ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 348

गोपाल राम गहमरी

गोपाल राम गहमरी हिंदी के महान सेवक, उपन्यासकार तथा पत्रकार थे। वे 38 वर्षों तक बिना किसी सहयोग के जासूस नामक पत्रिका निकालते रहे, २०० से अधिक उपन्यास लिखे, सैकड़ों कहानियों के अनुवाद किए, यहां तक कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की चित्रागंदा काव्य का भी अनु ...

जयप्रकाश भारती

जयप्रकाश भारती हिन्दी के प्रख्यात लेखक और नन्दन के पूर्व सम्पादक थे। भारती जी ने हिन्दी बालसाहित्य पर महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्हें हिन्दी बाल-साहित्य का युगनिर्माता कहा जाता है। नंदन को उन्होंने सर्वश्रेष्ठ बाल पत्रिका का दर्जा दिलाया।

दुर्गाप्रसाद मिश्र

दुर्गाप्रसाद मिश्र हिन्दी के पत्रकार थे। 19वीं सदी की हिंदी पत्रकारिता में दुर्गाप्रसाद मिश्र का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। वे हिंदी के ऐसे पत्रकार रहे हैं जिन्हें हिंदी पत्रकारिता के जन्मदाताओं एवं प्रचारकों में शुमार किया जाता है। हिंदी पत ...

देवी दत्त शुक्ल

देवीदत्त शुक्ल हिन्दी के साहित्यकार एवं पत्रकार थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद सरस्वती पत्रिका के सम्पादन का गुरुतर भार सन् १९२५ से १९२७ फिर १९२९ - १९४६ तक शुक्ल जी ने ही सँभाला। शुक्ल जी ने २७ वर्षों तक "सरस्वती" का सम्पादन किया।

द्वारका प्रसाद शर्मा

द्वारका प्रसाद शर्मा हिन्दी के साहित्यकार थे। इन्हें हिंदी गद्य के विकास काल के आरंभिक लेखकों में गिना जाता है। चतुर्वेदीजी को हिंदी साहित्य जगत में महत्वपूर्ण योगदान हेतु "शर्मा" की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में ...

मनमोहन सरल

1966 Griffin Award.jpg जन्म: 28 दिसम्बर 1934, नजीबाबाद, उत्तरप्रदेश। शिक्षा: एम.ए., बी.एससी., एलएल.बी. कार्यक्षेत्र: संपादन, अध्यापन व लेखन। पहली कहानी 1949 में छपी और पहला कहानी संग्रह प्यास एक: रूप दो 1959 में छपा और चर्चित हुआ। 1958 में महानंद ...

मुंशी दयानारायण निगम

मुंशी दयानारायण निगम बीसवीं सदी के प्रारंभ में कानपुर से प्रकाशित होने वाली उर्दू पत्रिका ज़माना के संपादक थे। उन्होंने प्रेमचंद की पहली कहानी दुनिया का सबसे अनमोल रतन प्रकाशित की थी। नवाबराय के नाम से लिखने वाले लेखक को प्रेमचंद नाम भी मुंशी दया ...

राजेन्द्र अवस्थी

राजेन्द्र अवस्थी हिंदी के प्रख्यात पत्रकाऔर लेखक थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के ज्योतिनगर गढा इलाके में हुआ था। वे नवभारत, सारिका, नंदन, साप्ताहिक हिन्दुस्तान और कादम्बिनी के संपादक रहे। उन्होंने अनेक उपन्यासों कहानियों एवं कविताओं क ...

रुद्रदत्त शर्मा

रुद्रदत्त शर्मा उच्चकोटि के सम्पादक ही नहीं अपितु एक साहित्यकार भी थे। विद्वत समाज में आप सम्पादकाचार्य के रूप में जाने जाते थे। आपने इन्द्रप्रस्थ, आर्यविनय, भारतमित्र, आर्यमित्और सत्यवादी तथा भारतोदय का भी सफलतापूर्वक सम्पादन किया। आपकी साहित्यि ...

छंद

संस्कृत वाङ्मय में सामान्यतः लय को बताने के लिये छन्द शब्द का प्रयोग किया गया है। विशिष्ट अर्थों या गीत में वर्णों की संख्या और स्थान से सम्बंधित नियमों को छ्न्द कहते हैं जिनसे काव्य में लय और रंजकता आती है। छोटी-बड़ी ध्वनियां, लघु-गुरु उच्चारणों ...

प्रतिभा

प्रतिभा वह शक्ति है, जो किसी व्यक्ति को काव्य की रचना में समर्थ बनाती है। काव्य हेतु में प्रतिभा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। विवाह के महत्व के बारे में भट्टतौत जी कहते हैं कि प्रज्ञा नोवनवोन्मेष शालिनी प्रतिभा माता।" अर्थात, "प्रतिभा उस प्रज्ञ ...

रीति संप्रदाय

रीति सम्प्रदाय आचार्य वामन द्वारा प्रवर्तित एक काव्य-सम्प्रदाय है जो रीति को काव्य की आत्मा मानता है। यद्यपि संस्कृत काव्यशास्त्र में रीति एक व्यापक अर्थ धारण करने वाला शब्द है। लक्षणग्रंथों में प्रयुक्त रीति शब्द का अर्थ ढंग, शैली, प्रकार, मार्ग ...

विभाव

विभाव का अर्थ है "कारण"। जिन कारणों से सहृदय सामाजिक के हृदय में स्थित स्थायी भाव उदबुद्ध होता है उन्हें विभाव कहते है। यह दो प्रकार के होते है- अर्थात् वातावरण से संबंधित वस्तुएं । प्राकृतिक दृश्यों की गणना भी इन्हीं के

हिन्दी हाइकु

हिन्दी हाइकु जापानी कविता हाइकु का हिन्दी रूप है। हाइकु अनेक भाषाओं में लिखे जाते हैं लेकिन वर्णों या पदों की गिनती का क्रम अलग-अलग होता है। हिंदी हाइकु के लिए पहली पंक्ति में ५ अक्षर, दूसरी में ७ अक्षर और तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर, इस प्रकार यह क ...

अचल

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव बृहद्रथ | वसुदान |शत्निक बुद्ध कालीन| अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष् ...

अप्सरा

प्रत्येक धर्म का यह विश्वास है कि स्वर्ग में पुण्यवान् लोगों को दिव्य सुख, समृद्धि तथा भोगविलास प्राप्त होते हैं और इनके साधन में अन्यतम है अप्सरा जो काल्पनिक, परंतु नितांत रूपवती स्त्री के रूप में चित्रित की गई हैं। यूनानी ग्रंथों में अप्सराओं क ...

अरिञ्जय

सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सुखीबल | परिप्लव | सुनय | मेधाविन् | नृपञ्जय | ध्रुव, मधु|तिग्म्ज ...

उदायि

सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | चित्ररथ | शुचिद्रथ सुखीबल | परिप्ल ...

ओखाहरन्

सबसे पहेले सुखदेवजी ने परीक्षीत राजा को ओखाहरण की कथा सुनाई थी। उसमे उन्होंने ओखा के जीवन के बारे मे और उसकी शादी किससे, कैसे और कहाँ हुई थी, यह सब बताया था। सुखदेव जी ने ओखाहरन की कथा की शुरुआत मे ही कहा है की. कथा की शुरुआत ओखाहर्ण की कथा जो भी ...

कलियुग वंशावली

कलियुग वंशावली पुराणों पर आधारित विभिन्न राजाओं की वंशावली है। यहां यह वंशावली मौर्य वंश तक की दी जायेगी। यह भारत के इतिहास को प्राचीन वंशावली, जो द्वापर के अन्त तक ही सीमित थी, से आगे महाभारत के युग के पश्चात के काल में ले आती है।

कृष्ण शंकर युद्ध

दानवीर दैत्यराज बलि के सौ प्रतापी पुत्र थे, उनमें सबसे बड़ा वाणासुर था। वाणासुर ने भगवान शंकर की बड़ी कठिन तपस्या की। शंकर जी ने उसके तप से प्रसन्न होकर उसे सहस्त्र बाहु तथा अपार बल दे दिया। उसके सहस्त्र बाहु और अपार बल के भय से कोई भी उससे युद्ध ...

क्षेमजित्

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस् अधिसीमकृष्ण | निचक्षु ...

क्षेमधर्म

सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | चित्ररथ | शुचिद्रथ जनमेजय ३ | शतान ...

गर्ग संहिता

"गर्गसंहिता" नाम से एक दूसरा गन्थ भी है जो ज्योतिष ग्रन्थ है। गर्ग संहिता गर्ग मुनि की रचना है। इस संहिता में मधुर श्रीकृष्णलीला परिपूर्ण है। इसमें राधाजी की माधुर्य-भाव वाली लीलाओं का वर्णन है। श्रीमद्भगवद्गीता में जो कुछ सूत्ररूप से कहा गया है, ...

दैत्य

विष्णु पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार दैत्य कश्यप ऋषि और दिति के पुत्र थे। उन्हें असुऔर राक्षस भी कहा गया है। हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष प्रसिद्ध दैत्य थे। दैत्यों की प्रवृत्तियाँ आसुरी थीं। आगे चलकर उनका देवताओं या सुरों से युद्ध भी हुआ। देवता ...

नरसिंह पुराण

श्री नरसिंह पुराण महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित यह भारतीय ग्रंथ समूह पुराण से जुड़ा है, यह एक उपपुराण है। आर° सी° हाज़रा के शोध के अनुसार यह 5वी शताब्दी के बाद के हिस्से में लिखा गया था तथा इसका तेलुगू संस्करण 1300 ई° के बाद का है।

नारद पुराण

नारद पुराण या नारदीय पुराण अट्ठारह महुराणों में से एक पुराण है। यह स्वयं महर्षि नारद के मुख से कहा गया एक वैष्णव पुराण है। महर्षि व्यास द्वारा लिपिबद्ध किगए १८ पुराणों में से एक है। नारदपुराण में शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, और छन्द-शास्त्रोंक ...

परीक्षित २

सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वमेधदत्त अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | ...

बृहत्कर्मन्

परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव बृहद्रथ | वसुदान |शत्निक बुद्ध कालीन| वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | ...

ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण वेदमार्ग का दसवाँ पुराण है। अठारह पुराणों में प्राचीनतम पुराण ब्रह्मवैवर्त पुराण को माना गया है। इस पुराण में जीव की उत्पत्ति के कारण और ब्रह्माजी द्वारा समस्त भू-मंडल, जल-मंडल और वायु-मंडल में विचरण करने वाले जीवों के जन्म और ...

महासेन

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस् अधिसीमकृष्ण | निचक्षु ...

युग पुराण

युग पुराण सबसे पुराना पुराण है। इसका रचना काल २५० ई के आसपास आँका गया है। इसमें दो अध्याय हैं जो गार्गी संहिता के भाग हैं। इसमें पर विदेशियों द्वारा दूसरी और पहली शताब्दी ईसापूर्व में भारत पर आक्रमणों का वर्णन है।

विष्णुधर्मोत्तर पुराण

विष्णुधर्मोत्तर पुराण एक उपपुराण है। इसकी प्रकृति विश्वकोशीय है। कथाओं के अतिरिक्त इसमें ब्रह्माण्ड, भूगोल, खगोलशास्त्र, ज्योतिष, काल-विभाजन, कूपित ग्रहों एवं नक्षत्रों को शान्त करना, प्रथाएँ, तपस्या, वैष्णवों के कर्तव्य, कानून एवं राजनीति, युद्ध ...

वीरजित्

परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस् उदयन | अहेनर | निरमित ...

सत्यजित्

सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | बृहद्रथ | वसुदान |शत्निक बुद्ध कालीन| वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | ...

सुकृत्त

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सुनेत्र

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस् बृहद्रथ | वसुदान |शत् ...

सुमति

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस् सुखीबल | परिप्लव | सु ...

हैहय राजवंश

हैहय पुराणों में वर्णित भारत का एक प्राचीन राजवंश था। हरिवंश पुराण के अनुसार हैहय, सहस्राजित का पौत्र तथा यदु का प्रपौत्र था। श्रीमद्भागवत महापुराण के नवम स्कंध में इस वंश के अधिपति के रूप में अर्जुन का उल्लेख किया गया है।पुराणों में हैहय वंश का ...

आचार्य मम्मट

आचार्य मम्मट संस्कृत काव्यशास्त्र के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में से एक समझे जाते हैं। वे अपने शास्त्रग्रंथ काव्यप्रकाश के कारण प्रसिद्ध हुए। कश्मीरी पंडितों की परंपरागत प्रसिद्धि के अनुसार वे नैषधीय चरित के रचयिता श्रीहर्ष के मामा थे। उन दिनों कश्म ...

डॉ मंडन मिश्र

आठवीं शताब्दी के दार्शनिक मण्डन मिश्र के लिये वहाँ जाएँ। डॉ मंडन मिश्र ७ जून १९२९ - १५ नवम्बर, २००१ संस्कृत के प्रसिद्ध पण्डित थे जिन्होने श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ की स्थापना की। सन् २००० में उन्हें पद्मश्री से सम्मानि ...

भरत मुनि

भरत मुनि ने नाट्य शास्त्र नामक ग्रंथ लिखा । इनका समय विवादास्पद हैं। इन्हें 400 ई॰पू॰ 100 ई॰ सन् के बीच किसी समय का माना जाता है। भरत बड़े प्रतिभाशाली थे। इतना स्पष्ट है कि भरतमुनि नाट्यशास्त्र के गहन जानकाऔर विद्वान थे । इनके द्वारा रचित ग्रंथ न ...

महिमभट्ट

महिमभट्ट संस्कृत काव्यशास्त्र के प्रमुख आचार्य हैं। ये अपने शास्त्रग्रंथ व्यक्तिविवेक के कारण प्रसिद्ध हुए। काव्यशास्त्र में ध्वनि के खण्डनकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनका ग्रंथ ‘व्यक्तिविवेक’ काव्य शास्त्र के इतिहास में मील का पत्थर है।

रुद्रट

रुद्रट अलंकार संप्रदाय के प्रमुख आचार्य। इन्होंने अलंकार शास्त्र के सिद्धांतों की विस्तृत एवं वैज्ञानिक दृष्टि से विवेचना की है। काव्यालंकार नामक ग्रन्थ के रचयिता संस्कृत साहित्य के एक प्रसिद्ध आचार्य जो रुद्रभ और शतानंद भी कहलाते थे।

अचलसिंह

अचलसिंह एक संस्कृत कवि थे जिनका जीवनकाल १२वीं शताब्दी या उससे पूर्व है। उनके श्लोक अनेकों ग्रन्थों मिलते हैं।

अमरु

अमरु संस्कृत के महान कवियों में से एक हैं। इनकी रचना अमरूशतक प्रसिद्ध है। इनका कोई अन्य काव्य उपलब्ध नहीं है और केवल इस एक ही सौ पद्यों के काव्य से ये सहृदयों के बीच प्रसिद्ध हुए हैं। सुभाषितावलि के विश्वप्रख्यातनाडिंधमकुलतिलको विश्वकर्मा द्वितीय ...

अश्वघोष

अश्वघोष, बौद्ध महाकवि तथा दार्शनिक थे। बुद्धचरितम् इनकी प्रसिद्ध रचना है। कुषाणनरेश कनिष्क के समकालीन महाकवि अश्वघोष का समय ईसवी प्रथम शताब्दी का अन्त और द्वितीय का आरम्भ है।

आर्यशूर

आर्यशूर संस्कृत के प्रख्यात बौद्ध कवि। साधारणत: ये अश्वघोष से अभिन्न माने जाते हैं, परंतु दोनों की रचनाओं की भिन्नता के कारण आर्यशूर को अवश्घोष से भिन्न तथा पश्चाद्वर्ती मानना ही युक्तिसंगत है। इनके प्रसिद्ध ग्रंथ जातकमाला की प्रख्याति भारत की अप ...

गंगादेवी

गंगादेवी चौदहवीं शती ई. की एक प्रख्यात कवयित्री एवं राजकुमारी थीं। वे विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक बुक्क की पुत्रवधू और कृष्ण की पट्टमहिषी थीं। उन्होंने संस्कृत में मधुराविजयम् नामक एक काव्य की रचना की थी। इसमें उन्होंने अपने पति वीरकंपराय के पर ...

गुमानी पन्त

गुमानी पन्त काशीपुर राज्य के राजकवि थे। वे संस्कृत और हिन्दी के कवि थे। वे कुमाऊँनी तथा नेपाली के प्रथम कवि थे। कुछ लोग उन्हें खड़ी बोली का प्रथम कवि भी मानते हैं। ग्रियर्सन ने अपनी पुस्तक लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया में गुमानी जी को कुर्मांचल प ...