ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 366

शंबूक की हत्या

शंबूक की हत्या नरेन्द्र कोहली द्वारा रचित नाटक है। शम्बूक वध का सत्य लेखक – स्वामी विद्यानंद सरस्वती एक दिन एक ब्राह्मण का इकलौता लड़का मर गया । उस ब्राह्मण के लड़के के शव को लाकर राजद्वापर डाल दिया और विलाप करने लगा । उसका आरोप था कि अकाल मृत्यु ...

शिवसिंहसरोज

शिवसिंहसरोज, किसी भारतीय द्वारा लिखी गई हिन्दी साहित्य के इतिहास की पहली पुस्तक है। इसके लेखक शिवसिंह सेंगर हैं। 1883 ई० मे लिखी गई इस पुस्तक में एक हजार साहित्यकारों का परिचय दिया गया है। इसमें वास्तव में हिंदी साहित्य के इतिहास का एक ढाँचा तैया ...

सम्पत्ति-शास्त्र

सम्पत्ति-शास्त्र महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित अर्थशास्त्र संबंधी हिंदी की पहली पुस्तक है। इसका पुस्तक रूप में प्रकाशन सन् १९०८ में हुआ। इसके पूर्व १९०७ की सरस्वती के विभिन्न अंकों में सम्पत्ति-शास्त्र के अंश प्रकाशित हो चुके थे।

सामर्थ्य और सीमा

सामर्थ्य और सीमा सुप्रसि़द्घ कथाकार भगवती चरण वर्मा का बहुचर्चित उपन्यास है। इसमें अपने सामर्थ्य की अनुभूति से पूर्ण कुछ ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों की कहानी है जिन्हें परिस्थितियाँ एक स्थान पर एकत्रित कर देती है। हर व्यक्ति अपनी महत्ता, अपनी शक्ति और ...

सुनीता

1935 में जैनेंद्र कुमार के दूसरे उपन्यास सुनीता का प्रकाशन हुआ। आरंभ में इसका दो तिहाई अंश चित्रपट में प्रकाशित हुआ था। गुजराती की एक पत्रिका में यह धारावाहिक रूप से अनूदित भी हुआ। सुनीता और जैनेंद्र की पूर्वप्रकाशित औपन्यासिक कृति परख के कथानक म ...

सूरसारावली

सूरसारावली भक्त कवि सूरदास की एक रचना है। इसमें ११०७ छन्द हैं। यह सम्पूर्ण ग्रन्थ एक "वृहद् होली" गीत के रूप में रचित है। इसकी टेक है - खेलत यह विधि हरि होरी हो, हरि होरी हो वेद विदित यह बात। इसका रचना-काल संवत् १६०२ वि० निश्चित किया गया है, क्यो ...

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। वे जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा के साथ हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने कई कहानियाँ, उपन् ...

हिन्द स्वराज

हिन्द स्वराज, गांधीजी द्वारा रचित एक पुस्तक का नाम है। मूल रचना सन १९०९ में गुजराती में थी। यह लगभग तीस हजार शब्दों की लघु पुस्तिका है जिसे गाँधी जी ने अपनी इंग्लैण्ड से दक्षिण अफ्रीका की यात्रा के समय पानी के जहाज में लिखी। यह इण्डियन ओपिनिअन मे ...

हिन्दी साहित्य का विकास ऐतिहासिक दृष्टिकोण

हिन्दी साहित्य का विकास ऐतिहासिक दृष्टिकोण एक महात्यपूर्ण पुस्तक हे जो वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुई हे जिसे डॉ देवेंद्र कुमार शर्मा ने लिखा हे, साहित्य के इतिहास को लिखने का यह प्रथम प्रयास है।

हिम्मत जौनपुरी

हिम्मत जौनपुरी राही मासूम रजा का दूसरा उपन्यास था जो मार्च १९६९ में प्रकाशित हुआ। आधा गांव की तुलना में यह जीवन चरितात्मक उपन्यास बहुत ही छोटा है। हिम्मत जौनपुरी लेखक का बचपन का साथी था और लेखक का विचार है कि दोनों का जन्म एक ही दिन पहली अगस्त सन ...

पेंसिल

पेंसिल लिखने या चित्र बनाने के काम आती है। इसमें एक आसानी से सरकने वाली पतली छड़ होती है जो प्रायः ग्रेफाइट की बनी होती है जो कागज पर घिसकर अपने रंग के अनुरूप एक निशान छोड़ जाती है। सामान्यतः इस छड़ को दो लकड़ी के तुकडों के बीच दबाकर उनसे गोंद से ...

अभिज्ञापक

अभिज्ञापक ऐसा नाम होता है जो किसी वस्तु विशेष या किसी वस्तुओं की विशेष श्रेणी की पहचान कराता हो। इसे आम-प्रयोग में अंग्रेज़ी के सूचकाक्षर आईडी के नाम द्वारा भी बुलाया जाता है। यह कोई शब्द, अंक, अक्षर, चिन्ह, चित्र या इन सब का मिश्रण हो सकता है। ऐ ...

डिजिटल वस्तु अभिज्ञापक

डिजिटल वस्तु अभिज्ञापक या डिजिटल ऑब्जेक्ट आएडॅन्टीफ़ायर एक क्रमांक है जिसके ज़रिये किसी भी डिजिटल वस्तु को एक अनूठा नाम दिया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय डी॰ओ॰आई॰ संसथान ने इस विधि का विकास किया और वही डी॰ओ॰आई॰ प्रणाली के साथ पंजीकृत की गयी वस्तुओं ...

ब्राह्मी परिवार की लिपियाँ

ब्राह्मी परिवार उन लिपियों का परिवार हैं जिनकी पूर्वज ब्राह्मी लिपि है। इनका प्रयोग दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया में होता है, तथा मध्य व पूर्व एशिया के कुछ भागों में भी होता है। इस परिवार की किसी लेखन प्रणाली को ब्राह्मी-आधारित लिपि या भारतीय ...

कदंब लिपि

कदम्ब लिपि, ब्राह्मी लिपि से व्युत्पन्न एक लिपि है जिसे पूर्व-प्राचीन कन्नड लिपि भी कहते हैं। इसी लिपि से कन्नड में लेखन का आरम्भ हुआ। यह कलिंग लिपि से बह्त कुछ मिलती-जुलती है।

धम्म लान्ना लिपि

धम्म लान्ना, ब्राह्मी लिपि से उत्पन्न एक लिपि है जो तीन आधुनिक भाषाओं को लिखने के लिये प्रयुक्त होती है।

बटक लिपि

बटक लिपि इण्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर बोली जाने वाली बटक भाषाओं को लिखने के लिए प्रयुक्त वर्णमाला है। इसका वास्तविक नाम सूरत बटक, सूरत न सम्पुलु सिआ, या सी-सिया-सिया है। बटक भाषा बोलने वालों की संख्या करोड़ों में है। यह मूलतः ब्राह्मी से व्यु ...

बायबायिन लिपि

बायबायिन, जो विसाया भाषाओं में बदलित कहलाती है, ब्राह्मी लिपि से व्युत्पन्न एक लिपि है जो फीलीपीन्ज़ में प्राचीन काल से प्रचलित थी। स्पेनियों द्वारा फिलीपीन्ज़ के उपनिवेशीकरण के बाद भी १९वीं शताब्दी के अन्तिम भाग तक इसका प्रयोग जारी रहा। इस लिपि ...

भट्टिप्रोलु लिपि

भट्टिप्रोलु एक लिपि है जो ब्राह्मी का परिवर्तित रूप है। वर्तमान आन्ध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के भट्टिप्रोलु गाँव के प्राचीन शिलालेखों में इस लिपि का प्रयोग हुआ है। इतिहासकार मानते हैं कि तेलुगु लिपि इसी लिपि से व्युत्पन्न हुई है।

सिलेटी नागरी

सिलेटि नागरी एक लिपि है जो सिलेटी भाषा लिखने में प्रयुक्त होती है। इसे जालालाबादी नागरी, मुसलमानी नागरी और फुल नागरी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक संकटग्रस्त लिपि है। सिलेटि नागरी का कैथी लिपि से निकट सम्बन्ध है। पिछले कुछ समय में बांग्ला लिपि ...

सोयोंबो लिपि

सोयोंबो लिपि, ब्राह्मी से व्युत्पन्न एक लिपि है। इसका विकास १६८६ ई में जनबजर नामक एक भिक्षु एवं विद्वान ने मंगोल भाषा को लिखने के लिए किया था। इसका उपयोग करके तिब्बती भाषा और संस्कृत भी लिखी जा सकती हैं। सोयोंबो नामक इस लिपि का एक विशेष वर्ण मंगो ...

थोन्मि सम्भोट

थोन्मि सम्भोट को पारम्परिक रूप से तिब्बती लिपि के अन्वेषक माना जाता है तथा ७वीं सदी में सम कु पा और आरटैग्स क्यी जुग पा के लेखक थे। थोन्मि सम्भोट किसी भी पूराने तिब्बती इतिहास, अन्य प्राचीन सामग्री में उल्लेख नहीं मिलता। अमेरिकी भाषाविद रॉय एंड्र ...

अन्य लिपि में इस अक्षर को इस प्रकार से लिखते हैं- गुजराती लिपि:ક तेलुगु लिपि:క तमिल लिपि:க उर्दू लिपि:کَ मलयालम लिपि:ക कन्नड लिपि:ಕ उड़िया लिपि:କ गुरमुखी लिपि:ਕ

क़

क़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे कि क़िला, क़यामत, क़त्ल, क़ुरबानी और क़ानून। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को q के चिन्ह से लिखा जाता है और उर्दू में इसे ق ‎ लिखा जाता ...

ख़

ख़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे कि ख़रगोश, ख़ुश, ख़बर, ख़ैऔर ख़ून। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को x के चिह्न से लिखा जाता है और उर्दू में इसे خ लिखा जाता है, जिस अक् ...

ग़

ग़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे कि ग़ायब, ग़ज़ल, ग़नीमत और ग़रीब। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को ɣ के चिह्न से लिखा जाता है और उर्दू में इसे غ लिखा जाता है, जिस अक्ष ...

ज़

ज़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। हिंदी-उर्दू के कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की ज़रुरत, ज़माना, आज़माइश, ज़रा और ज़ंग। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके उच्चारण को z के चिन्ह से लिखा जाता है और उर्दू में इसको ز लिखा जाता है, ...

झ़

झ़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। इसका प्रयोग हिंदी-उर्दू में केवल गिनती के ही शब्दों में होता है, जैसे की "झ़ुझ़" और "अझ़दहा" । अंग्रेज़ी में इसका प्रयोग बहुत सारे शब्दों में होता है, जैसे की "टॅलिविझ़न", "ट्रॅझ़र", "विझ़न", "डिसिझ़न" और "डिविझ़न" ...

थ़

थ़ देवनागरी लिपि का एक वर्ण है जिसके उच्चारण को अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में θ के चिन्ह से लिखा जाता है। मानक हिंदी और मानक उर्दू में इसका प्रयोग नहीं होता है, लेकिन हिंदी की कुछ पश्चिमी उपभाषाओं में इसका थ के साथ सहस्वानिकी संबंध है। ...

फ़

फ़ f देवनागरी वर्णमाला का एक अघोष अर्धओष्ठ्य संघर्षी व्यंजन है। प्रायः इसे अंग्रेजी या फ़ार्सी-अरबी से ली गयी शब्दोँ के लिए प्रयोग किया जाता है। पश्चिमी हिंदुस्तानी भाषाओँ राजस्थानी, मारवाड़ी और कश्मीरी में फ वर्ण के स्थान पर फ़ और फ़ के स्थान पर ...

ष देवनागरी लिपि का एक वर्ण है। संस्कृत से उत्पन्न कई शब्दों में इसका प्रयोग होता है, जैसे की षष्ठ, धनुष, सुषमा, कृषि, षड्यंत्र, संघर्ष और कष्ट। अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसके संस्कृत उच्चारण को ʂ के चिन्ह से लिखा जाता है। संस्कृत म ...

९ देवनागरी लिपि में प्रयुक्त होने वाली एक संख्या है. इसको नो कहते है. अंग्रेज़ी भाषा में इसे नाइन या 9 लिखते है. एक गणित उदहारण के तोर पे ५ को ९ से घटाने पर ४ मिलता है. ५ - ९ = ४

अब्जद

अब्जद ऐसी लिपि होती है जिसमें हर अक्षर एक व्यंजन होता है। इसमें स्वर लिखा ही नहीं जाता और पाठक को स्वयं ही स्वर का अनुमान लगाना पड़ता है। प्राचीनकाल में फ़ोनीशियाई वर्णमाला एक अब्जद लिपि थी और उस से उत्पन्न यूनानी लिपि और आरामाई लिपि दोनों अब्जद ...

आबूगीदा

आबूगीदा ऐसी लिपि को कहा जाता है जिसमें व्यंजन और स्वर को एक ईकाई में लिखा जाये। उदाहरण के लिये देवनागरी एक आबूगीदा है, क्योंकि "क" के व्यंजन और "ओ" के स्वर को एक ही ईकाई में मिलाकर "को" लिखा जाता है। इसी तरह इथियोपिआ व इरित्रिया की गीइज़ लिपि में ...

यिमचुंगरु भाषा

यिमचुंगरु, जिसे यचुमी भी कहा जाता है, भारत के नागालैण्ड राज्य के कुछ भागों में यिमचुंगर समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक आओ भाषा है। यह विशेष रूप से दीमापुर ज़िले व तुएनसांग ज़िले में बोली जाती है।

लोथा भाषा

यिमचुंगरु या ल्होता भारत के नागालैण्ड राज्य के कुछ भागों में लोथा समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक आओ भाषा है। यह विशेष रूप से वोखा ज़िले में बोली जाती है।

संगतम भाषा

संगतम, जिसे लोफोमी भी कहा जाता है, भारत के नागालैण्ड राज्य के कुछ भागों में संगतम समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक आओ भाषा है। यह विशेष रूप से किफाइर ज़िले व तुएनसांग ज़िले में बोली जाती है।

उत्तराखण्ड की भाषाएँ

उत्तराखण्ड की भाषाएँ पहाड़ी भाषाओं की श्रेणी में आती हैं। उत्तराखण्ड में बोली जाने वाली भाषाओं को दो प्रमुख समूहों में विभाजित किया जा सकता है: कुमाऊँनी और गढ़वाली जो क्रमशः राज्य कुमाऊँ और गढ़वाल मण्डलों में बोली जातीं हैं। इन दोनों भाषाओं में स ...

कार्बी भाषा

कार्बी भाषा, जो मिकिर भाषा और आरलेंग भाषा भी कहलाया करती थी, पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय व अरुणाचल प्रदेश राज्यों में कार्बी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक भाषा है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्या है लेकिन इस विशाल परिवार के अंदर इसका ...

कॉलीवुड

तमिल फिल्म उद्योग तमिल घर भाषा भारत में सिनेमा आधारित है और कभी कभी केरल फिल्म उद्योग के रूप में निर्दिष्ट है। नाम, केरल फिल्म उद्योग, Kodambakkam से ली गई है, चेन्नई में क्षेत्र, जहां केरल फिल्म उद्योग मुख्यतः फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं। तमिल ...

तमिल

तमिल एक मानव प्रजातीय मूल है, जिनका मुख्य निवास भारत के तमिलनाडु तथा उत्तरी श्री लंका में है। तमिल समुदाय से जुड़ी चीजों को भी तमिल कहते हैं जैसे, तमिल तथा तमिलनाडु के वासियों को भी तमिल कहा जाता है। तामिल, द्रविड़ जाति की ही एक शाखा है। मनुसंहित ...

तमिल मापन इकाइयाँ

प्राचीन तमिल नाडु में सात प्रकार के मापन प्रचलित थे। वह थे: संख्या गणना, तौल भार, तरल आयतन, अनाज आयतन, लम्बाई, समय और समानता। यही इकाइयाँ यहां विस्तृत तौपर उल्लेखित हैं।

पुथंडु

पुथंडु, जिसे पुथुरूषम या तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर पर वर्ष का पहला दिन है। तमिल तारीख को तमिल महीने चिधिराई के पहले दिन के रूप में, लन्नीसरोल हिंदू कैलेंडर के सौर चक्र के साथ स्थापित किया गया है। इसलिए यह हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर ...

ब्राह्मण तमिल

ब्राह्मण तमिल, तमिल की एक उपभाषा है जो परम्परागत रूप से प्रायः तमिल ब्राह्मणों द्वारा बोली जाती है। यह बोली शास्त्रीय तमिल के अधिक निकट है जिसमें संस्कृत मूल के शब्दों की अधिकता होती है। भाषाशास्त्री वी बालसुब्रमणियम के अनुसार, ब्राह्मण तमिल, केन ...

विश्वनाथ नायक

मदुरै नायक राजवंश का राजा। वह मधुरै के नायक राजवंश का संस्थापक है। विश्वनाथ नायक और आर्यनाथा मुडलियार ने सेना का नेतृत्व किया। दक्षिण भारत के तिरुनलवेली में उन्होने अधिकार प्राप्त किया। विश्वनाथ नायक के बाद उनका बेटा कृष्णप्पा और विश्वनाथ का मंत् ...

सरलीकृत तमिऴ् (तमिल) लिपि

सन् १९७८ ई॰ में, तमिऴ् नाडु सरकार ने कुछ तमिऴ् लिपि के अक्षरों में परिवर्तन किये थे, उसे सरल बनाने के लिये। उनका उद्देश्य ஆ आ, ஒ ऒ, ஓ ओ और ஐ ऐ अक्षरों के अमानक संयुक्ताक्षरों का माननीकरण करना था। ये परिवर्तन केवल भारत में ही विस्तृत हुए, वहीं श्र ...

प्रमुख बंगालियों की सूची

पार्था चटर्जी, राजनीतिक वैज्ञानिक अमल कुमार राय चौधरी, भौतिकशास्त्री कौशिक बसु, अर्थशास्त्री आंद्रे बेटैल्ले, समाजशास्त्री सुनीति कुमार चटर्जी, शिक्षाविद् सत्येंद्रनाथ बोस, भौतिकशास्त्री सुकुमार सेन, भाषाविद् दीपेश चक्रवर्ती, इतिहासकार अब्दुस सुत ...

बियाट भाषा

बियाट भारत की सबसे प्राचीन भाषाॐ में से एक है। इसके बोलने वाले लोगों को बियाट ही बोला जाता है और ये भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जैसे मेघालय, असम, मिजोरम, मणिपुऔर त्रिपुरा में पाये जाते हैं।

मैथिली साहित्य

मैथिली मुख्यतः भारत के उत्तर-पूर्व बिहार एवम् नेपाल के तराई क्षेत्र की भाषा है। भारत के सोलह जिलों में और नेपाल के सात जिलों में यह बोली जाती है। इसका क्षेत्र लगभग 30.000 वर्गमील में व्याप्त है। मैथिली भाषा का सांस्कृतिक केंद्र भारत में दरभंगा और ...

मुहावरा

मुहावरा मूलत: अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ लोग मुहावरे को ‘रोज़मर्रा’, ‘बोलचाल’, ‘तर्ज़ेकलाम’, या ‘इस्तलाह’ कहते हैं, किन्तु इनमें से कोई भी शब्द ‘मुहावरे’ का पूर्ण पर्यायवाची नहीं बन सका। संस्कृत वाङ्मय में म ...