ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 375

अलोयस यिरासेक

अलोयस यिरासेक चेक भाषा और इतिहास के अध्यापक थे। १९०९ में अपने सेवानिवृत्ति तक यिरासेक सेकेण्डरी स्कूल में अध्यापक थे। साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिये उन्हें 1918, 1919, 1921 और 1930 में नामांकित किया गया था।

करेल चपेक

करेल चपेक चेक लेखक एवं पत्रकार थे। उनका चेक साहित्य में गौरवपूर्ण स्थान है। उनकी सभी प्रमुख कृतियों के असंख्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद किगए थे। चपेक की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि उनकी लेखकीय प्रतिभा उद्भुत, अनोखी तथा अत्यंत गंभीर है। चपेक ...

विलहेम राब

विलहेम राब किताबों की एक दूकान में काम करते थे। बाद में बर्लिन विश्वविद्यालय में प्रवेश किया। पहली ही कृति डाय ख्राानिक डर स्पर्लिंग्सगार्स Die Chronik der Sperlingsgasse, १८५७ से सफलता मिल जाने के बाद विश्वविद्यायीय अध्ययन छोड़ पूरा समय लेखनकार् ...

स्वामी अछूतानन्द

स्वामी अछूतानन्द दलित चेतना प्रसारक साहित्यकार तथा समाजसुधारक थे। उनका मूल नाम हीरालाल था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में हुआ था। उन्होने आदि-हिन्दू आन्दोलन चलाया।

एम गुरुङ

नेपाली साहित्य के मूर्धन्य भारतीय कथाकाऔर निबंधकर। बिर्सिए को संस्कृति के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार। कहानी संग्रह तीस्ता ब्ग्छ संघे जस्तो से चर्चित। फिलहाल साहित्य अकादमी की कार्यकारिणी समिति के सदस्य और नेपाली सलहकर परिषद के सायोंजक।

केदार मान व्यथित

नेपाली भाषा के प्रतिष्ठित नेपाली कवि। नेपाली जन-जीवन की सामाजिक-सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों के प्राणनायक छायावादी काव्य-धारा के प्रखर स्तंभ। नेपाल की राजनीति में भी सक्रिय।

पारसमणि दङ्गाल

पारसमणि दंगाल सिक्किम के युवा पत्रकाऔर साहित्यकार है। इनका जन्म पूर्वी सिक्किम के पाण्डाम गाँव में 5 जुलाई 1982 में हुआ। पारसमणि दंगालले कलेज जीवन में ही पत्रकारिता शुरु की थी। वे सिक्किम लोकप्रिय नेपाली दैनिक समय दैनिक का सम्पादक रह चुके हैं। ने ...

भानुभक्त आचार्य

भानुभक्त आचार्य, नेपाल के कवि थे जिन्होने नेपालीमें रामायण की रचना की। उन्हें खस भाषा का आदिकवि माना जाता है। खस साहित्य के क्षेत्र में प्रथम महाकाव्य रामायण के रचनाकार भानुभक्त का उदय सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना है। पूर्व से पश्चिम तक नेपाल का कोई ...

भानुभक्तीय रामायण

भानुभक्तीय रामायण नेपाल के भक्त कवि भानुभक्त आचार्य द्वारा नेपाली भाषा में रचित रामायण है। पूर्व से पश्चिम तक नेपाल का कोई ऐसा गाँव अथवा कस्वा नहीं है जहाँ भानुभक्त रामायण की रामायण की पहुँच न हो। भानुभक्त कृत रामायण वस्तुत: नेपाल का रामचरित मानस ...

माधवप्रसाद घिमिरे

माधवप्रसाद घिमिरे नेपाली भाषा के कवि, साहित्यकार एवं गीतकार हैं। वे नेपाल के राष्ट्रकवि हैं। नवमंजरी, घामपानी, नयाँ नेपाल, किन्नर-किन्नरी आदि उनके प्रमुख कवितासंग्रह हैं।

सिद्धिचरण श्रेष्ठ

सिद्धिचरण श्रेष्ठ नेपाल के प्रमुख साहित्यकार थे। उन्होने अपने लेखन के द्वारा राणा शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। उनकी क्रांतिकामिनी कविता ने स्वतन्त्रता सेनानियों को जागृत किया जिसके लिए उन्हें १८ वर्ष के कारावास का दण्ड झेलना पड़ा। उन्होने नेपाल भ ...

अर्नेस्ट हेमिंग्वे

अर्नेस्ट हेमिंग्वे अमेरिकन उपन्यासकार तथा कहानीकार थे। 1954 ई० में साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता। अपने संघर्षपूर्ण जीवन के बहुविध अनुभवों का इन्होंने सफलतम सर्जनात्मक उपयोग किया तथा अनेक ऐसी रचनाएँ दीं जो आत्म-अनुभवजन्य होने का संकेत देती हुई ...

कार्ल एडाल्फ जेलेरप

कार्ल एडॉल्फ जेलेरप डेनमार्क के कवि और उपन्यासकार थे। 1917 ई० में हेनरिक पोंटोपिदां के साथ साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता।

ग्रेज़िया डेलेडा

ग्रेज़िया डेलेडा इटली की कथाकार, नाटककार एवं कवयित्री थी। 1926 ई० में साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता।

ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो

ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो फ़्रांसिसी उपन्यासकार हैं। उन्हें साल २००८ के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस साल १० दिसम्बर को स्टॉकहोम में होने वाले समारोह में उन्हें अन्य नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ सम्मानित किया जाएगा। १९० ...

जाकिन्तो बेनावेन्ते

जाकिन्तो बेनावेन्ते का जन्म 12 अगस्त, 1866 को स्पेन की राजधानी मेड्रिड में हुआ था। उनके पिता एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे। आरंभ में बेनावेन्ते ने कानून को अपना पेशा बनाना चाहा था और उसका कुछ अध्ययन भी किया था, किंतु बाद में लेखन और रंगमंच की ओर मुड़ ग ...

जोस इकेगारे

जोस इकेगारे एक स्पेनिश सिविल अभियंता, गणितज्ञ, राजनेता, और १९वीं सदी की अंतिम तिमाही के अग्रणी स्पैनिश नाटककारों में से एक थे। १९०४ में उन्हें साहित्य में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होने इस पुरस्कार को फ्रांसीसी लेखक फ्रेडेरिक मिस्ट्राल के सा ...

नट हैमसन

नट हैमसन का जन्म पूर्वी नार्वे के लोय नामक स्थान पर 4 अगस्त 1859 में हुआ था। इनका पूरा नाम नट पेडरसन हैमसन Knut Pedersen Hamsun; अन्य उच्चारण- नुत पेदरसन हामज़ुन था। इनके घराने में कारीगरी का काम हुआ करता था, जिन्हें भारतवर्ष में ठठेरा कहा जाता ह ...

पाब्लो नेरूदा

पाब्लो नेरूदा का जन्म मध्य चीली के एक छोटे-से शहर पराल में हुआ था। उनका मूल नाम नेफ्ताली रिकार्दो रेइस बासोल्ता था। वे स्वभाव से कवि थे और उनकी लिखी कविताओं के विभिन्न रंग दुनिया ने देखे हैं। एक ओर उन्होंने उन्मत्त प्रेम की कविताएँ लिखी हैं दूसरी ...

बॉब डिलन

बॉब डिलन एक अमेरिकी गीतकार, गायक, कलाकार, और लेखक है। वह अमेरिकी लोक संगीत के अलावा पॉप म्यूज़िक में भी काफी नाम कमा चुका है। बॉब 24 मई, 1941 को मिनेसोटा में पैदा हुआ था। उसका असली नाम रोबर्ट ऐलन ज़िमरमैन है। उसके दादा-दादी रूसी साम्रज्य अब यूक्र ...

माइगुएल एंजल आस्तुरियस

माइगुएल एंजल आस्तुरियस का जन्म ग्वाटेमाला में 19 अक्टूबर, 1899 ई० को हुआ था। उनका घर समृद्ध था। पिता मजिस्ट्रेट थे और माता स्कूल में अध्यापिका थी। उस समय तानाशाही के विरुद्ध आंदोलन का आरंभ हो चुका था और 1902 तथा 1903 ईस्वी में छात्रों ने भी विरोध ...

रोमां रोलां

रोमां रोलां नोबेल पुरस्कार से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक और नाटककार थे। उनका जन्म मध्य फ्रांस के एक गांव में हुआ था। उन्होंने पेरिस और रोम में शिक्षा पाई थी। वे सूरबन विश्वविद्यालय पेरिस में प्रोफेसर नियुक्त हुए। उन्होंने लिओ तालस्तोय, महात्मा गांधी ...

लुइजी पिरांडेलो

लुइजी पिरांडेलो का जन्म 28 जून, 1867 को सिसली में गिरीगेण्टी के निकटवर्ती एक गाँव में हुआ था। 19 वर्ष की अवस्था में वे रोम गये और 1891 तक वहीं पढ़ते रहे। 1891 ई० में वे जर्मनी गये और वहाँ के बाॅन विश्वविद्यालय से तत्वज्ञान की डिग्री प्राप्त की। ज ...

वर्नर हेइदेन्स्ताम

वर्नर हेइदेन्स्ताम का पूरा नाम कार्ल गुस्ताफ वर्नर वान हेइदेन्स्ताम Carl Gustaf Verner Van Heidenstam था। उनका जन्म 6 जुलाई, 1859 ई०को नार्क स्वीडन में हुआ था। बचपन में वे बड़े लज्जालु स्वभाव के और दुर्बल थे, किंतु पढ़ने-लिखने में उनका मन बहुत लग ...

व्लाडिस्लाव रेमांट

व्लाडिस्लाॅ स्टेनिस्लाॅ रेमाॅन्ट का जन्म 7 मई 1868 को हुआ था। उनका परिवार मध्यवित्त श्रेणी का था। उनके पिता एक चक्की के मालिक थे और कोबियाला वीलका जो उन दिनों रूसी पोलैंड में था में रहते थे। रेमाॅन्ट खेती और पशुपालन में घरवालों की सहायता भी करते ...

हेनरिक पोंटोपिदां

हेनरिक पोंटोपिदां का जन्म 24 जुलाई, 1857 ई० में जटलैंड के फ्रेडरिका नामक स्थान में हुआ था। उनके पितामह और पिता पादरी रह चुके थे। आरंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने कोपेनहेगेन में पॉलिटेक्निक स्कूल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

इराकी

फखरुद्दीन अल इराक़ी, हमादान में जन्मे एक फ़ारसी साहित्यकार थे। इराक़ी को लड़कों और पुरुषों की ख़ूबसूरती के लिए लिखी गए कविताओं के लिए जाना जाता है। इराक़ी अपनी किशोरावस्था में हमादान मे आए एक कलंदरिया दल में शामिल हो गए और कई जगहों पर फकीरों की त ...

उमर खय्याम

उमर खय्याम फ़ारसी साहित्यकार, गणितज्ञ एवं ज्योतिर्विद थे। इनका जन्म उत्तर-पूर्वी फ़ारस के निशाबुर में 18 सदी में एक ख़ेमा बनाने वाले परिवार में हुआ था। इन्होंने इस्लामी ज्योतिष को एक नई पहचान दी और इसके सुधारों के कारण सुल्तान मलिकशाह का पत्रा, ज ...

जलालुद्दीन रूमी

मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी फारसी साहित्य के महत्वपूर्ण लेखक थे जिन्होंने मसनवी में महत्वपूर्ण योगदान किया। इन्होंने सूफ़ी परंपरा में नर्तक साधुओ की परंपरा का संवर्धन किया। रूमी अफ़ग़ानिस्तान के मूल निवासी थे पर मध्य तुर्की के सल्जूक दरबार में ...

फ़िरिश्ता

फ़िरिश्ता या फ़ेरिश्ता, पूरा नाम मुहम्मद कासिम हिन्दू शाह, एक फारसी इतिहासकार था जिसका जन्म १५६० में हुआ था एवं मृत्यु १६२० में हुई थी।फ़िरिश्ता या फ़रिश्ता नाम फ़ारसी में खुदा का भेजा एक दूत होता है।

मुंशी सदासुखलाल

मुंशी सदासुखलाल हिन्दी लेखक थे। खड़ी बोली के प्रारंभिक गद्यलेखकों में उनका ऐतिहासिक महत्व है। फारसी एवं उर्दू के लेखक और कवि होते हुए भी इन्होंने तत्कालीन शिष्ट लोगों के व्यवहार की भाषा को अपने गद्य-लेखन-कार्य के लिए अपनाया। इस भाषा में संस्कृत क ...

रुदाकी

अब्दुल्ला जफ़र इब्न मुहम्म्द रुदाकी फारसी के सबसे प्रमुख कवियों में से एक हैं। इन्हें आधुनिक फ़ारसी भाषा के प्रवर्तक कवि के रूप में भी जाना जाता है। उस समय जब फ़ारस पर अरबों का अधिकार हो गया था और साहित्यिक जगत में अरबी का प्रभुत्व बढ़ गया था, रु ...

शेख़ सादी

शेख सादी, 13वीं शताब्दी का सुप्रसिद्ध साहित्यकार। ईरान के दक्षिणी प्रांत में स्थित शीराज नगर में 1185 या 1186 में पैदा हुआ था। उसकी प्रारंभिक शिक्षा शीराज़ में ही हुई। बाद में उच्च शिक्षा के लिए उसने बगदाद के निज़ामिया कालेज में प्रवेश किया। अध्य ...

हाफ़िज़ शिराज़ी

ख़्वाजा शम्स-अल-दीन मोहम्मद हाफ़िज़ शिराज़ी एक विचारक और कवि थे जो अपनी फ़ारसी ग़जलों के लिए जाने जाते हैं। हाफ़िज़ शिराज़ी के नाम से जाने जाते हैं। उनकी कविताओं में रहस्यमय प्रेम और भक्ति का मिला जुला असर दिखता है जिसे सूफ़ीवाद के एक स्तंभ के रू ...

गाय दी मोपासां

प्रकृतिवादी विचारधारा से प्रभावित गाय दी मोपासां, निर्विवाद रूप से फ्रांस के सबसे महान कथाकार हैं। वे जब ग्यारह वर्ष के थे तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार्मिक स्कूलों में हुई जिससे उन्हें चिढ़ थी। उन्होंने फ्रांस और जर् ...

एमिल जोला

एमिल जोला विश्वविख्यात उपन्सासकाऔर पत्रकार। जन्मस्थान, पेरिस। उनकी माँ फ्रांसीसी थीं, किंतु पिता मिश्रित इटालियन और ग्रीक नस्ल के थे। वे सैनिक और इंजिनियर थे। पिता की मृत्यु के उपरांत जोला और उनकी माँ आर्थिक संकट में फँस गए। संबंधियों की सहायता स ...

जोआकिम दु बेले

जोआकिम दु बेले एक फ्रान्सीसी कवि, आलोचक एवं प्लीदे का सदस्य था। उसका जन्म आंजु के निकट लिरे में सन् १५२५ में हुआ था। छोटी अवस्था में ही उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई। बड़े भाई ने उनकी शिक्षा पर समुचित ध्यान नहीं दिया। उसने २३ वर्ष की अवस्था में ...

ला फान्तेन

जीन डो ला फांतेन फ्रांस के बाल-कथाकार एवं कवि थे। चैटो थिएरी फ्रांस में सन् 1621 में जन्मे ला फांतेन ने धर्मशास्त्र तथा कानून की शिक्षा ग्रहण की और कुछ समय बाद वे पेरिस चले गए। वहाँ उन्होंने ग्रामीण काव्यसंवाद, वीरकाव्य, गाथाकाव्य, गीतिकविता आदि ...

विक्टर ह्यूगो

प्रतिभा के धनी विक्टर ह्यूगो ने 16 वर्ष की आयु में ही राष्ट्रीय कविता लिखकर ख्याति के अंकुर संजो लिए। 25 वर्ष के होते-होते ह्यूगो युवा लेखक के रूप में फ्रांस भर में विख्यात हो गए। उनकी ख्याति उनकी आयु के साथ बढती ही गई और 1885 में जब उनकी मृत्यु ...

काज़ी नज़रुल इस्लाम

काजी नज़रुल इस्लाम, अग्रणी बांग्ला कवि, संगीतज्ञ, संगीतस्रष्टा और दार्शनिक थे। वे बांग्ला भाषा के अन्यतम साहित्यकार, देशप्रेमी तथा बंगलादेश के राष्ट्रीय कवि हैं। पश्चिम बंगाल और बंगलादेश दोनो ही जगह उनकी कविता और गान को समान आदर प्राप्त है। उनकी ...

कालीप्रसन्न सिंह

कालीप्रसन्न सिंह एक बंगाली साहित्यकार थे। उन्होने महाभारत का बांग्ला में अनुवाद किया। वे एक मानवतावादी व्यक्ति थे जिन्होने विपत्तिग्रस्त अनेकों लोगों एवं आन्दोलनों की सहायता की।

जीवनानन्द दास

जीवनानंद दास बोरिशाल में जन्मे बांग्ला के सबसे जनप्रिय रवीन्द्रोत्तर कवि हैं। उन्हें १९५५ में मरणोपरांत श्रेष्ठ कविता के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। १९२६ में उनका पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ। झरा पालक, धूसर पांडुलिपि, बनल ...

ज्ञानदास

ज्ञानदास ब्रजबुलि एवं बँगला दोनों भाषाओं के श्रेष्ठ कवि थे। गोविंददास कविराज के उपरांत रचनासौष्ठव के लिय इन्हीं की ख्याति है। इनके ब्रजबुलि में लिखे पद्य अत्यंत सुंदर हैं। वैष्णवदास के पद-संग्रह-पंथ पदकल्पतरु में लगभग 105 ब्रजबुलि के पद संगृहीत ह ...

त्रैलोक्यनाथ मुखोपाध्याय

त्रैलोक्यनाथ मुखोपाध्याय एक बांग्ला साहित्यकार थे। बांग्ला साहित्य के इतिहास में ब्यङ्ग्यकार के रूप में उनकी पहचान है। मातृभाषा बांग्ला के अलावा वे फारसी, ओड़िया इत्यादि कई अन्य भाषाओं में भी दक्ष थे। उनके द्वारा रचित ग्रन्थों में कङ्काबती, भूत ओ ...

दीनबन्धु मित्र

उनका जन्म उत्तरी चौबीस परगना के चौबेरिया गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम कलाचन्द मित्र था। उनका मूल नाम गंधर्व नारायण था किन्तु उन्होने इसे बदलकर अपना नाम दीनबन्धु मित्र रख लिया।

द्विजेन्द्रलाल राय

द्विजेन्द्रलाल राय बांग्ला के विशिष्ट नाटककार, कवि तथा संगीतकार थे। वे अपने पौराणिक एवं ऐतिहासिक राष्ट्रवादी नाटकों एवं ५०० से अधिक द्विजेन्द्रगीति नामक गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। नाटक में कला तथा निस्पृह सौंदर्य की दृष्टि से, न कि भावुकता की दृष ...

प्यारीचाँद मित्र

प्यारीचाँद मित्र लेखक, पत्रकार, सांस्कृतिक कार्यकर्ता तथा उद्यमी थे। वे बांग्ला साहित्य के प्रथम उपन्यासकार थे। उनका छद्मनाम टेकचाँद ठाकुर था। वे युवा बंगाल समूह के एक सदस्य थे जिसने सरल बांगला गद्य में लिखकर बंगाल के पुनर्जागरण में अग्रगण्य भूमि ...

बुद्धदेव गुहा

बुद्धदेव गुहा बांग्ला भाषा के जानेमाने कथाकार हैं। इनका जन्म २९ जून १९३६ को कोलकाता में हुआ था। इनकी अब तक १०० से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें आनन्द पुरस्कार, शरद पुरस्कार, शिरोमणि पुरस्काऔर विभूतिभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया ...

भारतचंद्र राय

ईश्वरचंद्र गुप्त ने भारतचंद्र की बहुत सी रचनाओं की खोज करके उन्हें भारतचंद्रेर ग्रंथावली नाम से सन्‌ 1855 ई. में पुस्तकाकार प्रकाशित किया। इसी में उन्होने उनकी खोजपूर्ण जीवनी भी प्रकाशित की है। इसके अनुसार भारतचन्द्र दक्षिण राढ़ी भुरशिट वर्तमान ह ...

भूदेव मुखोपाध्याय

भूदेव मुखोपाध्याय १९वीं शताब्दी के बंगाल के लेखक और बुद्धिजीवी थे। बंगाल के नवजागरण काल में उनकी रचनाओं में राष्ट्रवाद और दर्शन का सुन्दर रूप देखने को मिलता है। अङ्गुरिया बिनिमय नामक उनका उपन्यास बंगाल का पहला ऐतिहासिक उपन्यास था। वे संस्कृत के म ...