा चट्टानों को काट कर बनाई शिल्पाकृतियाँ बनायी गई हैं। वास्तुशि ...

विंध्यवासिनी धाम

देवी भागवत मे माँ जगदम्बा के विविध स्वरूपों का वर्णन है। दुर्गा सप्तशती मे भी देवी के नौ स्वरूपों का सुंदर वर्णन है।उत्तर प्रदेश की धरती सदा से ही देवी- देवताओं की स्थली रही है। श्री राम का जन्मस्थान,श्रीकृष्ण का जन्मस्थान यही भूमि रही है। इसके अ ...

द्वादश ज्योतिर्लिंग

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में १२ है। सौराष्ट्र प्रदेश में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी में श्रीमह ...

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव् ...

केदारनाथ मन्दिर

केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह ...

नागेश्वर मंदिर, द्वारका

नागेश्वर मन्दिर एक प्रसिद्द मन्दिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह द्वारका, गुजरात के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यह शिव जी के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हिन्दू धर्म के अनुसार नागेश्वर अर्थात नागों का ईश्वर होता है। यह विष आदि से बचाव का ...

पौराणिक बृद्धकेदार

पौराणिक बृद्धकेदार भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले के अन्तर्गत पाली पछांऊॅं इलाके में रामगंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसे बृद्धकेदार अथवा बूढ़ाकेदार भी कहा जाता है। स्थानीय अनुभववेत्ताओं के मतानुसार इस वैदिक काल के शिवालय को ...

भीमाशंकर मंदिर

भीमाशंकर मंदिर भोरगिरि गांव खेड़ से 50 कि.मि. उत्तर-पश्चिम पुणे से 110 कि.मि में स्थित है। यह पश्चिमी घाट के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। यहीं से भीमा नदी भी निकलती है। यह दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई रायचूर जिले में कृष्णा नदी से जा मिलती है। ...

श्री शैलम देवस्थानम

श्रीशैलम नामक ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के पश्चिमी भाग में कुर्नूल जिले के नल्लामल्ला जंगलों के मध्य श्री सैलम पहाडी पर स्थित है। यहाँ शिव की आराधना मल्लिकार्जुन नाम से की जाती है। मंदिर का गर्भगृह बहुत छोटा है और एक समय में अधिक लोग नही जा सकते। ...

सोमनाथेश्वर महादेव

सोमनाथेश्वर महादेव एक प्राचीनतम शिवालय है, जो रामगंगा नदी के पश्चिमी तट पर चौखुटिया तहसील के तल्ला गेवाड़ नामक पट्टी में भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमांऊॅं क्षेत्र के अल्मोड़ा जनपद में प्राण-प्रतीष्ठित है। सोमनाथेश्वर शब्द श्रीनाथे ...

चोपता तुङ्गनाथ

तुंगनाथ उत्तराखण्ड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक पर्वत है। तुंगनाथ पर्वत पर स्थित है तुंगनाथ मंदिर, जो 3460 मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ है और पंच केदारों में सबसे ऊँचाई पर स्थित है। यह मंदिर १,००० वर्ष पुराना माना जाता है और यहाँ भगवान ...