ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 24

ग्वालियर लाइट रेलवे

ग्वालियर लाइट रेलवे या महाराजा रेलवे एक 2 फीट नैरो-गेज रेलवे है जो ग्वालियर में चलती है। यह ब्रिटिश काल में ग्वालियर राज्य के लिए स्थापित की गई थी।

सिद्धांचल गुफाएँ

सिद्धांचल गुफाएँ जैन गुफा स्मारक और मूर्तियाँ हैं, उत्तरी मध्य प्रदेश में ग्वालियर किले की उरवई घाटी के अंदर चट्टान की ओर बनी हुई हैं। ग्वालियर किले की पहाड़ी के पत्थर पर 5 जगह नक्काशी की गई है, जिनमें से सिद्धांचल सबसे अधिक लोकप्रिय है। इनका निर ...

ओरछा किला

यह मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित है। यह बेतवा नदी और जामनी नदी के संगम से एक छोटा सा द्वीप बना है। इसके पूर्वी भाग में बाजार से शहर में आने के लिए ग्रेनाइट पत्थर से पुल बनाया गया है। निवाड़ी नगर से लगभग 27 किलोमीटर दूर ओरछा नगर स्थित है। ...

गोहद का किला

गोहद का क़िला मध्य प्रदेश के भिंड ज़िले के गोहद तहसील में स्थित एक दुर्ग या किला है। यह ऐतिहासिक स्थल राज्य के पर्यटन आकर्षणों में से एक है। इस किले का निर्माण जाट राजा महासिंह ने १६वीं शताब्दी में करवाया था। वर्तमान में गोहद दुर्ग जीर्ण-शीर्ण अव ...

ग्वालियर का क़िला

ग्वालियर दुर्ग ग्वालियर शहर का प्रमुखतम स्मारक है। ग्वालियर दुर्ग का निर्माण बघेल शासक सूरजसेन ने किया बघेल शासकों ने ग्वालियर पर लगभग 1000 साल तक शासन किया। यह किला गोपाचल नामक पर्वत पर स्थित है। किले के पहले राजा का नाम सूरज सेन था, जिनके नाम क ...

चंदेरी दुर्ग

चन्देरी दुर्ग मध्य प्रदेश के गुना के नजदीक अशोक नगर जिले में स्थित है। यह दुर्ग आज भी राजपूतों के शौर्य और क्षत्राणियों के जौहर की गाथा गाता है। इतिहास प्रसिद्ध चंदेरी का युद्ध 1528 ई. को मुग़ल शासक बाबर एवं राजपूतों के मध्य लड़ा गया था। उस समय य ...

कैस्टेला दे अगुआड़ा

कास्टेल्ला दे अगुआड़ा, जिसे बांद्रा किले के नाम से भी जाना जाता है, मुम्बई में बांद्रा क्षेत्र में स्थित एक दुर्ग है। कास्टेल्ला, पुर्तगाली शब्द कैस्टेलो का अपभ्रंश रूप है। इसका सही नाम कैस्टेलो दे अगुआड़ा होना चाहिये, किन्तु इसके निर्माताओं द्वा ...

मज़गाँव

मज़गाँव या माझगाव भारत के महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई नगर का एक मुहल्ला है। यह दक्षिण मुम्बई में स्थित है। आधुनिक मुम्बई १८वीं शताब्दी तक सात द्वीपों में बंटा हुआ था जिन्हें जोड़कर आधुनिक नगर का निर्माण किया गया। मज़गाँव मुम्बई के इन सात द्वीपों म ...

उदयपुर के सज्जन सिंह

महाराणा सज्जन सिंह के भारतीय हिन्दू उदयपुर रियासत के महाराणा यानी शासक थे। जिन्होंने १८७४ से १८८४ तक शासन किया था। सज्जन सिंह बागोर के शक्ति सिंह के पुत्र थे जिनको पहले चचेरे भाई शम्भू सिंह ने अपनाया था और शम्भू के बाद १८७४ में गद्दी पर बैठे थे। ...

एकलिंगजी

एकलिंग राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित एक मंदिर परिसर है। यह स्थान उदयपुर से लगभग १८ किमी उत्तर में दो पहाड़ियों के बीच स्थित है। वैसे उक्त स्थान का नाम कैलाशपुरी है परन्तु यहाँ एकलिंग का भव्य मंदिर होने के कारण इसको एकलिंग जी के नाम से पुकारा ...

माधो सिंह प्रथम

जयपुर राज्य के महाराजा सवाई माधोसिंह प्रथम प्रमुख महाराजा थे। ये 7 फीट लम्बे व 4 फीट चौङे थे। राजस्थान के सवाई माधोपुर शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह ने 1765 ईस्वी के लगभग की थीं। सवाई माधोसिंह प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शह ...

अमर सिंह द्वितीय

मेवाड़, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे।अमर सिंह अमर सिंह के नाम से भी जाना जाता है 1698 में और 1710 में उनकी मृत्यु के साथ उनका राज्य काल समाप्त हुआ। उन के शासनकाल में मुगल अपनी शक्तियों को खो दिया मुगलों ने और इसे उन्हें स्वतंत्र होने का ...

अमर सिंह प्रथम

राणा अमर सिंह मेवाड़ के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। वे महाराणा प्रताप के पुत्र तथा महाराणा उदयसिंह के पौत्र थे। महाराणा अमर सिंह प्रथम का निधन चार सौ साल पहले 26 जनवरी, 1620 को हुआ। महा सतियाँ आहड़ में बनी छतरियों में पहली छतरी महाराणा अमर सिंह प ...

उदयसिंह प्रथम

उदयसिंह प्रथम इन्हें कभी-कभी उदयकरण या उदाह या ऊदा के नाम से भी जाने जाते थे और ये एक मेवाड़ साम्राज्य के महाराणा थे । ये महाराणा कुम्भा के पुत्र थे। जब राणा कुंभा एकलिंगजी की प्रार्थना कर रहे थे, उदय सिंह प्रथम ने उनकी हत्या कर दी और खुद को शासक ...

कल्ला जी राठौड़

वीर कल्ला जी राठौड जन्म वीर कल्ला जी राठौड़ का जन्म १५४४ ई. में आश्विन शुक्ल अष्टमी वि.सं.१६०१ को सामियाना गांव मेडता, नागौर में हुआ था। इनके पिता का नाम आसशिंह राठौड़ था। ये जयमल मेड़तिया तथा मीरा बाई के भतीजे थे। परिचय ये राजस्थान के प्रमुख लोक ...

जगत सिंह प्रथम

मेवाड, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। इन्होंने पिछोला झील में जगमन्दिर महल का निर्माण करवाया था तथा जगदीश मन्दिर बनवाया इन्होने मन्दिर में जगन्नाथ राय प्रशस्ती लगवाईं। इन्होंने मोहन मन्दिर व स्वरूप तालाब बनवाया।

भूपाल सिंह

करेड़ा से भूपालसागर नामकरण #महाराणा भूपालसिंह जी मेवाड़ जन्म 22 फरवरी 1884 मोक्ष- 4 जुलाई 1955 स्थान-उदयपुर रियासत समय -1930-1955 शिशौदिया राजवंश पिता- फतेहसिंह जी मेवाड़ उत्तराधिकारी-भगवंत सिंह जी मेवाड़ 28 जुलाई 1 9 21 को, मेवाड में कुछ सामाजिक ...

महाराणा फतेह सिंह

मेवाड, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। महाराणा फतेह सिंह:- -1911 ई.मे जॉर्ज पंचम के भारत आगमन पर फतेहसिंह दिल्ली दरबार मे शामिल होने के लिए दिल्ली गए परन्तु केशरी सिंह बारहट द्वारा लिखित चेतावनी रा चुगठीया पढ़कर दिल्ली दरबार मे शामिल हुए ...

मेवाड़ के जय सिंह

मेवाड, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। महाराणा राजसिंह के बाद उनके पुत्र जयसिंह का राज्याभिषेक कुरज गाव मे हुआ ।उन्होंने जयसमंद झील का निर्माण करवाया जिसे ढेबर झील भी कहते है ।इस झील पर दो बड़े टापू है जिन्हें बाबा का मगरा और प्यारी कहते ...

मेवाड़ के भीम सिंह

मेवाड, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। वह महाराणा अरी सिंघ द्वितीय के पुत्और महाराणा हमीर सिंह द्वितीय के छोटे भाई थे। दस साल की उम्र में, भीम सिंह अपने भाई, हमीर सिंह द्वितीय, जो एक घाव से 16 साल की उम्र में मृत्यु हो गई थी जब उनके हाथ म ...

मोटा राजा उदयसिंह

सिवाना के कल्याणदास राठौड़ ने उदयसिंह और जहाँगीर को मारने की धमकी दी क्योंकि उदयसिंह ने अपनी बेटी जगत गोसाई का विवाह जहाँगीर के साथ निर्धारित किया था। यह ज्ञान होने के पश्चात् अकबर ने सिवाना पर हमला कर दिया और इसमें कल्याणदास अपने लोगों के साथ वी ...

राज सिंह द्वितीय

मेवाड, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे।इन के शासनकाल में मराठो और उन्होंने सभी राजपूत राजाओं को एकत्रित कर अहमद शाह दुर्रानी को भारत पर आक्रमण करने का न्योता भी दिया था। मराठो ने राजपूताना में भी अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया और इसकी से नार ...

राज सिंह प्रथम

राज सिंह प्रथम मेवाड़ के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। वे जगत सिंह प्रथम के पुत्र थे। उन्होने औरंगजेब के अनेकों बार विरोध किया। राजनगर कांकरोली / राजसमंद के राजा महाराणा राज सिंह जी का जन्म 24 सितंबर 1629 को हुआ। उनके पिता महाराणा जगत सिंह जी और मा ...

राणा मोकल

राणा मोकल मेवाड़ के राणा लाखा तथा रानी हंंसाबाई केे पुत्र थेे | मेवाड़ राज्य की विषय परिस्थितियों का दौर राणा लाखा की मृत्यु के बाद प्रारंभ हो गया | राणा मोकल को परिस्थितियाँ विरासत के रूप में प्राप्त हुई, क्योंकि इनके पिता लाखा का विवाह मारवाड़ ...

राणा रायमल

राणा रायमल मेवाड के राजपूत राजा थे। वे राणा कुम्भा के पुत्र थे। उनके शासन के आरम्भिक दिनों मेम ही मालवा के शासक घियास शाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया किन्तु उसे सफलता नहीं मिली। इसके शीघ्र बाद गियास शाह के सेनापति जफर खान ने मेवाड़ पर आक्रमण किया ...

राणा लाखा

राणा लाखा चित्तौड़,मेवाड़ में सिसोदिया राजपूत राजवंश राजा थेे इनके पिता का नाम राणा क्षेत्र सिंह था। जब राणा लाखा गद्दी पर बैठे,तब मेवाड़ आर्थिक समस्याओं से ग्रसित था, लेकिन लाखा के शासनकाल में ही जावर नामक स्थान पर चाँदी की खान निकल आती है जो की ...

राव गांगा

राव गांगा राठौड़ मारवाड़ जोधपुर के शासक थे। राव गांगा १५०८ ई. राव सूजा की मृत्यु के बाद जोधपुर के शासक बने थे। ये एक वीर राजा थे। राणा सांगा,गांगा के बहनोई थे। १५११ ई. में जब राणा सांगा ने ईडर पर आक्रमण किया तो, गांगा स्वंय सेना सहित उसकी सहायता ...

संग्राम सिंह द्वितीय

मेवाड़, राजस्थान के शिशोदिया राजवंश के शासक थे। इन्होंने उदयपुर में सहेलियों की बाडी बनवाईं तथा वैधनाथ जी का मंदिर। जन्म -24 मार्च, 1690 को। पिता - महाराणा अमर सिंह द्वितीय। शासन काल - 1710ई. से 1734 ई.। इन्होंने उदयपुर में सहेलियों की बाड़ी का न ...

राजा लोने सिंह

लोने सिंह मितौली के शासक थे जिन्होंने १८५७ के प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभायी। इसी कारण वे ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार में कुख्यात अपराधी के रूप में चर्चित हुए। उनका राज्य संयुक्त प्रान्त के मोहम्मदी जनपद के विशाल भू-भाग पर ...

कार्कासोन की एर्मज़ीन्द

कार्कासोन की एर्मज़ीन्द दक्षिण फ्रांस की कुलीन महिला थीं। ये बार्सिलोना, ज़िरोना और ऊज़ोना के काउंट की पत्नी थीं। इनका बार्सिलोना के काउंट रमोन बोर्रेई से विवाह 993 में हुआ, जिनके साथ इनके तीन संताने हुईं। अपने पति की 1017 में मृत्यु के पश्चात 10 ...

मंगल पांडे

मंगल पाण्डेय एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 में भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वोे ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल इंफेन्ट्री के सिपाही थे। तत्कालीन अंग्रेजी शासन ने उन्हें बागी करार दिया जबकि आम हिंद ...

हबर्ट सेसिल बूथ

हुबर्ट सेसिल बूथ एक अंग्रेज इंजीनियर थे, जिन्हें पहले विद्युत् संचालित वैक्यूम क्लीनर बनाने के लिए जाना जाता है । उन्होंने फेरिस पहियों, निलंबन पुलों और कारखानों को भी डिजाइन किया था। बाद में वे ब्रिटिश वैक्यूम क्लीनर और इंजीनियरिंग कंपनी के अध्य ...

कृष्ण मोहन बनर्जी

कृष्ण मोहन बनर्जी एक 1 9वीं शताब्दी के भारतीय विचारक थे जिन्होंने ईसाई विचारों के प्रोत्साहन के जवाब में हिंदू दर्शन, धर्म और नैतिकता पर पुनर्विचार करने का प्रयास किया था। वह खुद ईसाई बन गए और बंगाल क्रिश्चियन एसोसिएशन के पहले अध्यक्ष थे, जिन्हें ...

जॉर्ज ब मैकक्लेनन

जॉर्ज ब्रिंटन मैकक्लेनन अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान संघ के मेजर जनरल थे और १८६४ में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे, जो बाद में न्यू जर्सी के गवर्नर हुएँ। उन्होंने प्रसिद्ध पोटोमैक की सेना संगठित की और संक्षिप्त काल के लिए संघ क ...

राजा हनुमंत सिंह

राजा हनुमंत सिंह कालाकांकर रियासत के तालुकेदार थे। इन्हें अवध के बादशाह ने सन १८४९ में राजा की उपाधि से नवाजा था। राजा हनुमंत ने १८५७ की क्रांति में अपने पुत्र लाल प्रताप सिंह के साथ योगदान दिया था। राजा हनुमत सिंह के छोटे भाई माधव सिंह कालाकार क ...

रतन कुमार नेहरू

रतन कुमार नेहरू अथवा आर के नेहरू भारत के प्रशासनिक कर्मचारी एवं राजदूत थे। वो जवाहर लाल नेहरू के चचेरे भाई थे। वो भारतीय विदेश मंत्रालय के महासचिव रहे और 1950 एवं 60 के दशक में विभिन्न राष्ट्रों के राजदूत भी रहे। 1955 से 1958 तक वो चीन में भारत क ...

अर्कादी गैदार

गैदार १४ वर्ष की आयु में लाल सेना में स्वयंसेवक बनकर आए। १७ वर्ष की आयु में रेजिमेंट के कमांडर हुए। अस्वस्थता के कारण १९२४ में सेना से छुट्टी मिली और साहित्यिक कार्य प्रारंभ किया। महान् देशभक्तिपूर्ण युद्ध के समय गैदार मोर्चों पर गए वहीं फासिस्टो ...

किरण बाला बोरा

किरण बाला बोरा असम, भारत से एक स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता थी। उसे 1930 और 1940 के भारत की स्वतंत्रता में योगदान करने वाले नागरिक अवज्ञा आंदोलनों में उस की भागीदारी के लिए जाना जाता है, जो करती थी।

प्रमोद रंजन चौधरी

प्रमोद रंजन चौधरी एक बंगाली क्रांतिकारी थे। उन्होंने अंग्रेज़ शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी। प्रमोद का जन्म चिट्टागॉन्ग के केलिशहर में हुआ जो अब बंग्लादेश में है। उनके पिता का नाम श्री ईशान चन्द्र चौधरी था। 1920 में शिक्षा के दौरान वह अनुशीलन समि ...

हैंश अल्बर्ट आइंस्टीन

हंस अल्बर्ट आइंस्टीन एक स्विस मूल के अमेरिकी इंजीनियर और शिक्षक, और अल्बर्ट आइंस्टीन और मिलेवा मेरिक का पहला बेटा और दूसरा बच्चा था। वह सबसे अच्छा तलछट परिवहन पर अपने शोध के लिए जाने जाते हैं। हंस अल्बर्ट आइंस्टीन के पत्र जल संसाधन संग्रह और कैलि ...

बिनोय बसु

बिनोय कृष्ण बासु ब्रिटिश ससन के विरुद्ध एक बंगाली स्वतंत्रता सेनानी थे। ब्रिटिश शासन के दौरान इन्होने सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग जिसे आज राइटरस बिल्डिंग के नाम से जाना जाता हैं उस पर हमला किया था।

एलसा आइंस्टीन

USA राष्ट्रीयता Germanअन्य नाम Elsa Lowenthalप्रसिद्धि कारण Being the second wife and cousin of Albert Einsteinधार्मिक मान्यता Jewishजीवनसाथी Max Löwenthal Albert Einstein बच्चे Ilse Lowenthal Einstein Margot Lowenthal Einstein माता-पिता Rudolf E ...

जॉर्ज पंचम

जॉर्ज पंचम प्रथम ब्रिटिश शासक थे, जो विंडसर राजघराने से संबंधित थे। यूनाइटेड किंगडम एवं अन्य राष्ट्रमंडल समूह के महाराजा होने के साथ साथ, जॉर्ज भारत के सम्राट एवं स्वतन्त्र आयरिश राज्य के राजा भी थे। जॉर्ज ने सन 1910 से प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ...

श्रीमाता

श्रीमाता श्री अरविन्द की शिष्या और सहचरी थी। श्रीमाँ फ्रासंसी मूल की भारतीय आध्यात्मिक गुरु थी। हिँदु धर्म लेने से पहलेतक उनका नाम था मीरा अलफासा। उन्हे श्री अरविँद माता कहकर पुकारा करते थे इसलिये उनके दुसरे अनुयायी भी उन्हे श्रीमाँ कहने लगे। मार ...

डोरा जैकोबोसहन

डोरा एलिजाबेथ जैकबसन एक जर्मन-स्वीडिश फिजियोलॉजिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट थी। न्यूरोएंडोक्रिनोलॉजी के क्षेत्र के शुरुआती अग्रदूतों में से एक माना जाता है, वह जेफ्री हैरिस के साथ अपने काम के लिए सबसे ज्यादा जानी जाती है, जिसमें दिखाया गया है कि पूर ...

सफ़दर हाशमी

सफदर हाशमी एक कम्युनिस्ट नाटककार, कलाकार, निर्देशक, गीतकाऔर कलाविद थे। उन्हे नुक्कड़ नाटक के साथ उनके जुड़ाव के लिए जाना जाता है। भारत के राजनैतिक थिएटर में आज भी वे एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सफदर जन नाट्य मंच और दिल्ली में स्टूडेंट्स फेडरेशन ...

लक्ष्मण जू

स्वामि लक्ष्मण जू रैना कश्मीर शैवदर्शन के महान पण्डित थे। उन्हें उनके अनुयायियों द्वारा लाल साहिब के रूप में जाना जाता है जो उन्हें एक साधित संत के रूप में मानते हैं।

मालावत् पूर्ण

मालावत् पूर्ण भारत की पर्वतारोहिणी है जिसने मात्र १३ वर्ष की आयु में २५ मई २०१४ को विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता प्राप्त की। वह इस शिखर तक पहुँचने वाली सबसे युवा महिला है। मालावत पूर्ण का जन्म तेलंगाना के निजामाबाद जिल ...

फ़्रेड हॉयल

सर फ़्रेडेरिक हॉयल 24 जून 1915 - 20 अगस्त 2001 ब्रिटिश खगोलशास्त्री थे जिनके विचार अक्सर मुख्य वैज्ञनिक समुदाय के विपरीत होते थे। इनका काम मुख्यतः ब्रह्माण्डविज्ञान के क्षेत्र में है। इन्होंने तारों के नाभिकों में हो रही नाभिकीय प्रक्रियाओं का अध ...

२००१ में निधन

निम्नलिखित सूची २००१ में निधन हो गये लोगों की है। यहाँ पर सभी दिनांक के क्रमानुसार हैं और एक दिन की दो या अधिक प्रविष्टियाँ होने पर उनके मूल नाम को वर्णक्रमानुसार में दिया गया है। यहाँ लिखने का अनुक्रम निम्न है: नाम, आयु, उल्लेखनीयता का कारण एवं ...