ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 295

प्रेम मन्दिर

प्रेम मंदिर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले के समीप वृंदावन में स्थित है। इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के मन्दिर के रूप में करवाया गया है। प्रेम मन्दिर का लोकार्पण १७ फरवरी को किया गया था। इस मन्दिर के ...

हरि पर्वत

हरि पर्वत भारत के उत्तरतम राज्य जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में डल झील के पश्चिम ओर स्थित है। इस छोटी पहाड़ी के शिखर पर इसी नाम का एक किला बना है जिसका अनुरक्षण जम्मू कश्मीर सरकार का पुरातत्व विभाग के अधीन है। इस किले में भ्रमण हेतु पर्यटकों ...

पीथमपुर के कालेश्वरनाथ

जांजगीर-चांपा जिलान्तर्गत जांजगीर जिला मुख्यालय से 11 कि. मी. और दक्षिण पूर्वी मध्य रेल्वे के चांपा जंक्शन से मात्र 8 कि. मी. की दूरी पर हसदेव नदी के दक्षिणी तट पर पीथमपुर में कालेश्वरनाथ का एक मंदिर है। जांजगीर के कवि श्री तुलाराम गोपाल ने ``िशव ...

नैलायप्पर मंदिर

स्वामी नैलापीपर मंदिर स्वामी नैलायप्पर मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के एक शहर तिरुनेलवेली में स्थित देवता शिव को समर्पित है। शिव को नेलियाप्पार वेणुवननाथ के नाम से भी जाना जाता है को लिंगम द्वारा दर्शाया गया है और उनकी ...

भूत विद्या

भूत विद्या अथवा ग्रह चिकित्सा आयुर्वेद चिकित्सा का एक विभाग है। यह प्रत्यक्ष रूप से अज्ञात कारणों से होने वाले रोगों के निदान के लिए प्रयुक्त किया जाता है। यह मुख्यतः मानव के मानसिक विकारों को ठीक करने के लिए काम में लिया जाता है। आधुनिक शब्दावली ...

मेद धातु

मेद धातु का सारांश 3-प्रमेंहों के पूर्व रूप केश जटिलता 4- मेद का स्‍तर अधिक होना 5-ग्रंथि बृद्धि 2-आर्युहास 1- अति स्‍थूलता 6- गलगन्‍ड 8- मधुमेह के कारण से मोटापा 7- अर्बुद 9- अत्‍यधिक पसीना आना

वेदनाहर

ऐसी सारी ओषधियाँ एवं प्रणालियाँ जिनसे पीड़ा का निवारण हो सकता है, वेदनाहर या पीड़ापहारक analgesic कहलाती हैं। बहुत सी औषधियों में अन्यान्य गुणों के साथ-साथ पीड़ापहरण के गुण भी होते हैं। लेकिन वास्तविक पीड़ापहारक केवल उन्हीं औषधियों को कहते हैं जि ...

पी एस वारियर

वैद्यरत्नम पन्नियिनपल्ली सनकुन्नी वार्यर भारत के आयुर्वेदाचार्य थे। उन्होने आयुर्वैदिक चिकित्सा पद्धति के पुनर्जागरण का अभियान चलाया। उन्होंने आयुर्वेद की शिक्षा और औषधि निर्माण को आधुनिक, सेकुलर और वैज्ञानिक रूप दिया। आज केरल का सबसे बड़ा ब्रांड ...

भाव मिश्र

भाव मिश्र को प्राचीन भारतीय औषधि-शास्त्र का अन्तिम आचार्य माना जाता है। उनकी जन्मतिथि और स्थान आदि के बारे में कुछ भी पता नहीं है किन्तु इतना ज्ञात है कि सम्वत १५५० में वे वाराणसी में आचार्य थे और अपनी कीर्ति के शिखर पर विराजमान थे। उन्होने भावप् ...

चन्द्रप्रभा वटी

चन्द्रप्रभा वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में लाभदायक होती है। "चन्द्रप्रभा वटी आयुर्वेद शास्त्र का एक ऐसा अद्भुत एवं गुणकारी योग है जो आज के युग में स्त्री-पुरुष दोनों वर्ग के लिए, किसी भी आयु में उपयोगी एवं लाभकारी सिद्ध होत ...

द्राक्षासव

द्राक्षासव अंगूर से बनाई जाने वाली एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है। द्राक्षासव है एक कमजोर शराब, क्योंकि अंगूर का रस आमतौपर केवल आंशिक रूप से किण्वित है। यह भी कभी कभी का उपयोग करके तैयार किशमिश ध्यान केंद्रित. टॉनिक का दावा किया है करने के लिए फा ...

पिप्पली

पिप्पली, पाइपरेसी परिवार का पुष्पीय पौधा है। इसकी खेती इसके फल के लिये की जाती है। इस फल को सुखाकर मसाले, छौंक एवं औदषधीय गुणों के लिये आयुर्वेद में प्रयोग किया जाता है। इसका स्वाद अपने परिवार के ही एक सदस्य काली मिर्च जैसा ही किन्तु उससे अधिक ती ...

ताण्ड्य ब्राह्मण

ताण्ड्य ब्राह्मण सामवेद का सर्वप्रमुख ब्राह्मणग्रन्थ है। इसका सम्बन्ध सामवेद की ताण्डि-शाखा से है। इसीलिए इसका नाम ताण्ड्य है। इसमें २५ अध्याय हैं, इसलिए इसे पंचविंश ब्राह्मण भी कहते हैं। विशालकाय होने के कारण इसकी संज्ञा महाब्राह्मण है। इसमें यज ...

तिथियाँ

हिन्दू काल गणना के अनुसार मास में ३० तिथियाँ होतीं हैं, जो दो पक्षों में बंटीं होती हैं। चन्द्र मास एक अमावस्या के अन्त से शुरु होकर दूसरे अमा वस्या के अन्त तक रहता है। अमावस्या के दिन सूर्य और चन्द्र का भौगांश बराबर होता है। इन दोनों ग्रहों के भ ...

अनुराधा नक्षत्र

भारतीय ज्योतिर्विदों ने कुल २७ नक्षत्र माने हैं, जिनमें अनुराधा सत्रहवाँ है। इसकी गिनती ज्योतिष देवगण तथा मध्य नाड़ीवर्ग में की जाती है जिसपर विवाह स्थिर करने मे गणक विशेष ध्यान देते हैं। अनुराधा नक्षत्र मे जन्म का पाणिनि ने अष्टाध्यायी में उल्ले ...

अश्लेषा

आश्लेषा नक्षत्र में जन्मा जातक प्रत्येक कार्य में सफल होता है। आश्लेषा नक्षत्र नौवाँ नक्षत्र है। यह कर्क राशि के अंतर्गत आता है। इसके चरणानुसार नाम डी डू डे डो है। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इन नक्षत्र में जन्म लेने वालों को बुध व चंद्र का प्रभ ...

अश्विनी

नक्षत्रों में सबसे पहला नक्षत्र एक अप्सरा जो बाद में अश्विनी कुमारों की माता मानी जोने लगी सूर्य पत्नी जो कि घोड़ी के रूप में छिपी हुई थी। सूर्य की पत्नी अश्विनी के यमराज पुत्र। जीवन को व्यवस्थित करने के लिए यदि हम अंतरिक्ष का सहारा लेते हैं, ग्र ...

आर्द्रा

आर्द्रा भारतीय ज्योतिष में एक नक्षत्र है। संस्कृत भाषा से आए इस नाम का अर्थ होता है "नम"। आर्द्रा से सम्बन्धित हिंदू मिथक बृहस्पति की दूसरी पत्नी तराका के साथ है। तराका एक असुर है जिसे ब्रह्मा द्वारा अखंडनीयता का वरदान मिला हुआ है। आर्द्रा सताइस ...

उत्तराफाल्गुनी

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र बारहवाँ हैं वहीं इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसका प्रथम चरण सिंह राशि में आता है। अतः इस राशि वालों के सूर्य का दोहरा लाभ मिल जाता है। यह नाम से प्रथम चरण वाला उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। सूर्य प्रधान जातक अत्यंत तेजस्व ...

उत्तराभाद्रपद

उत्तरा भाद्रपद आकाश मंडल में 26वाँ नक्षत्र है। यह मीन राशि के अंतर्गत आता है। इसे दू, थ, झ नाम से जाना जाता है। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी शनि है। वहीं राशि स्वामी गुरु है। शनि गुरु में शत्रुता है। कहीं इनका तालमेल व पंचधामेत्री चक्र में जि ...

उत्तराषाढा

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसका प्रथम चरण भूनाम से धनुराशि में आता है। राशि स्वामी गुरु है तो नक्षत्र स्वामी सूर्य है। सूर्य की दशा में सबसे कम 6 वर्ष की होती है। जो लगभग जन्म से 6 वर्ष के अंदर बीत जाती है। इसके बाद चंद्रमा की 10 वर् ...

कृत्तिका

कृत्तिका वा कयबचिया एक नक्षत्र है। इसका लैटिन/अंग्रेजी में नाम Pleiades है। पृथ्वी से देखने पर पास-पास दिखने वाले कई तारों का इस समूह को भारतीय खगोलशास्त्और हिन्दू धर्म में सप्त ऋषि की पत्नियां भी कहा गया है। कृत्तिका एक तारापुंज है जो आकाश में व ...

चित्रा नक्षत्र

आकाशीय मंडल में चौदहवाँ नक्षत्र है। चित्रा नक्षत्र के देवता त्वष्टा हैं जो एक आदित्य हैं। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण कन्या राशि में आते हैं। पे पो नाम से इस नक्षत्र की पहचान होती है। नक्षत्र स्वामी मंगल राशि स्वामी बुध इन दो ग्रहों का जातक पर विश ...

ज्येष्ठा

ज्येष्ठा नक्षत्र गंड मूल नक्षत्र कहलाता है। यह वृश्चिक राशि में नो या यी यु के नाम से जाना जाता है। राशि स्वामी मंगल व नक्षत्र स्वामी बुध का ऐसे जातकों पर असर देखने को मिलता है। वृश्चिक राशि में जन्मा जातक तुनक मिजाजी, स्फूर्तिवान, स्पष्ट वक्ता व ...

धनिष्ठा

धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरणों में जन्मा जातक गू, गे नाम से जाना जा सकता है। मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है। मंगल का नक्षत्र होने से ऐसे जातक ऊर्जावान, तेजस्वी, पराक्रमी, परिश्रम के द्वारा सफलता पाने वाला होता है। कुंम र ...

धनिष्ठा नक्षत्र

धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरणों में जन्मा जातक गू, गे नाम से जाना जा सकता है। मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है, वहीं राशि स्वामी शनि है। मंगल का नक्षत्र होने से ऐसे जातक ऊर्जावान, तेजस्वी, पराक्रमी, परिश्रम के द्वारा सफलता पाने वाला होता है। कुंम र ...

पुनर्वसु

पुनर्वसु मात्रेयसंहिता के रचयिता एवं आयुर्वेदाचार्य थे। अत्रि ऋषि के पुत्र होने के कारण इन्हें पुनर्वसु आत्रेय कहा जाता है। अत्रि ऋषि स्वयं आयुर्वेदाचार्य थे। अश्वघोष के अनुसार, आयुर्वेद-चिकित्सातंत्र का जो भाग अत्रि ऋषि पूरा नहीं कर सके थे उसे इ ...

पुनर्वसु नक्षत्र

पुनर्वसु हिन्दु ज्योतिष के अनुसार आकाश में स्थित एक नक्षत्र होता है। इसमें दो दीप्तिमान तारे हैं जो मिथुन नक्षत्र मंडल में आते हैं, जिन्हें कैस्टर एवं पॉल्लक्स कहा जाता है। मलयालम भाषा में पुनर्थम और दक्षिण भारत में इसे पुनर्पुषम कहा जाता है।

पुष्य

राशि में 3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक होती है। यह क्रान्ति वृ्त्त से 0 अंश 4 कला 37 विकला उत्तर तथा विषुवत वृ्त्त से 18 अंश 9 कला 59 विकला उत्तर में है। इस नक्षत्र में तीन तारे तीर के आगे का तिकोन सरीखे जान पड़ते हैं। बाण का शीर्ष बिन ...

पुष्य नक्षत्र

पुष्य का अर्थ है पोषण करने वाला, ऊर्जा व शक्ति प्रदान करने वाला. मतान्तर से पुष्य को पुष्प का बिगडा़ रूप मानते हैं। पुष्य का प्राचीन नाम तिष्य शुभ, सुंदर तथा सुख संपदा देने वालाहै। विद्वान इस नक्षत्र को बहुत शुभ और कल्याणकारी मानते हैं। विद्वान इ ...

पूर्वाफाल्गुनी

पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र 11वाँ नक्षत्र है। यह सूर्य की सिंह की राशि में आता है। इसके चारों चरण सिंह में मो टी ट नाम अक्षर से चरणानुसार आते हैं। नक्षत्र स्वामी शुक से इसकी मित्रता नहीं है। सूर्य अग्नितत्व प्रधान है तो शुक्र कला, सौंदर्य, धन का कारक ...

पूर्वाभाद्रपद

गुरु का नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद का अंतिम चरण मीन राशि में आता है। इसे ही नाम से पहचाना जाता है। गुरु का नक्षत्र व गुरु की राशि मीन में होने से ऐसा जातक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी, गुणवान, धर्म, कर्म को मानने वाला, ईमानदार, परोपकारी, न्यायप्रिय होता ...

पूर्वाषाढ़ा

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मंडल का 20वाँ नक्षत्र है। यह धनुराशि में आता है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक है तो राशि स्वामी शुक्र। नक्षत्र स्वामी की सर्वाधिक दशा 20 वर्ष की होती है। इसके बाद सूर्य व चंद्र 16 वर्ष की दशा रहती है। इस नक्षत्र में जितना भी योग्य ...

भरणी

यह एक नक्षत्र है। नक्षत्रों की कड़ी में भरणी को द्वितीय नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। जो व्यक्ति भरणी नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे सुख सुविधाओं एवं ऐसो आराम चाहने वाले होते हैं। इनका जीवन भोग विलास एवं आनन्द में ब ...

मघा

मघा नक्षत्र सूर्य की सिंह राशि में आता है। नक्षत्र स्वामी केतु है, इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है। केतु को राहु का धड़ माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो केतु पृथ्वी का दक्षिण छोर है। केतु प्रधान होने से ऐसे जातक जिद्दी स्वभाव के हो ...

मूल नक्षत्र

मूल नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में आते हैं। यह ये यो भा भी के नाम से जाना जाता है। नक्षत्र का स्वामी केतु है। वहीं राशि स्वामी गुरु है। केतु गुरु धनु राशि में उच्च का होता है व इसकी दशा 7 वर्ष की होती है। इस के बाद सर्वाधिक 20 वर्ष की दशा शुक् ...

मृगशिरा

मृगशिरा या मृगशीर्ष एक नक्षत्र है। वैदिक ज्योतिष में मूल रूप से 27 नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवां है। इस नक्षत्पर मंगल का प्रभाव रहता है क्योंकि इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है।

रेवती (नक्षत्र)

यह एक नक्षत्र है और ३२ तारों का एक समूह है। यह मृदु मॅत्र संज्ञक नक्षत्र है। इस नक्षत्र में विद्या का आरंभ, गृह प्रवेश, विवाह, सम्मान प्राप्ति, देव प्रतिष्ठा, वस्त्र निर्माण इत्यादि कार्य संपन्न किए जाते हैं। इसमें दक्षिण दिशा की यात्रा तथा शव दा ...

रोहिणी नक्षत्र

रोहिणी नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा गया है। इस नक्षत्र में तारों की संख्या पाँच है। भूसे वाली गाड़ी जैसी आकृति का यह नक्षत्र फरवरी के मध्य भाग में मध्याकाश में पश्चिम दिशा की तरफ रात को 6 से 9 बजे के बीच दिखाई देता है। यह कृत्तिका नक्षत्र के ...

विशाखा

विशाखा नक्षत्र का अंतिम चरण मंगल की वृश्चिक राशि में आता है। इसे तो नाम अक्षर से पहचाना जाता है। जहाँ नक्षत्र स्वामी गुरु है तो राशि स्वामी मंगल गुरु मंगल का युतियाँ दृष्टि संबंध उस जातक के लिए उत्तम फलदायी होती हैं। ऐसे जातक उच्च पदों पर पहुँचने ...

शतभिषा

शतभिषा, नक्षत्रों में 24वाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है, इसकी दशा में 18 वर्ष है व कुंभ राशि के अंतर्गत आता है। जहाँ नक्षत्र स्वामी राहु है वहीं राशि स्वामी शनि है। राहु का प्रभाव लगभग शनि वृत ही पड़ता है। कुछ ज्योतिषियों ने इसकी दृष ...

स्वाती (नक्षत्र)

स्वाति नक्षत्र आकाश मंडल में 15वाँ नक्षत्र होकर इसका स्वामी राहु यानि अधंकार है। कहावत भी है कि जब स्वाति नक्षत्र में ओस की बूँद सीप पर गिरती है तो मोती बनता है। दरअसल मोती नहीं बनता बल्कि ऐसा जातक मोती के समान चमकता है। राहु कोई ग्रह नहीं है न ह ...

हस्त नक्षत्र

हस्त नक्षत्र में जन्मा जातक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी होगा हस्त नक्षत्र 13वाँ नक्षत्र है। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। यह पू ष ण ढ प्रथम नाम अक्षर से पहचाना जाता है। नक्षत्र स्वामी चंद्रमा तो राशि कन्या इसका स्वामी बुध है। चंद्र का बुध शत्रु ह ...

आश्विन कृष्ण अष्टमी

हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक महायुग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग आनलाइन पंचाग

आश्विन कृष्ण एकादशी

आनलाइन पंचाग हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम महायुग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस

आश्विन कृष्ण चतुर्थी

हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक आनलाइन पंचाग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम महायुग

आश्विन कृष्ण चतुर्दशी

सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस महायुग आनलाइन पंचाग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग

आश्विन कृष्ण तृतीया

आनलाइन पंचाग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक महायुग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग

आश्विन कृष्ण त्रयोदशी

आनलाइन पंचाग विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग महायुग हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक

आश्विन कृष्ण दशमी

विश्व के सभी नगरों के लिये मायपंचांग डोट कोम आनलाइन पंचाग सॄष्टिकर्ता ब्रह्मा का एक ब्रह्माण्डीय दिवस महायुग विष्णु पुराण भाग एक, अध्याय तॄतीय का काल-गणना अनुभाग हिन्दू पंचांग १००० वर्षों के लिए सन १५८३ से २५८२ तक