ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 294

माँ पीताम्बरा बगलामुखी मंदिर (अमलेश्वर)

माँ पीताम्बरा बगलामुखी मन्दिर छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर में स्थित एक हिन्दू मंदिर है। बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें पीताम्बरा भी कहते हैं। मंदिर रायपुर हवाईअड्डे से १५, रायपुर रेलवे स्टेशन से ५ और दुर्ग शहर से लगभग २५ किलो ...

मातंगी

मतंग शिव का नाम है। इनकी शक्ति मातंगी है। यह श्याम वर्ण और चन्द्रमा को मस्तक पर धारण करती हैं। यह पूर्णतया वाग्देवी की ही पूर्ति हैं। चार भुजाएं चार वेद हैं। मां मातंगी वैदिकों की सरस्वती हैं। पलास और मल्लिका पुष्पों से युक्त बेलपत्रों की पूजा कर ...

कैरौं की महान मस्जिद

कैरौं की महान मस्जिद, जिसे उक़्बा की मस्जिद भी कहा जाता है, जो ट्यूनीशिया के कैरौं में स्थित एक मस्जिद है। जिसे यूनेस्को की विश्व विरासत नगरी का दर्जा दिया गया है, यह उत्तरी अफ्रीका में सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली इस्लामी स्मारक में से एक है। यह ...

सुलैमानी मन्दिर

सुलैमनी मंदिर बर्मा में मिन्नांथु के गाँव में स्थित बौद्ध मंदिर है। इसका निर्माण ११८३ में तत्कालीन राजा नरपेतिसिथु ने करवाया था।

शाओलिन मन्दिर

शाओलिन मन्दिर चीन में स्थित एक बौद्ध मठ है। इसे दुनिया भर में आधुनिक युद्ध कला के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है। चीनी मार्शल आर्ट के लिए प्रसिद्ध हनान प्रांत की तडंफडं काउन्टी में स्थित शाओलिन मंदिर के पश्चिम में ईट-पत्थरों से बना पगोडा समूह ...

गेलुगपा

पूर्वी तिब्बत के अम्दो निवासी छोंखपा और लोझंग रक्पा ने गेलुगपा संप्रदाय की स्थापना की। 1409 ई में मध्य तिब्बत में गदेन मठ की स्थापना की। इस कारण यह संप्रदाय पहले गदेन फिर गदेनपा कहलाने लगा। इस प्रकार यह संप्रदाय 600 वर्ष पुराना हो चुका है। इसका अ ...

जोनंग

जोनंग तिब्बती बौद्ध धर्म के छह मुख्य सम्प्रदायों में से एक है। अन्य पाँच न्यिंगमा, कग्यु, सक्या, गेलुग और बोन हैं। इसका आरम्भ तिब्बत में १२वीं शताब्दी में यूमो मिक्यो दोर्जे ने करा और सक्या सम्प्रदाय में शिक्षित दोल्पोपा शेरब ग्याल्त्सेन नामक भिक ...

सक्या

सक्या तिब्बती बौद्ध धर्म के छह मुख्य सम्प्रदायों में से एक है। अन्य पाँच न्यिंगमा, कग्यु, जोनंग, गेलुग और बोन हैं। इनमें से सक्या, गेलुग और कग्यु को वज्रयान का नवप्रसार या सारमा कहा जाता है, क्योंकि यह तिब्बत में बौद्ध धर्म के फैलाव की द्वितीय शृ ...

चट्टग्राम पहाड़ी क्षेत्र

चट्टग्राम पहाड़ी क्षेत्र, जिसे ऐतिहासिक रूप से सी०ऍच०टी० भी कहते थे, दक्षिणपूर्वी बांग्लादेश में बर्मा की सीमा के साथ स्थित एक क्षेत्र है। यह बांग्लादेश का एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र है और उस देश का एकलौता क्षेत्र है जहाँ मूल रूप से बौद्ध धर्मियों व ...

नाभीस्थान

नाभीस्थान नेपाल के दैलेख जिले में स्थित एक तीर्थस्थल है। नेपाल के प्रख्यात पंचकोशी तिर्थस्थल के पांच मुख्य स्थानों में शामिल यह तीर्थस्थल शिरस्थान मन्दिर से आधा घंटे की पैदल दुरी पर स्थित है।

कटासराज मन्दिर

कटास राज पाकिस्तान के पाकिस्तानी पंजाब के उत्तरी भाग में नमक कोह पर्वत शृंखला में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर है। इसके अतिरिक्त और भी मंदिरों की श्रृंखला है जो दसवीं शताब्दी के बताये जाते हैं। ये इतिहास को ...

पाकिस्तान स्थित हिन्दू मंदिर

साँचा:Col div Shiva Temple former, now a public library-- Mansehra town no longer a temple Krishna Temple old--Abbottabad destroyed/building no longer exists Krishna Temple, Haripur destroyed Araya Temple, Nawanshehr area, Abbottabad ruined Shiv ...

कांताजी मंदिर, दिनाजपुर

कांताजी मंदिर बांग्लादेश के दिनाजपुर में स्थित एक उत्तर मध्यकालीन हिंदू मंदिर है। इस मंदिर के आराध्य देवता भगवान कृष्ण हैं। बंगाल के कृष्ण-भक्त राधा-माधव संप्रदाय का यह प्रमुख मंदिर है, अठारहवीं सदी के शिल्प और स्थापत्य का बेजोड़ नमूना है।

ढाकेश्वरी मन्दिर

ढाकेश्वरी मन्दिर ढाका नगर का सबसे महत्वपूर्ण मन्दिर है। इन्हीं ढाकेश्वरी देवी के नाम पर ही ढाका का नामकरण हुआ है। भारत के विभाजन से पहले तक ढाकेश्वरी देवी मन्दिर सम्पूर्ण भारत के शक्तिपूजक समाज के लिए आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र था। 12वीं शताब्दी ...

भवानीपुर शक्तिपीठ

भवानीपुर शक्तिपीठ बांग्लादेश के राजशाही डिवीजन के बोगरा जिले में स्थित है। करातोया नदी के किनारे स्थित इस मंदिर को हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है।

उत्तराखण्ड में पर्यटन और तीर्थाटन

उत्तराखण्ड में पर्यटन और तीर्थाटन इस राज्य में आय का प्रमुख स्रोत और यहाँ की अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। उत्तराखण्ड में भारत के कुछ सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं जैसे नैनीताल, मसूरी, देहरादून, कौसानी इत्यादि। इसके अतिरिक्त ...

बातू गुफाएँ

बातू गुफाएँ मलेशिया के गोम्बैक जिले में स्थित एक चूना पत्थर की पहाड़ी है जिसमें गुफ़ाओं व गुफा मंदिरों की शृंखलाएँ हैं। यह पहाड़ी मलेशिया की राजधानी क्वालालम्पुर से 13 किलोमीटर दूर है। इसका यह नाम इसे पहाड़ी के पीछे बहने वाली बातू नदी से मिला है, ...

महालसा नारायणी मन्दिर

महालसा को मोहिनी के साथ पहचाना जाता है, जो भगवान विष्णु का एक स्त्री-अवतार थीं। महालसा के चार हाथ है जो एक त्रिशूल, एक तलवार, एक कटा हुआ सिर, और एक पीने का पात्र धारण किए होते हैं। वह प्रणाम की मुद्रा-युक्त एक दानव या पुरुष के ऊपर खड़ी होती हैं, ...

डेरा बाबा मुराद शाह

डेरा बाबा मुराद शाह जी एक सूफ़ियाना दरबार है जो नकोदर, जालंधर जिला, पंजाब, भारत में स्थित है।दरबार प्रेम का प्रतीक है और सभी जातियों और धर्मों के लोग इस दरबार में आते हैं और उनको सम्मान देते हैं।

महाराष्ट्र में धर्म

महाराष्ट्र में धर्म धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं की विविधता से चिन्हित होता हैं। महाराष्ट्र में दुनिया के छः प्रमुख धर्म हैं; अर्थात् हिंदू धर्म, इस्लाम, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, ईसाई धर्म और सिख धर्म। महाराष्ट्र के पूरे इतिहास में, धर्म राज्य की सं ...

श्रीमद्भगवद्गीता

कुरुक्षेत्र की भूमि में श्रीकृष्ण ने जो उपदेश दिया था वह श्रीमद्भगवदगीता के नाम से प्रसिद्ध है। यह महाभारत के महाभारत के पर्व का अंग है। जैसा गीता के शंकर भाष्य में कहा है- तं धर्मं भगवता यथोपदिष्ट वेदव्यासः सर्वज्ञोभगवान् गीताख्यैः सप्तभिः श्लोक ...

प्रतिविन्ध्य

प्रतिविन्ध्य महाभारत के चरित्र द्रौपदी और युधिष्ठिर का पुत्र था। १८ वें दिन युद्ध समाप्त होने के पश्चात रात्री में शतानीक और उसके अन्य भाईयो का अश्वत्थामा ने सोते समय वध कर दिया था।

शतानीक

शतानीक महाभारत के चरित्र द्रौपदी और भीम का पुत्र था। उसने कुरुसेना के बहुत से योद्धाओं को परास्त किया और अपने भाईयों के साथ मिलकर भूरिश्रवा के बहुत से भाईयों और, दुर्योधन, दु:शासन और अन्य कौरवों के पुत्रों का वध किया। १८ वें दिन युद्ध समाप्त होने ...

अयोध्याकाण्ड

अयोध्याकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग है। राम के विवाह के कुछ समय पश्चात् राजा दशरथ ने राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवता लोगों को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का वध असम्भव हो ...

अरण्यकाण्ड

अरण्यकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग है। कुछ काल के पश्चात राम ने चित्रकूट से प्रयाण किया तथा वे अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे। अत्रि ने राम की स्तुति की और उनकी पत्नी अनसूया ने सीता को पातिव्रत धर्म के ...

उत्तरकाण्ड

स्रोतहीन}} उत्तरकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग काण्ड या सोपान है। उत्तरकाण्ड राम कथा का उपसंहार है। सीता, लक्ष्मण और समस्त वानर सेना के साथ राम अयोध्या वापस पहुँचे। राम का भव्य स्वागत हुआ, भरत के स ...

किष्किन्धाकाण्ड

किष्किन्धाकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग है। राम ऋष्यमूक पर्वत के निकट आ गये। उस पर्वत पर अपने मंत्रियों सहित सुग्रीव रहता था। सुग्रीव ने, इस आशंका में कि कहीं बालि ने उसे मारने के लिये उन दोनों वी ...

बालकाण्ड

बालकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग है। अयोध्या नगरी में दशरथ नाम के राजा हुये जिनकी कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा नामक पत्नियाँ थीं। संतान प्राप्ति हेतु अयोध्यापति दशरथ ने अपने गुरु श्री वशिष्ठ की आज् ...

लंकाकाण्ड

लंकाकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग है। जाम्बवन्त के आदेश से नल-नील दोनों भाइयों ने वानर सेना की सहायता से समुद्पर पुल बांध दिया। श्री राम ने श्री रामेश्वर की स्थापना करके भगवान शंकर की पूजा की और स ...

सुन्दरकाण्ड

सुंदरकाण्ड मूलतः वाल्मीकि कृत रामायण का एक भाग है। गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस तथा अन्य भाषाओं के रामायण में भी सुन्दरकाण्ड उपस्थित है। सुन्दरकाण्ड में हनुमान जी द्वारा किये गये महान कार्यों का वर्णन है। रामायण पाठ में सुन्दरकाण्ड के ...

आद्या कात्यायिनी मंदिर, दिल्ली

छतरपुर मन्दिर दिल्ली के दक्षिण में स्थित एक मन्दिर है। इसका वास्तविक नाम श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मन्दिर है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा मन्दिर परिसर है। यह मन्दिर देवी कात्यायनी को समर्पित है। इस मन्दिर की स्थापना बाबा सन्त नागपाल जी द्वारा ...

जगन्नाथ मंदिर, त्यागराजनगर, दिल्ली

यह मंदिर त्यागराज नगर में स्थित है। इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में आते हैं: आई एन ए कालोनी प्रेम नगर विकास सदन, दिल्ली विकास प्राधिकरण का कार्यालय, लक्ष्मीबाई नगर दिल्ली हाट लोधी कालोनी कोटला मुबारकपुर साउथ एक्स्टेंशन किदवई नगर

जगन्नाथ मंदिर, हौज खास, दिल्ली

यह मंदिर त्यागराज नगर में स्थित है। इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में आते हैं: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली ग्रीन पार्क विस्तार लक्ष्मीबाई नगर हौज खास यूसुफ सराय बाहरी रिंग मार्ग, दिल्ली सअदरजंग डवलपमेंट एरिया ग्रीन पार्क

झंडेवाली देवी मंदिर, दिल्ली

झंडेवाली देवी मंदिर दिल्ली के पहाड़गंज और झंडेवालान क्षेत्रों के बीच स्थित है। यह एक बड़ा और मान्यता वाला हिन्दू मंदिर है। यहां नवरात्रि के पर्व पर अत्यधिक श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

नई दिल्ली काली बाड़ी मंदिर

काली बाड़ी मंदिर दिल्ली के बिड़ला मंदिर के निकट स्थित एक हिन्दू बंगाली समुदाय का मन्दिर है। यह छोटा-सा मंदिर काली मां को समर्पित है। नवरात्रि के दौरान यहां भव्य समारोह आयोजित किया जाता है। काली मां को देवी दुर्गा का ही रौद्र रूप माना जाता है। इस ...

लक्ष्मी नारायण मंदिर, दिल्ली

लक्ष्मी नारायण मंदिर बिड़ला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण १९३८ में हुआ था और इसका उद्घाटन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था। बिड़ला मंदिर अ ...

अलौकिक ड्रामा

अलौकिक ड्रामा या अलौकिक नाटक फैंटेसी का उप-प्रकार है जिसमें अलौकिक गल्प व ड्रामा के तत्वों का संयोजन होता है। यह शैली भूत और अन्य असाधारण विषयों के साथ संबंधित है, लेकिन हॉरर शैली के साथ संबद्ध रखने वाले स्वर और भय के बिना। अलौकिक ड्रामा की कहानी ...

पंचानन भट्टाचार्य

पंचानन भट्टाचार्य भारत के एक योगी थे। वे लाहिड़ी महाशय के शिष्य थे। लाहिड़ी महाशय ने उनको ही सबसे पहले क्रिया योग की शिक्षा देने के लिये अधिकृत किया था। उन्होने आर्य मिशन नामक सम्स्था बनाकर लाहिड़ी महाशय की शिक्षाओं का बंगाल में प्रचार-प्रसार किया।

बाबा हरि दास

बाबा हरि दास एक योगगुरु तथा धर्म और मोक्ष के व्याख्याकार हैं। उन्होने अष्टाङ्ग योग की पारम्परिक शिक्षा ग्रहण की हुई है। इसके अलावा वे क्रियायोग, आयुर्वेद, सांख्य, तंत्रयोग, वेदान्त तथा संस्कृत के विद्वान हैं।

स्वामी कुवलयानन्द

स्वामी कुवलयानन्द योग पर वैज्ञानिक अनुसंधान के अग्रदूत थे। उन्होने १९२० के दशक में योग पर वैज्ञानिक अनुसंधान प्रारम्भ किया और योग के अध्ययन के लिये १९२४ में योग मीमांसा नामक प्रथम वैज्ञानिक जर्नल प्रकाशित किया। १९२४ में ही उन्होने कैवल्यधाम स्वास ...

कुर्शा मठ

करशा मठ या करशा गोम्पा उत्तरी भारत में जम्मू और कश्मीर राज्य के ज़ांस्कर क्षेत्र के पद्म घाटी में बौद्ध मठ है। डोडा नदी मस्तिष्क से अपने स्रोत से पेंसी ला) के ड्रांग ड्रुंग ग्लेशियर में बहती है। यह अनुवादक, फाग्स्पा शेश्रब द्वारा स्थापित किया गया ...

कोरोजोक मठ

कोरोजोक, ड्रुपा वंशावली से संबंधित एक तिब्बती बौद्ध मठ है। यह कोरोजोक गांव में स्थित है, लेह जिला, लद्दाख, भारत में त्सो मोरीरी के उत्तर-पश्चिमी बैंक पर स्थित है। 4.560 मीटर में गोम्पा, एक शाकमुनी बुद्ध और अन्य मूर्तियां रखता है। यह लगभग 70 भिक्ष ...

तकथोक मठ

तकथोक मठ या थगथोग मठ भारत के लद्दाख़ क्षेत्र के लेह ज़िले की लेह तहसील के सक्ती गाँव में स्थित एक तिब्बती बौद्ध मठ है। यह लेह से ४६ किमी पूर्व में है। इसके नाम का अर्थ "पत्थर की छत" है क्योंकि इसकी दीवारें और छत दोनों पत्थर के बने हैं। यह लद्दाख़ ...

रुमटेक मठ

रुमटेक मठ सिक्किम की राजधानी गान्तोक के निकट स्थित एक बौद्ध बिहार है। इसे धर्मचक्र केन्द्र भी कहते हैं।

सस्पोल गुफाएँ

सस्पोल गुफाएँ भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के लेह ज़िले में सस्पोल बस्ती के पीछे स्थित पहाड़ों में कुछ गुफाएँ हैं। इनमें चित्रकारी वाले पाँच मंदिर बने हुए हैं, जिनमें से दो बहुत हद तक टूटफूट गए हैं। यह स्थानीय लिकिर मठ की देखरेख में हैं। एक गुफा ...

गजानन महाराज

गजानन महाराज Shegaon, महाराष्ट्र, भारत भारत के सुप्रसिद्द संतों में से एक संत है। संत गजानन महाराज संस्थान विदर्भ क्षेत्र में सबसे बड़ा मंदिर ट्रस्ट है। गजान महाराज को तिहा प्ररथाम बंकट लाल ने शे गाव मे देखा था| बंकट लाल तत पश्यात गजान महाराज के ...

राजा हरिश्चन्द्र

राजा हरिश्चंद्र अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे जो सत्यव्रत के पुत्र थे। ये अपनी सत्यनिष्ठा के लिए अद्वितीय हैं और इसके लिए इन्हें अनेक कष्ट सहने पड़े। ये बहुत दिनों तक पुत्रहीन रहे पर अंत में अपने कुलगुरु वशिष्ठ के उपदेश से इन्होंने वरुणदे ...

देव राय द्वितीय

देवराय द्वितीय, संगम राजवंश से विजयनगर साम्राज्य के एक सम्राट थे। देवराय द्वितीय संगम वंश का सबसे प्रतापी राजा था। वे संभवतः संगम राजवंश के महानतम सम्राट थे और उन्होंने कुछ समकालीन प्रसिद्ध कन्नड़ तथा तेलुगु कवियों को संरक्षण प्रदान किया। लक्कना ...

कुन्दन लाल सहगल

कुन्दन लाल सहगल हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध गायक-अभिनेता थे। इन्हें हिंदी फिल्म उद्योग जो तत्कालीन समय के दौरान कोलकाता में केंद्रित था, का पहला सुपरस्टार माना जाता था। वर्ष २०१८ में उनके ११४वें जन्मदिन के अवसर को गूगल ने डूडल बना कर मनाया।

एकांतिक

एकांतिक वैष्णव संप्रदाय का प्राचीन नाम है। वैष्णव संप्रदाय को प्राचीन काल में अनेक नामों से पुकारते थे जिनमें भागवत, सात्वत तथा पांचरात्र नाम विशेष विख्यात हैं। एकांतिक भी इसी का अपर पर्याय है। पद्मतंत्र नामक पांचरात्र संहिता का यह वचन प्रमाण के ...