ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 367

यिमचुंगरु भाषा

यिमचुंगरु, जिसे यचुमी भी कहा जाता है, भारत के नागालैण्ड राज्य के कुछ भागों में यिमचुंगर समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक आओ भाषा है। यह विशेष रूप से दीमापुर ज़िले व तुएनसांग ज़िले में बोली जाती है।

लोथा भाषा

यिमचुंगरु या ल्होता भारत के नागालैण्ड राज्य के कुछ भागों में लोथा समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक आओ भाषा है। यह विशेष रूप से वोखा ज़िले में बोली जाती है।

संगतम भाषा

संगतम, जिसे लोफोमी भी कहा जाता है, भारत के नागालैण्ड राज्य के कुछ भागों में संगतम समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक आओ भाषा है। यह विशेष रूप से किफाइर ज़िले व तुएनसांग ज़िले में बोली जाती है।

उत्तराखण्ड की भाषाएँ

उत्तराखण्ड की भाषाएँ पहाड़ी भाषाओं की श्रेणी में आती हैं। उत्तराखण्ड में बोली जाने वाली भाषाओं को दो प्रमुख समूहों में विभाजित किया जा सकता है: कुमाऊँनी और गढ़वाली जो क्रमशः राज्य कुमाऊँ और गढ़वाल मण्डलों में बोली जातीं हैं। इन दोनों भाषाओं में स ...

कार्बी भाषा

कार्बी भाषा, जो मिकिर भाषा और आरलेंग भाषा भी कहलाया करती थी, पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय व अरुणाचल प्रदेश राज्यों में कार्बी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक भाषा है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्या है लेकिन इस विशाल परिवार के अंदर इसका ...

कॉलीवुड

तमिल फिल्म उद्योग तमिल घर भाषा भारत में सिनेमा आधारित है और कभी कभी केरल फिल्म उद्योग के रूप में निर्दिष्ट है। नाम, केरल फिल्म उद्योग, Kodambakkam से ली गई है, चेन्नई में क्षेत्र, जहां केरल फिल्म उद्योग मुख्यतः फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं। तमिल ...

तमिल

तमिल एक मानव प्रजातीय मूल है, जिनका मुख्य निवास भारत के तमिलनाडु तथा उत्तरी श्री लंका में है। तमिल समुदाय से जुड़ी चीजों को भी तमिल कहते हैं जैसे, तमिल तथा तमिलनाडु के वासियों को भी तमिल कहा जाता है। तामिल, द्रविड़ जाति की ही एक शाखा है। मनुसंहित ...

तमिल मापन इकाइयाँ

प्राचीन तमिल नाडु में सात प्रकार के मापन प्रचलित थे। वह थे: संख्या गणना, तौल भार, तरल आयतन, अनाज आयतन, लम्बाई, समय और समानता। यही इकाइयाँ यहां विस्तृत तौपर उल्लेखित हैं।

पुथंडु

पुथंडु, जिसे पुथुरूषम या तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर पर वर्ष का पहला दिन है। तमिल तारीख को तमिल महीने चिधिराई के पहले दिन के रूप में, लन्नीसरोल हिंदू कैलेंडर के सौर चक्र के साथ स्थापित किया गया है। इसलिए यह हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर ...

ब्राह्मण तमिल

ब्राह्मण तमिल, तमिल की एक उपभाषा है जो परम्परागत रूप से प्रायः तमिल ब्राह्मणों द्वारा बोली जाती है। यह बोली शास्त्रीय तमिल के अधिक निकट है जिसमें संस्कृत मूल के शब्दों की अधिकता होती है। भाषाशास्त्री वी बालसुब्रमणियम के अनुसार, ब्राह्मण तमिल, केन ...

विश्वनाथ नायक

मदुरै नायक राजवंश का राजा। वह मधुरै के नायक राजवंश का संस्थापक है। विश्वनाथ नायक और आर्यनाथा मुडलियार ने सेना का नेतृत्व किया। दक्षिण भारत के तिरुनलवेली में उन्होने अधिकार प्राप्त किया। विश्वनाथ नायक के बाद उनका बेटा कृष्णप्पा और विश्वनाथ का मंत् ...

सरलीकृत तमिऴ् (तमिल) लिपि

सन् १९७८ ई॰ में, तमिऴ् नाडु सरकार ने कुछ तमिऴ् लिपि के अक्षरों में परिवर्तन किये थे, उसे सरल बनाने के लिये। उनका उद्देश्य ஆ आ, ஒ ऒ, ஓ ओ और ஐ ऐ अक्षरों के अमानक संयुक्ताक्षरों का माननीकरण करना था। ये परिवर्तन केवल भारत में ही विस्तृत हुए, वहीं श्र ...

प्रमुख बंगालियों की सूची

पार्था चटर्जी, राजनीतिक वैज्ञानिक अमल कुमार राय चौधरी, भौतिकशास्त्री कौशिक बसु, अर्थशास्त्री आंद्रे बेटैल्ले, समाजशास्त्री सुनीति कुमार चटर्जी, शिक्षाविद् सत्येंद्रनाथ बोस, भौतिकशास्त्री सुकुमार सेन, भाषाविद् दीपेश चक्रवर्ती, इतिहासकार अब्दुस सुत ...

बियाट भाषा

बियाट भारत की सबसे प्राचीन भाषाॐ में से एक है। इसके बोलने वाले लोगों को बियाट ही बोला जाता है और ये भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे मेघालय, असम, मिजोरम, मणिपुऔर त्रिपुरा में पाये जाते हैं।

मैथिली साहित्य

मैथिली मुख्यतः भारत के उत्तर-पूर्व बिहार एवम् नेपाल के तराई क्षेत्र की भाषा है। भारत के सोलह जिलों में और नेपाल के सात जिलों में यह बोली जाती है। इसका क्षेत्र लगभग 30.000 वर्गमील में व्याप्त है। मैथिली भाषा का सांस्कृतिक केंद्र भारत में दरभंगा और ...

मुहावरा

मुहावरा मूलत: अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ लोग मुहावरे को ‘रोज़मर्रा’, ‘बोलचाल’, ‘तर्ज़ेकलाम’, या ‘इस्तलाह’ कहते हैं, किन्तु इनमें से कोई भी शब्द ‘मुहावरे’ का पूर्ण पर्यायवाची नहीं बन सका। संस्कृत वाङ्मय में म ...

अंग्रेजी हटाओ आंदोलन

स्वतंत्र भारत में साठ के दशक में अंग्रेजी हटाओं-हिन्दी लाओ के आंदोलन का सूत्रपात राममनोहर लोहिया ने किया था। इस आन्दोलन की गणना अब तक के कुछ इने गिने आंदोलनों में की जा सकती है। लोहिया का मानना था की लोकभाषा के बिना लोकतंत्र सम्भव नहीं है। १९५७ स ...

अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन

अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन बहुआयामी साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़ व साहित्यिक वेब पत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम द्वारा किया जाता है।अब तक रायपुर, बैंकाक, मारीशस, पटाया, ताशकंद, संयुक्त अरब अमीरात, कंबोडिया-वियतनाम, श्र ...

अभिनव क़दम

अभिनव क़दम हिन्दी की एक साहित्यिक पत्रिका है। इस पत्रिका का प्रकाशन 1996 ईस्वी में आरंभ हुआ। अर्द्धवार्षिक रूप में प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका के सम्पादक जयप्रकाश धूमकेतु हैं। इसका प्रकाशन जयप्रकाश धूमकेतु द्वार राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के अं ...

आरा नागरी प्रचारिणी सभा

ब्रिटिश हुकूमत में जब हिन्दी की उपेक्षा की जा रही थी तब नागरी लिपि के प्रचाऔर हिन्दी साहित्य के विस्तार के लिए उतर भारत में दो स्थानों पर नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना की गयी। एक काशी और दूसरा आरा में। आरा में नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना 12 अ ...

कन्हैयालाल शर्मा

डॉ कन्हैयालाल शर्मा हिन्दी के कवि, हिन्दी-विभागाध्यक्ष एवं भाषा-शोधक थे। उनका जन्म राजस्थान के कोटा जिले के कनवास नामक ग्राम में एक अल्प-मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था।

कल्पित कथा/मिथ

मिथ अंग्रेजी के शब्द MYTH का समानअर्थी शब्द है। मिथ में उन काल्पनिक कथओं को लिया जाता है जो मुनष्य के ब्रह्मांड, प्रकृति और मानव व्यवहार/जीवन से संबंधित प्रश्न के उत्तर में होंद के रूप से सम्बंधित हो। मिथ दो प्रकार की होती है- प्रकृति के साथ जुडी ...

कादम्बिनी

कादम्बिनी हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की एक सामाजिक व साहित्यिक पत्रिका है जो नई दिल्ली से प्रकाशित होती है। सन् १९६० में शुरू हुई कादम्बिनी पत्रिका बीते पांच दशक से निरंतर हिंदी जगत में एक खास मुकाम बनाए हुए हैं। संस्कृति, साहित्य, कला, सेहत जैसे वि ...

केन्द्रीय हिन्दी समिति

केन्‍द्रीय हिन्दी समिति वह शीर्षस्‍थ समिति है, जो नीति निर्धारण में बड़े स्‍तर पर मार्गदर्शन उपलब्‍ध कराती है और राजभाषा नीति को लागू करने के लिए अंतर्मन्त्रालयीय और अंतर्विभागीय समन्‍वय सुनिश्चित करते हुए नीतिगत विषय से संबंधित निर्णयों के कार्य ...

गंगालहरी

गंगालहरी दो अलग-अलग रचनाओं का नाम है। १ पंडित जगन्नाथ तर्कपंचानन द्वारा संस्कृत में रचित गंगास्तव। इसमें केवल 521 श्लोक हैं जिसमें उन्होंने गंगा के विविध गुणों का वर्णन करते हुए अपने उद्धार के लिए अनुनय किया है। इसके संबंध में एक कथा प्रसिद्ध है। ...

छत्तीसगढ़ राज्य हिंदी ग्रंथ अकादमी

भारत सरकार ने सन् 1968 में उच्च शिक्षा के माध्यम परिवर्तन पर बल दिया था। इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न विषयों की पुस्तकों के लेखन, प्रकाशन के साथ-साथ उनका विपणन भी किया जाना था। ...

डिंगल

राजस्थान के चारण कवियों ने अपने गीतों के लिये जिस साहित्यिक शैली का प्रयोग किया है, उसे डिंगल कहा जाता है। वैसे चारण कवियों के अतिरिक्त प्रिथीराज जैसे अन्य कवियों ने भी डिंगल शैली में रचना की है। राजस्थान के राव कवि "डिंगल" का आश्रय न लेकर "पिंगल ...

तद्भव

तद्भव हिन्दी की एक पत्रिका है। यह पत्रिका हर बार आधुनिक रचनाशीलता पर केन्द्रित एक विशिष्ट संचयन होती है तथा विशुद्ध साहित्यिक सामग्रियों को प्रकाशन में महत्व देती है। ये हिन्दी में प्रयुक्त वो शब्द हैं जिनका जन्म संस्कृत या प्राकृत में हुआ था, ले ...

तमिलनाडु के हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन

तमिलनाडु में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के विरुद्ध जो आंदोलन हुआ था उसको तमिलनाडु का हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु का प्रथम हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन उस ज़माने के मद्रास प्रान्त में सं १९३७ ई में हुआ। तमिलनाडु के विरो ...

दृष्टिपात (पत्रिका)

दृष्टिपात हिन्दी की मासिक पत्रिका है। यह झारखण्ड की राजधानी रांची से प्रकाशित होती है। इसके प्रधान संपादक अरुण कुमार झा हैं। इसके प्रिंट और ऑन लाइन दोनों संस्करण हैं।

देवरानी जेठानी की कहानी

देवरानी जेठानी की कहानी हिन्दी का उपन्यास है। इसके रचयिता हिन्दी व देवनागरी के महान सेवक पंडित गौरीदत्त हैं। न केवल अपने प्रकाशन वर्ष, बल्कि अपनी निर्मिति के लिहाज से भी पं॰ गौरीदत्त की कृति देवरानी-जेठानी की कहानी को हिन्दी का पहला उपन्यास होने ...

धर्मयुग

धर्मयुग हिन्दी की एक लोकप्रिय साप्ताहिक पत्रिका थी जो टाईम्स ऑफ् इण्डिया समूह द्वारा मुंबई से प्रकाशित होती थी। इसके सम्पादक हिन्दी के जाने-माने साहित्यकार धर्मवीर भारती थे।

निज भाषा उन्नति अहै

यह प्रसिद्ध दोहा भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रसिद्ध कविता निज भाषा से लिया गया है। हिन्दी सम्बन्धित आन्दोलनों और आयोजनों में यह दोहा अनगिनत बार प्रेरणास्रोत की तरह उद्धृत किया जाता रहा है। इस कविता में कुल दस दोहे हैं। इसमें कवि मातृभाषा का उपयोग ...

पाखी

पाखी हिन्दी की एक मासिक पत्रिका है। हिन्दी साहित्य की पत्रिकाओं की भीड़ में अलग पहचान बनाने वाली पाखी का प्रकाशन सितंबर, 2008 से नियमित जारी है। प्रवेशांक का लोकार्पण हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह ने किया। अब तक पाखी पत्रिका ज्ञानरंजन, राजेन् ...

प्रताप (पत्र)

प्रताप हिन्दी का समाचार-पत्र था जिसेने भारत के स्वाधीनता आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभायी। प्रताप के जरिये जहाँ न जाने कितने क्रान्तिकारी स्वाधीनता आन्दोलन से रूबरू हुए, वहीं समय-समय पर यह अखबार क्रान्तिकारियों हेतु सुरक्षा की ढाल भी बना। इसे गणे ...

प्रयोजनमूलक हिन्दी

व्यक्ति द्वारा विभिन्न रूपों में बरती जाने वाली भाषा को भाषा-विज्ञानियों ने स्थूल रूप से सामान्य और प्रयोजनमूलक इन दो भागों में विभक्त किया है। प्रयोजनमूलक हिन्दी Functional Hindi से तात्पर्य हिन्दी के विज्ञान, तकनीकी, विधि, संचार एवं अन्यान्य गत ...

बाबूराव विष्णु पराडकर

बाबूराव विष्णु पराड़कर हिन्दी के जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार एवं हिन्दीसेवी थे। उन्होने हिन्दी दैनिक आज का सम्पादन किया। भारत की आजादी के आंदोलन में अखबार को बाबूराव विष्णु पराड़कर ने एक तलवार की तरह उपयोग किया। उनकी पत्रकारिता ही क्रांतिकारिता ...

बाल प्रभा

बाल प्रभा बाल साहित्य की पत्रिका है। इस पत्रिका में बाल साहित्य की सभी विधाओं की रचनाओं प्रकाशित की जाती हैं। पत्रिका के सम्पादक डॉ॰ नागेश पाण्डेय हैं।

बिंदिया

बिंदिया महिलाओं पर केन्द्रित हिन्दी की एक सामाजिक पत्रिका है। बिंदिया पत्रिका की सम्पादक गीताश्री हैं। यह पत्रिका नोएडा उ०प्र० से २००९ से प्रकाशित हो रही थी, जिसका प्रकाशन अब बन्द हो गया है।

भक्तमाल

भक्तमाल हिन्दी का एक ऐतिहासिक ग्रन्थ है। इसके रचयिता नाभादास या नाभाजी हैं। इसका रचना काल सं. १५६० और १६८० के बीच माना जा सकता है। भक्तमाल के दो पहलू स्पष्ट ही प्रतीत होते हैं, एक में छप्पयों में रामानुजाचार्य से पूर्व के सभी प्रकार के भक्तों के ...

मतरुकात

मतरूकात का सिद्धान्त का अर्थ है भाषा में बिगड़े हुए शब्द एवं प्रयोग को भाषाकोश से बाहर निकालना जो अप्रचलित या लुप्तप्रयोग हो चुके हैं। भारत में मतरूकात के सिद्धान्त के कारण ही उर्दू और हिन्दी में से बहुत से शब्द छोड़ दिये गये। इसके कारण हिन्दी और ...

महाराष्ट्री प्राकृत

महाराष्ट्री प्राकृत उस प्राकृत शैली का नाम है जो मध्यकाल में महाराष्ट्र प्रदेश में विशेष रूप से प्रचलित हुई। प्राचीन प्राकृत व्याकरणों में - जैसे चंडकृत प्राकृतलक्षण, वररुचि कृत प्राकृतप्रकाश, हेमचंद्र कृत प्राकृत व्याकरण एवं त्रिविक्रम, शुभचँद्र ...

माध्यम (सम्पादित्र)

माध्यम कृतिदेव फॉण्ट में हिन्दी लिखने के लिये एक पाठ सम्पादित्र है। कृतिदेव फॉण्ट रेमिंगटन लेआउट पर आधारित है जिस कारण इन्स्क्रिप्ट के प्रयोक्ताओं को इसमें टाइप करने में ससस्या आती है। माध्यम इन्स्क्रिप्ट लेआउट द्वारा कृतिदेव में टाइप करने की सुव ...

मानक हिन्दी

मानक हिन्दी हिन्दी का मानक स्वरूप है जिसका शिक्षा, कार्यालयीन कार्यों आदि में प्रयोग किया जाता है। भाषा का क्षेत्र देश, काल और पात्र की दृष्टि से व्यापक है। इसलिये सभी भाषाओं के विविध रूप मिलते हैं। इन विविध रूपों में एकता की कोशिश की जाती है और ...

यूरोप में प्रसारित हिन्दी टीवी चैनेलों की सूची

GlobeCast World TV CNN IBN Sony Entertainment Television Asia B4U Music Life OK Sahara One BIG Magic Star Movies Star World Filmy 9XM Music India डीडी न्यूज NDTV 24x7 जी टीवी DD India India Today जी न्यूज ABP News &TV India TV Star Plus SET M ...

राजभाषा आयोग, १९५५

भारत के राष्‍ट्रपति ने भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 344 में प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 7 जून 1955 को श्री बी.जी. खेर की अध्‍यक्षता में निम्‍नांकित विषयों पर सिफारिशें करने के लिए राजभाषा आयोग का गठन किया – क संघ के सरकारी कामकाज के लिए ...

राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी

राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी राजस्थान सरकार का स्वायत्तशासी संस्थान है जो हिन्‍दी माध्‍यम से उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने वाले विद्यार्थियों के लिए विभिन्‍न विषयों की पाठ्य एवं संदर्भ पुस्‍तकों की रचना करता है। अपनी स्थापना से यह अकादमी हिन्दी माध ...

राजेन्द्र माथुर

राजेन्द्र माथुर, हिन्दी के प्रसिद्ध पत्रकार थे। स्वाधीन भारत में हिन्दी पत्रकारिता को स्थापित करने वाले स्वर्गीय राजेन्द्र माथुर का पूरा जीवन हिन्दी के लिये समर्पित रहा। मालवा अंचल के इस प्रतिभावान पत्रकार ने यह प्रमाणित कर दिया कि ऊंचाई प्राप्त ...

राजेन्द्र मिश्र

राजेन्द्र मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षाविद एवं समालोचक हैं। वे हिन्दी भाषा चिन्तन पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे नागरी लिपि परिषद् से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। अब तक उनकी लगभग ४५ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं।

राष्‍ट्रधर्म

राष्‍ट्रधर्म हिन्दी की एक पत्रिका है। यह संस्कृति भवन लखनऊ से प्रकाशित होती है। इसके प्रखर संपादक भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और ओजस्वी कवि श्री अटल बिहारी वाजपेयी रहे हैं।