ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 427

कुषाण राजवंश

कुषाण प्राचीन भारत के राजवंशों में से एक था। कुछ इतिहासकार इस वंश को चीन से आए युएझ़ी लोगों के मूल का मानते हैं। युरोपियन इतिहासकारों नें युएझी/यूची कबीले को प्राचीन आर्य से जुड़ा बताया है!प्रो वी एस स्मिथ एवं ए कनिंघम इन्हें आर्यों से जोड़ते हुए ...

कुतुब-उद-दीन ऐबक

कुतुबुद्दीन ऐबक मध्य कालीन भारत में एक शासक, दिल्ली सल्तनत का पहला शासक एवं गुलाम वंश का स्थापक था। उसने केवल चार वर्ष ही शासन किया। वह मुहम्मद गोरी का एक गुलाम था। यह पहले ग़ोरी साम्राज्य के सुल्तान मुहम्मद ग़ोरी के सैन्य अभियानों का सहायक बना औ ...

तेलंगाना की संस्कृति

तेलंगाना की संस्कृति: तेलंगाना के भारतीय राज्य में लगभग 5.000 वर्षों का सांस्कृतिक इतिहास है। हिन्दू काकातिया वंश और मुस्लिम कुतुब शाही और आसफ़ जाही राजवंश के शासन के दौरान यह क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप में संस्कृति का सबसे प्रमुख केंद्र के रूप मे ...

तेलंगाना विद्रोह

तेलंगाना विद्रोह तेलंगाना क्षेत्र के सामंती प्रभुओं के खिलाफ एक किसान विद्रोह था और बाद में, यह विद्रोह 1946 और 1951 के बीच हैदराबाद राज्य के खिलफ़ लडा गया।

निज़ाम शुगर फैक्ट्री

निजाम शुगर फैक्टरी "निजाम डेक्कन शुगर्स लिमिटेड के रूप में भी जाना जाता है। यह चीनी कारखाना भारत के तेलंगाना, निजामाबाद जिले के बोधन शहर में स्थित है। यह कारखाना जिला मुख्यालय निजामाबाद से 25 किलोमीटर दूर स्थित है, और एक समय में एशिया का सबसे बड़ ...

हैदराबाद प्रांत

हैदराबाद स्टेट जो हैदराबाद डेक्कन के रूप में भी जाना जाता था ब्रिटिश काल की सबसे बड़ी नवाबी/राजशाही रियासत थी। यह भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण-पश्चिमी ओर स्थित थी। इस रियासत मे वर्तमान राज्य, उत्तरी कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र का मराठवाड़ा विभ ...

चालुक्य राजवंश

चालुक्य प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश है। इनकी राजधानी बादामी थी। अपने महत्तम विस्तार के समय यह वर्तमान समय के संपूर्ण कर्नाटक, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिणी मध्य प्रदेश, तटीय दक्षिणी गुजरात तथा पश्चिमी आंध्र प्रदेश में फैला हुआ था।

अधिराजेन्द्र चोल

अधिराजेंद्र चोल चोल राजा वीरराजेंद्र चोल का पुत्र था, जो लगभग १०७० ई. में उसके मरने पर चोडमंडल का राजा हुआ। तीन वर्ष वह युवराज के पद पर रहा था और युवराज का पद चोलों में बड़ी कार्यशीलता का था। वह राजा का निजी सचिव भी होता था और सर्वत्र उसका प्रतिन ...

वेल्लोर किला

वेल्लोर किला तमिल नाडु राज्य के वेल्लोर के केंद्र में स्थित है। किले में श्री जलागांडीश्‍वर मंदिर, एक मस्जिद, चर्च, मुतु मंडपम, प्रसिद्ध वेल्लोर ईसाई अस्पताल और राज्य सरकार संग्रहालय भी स्थित हैं। इसी किले में टीपू महल भी स्थित है और मान्यता यह भ ...

मैसूर का साम्राज्य

विजय नगर राज्य के समय में ही 1612 ई0 में ओडियार नामक राजा ने मैसूर राज्य की स्थापना की इस मैसूर राज्य में आगे चलकर दो प्रमुख शासक हुए-हैदर अली एवं टीपू। इन्होंने अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष जारी रखा। टीपू, हैदर अली दक्षिण भारत का पहला शासक था जिस ...

राजाराज चोल १

राजाराज चोल १ दक्षिण भारत के चोल साम्राज्य के महान चोल सम्राट थे जिन्होंने ९८५ से १०१४ तक राज किया। उनके शासन में चोलों ने दक्षिण में श्रीलंका तथा उत्तर में कलिंग तक साम्राज्य फैलाया। राजराज चोल ने कई नौसैन्य अभियान भी चलाये, जिसके फलस्वरूप मालाब ...

राष्ट्रकूट राजवंश

इनका शासनकाल लगभग छठी से तेरहवीं शताब्दी के मध्य था। इस काल में उन्होंने परस्पर घनिष्ठ परन्तु स्वतंत्र जातियों के रूप में राज्य किया, उनके ज्ञात प्राचीनतम शिलालेखों में सातवीं शताब्दी का राष्ट्रकूट ताम्रपत्र मुक्य है, जिसमे उल्लिखित है की, मालवा ...

सातवाहन

सातवाहन प्राचीन भारत का एक राजवंश था। इसने ईसापूर्व २३० से लेकर दूसरी सदी तक केन्द्रीय दक्षिण भारत पर राज किया। यह मौर्य वंश के पतन के बाद शक्तिशाली हुआ था। इनका उल्लेख ८वीं सदी ईसापूर्व में मिलता है। अशोक की मृत्यु के बाद सातवाहनों ने खुद को स्व ...

पानीपत का प्रथम युद्ध

पानीपत का पहला युद्ध, उत्तरी भारत में लड़ा गया था और इसने इस इलाके में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी। यह उन पहली लड़ाइयों में से एक थी जिसमें बारूद, आग्नेयास्त्रों और मैदानी तोपखाने को लड़ाई में शामिल किया गया था। सन् 1526 में, काबुल के तैमूरी शासक ...

पानीपत के युद्ध

पानीपत में तीन ऐतिहासिक लड़ाईयां हुईं - पहली लड़ाई - 21 अप्रैल 1526 बाबर एवं इब्राहिम लोदी के मध्य, बाबर विजयी पानीपत का प्रथम युद्ध दूसरी लड़ाई - 5 नवंबर1556 बैरम ख़ाँअकबर का सेनापति के मध्य, अकबर के सेनापति विजयी अकबर नाबालिग को हिंदुस्तान का ब ...

इला

इला ऋग्वेद में अन्न की अधिष्ठातृ मानी गई हैं, यद्यपि सायण के अनुसार उन्हें पृथिवी की अधिष्ठातृ मानना अधिक उपयुक्त है। वैदिक वाङमय में इला को मनु को मार्ग दिखलानेवाली एवं पृथिवी पर यज्ञ का विधिवत् नियमन करनेवाली कहा गया है। इला के नाम पर ही जंबूद् ...

अंगदेश

अंगदेश पहले राजा जरासंध का दास था क्योकि अंग का कोई राजा नही था। जब दुर्योधन ने कर्ण को राजा बनाया तो लोग कहने लगे कि अंगदेश का राजा बनना मतलब मृत्यु के मुख में जाना है। कर्ण अंगदेश गया व यह जाना कि लोग इसलिए यह कहे है क्योकि अंगदेश को जरासंध का ...

अम्बष्ठ

संस्कृत और पालि साहित्य में अंबष्ठ जाति तथा अम्बष्ठ देश का उल्लेख अनेक स्थलों पर मिलता है। इनके अतिरिक्त सिकन्दर के इतिहास से संबंधित कतिपय ग्रीक और रोमन लेखकों की रचनाओं में भी अंबष्ठ जाति का वर्णन हुआ है। दिओदोरस, कुर्तियस, जुस्तिन तथा तालेमी न ...

अहिच्छत्र

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के आँवला स्टेशन से कोई १० किमी उत्तर प्राचीन अहिच्छत्र के अवशेष आज भी वर्तमान हैं। इनमें कोई तीन मील के त्रिकाणाकार घेरे में ईटों की किलेबंदी के भीतर बहुत से ऊँचे-ऊँचे टीले हैं। सबसे ऊँचा टीला ७५ फुट का है। कर्निघम ने स ...

आभीर

वेदों के अनुसार, अभीर या अभीरा प्राचीन भारतीय महाकाव्यों और धर्मग्रंथों में वर्णित एक जनजाति थी।संक्षेप में, वह जो सभी ओर से भय को दूकर सकता है, आभीर कहलाता है। प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश के अनुसार अहिर, अहीर व अभीर समानार्थी शब्द हैं। हिन्दी क्षेत्र ...

इन्द्रायुध

इंद्रायुध, वज्रायुद्ध का उत्तराधिकारी था इन्द्रायुद्ध आयुद्ध वंश का एक राजा था। जिसका संस्थापक वज्रायुद्ध था वह कन्नौज में हर्ष और यशोवर्मन् के बाद आयुधकुल का राजा बना। जैन हरिवंश से प्रमाणित है कि इंद्रायुध ७८३-८४ ई. में राज करता था। संभवत: उसी ...

ईशानवर्मन

ईशानवर्मन् कन्नौज का मौखरी राजा था। उसके पहले के तीन राजा अधिकतर उत्तरयुगीन मगध गुप्तों के सामंत रहे थे। ईशानवर्मन् ने उत्तर गुप्तों का आधिपत्य कन्नौज से हटाकर अपनी स्वतंत्रता घोषित की। उसकी प्रशस्ति में लिखा है कि उसने आंध्रों को परास्त किया और ...

उदायिभद्र

उदायिभद्र मगध महाजनपद के शक्तिशाली राजा अजातशत्रु का पुत्और उत्तराधिकारी। उसका उल्लेख उदायिन्, उदायी अथवा उदयिन और उदयभद्र जैसे कई नामों से मिलता है। बौद्ध अनुश्रुति के अनुसार उदायिभद्र अपने पिता अजातशत्रु की ही तरह स्वयं भी पितृघाती था और पिता क ...

कर्ष

कर्ष या कार्षापण एक प्राचीन भारतीय सिक्का था। जातक, पाणिनि के व्याकरण, तथा चाणक्य के अर्थशास्त्र में रजत और ताम्र के सिक्कों को कार्षार्पण कहा गया है। मनु तथा याज्ञवल्क्य के अनुसार ताम्र कार्षापण ८० गुंजे या रत्ती के बराबर भार वाला होता था।

काच (राजा)

काच सम्भवतः कोई गुप्त वंध का शासक था जिसका नाम भारत में प्राप्त कुछ स्वर्णमुद्रओं पर खुदा मिलता है। इन मुद्राओं पर सामने बाएँ हाथ में चक्रध्वज लिए खड़े राजा की आकृति मिलती है। उसके बाएँ हाथ के नीचे गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि में राजा का नाम काच लिख ...

कृष्णगुप्त

कृष्णगुप्त छठीं सातवीं शती ई. में मगध पर शासन करनेवाले उत्तरवर्ती गुप्तवंश के संस्थापक। इनका उल्लेख अपसढ़ और देव बर्नारक से मिले अभिलेखों में हुआ है। कुछ इतिहासकारों की धारणा है कि ये चंद्रगुप्त के ज्येष्ठ पुत्र थे जिनका उललेख वैशाली से प्राप्त म ...

केक‍य

केकय केकय जिसे कैकेय, कैकस या कैकेयस नाम से भी जाना जाता है एक प्राचीन राज्य था, जो अविभाजित पंजाब से उत्तर पश्चिम दिशा में गांधा और व्यास नदी के बसा था। यहां के अधिकांश निवासी केकय जनपद के क्षत्रीय थे।

क्षुद्रक

क्षुद्रक प्राचीन भारत का एक गणराज्य जो सिकन्दर के आक्रमण के विरुद्ध लड़ा था। यह दक्षिण पंजाब में व्यास नदी के किनारे मालवगण के पूर्वभाग में बसा हुआ था। अपने पड़ोस में रहनेवाले मालव लोगों से इनका प्राचीनकाल से वैर था। अपने देश वापस जानेवाले सिकन्द ...

खारवेल

खारवेल कलिंग में राज करने वाले महामेघवाहन वंश का तृतीय एवं सबसे महान तथा प्रख्यात सम्राट था। खारवेल के बारे में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी हाथीगुम्फा में चट्टान पर खुदी हुई सत्रह पंक्तियों वाला प्रसिद्ध शिलालेख है। हाथीगुम्फा, भुवनेश्वर के निकट उदयग ...

गनफ़ाउन्ड्री

गनफ़ाउन्ड्री जिसे तोप का साँचा भी कहा जाता है, तोपों के गोलों की फ़ैक्ट्री के रूप में 1786 में निर्मित हुई थी। इसकी स्थापना हैदराबाद के द्वीतीय निज़ाम नवाब मीर नाज़िम अली ख़ान ने फ़तेह मैदान के निकट किया था। वर्तमान रूप से आलिया बॉयज़ हाई स्कूल इ ...

गिरिव्रज

गिरिव्रज महाभारतकाल और बिंबिसार तक के परवर्ती काल की मगध की राजधानी थी। समझा जाता है कि यह आधुनिक राजगिर से दस किलोमीटर पूर्व और गया से प्राय: ५० किमी पूर्व-उत्तर पंचना नदी के तीर स्थित था। बार्हद्रथ राजकुल की राजधानी होने के कारण महाभारत के अनुस ...

घटोत्कच गुप्त

घटोत्कचगुप्त गुप्तवंश का दूसरा राजा और उस वंश के प्रथम शासक श्रीगुप्त का पुत्र था। स्वयं तो वह केवल महाराज अर्थात् सामंत मात्र था, किंतु उसका पुत्र चंद्रगुप्त प्रथम वंश का प्रथम सम्राट् हुआ।

चम्पापुरी

चंपा प्राचीन अंग की राजधानी, जो गंगा और चंपा के संगम पर बसी थी। प्राचीन काल में इस नगर के कई नाम थे- चंपानगर, चंपावती, चंपापुरी, चंपा और चंपामालिनी। पहले यह नगर मालिनी के नाम से प्रसिद्ध था किंतु बाद में लेमपाद के प्राचीन राजा चंप के नाम पर इसका ...

चेदि राज्य

चेदि आर्यों का एक अति प्राचीन वंश है। ऋग्वेद की एक दानस्तुति में इनके एक अत्यंत शक्तिशाली नरेश कशु का उल्लेख है। ऋग्वेदकाल में ये संभवत: यमुना और विंध्य के बीच बसे हुए थे। पुराणों में वर्णित परंपरागत इतिहास के अनुसार यादवों के नरेश विदर्भ के तीन ...

जलौक

जलौक कश्मीर का शासक था। उसका उल्लेख राजतरंगिणी में हुआ है। जलौक की पहचान के विषय में मतैक्य नहीं है। जलौक, शायद कोई कुषाण शासक हो जिसका नाम गलत रूप में प्रयुक्त् होता आया हो। किन्तु वर्तमान स्थिति में जलौक के विषय में निश्चयपूर्वक कुछ नहीं कहा जा ...

तक्षशिला

तक्षशिला प्राचीन भारत में गांधार देश की राजधानी और शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। यहाँ का विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में शामिल है। यह हिन्दू एवं बौद्ध दोनों के लिये महत्व का केन्द्र था। चाणक्य यहाँ पर आचार्य थे। ४०५ ई में फाह् ...

तमलुक

तमलुक भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के पूर्वी मेदिनापुर जनपद का मुख्यालय है। विद्वानों का विचार है कि तमलुक ही प्राचीन ताम्रलिप्त है जो प्राचीन भारत में एक प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र था। यह नगर बंगाल की खाड़ी से सटे हुए रूपनारायण नदी के किनारे स्थित ...

दामोदरगुप्त

दामोदरगुप्त परवर्ती गुप्तवंश का पंचम शासक था। उसके वंश का कुछ वृत्त अपसड के अभिलेख से ज्ञात होता है, जहाँ उसकी भी थोड़ी चर्चा मिलती है। अधिकांश विद्वान् यह मानते हैं कि परवर्ती गुप्तों का मूलस्थान पूर्वी मालवा था, किंतु कुछ लेखकों के मत में वे वा ...

देवगुप्त

देवगुप्त प्राचीन भारत में तीसरी सदी से पाँचवी सदी तक मगध के शासन थे। इस वंश के परवर्ती गुप्त नरेशों ने भी उत्तरी भारत में शासन किया। यद्यपि देवगुप्त तथा इन अन्य राजाओं के नामों के अंत में गुप्त शब्द जुड़ा है तथापि यह सिद्ध करना कठिन है कि अनुवर्त ...

नहपान

नहपान प्राचीन भारत के क्षहरातवंश का प्रतापी राजा था। इसके शासनकाल का निर्धारण विवादास्पद है। इसके सिक्कों पर कोई तिथि अंकित नहीं है। कुछ अभिलेखों से ऐसा ज्ञात होता है कि इसने किसी अज्ञात संवत् के इकतालीसवें और छियालीसवें वर्ष में शासन किया। डुब्र ...

पश्चिमी क्षत्रप

भारतवर्ष में शकों के जो राज्य स्थापित हुए उनमें भी क्षत्रपीय राज्यव्यवस्था थी। भारतीय क्षत्रपों के तीन प्रमुख वंश और एक राजवंश था- १ कपिशा, पुष्पपुऔर अभिसार के क्षत्रप, २ पश्चिमी पंजाब के क्षत्रप, ३ मथुरा के क्षत्रप और ४ उज्जैन के क्षत्रप।

पुरुगुप्त

पुरुगुप्त गुप्त वंश का एक सम्राट था जो उत्तर भारत में शासन करता था। ये गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम का अपनी सम्राज्ञी अनन्तदेवी से उत्पन्न पुत्र था। यह अपने सौतेले भ्राता स्कन्दगुप्त का उत्तराधिकारी बना। पुरुगुप्त के अभी तक कोई शिलालेख, प्रशस्ति ...

प्रद्योत वंश

प्रद्योत वंश प्राचीन भारत का एक राजवंश था जिसका शासन अवन्ति पर था। इसके संस्थापक प्रद्योत थे जो सुनीक के पुत्र थे। प्रद्योत म्लेच्छों से अपने पिता का प्रतिशोध लेने के लिये म्लेच्छयज्ञ करने के कारण म्लेच्छहंता कहलाए।

भारतीय साहित्य में कम्बोज

कम्बोजों का उल्लेख भारत के अनेकों संस्कृत एवं पालि ग्रन्थों में हुआ है, जैसे सामवेद, अथर्ववेद, रामायण, महाभारत, पुराण, कौटिल्य अर्थशास्त्र, निरुक्त, जातक कथाओं, जैन आगमों, प्राचीन व्याकरण ग्रन्थों, एवं नाटकों में।

मद्र

यह महाभारत कालीन एक शक्तिशाली जनपद था। राजा शल्य इसके शासक थे। पांडवों की माँ और शल्य की बहन माद्री का नाम इसी जनपद के नाम पर पड़ा। उपनिषदकालीन अश्वपति मद्र का राजा था

महापद्म नन्द

महापद्म नद नन्द वंश का प्रथम सम्राट था। पुराणों तथा विशाखदत्त के मुद्राराक्षस के अनुसार वह एक शिशुनाग वंशी क्षत्रिय महामंदी का पुत्र था। पुराणों में इसे महापद्म तथा महाबोधिवंश में उग्रसेन कहा गया है । उसे महापद्म एकरात, सर्व क्षत्रान्तक आदि उपाधि ...

महामेघवाहन वंश

भुवनेश्वर के समीप उदयगिरि पहाड़ी पर हाथीगुंफा के अभिलेख से कलिंग में एक चेति राजवंश का इतिहास ज्ञात होता है। यह वंश अपने को प्राचीन चेदि नरेश वसु की संतति कहता है। कलिंग में इस वंश की स्थापना संभवत: महामेघवाहन ने की थी जिसके नाम पर इस वंश के नरेश ...

मालवगण

मालवगण प्राचीन भारत की एक जातिविशेष का संघ। महाभारत में मालवों के उल्लेख मिलते है। अपनी पड़ोसी जाति क्षुद्रकों की तरह मालव के उल्लेख मिलते हैं। अपनी पड़ोसी जाति क्षुद्रकों की तरह मालव भी महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। वे पंजाब में निव ...

माहिष्मती

माहिष्मती प्राचीन भारत की एक नगरी थी जिसका उल्लेख महाभारत तथा दीर्घनिकाय सहित अनेक ग्रन्थों में हुआ है। अवन्ति महाजनपद के दक्षिणी भाग में यह सबसे महत्वपूर्ण नगरी थी। बाद में यह अनूप महाजनपद की राजधानी भी रही। यह नगरी वर्तमान समय के मध्य प्रदेश मे ...

मौर्य राजवंश

मौर्य राजवंश प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं महान क्षत्रिय राजवंश था।। मौर्य राजवंश ने १३७ वर्ष भारत में राज्य किया। इसकी स्थापना का श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मन्त्री कौटिल्य को दिया जाता है, यह साम्राज्य पूर्व में मगध राज्य में गंगा नदी क ...