ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 423

अबुल फजल

परिचय – अबुल फजल का पूरा नाम अबुल फजल इब्न मुबारक था। इसका संबंध अरब के हिजाजी परिवार से था। इसका जन्म 14 जनवरी 1551 में हुआ था। इसके पिता का नाम शेक मुबारक था। अबुल फजल ने अकबरनामा एवं आइने अकबरी जैसे प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की। प्रारंभिक जीवन – ...

अविनाशचन्द्र दास

अविनाशचन्द्र दास भारत के एक इतिहासकार थे। उनकी कृति रिग्वेदिक इन्डिया प्रसिद्ध है। इसमें उन्होने सप्तसैन्धव प्रदेश को आर्यों का मूल निवास माना है।

कदंबी मिनाक्षी

कदंबी मिनाक्षी पल्लव इतिहास पर एक भारतीय इतिहासकाऔर विशेषज्ञ थी। वह मद्रास विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं। मिनाक्षी का जन्म १२ सितंबर १९०५ को मद्रास में हुआ था। मिनाक्षी को प्रारंभिक वर्षों से इतिहास में रुच ...

काशीप्रसाद जायसवाल

काशीप्रसाद जायसवाल, भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार, पुरातत्व के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के विद्वान् एवं हिन्दी साहित्यकार थे।

किशोरी शरण लाल

History of the Khaljis 1950, 1967, 1980 Muslim Slave System in Medieval India 1994 Growth of Muslim Population in Medieval India 1973 Early Muslims in India 1984 The Mughal Harem 1988 Theory and Practice of Muslim State in India 1999 Studies in A ...

गोपीनाथ शर्मा

डॉ गोपीनाथ शर्मा राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार हैं। आपने इतिहास से सम्बधित 25 ग्रंथों की रचना की। महाराणा फतहसिंह के `बहिडे’ नामक पुस्तकों का सम्पादन किया। 100 से अधिक लेख भारत की प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में छपे। संसार के बड़े-बड़े विद्वानों ने ...

गोविंद सखाराम सरदेसाई

गोविन्द सखाराम सरदेसाई का मराठों के अर्वाचीन इतिहासकारों में अग्रगण्य स्थान है। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन १९५७ में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

जयचन्द विद्यालंकार

जयचन्द विद्यालंकार भारत के महान इतिहासकार एवं लेखक थे। वे स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती, गौरीशंकर हीराचन्द ओझा और काशीप्रसाद जायसवाल के शिष्य थे। उन्होने ‘भारतीय इतिहास परिषद’ नामक संस्था खड़ी की थी। उनका उद्देश्य भारतीय दृष्टि से समस्त अध्ययन को आय ...

ताराचन्द

डॉक्टर ताराचंद भारत के पुरातत्त्वविद तथा इतिहासकार थे। वे भारत के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति के विशेषज्ञ थे। उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाया था। १९४० के दशक में वे इस विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे थे।उन्होंने इन्फ्लूएंस आफ इस्लाम आन इं ...

दिनेशचंद्र सरकार

दिनेशचन्द्र सरकार ने ४० से अधिक ग्रन्थों की रचना की जो बांग्ला और अंग्रेजी में हैं। उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकें ये हैं- Journal of Ancient Indian History Ed. Select Inscriptions Bearing on Indian History and Civilisation दो भागों में Some Epigraphic ...

दीपक कुमार (इतिहासकार)

दीपक कुमार भारत के एक इतिहासकार हैं। सम्प्रति वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नयी दिल्ली में विज्ञान एवं शिक्षा के इतिहास के प्राध्यापक हैं। अपनी रचनाओं में दीपक कुमार ने यह प्रदर्शित किया है कि यूरोप की वैज्ञानिक उन्नति के पीछे अंग्रेजों द्वारा ...

नीहाररंजन राय

नीहाररंजन राय भारत के एक इतिहाकार थे। वे कला एवं बौद्ध धर्म सम्बन्धी इतिहासलेखन के लिए प्रसिद्ध हैं। इनके द्वारा रचित एक रवीन्द्रनाथ का अध्ययन एन आर्टिस्ट इन लाइफ़ के लिये उन्हें सन् 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रेम चौधरी

प्रेम चौधरी एक भारतीय सामाजिक वैज्ञानिका, इतिहासकार, और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली में वरिष्ठ शैक्षणिक फेलो हैं। She is a feminist वह एक नारीवादी है और शादीशुदा विवाह से इनकार करते हुए जोड़ों के खिलाफ हिंसा की आलोचक करती है। वह लैं ...

बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे

बलवंत मोरेश्वर पुरन्दरे उपाख्य बाबासाहेब पुरंदरे मराठी साहित्यकार, नाटककार तथा इतिहास लेखक हैं। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राज्य के सर्वोच्च सम्मान महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित किया है। वे शिवाजी से सम्बन्धित इतिहास शोध के लिये प्रसिद्ध हैं। प्रसि ...

भगवानलाल इन्द्रजी

भगवानलाल इन्द्रजी प्रख्यात भारतविद्याविशारद, पुरातत्ववेत्ता तथा प्राचीन भारतीय इतिहास के अनुसंधानकर्ता थे। वे ग्रेटब्रिटेन तथा आयरलैण्ड की शाही एशियाई सोसायटी की मुम्बई शाखा के सदस्य थे। उन्होने हाथीगुम्फा शिलालेख सहित अनेकों प्राचीन भारतीय शिलाल ...

भारतीय इतिहासकार

भारतीय इतिहासकारों में प्रमुख है प्रो ओम प्रकाश कुमार गौरीशंकर हीराचंद ओझा, विश्वनाथ काशिनाथ राजवाडे, यदुनाथ सरकार, रमेशचन्द्र मजुमदार‎, रामशरण शर्मा, बिपिन चन्द्र, रोमिला थापर, दामोदर धर्मानंद कोसंबी, राधाकुमुद मुखर्जी, सुमित सरकार, इरफान हबीब, ...

मुहता नैणसी

मुहता नैणसी महाराजा जसवन्त सिंह के राज्यकाल में मारवाड़ के दीवान थे। वे भारत के उन क्षेत्रों का अध्यन करने के लिये प्रसिद्ध हैं जो वर्तमान में राजस्थान कहलाता है। मारवाड़ रा परगना री विगत तथा नैणसी री ख्यात उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।

रमेशचन्द्र मजुमदार

अध्यापक रमेशचन्द्र मजुमदार भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार थे। वे प्रायः आर सी मजुमदार नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। उन्होने ने प्राचीन भारत के इतिहास पर बहुत कार्य किया। उन्होने भारत की स्वाधीनता के इतिहास पर भी बहुत कुछ लिखा है। उन्होने कहा था कि 1857 क ...

रामकृष्ण गोपाल भांडारकर

रामकृष्ण गोपाल भांडारकर भारत के विद्वान, पूर्वात्य इतिहासकार एवं समाजसुधारक थे। वे भारत के पहले आधुनिक स्वदेशी इतिहासकार थे। दादाभाई नौरोज़ी के शुरुआती शिष्यों में प्रमुख भण्डारकर ने पाश्चात्य चिंतकों के आभामण्डल से अप्रभावित रहते हुए अपनी ऐतिहास ...

विश्वनाथ काशिनाथ राजवाडे

विश्वनाथ काशिनाथ राजवाडे भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार, विद्वान, लेखक तथा वक्ता थे। वे इतिहासाचार्य राजवाडे के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। वह संस्कृत भाषा और व्याकरण के भी प्रकांड पंडित थे, जिसका प्रमाण उनकी सुप्रसिद्ध कृतियाँ राजवाडे धातुकोश तथा संस् ...

वी आर रामचन्द्र दीक्षितार

विशनमपेट आर रामचन्द्र दीक्षितार भारत के एक इतिहासकार एवं भारतविद थे। वे मद्रास विश्वविद्यालय में इतिहास एवं पुरातत्व के प्रोफेसर थे। उन्होने भारतीय इतिहास से सम्बन्धित अनेक ग्रन्थों की रचना की।

सत्यकेतु विद्यालंकार

सत्यकेतु विद्यालंकार ने ५० से अधिक पुस्तकों की रचना की, उनमें से कुछ नीचे दी गयीं हैं- यूरोप का आधुनिक इतिहास, 1789 से 1949 तक १९५० सेनानी पुष्यमित्र प्राचीन भारतीय इतिहास का वैदिक युग आर्यसमाज का इतिहास नागरिकशास्त्र के सिद्धान्त प्राचीन भारत का ...

ईसरलाट

अठारहवीं सदी में निर्मित जयपुर शहर में त्रिपोलिया बाज़ार में दिखलाई देने वाली पुराने शहर की सबसे ऊंची मीनार ईसरलाट उर्फ़ सरगासूली जिसका का निर्माण महाराजा ईश्वरी सिंह ने जयपुर के गृहयुद्धों में अपनी तीन विजयों की स्मृति में करवाया था।

जयगढ़ दुर्ग

जयगढ़ दुर्ग भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर में अरावली पर्वतमाला में चील का टीला पर आमेर दुर्ग एवं मावता झील के ऊपरी ओर बना किला है। इस दुर्ग का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह ने १६६७ ई. में आमेर दुर्ग एवं महल परिसर की सुरक्षा हेतु कर ...

सिटी पैलेस, जयपुर

सिटी पैलेस जयपुर में स्थित राजस्थानी व मुगल शैलियों की मिश्रित रचना एक पूर्व शाही निवास जो पुराने शहर के बीचोंबीच है। भूरे संगमरमर के स्तंभों पर टिके नक्काशीदार मेहराब, सोने व रंगीन पत्थरों की फूलों वाली आकृतियों ले अलंकृत है। संगमरमर के दो नक्का ...

क्राइस्ट द रिडीमर (प्रतिमा)

क्राइस्ट द रिडीमर ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में स्थापित ईसा मसीह की एक प्रतिमा है जिसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आर्ट डेको स्टैच्यू माना जाता है। यह प्रतिमा अपने 9.5 मीटर आधार सहित 39.6 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी है। इसका वजन 635 टन है और तिजुका ...

माचू पिच्चू

माचू पिच्चू दक्षिण अमेरिकी देश पेरू मे स्थित एक कोलम्बस-पूर्व युग, इंका सभ्यता से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है। यह समुद्र तल से 2.430 मीटर की ऊँचाई पर उरुबाम्बा घाटी, जिसमे से उरुबाम्बा नदी बहती है, के ऊपर एक पहाड़ पर स्थित है। यह कुज़्को से 80 किलोम ...

टावर ऑफ़ लण्डन

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के मध्य में टेम्स नदी के किनारे बने इस भव्य क़िले का निर्माण सन् 1078 में विलियम ने कराया था। इसके निर्माण में लगे पत्थर फ़्रांस से मंगागए थे। इसके परिसर में कई इमारतें हैं। एक समय यह ब्रिटेन का शाही महल था। इसी परिसर में ...

काराशहर

काराशहर या यान्ची, जिसे संस्कृत में अग्नि या अग्निदेश कहते थे, रेशम मार्ग पर स्थित एक प्राचीन शहर है। यह मध्य एशिया में जनवादी गणतंत्र चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रान्त के बायिनग़ोलिन मंगोल स्वशासित विभाग के यान्ची हुई स्वशासित ज़िले में स्थ ...

कूचा राज्य

कूचा या कूचे या कूचार या कूचीन मध्य एशिया की तारिम द्रोणी में तकलामकान रेगिस्तान के उत्तरी छोपर और मुज़ात नदी से दक्षिण में स्थित एक प्राचीन राज्य का नाम था जो ९वीं शताब्दी ईसवी तक चला। यह तुषारी लोगों का राज्य था जो बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और ह ...

ख़ीवा

खीवा मध्य एशिया के उज़बेकिस्तान देश के ख़ोरज़्म प्रान्त में स्थित एक ऐतिहासिक महत्व का शहर है। इस क्षेत्र में हजारों वर्षों से लोग बसते आये हैं लेकिन यह शहर तब मशहूर हुआ जब यह ख़्वारेज़्म और ख़ीवा ख़ानत की राजधानी बना।

ताशक़ुरग़ान​

ताशक़ुरग़ान​ मध्य एशिया में चीन द्वारा नियंत्रित शिनजियांग प्रान्त के ताशक़ुरग़ान​ ताजिक स्वशासित ज़िले की राजधानी है। पाकिस्तान से पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र से आने वाले काराकोरम राजमार्ग पर यह पहला महत्वपूर्ण चीनी पड़ाव है। ...

दूनहुआंग

दूनहुआंग पश्चिमी चीन के गांसू प्रान्त में एक शहर है जो ऐतिहासिक रूप से रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। इसकी आबादी सन् २००० में १,८७,५७८ अनुमानित की गई थी। रेत के टीलों से घिरे इस रेगिस्तानी इलाक़े में दूनहुआंग एक नख़लिस्तान है, जिस ...

मर्व

मर्व मध्य एशिया में ऐतिहासिक रेशम मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण नख़लिस्तान में स्थित शहर था। यह तुर्कमेनिस्तान के आधुनिक मरी नगर के पास था। भौगोलिक दृष्टि से यह काराकुम रेगिस्तान में मुरग़ाब नदी के किनारे स्थित है। कुछ स्रोतों के अनुसार १२वीं शताब ...

मोगाओ गुफ़ाएँ

मोगाओ गुफाएँ, जिन्हें हज़ार बुद्धों की गुफाएँ भी कहते हैं, पश्चिमी चीन के गान्सू प्रांत के दूनहुआंग शहर से २५ किमी दक्षिणपूर्व में स्थित एक पुरातत्व स्थल है। रेशम मार्ग पर स्थित इस नख़्लिस्तान क्षेत्र में ४९२ मंदिरों का एक मंडल है। इनमें १००० वर् ...

हेशी गलियारा

हेशी गलियारा या गांसू गलियारा आधुनिक चीन के गांसू प्रांत में स्थित एक ऐतिहासिक मार्ग है जो उत्तरी रेशम मार्ग में उत्तरी चीन को तारिम द्रोणी और मध्य एशिया से जोड़ता था। इस मार्ग के दक्षिण में बहुत ऊँचा और वीरान तिब्बत का पठार है और इसके उत्तर में ...

मध्ययुग

रोमन साम्राज्य के पतन के उपरांत, पाश्चात्य सभ्यता एक हजार वर्षों के लिये उस युग में प्रविष्ट हुई, जो साधारणतया मध्ययुग के नाम से विख्यात है। ऐतिहासिक रीति से यह कहना कठिन है कि किस किस काल अथवा घटना से इस युग का प्रारंभ और अंत होता है। मोटे तौर स ...

भारत में लौह युग

भारतीय उपमहाद्वीप की प्रागितिहास में, लौह युग गत हड़प्पा संस्कृति के उत्तरगामी काल कहलाता है। वर्तमान में उत्तरी भारत के मुख्य लौह युग की पुरातात्विक संस्कृतियां, गेरूए रंग के मिट्टी के बर्तनों की संस्कृति और उत्तरी काले रंग के तराशे बर्तन की संस ...

छप्पर चीरी

छप्पर चीरी, भारत के पंजाब राज्य के साहिबजादा अजित सिंह नगर जिले में स्थित एक छोटा सा गाँव है। यह गाँव छप्पर चीरी के युद्ध के लिए प्रसिद्ध है। इस युद्ध का स्मारक फतिह बुर्ज जो भारत का सबसे ऊँचा विजय स्तम्भ है।

दैमाबाद

दैमाबाद गोदावरी नदी की सहायक प्रवरा नदी के तट पर स्थित एक निर्जन गाँव तथा पुरातत्व स्थल है, जो कि भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर ज़िले में है। यह स्थान बी॰ पी॰ बोपर्दिकर द्वारा खोजा गया था। इस स्थान की भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा तीन ...

हुसैनीवाला

हुसैनीवाला भारतीय पंजाब के फिरोजपुर जिले का एक गाँव है। यह पाकिस्तान की सीमा के निकट सतलज नदी के किनारे स्थित है। इसके सामने नदी के दूसरे किनारे पर पाकिस्तान का गेन्दा सिंह वाला नामक गाँव है। इसी गाँव में २३ मार्च १९३१ को शहीद भगत सिंह, राजगुरु औ ...

जुनापाणी के शिलावर्त

जुनापाणी के शिलावर्त भारत के महाराष्ट्र राज्य के नागपुर नगर के पास स्थित जुनापाणी शहर में महापाषाण शिलावर्त हैं जो यहाँ प्रागैतिहासिक काल में बनागए थे। यहाँ पत्थरों के ऐसे ३०० चक्र मिले हैं। सन् १८७९ में इतिहासकार जे॰ ऍच॰ रिवॅट-कारनैक ने यहाँ खुद ...

स्टोनहॅन्ज

स्टोनहॅन्ज ब्रिटेन की विल्टशायर काउंटी में स्थित एक प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक स्थापत्य है। यह एक महापाषाण शिलावर्त है। इसमें ७ मीटर से भी ऊँची शिलाओं को धरती में गाड़कर खड़ा करके एक चक्र बनाया गया था। इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि इसका निर्माण पाषाण ...

ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाह देव

ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाह नेपाल के राजा है। वे २ बार राजा बन चुके है। नारायणहिटी काण्ड के बाद मे दुसरे बार राजा बन्ने के बाद उन्हौंने देश की सार्वभौमसत्ता जनता से लेकर शासन करने लगे। जनता के विरोध और नेपाली जनआन्दोलन २ के पश्चात उन्हे जनता को दे ...

त्रिभुवन नेपाल

नेपाल के त्रिभुवन त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह 11 दिसंबर सन 1911 से उनकी मृत्यु तक नेपाल के राजा थे। इनका जन्म काठमांडू में हुआ था जो की वर्तमान में नेपाल की राजधानी है। 5 वर्ष की अल्प आयु में ही अपने पिता पृथ्वी वीर विक्रम शाह की मृत्यु के पश्चात राज ...

नरभूपाल शाह

नरभूपाल शाह नेपाल के गोरखा राज्य के राजा थे। नेपाल के प्रसिद्ध राजा पृथ्वीनारायण शाह उनके ही पुत्र थे। नर भूपाल शाह बीरभद्र शाह के पुत्और पृथ्विपति शाह के पौत्र थे।

नेपाल के मल्ल राजाओं की सूची

मल्ल वंश ने १२वीं से १८वीं शताब्दी तक नेपाल की नेपालमण्डल पर शासन किया। उस समय केवल इसी क्षेत्र को नेपाल मण्डल कहते थे और इसके निवासियों को नेपामि कहते थे। १५वीं शताब्दी के अन्तिम समय में काठमाण्डू उपत्यका को तीन भागों में विभक्त कर दिया गया: भक् ...

प्रताप मल्ल

प्रताप मल्ल, नेपाल के मल्ल राजवंश के राजा थे। वे कान्तिपुर के ९वें राजा थे और १६४१ से १६७४ ई॰ तक शासन किया। उन्होने ललितपुऔर भक्तपुर को जीतने तथा काठमांडू उपत्यका के एकीकरण का प्रयत्न किया था किन्तु असफल रहे।

मल्ल राजवंश

मल्ल वंश तथा सिहतवार के शासकों ने १२वीं शताब्दी से १८वीं शताब्दी तक नेपाल में शासन किया। मल्ल तथा साइंथवार क्षत्रिय राजवंश है। संस्कृत में मल्ल शब्द का अर्थ योद्धा होता है। मल्ल वं श का शासन लगभग १२०० ई के आसपास काठमांडू उपत्यका में आरम्भ हुआ। उन ...

सिद्धिनरसिंह मल्ल

सिद्धिनरसिंह मल्ल नेपाल के मल्ल राजवंश के प्रसिद्ध राजा थे। वे हरिहरसिंह मल्ल के पुत्र थे। वे गुण, बुद्धिमान एवं दयालुहृदय राजा थे। वे कवि भी थे। उन्होने अनेकों जलाशय, धर्मशालाएँ, मन्दिर, और मठों का निर्माण कराया। पाटन का प्रसिद्ध कृष्ण मन्दिर उन ...