ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 22

समीर सोनी

समीर सोनी ब्रितानी फ़िल्म एवं टेलीविजन अभिनेता तथा पूर्व मॉडल हैं। भारतीय मूल के सोनी ने नेवी अधिकारी पर आधारित धारावाहिक समंदर से अभिनय की शुरूआत की थी। वर्ष १९९६ में उन्होंने दूरदर्शन धारावाहिक ए माउथफुल ऑफ़ स्काई में अभिनय किया। उन्होंने फ़िल् ...

जेठालाल चम्पकलाल गड़ा

जेठालाल चम्पकलाल गड़ा यह तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक का एक किरदार है, जिसे दिलीप जोशी निभा रहें है। ==कार्य यह मुख्यतः अपने दुकान में टीवी, मोबाइल आदि सामान बेचता है। इसके अलावा इसका मुख्य कार्य आत्माराम भिड़े से लड़ाई करना और कृष्णन सुब् ...

दया जेठालाल गड़ा

यह मुख्यतः घर के कार्य करने में व्यस्त रहती हैं। लेकिन कई बार यह गरबा करने में व्यस्त हो जाती हैं। यह अपना बाक़ी समय फ़ोन पर अपनी माँ से बात करने में भी उपयोग करती हैं।

रामनगर, वाराणसी

रामनगर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला का एक तहसील है। रामनगर में एक किला है जिसे रामनगर किला कहते हैं और ये यहां के राजा काशी नरेश का आधिकारिक और पैतृक आवास है। काशी नरेश वाराणसी शहर के मुख्य सांस्कृतिक संरक्षक एवं सभी धार्मिक क्रिया- ...

केसरोली पहाड़ी दुर्ग

केसरोली पहाड़ी दुर्ग 14वीं शताब्दी में बनाया गया एक दुर्ग है जो भारतीय राज्य राजस्थान के अलवर ज़िले में स्थित है। अभी वर्तमान में केसरोली पहाड़ी दुर्ग एक हेरिटेज़ होटल है जिसका संचालन नीमराना होटल समूह कर रहा है।

गढ़कुंडार

गढ़-कुंडार मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित एक गाँव है। इस गाँव का नाम यहां स्थित प्रसिद्ध दुर्ग के नाम पर पढ़ा है। यह किला उस काल की न केवल बेजोड़ शिल्पकला का नमूना है बल्कि उस खूनी प्रणय गाथा के अंत का गवाह भी है, जो विश्वासघात की नींव पर ...

चंद्रगिरि दुर्ग, आंध्र प्रदेश

चंद्रगिरि दुर्ग भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में तिरुपति के निकट चंद्रगिरि नामक स्थान पर स्थित एक दुर्ग है। इसका निर्माण ११वीं शताब्दी में श्रीकृष्ण देवराया द्वारा करवाया गया था। यह किला तीन सौ वर्षों तक देवराया राजवंश के अधिकार में रहा। १३६७ में य ...

चौरागढ़ किला

चौरागढ़ का किला, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर शहर के निकट स्थित है। गोंड शासक संग्राम शाह ने इस किले को 15वीं शताब्दी में बनवाया था। यह किला गाडरवारा रेलवे स्टेशन से लगभग 19 किलोमीटर दूर है। वर्तमान में प्रशासन की उपेक्षा के कारण किला क्षतिग्रस्त अवस ...

जलालगढ़ का किला

जलालगढ का किला, बिहार राज्य के पूर्णिया जिला में जलालगढ़ में स्थित है। यह प्राचीन भग्नावशेष ऐतिहासिक महत्व रखता है। वस्तुत: यह मुगलकालीन सैनिक छावनी है। जलालगढ़ का यह ऐतिहासिक मुगलकालीन किला कब, किसने बनवाया इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। परंतु कुछ ...

तारागढ़ का दुर्ग

तारागढ का दुर्ग राजस्थान में अरावली पर्वत पर स्थित है। इसे राजस्थान का जिब्राल्टर राजसथान कि कुजी भी कहा जाता है। अजमेर शहर के दक्षिण-पश्चिम में ढाई दिन के झौंपडे के पीछे स्थित यह दुर्ग तारागढ की पहाडी पर 700 फीट की ऊँचाई पर स्थित हैं। इस क़िले क ...

नमक्कल किला

नमक्कल का दुर्गम किला या दुर्ग, तमिल नाडु के नमक्कल में स्थित है। संघर्षमय इतिहास का प्रतीक यह किला नामागिरी शिखर पर बना हुआ है। 1769 में अंग्रेजों के नियंत्रण से पहले इस पर मैसूर का अधिकार था। बाद में हैदर अली ने इस किले को कुछ समय के लिए पुन: अ ...

नरवर दुर्ग

नरवर दुर्ग मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर में विन्ध्य वर्वतमाला की एक पहाड़ी पर स्थित है। इसकी ऊँचाई भूस्तर से लगभग ५०० फीट है और यह लगभग ८ वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। कहा जाता है कि १०वीं शताब्दी में जब कछवाहा ने नरवर पर अधिकार कि ...

पद्मदुर्ग किला

वर्तमान समय का कासा किला ही पहले पद्मदुर्ग किला के नाम से जाना जाता था। यह किला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिला मॆं स्थित है। इस किले का निर्माण शिवाजी के उत्तराधिकारी और पुत्र शंभाजी ने सिद्दिकियों के जंजीरा किले के जबाव के रूप में करवाया था। यह किला ...

पलामू के दुर्ग

पलामू में दो दुर्ग हैं जो वर्तमान समय में कुछ जर्जर हो चुके है, लेकिन ये आज भी इस क्षेत्र की शान हैं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र भी। इन किलों को पुराना किला और नया किला कहा जाता है। ये दुर्ग चेरो राजवंश के राजाओं की देन हैं। इस किले क ...

भारतीय दुर्गों की सूची

लखपत वाधवान मांड्वी औरंगज़ेब नो किल्लो, दाहोद कंठकोट दुर्ग ज़िंजुवाड़ा, कच्छ हतगढ़, सतपुरा दाभोई दुर्ग टेड़ा दुर्ग भुजिया दुर्ग अहमदाबाद के किले और द्वार चम्पानेर दुर्ग लिवा दुर्ग, इदर वेरावल पुराना किला, सूरत भद्रा दुर्ग मुन्द्रा पटन भूज धोराजी ...

भीमगढ़ का किला

भीमगढ़ का किला जिसे सामान्यतः रियासी किला भी कहा जाता है, जम्मू से ६४ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में रियासी ग्राम के निकट स्थित एक किला है। पहाड़ी पर बना यह किला लगभग 150 मीटर ऊँचा है।

मझगांव दुर्ग

मझगाँव दुर्ग भारत के राज्य महाराष्ट्र में स्थित एक दुर्ग है जिसका निर्माण तत्कालीन बॉम्बे में १६८० में हुआ था। यह किला वर्तमान के यूसुफ बाप्तिस्ता गार्डन में, भंडारवाड़ा पहाड़ी पर डॉकयार्ड रोड रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित है।

शाही किला, जौनपुर

शाही किला गोमती के बाएं किनारे पर शहर के दिल में स्थित है। शाही किला फिरोजशाह ने १३६२ ई. में बनाया था इस किले के भीतरी गेट की ऊचाई २६.५ फुट और चौड़ाई १६ फुट है। केंद्रीय फाटक ३६ फुट उचा है। इसके एक शीर्ष पर वहाँ एक विशाल गुंबद है। शाही किला में क ...

कोटला का किला (फिरोजाबाद)

कोटला का किला पांच सौ वर्ष पुराने इस किले को कुंवर उमराय सिंह ने सहेजा था। यह एक ऐतिहासिक किला है जो फिरोजाबाद जिले के इतिहास को गौरवान्वित करता है कोटला रियासत के राजा कुंवर उमराय सिंह ने बड़े पुत्र कुशलपाल सिंह को कोटला रियासत का राजा बनाया।किल ...

गंडिकोटा

गंडिकोटा भारत के आंध्र प्रदेश, कडपा जिले के जम्मलामडुगु से 15 किलोमीटर दूर पेन्नेरु नदी के दाहिने किनारे पर एक गांव है। गंडिकोटा कम्मा राजाओं का गढ़ माना जाता है जिन्होंने इस किले पर लगभग 300 वर्षों तक शासन किया था। गंडिकोटा पर शक्तिशाली तेलुगू र ...

चित्रदुर्ग (किला)

चित्रदुर्ग के किले का इतिहास सम्भवतः १५वीं शताब्दी के अंत से १८वीं शताब्दी के प्रारम्भ के बीच का है। इस किले को किसने बनवाया, इसके कोई प्रामाणिक ऐतिहासिक श्रोत नहीं हैं। इतिहासकार इस पर एकमत हैं कि उस कालखण्ड में जो भी उस क्षेत्र का अधिपति रहा उस ...

जिंजी दुर्ग

जिंजी दुर्ग या सेंजी दुर्ग तमिलनाडु में स्थित एक दुर्ग है। यह दुर्ग विल्लुपुरम जिले में पुद्दुचेरी के पास स्थित है। यह इस प्रकार निर्मित है कि छत्रपति शिवाजी ने इस किले को भारत का सबसे अभेद्य दुर्ग कहा था। अंग्रेजों ने इसे पूरब का ट्रॉय कहा था। ज ...

तलश्शेरी दुर्ग

थलस्सरी क़िला भारत के दक्षिणतम राज्य केरल के कन्नूर शहर में स्थित एक दुर्ग है। यह किला तलश्शेरी कस्बे के तिरूवल्लपद पर्वत बना हुआ है और दक्षिणी कन्नूर से २० किलोमीटर दूरी पर है। तालश्शेरी क़िले का निर्माण ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने १७०८ ई० में ...

बांधवगढ़ का किला

बांधवगढ का किला भारत के मध्यप्रदेश राज्य में हैं।जो उमरिया जिला और शहडोल संभाग में आता हैं। यह किला 2000 बर्ष पहले बनाया गया था। और इस किले का नाम शिवपुराण में मिलता है। इस किले को रीवा के राजा विक्रमादित्य सिंह ने बनबाया था। और किले में जाने के ...

बेकल दुर्ग

केरल के कासरकोड जिले की होसदुर्ग तालुका के पल्लीकेरा ग्राम में स्थित बेकल दुर्ग राज्य का सबसे बड़ा दुर्ग है। ४० एकड़ क्षेत्रफल में फैला ये दुर्ग मंगलौर से लगभग ६५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दुर्ग का निर्माण केलादि के शिवप्पा नायक ने १६५० में क ...

रोहतास दुर्ग

रोहतासगढ़ दुर्ग या रोहतास दुर्ग, बिहार के रोहतास जिले में स्थित एक प्राचीन दुर्ग है। यह भारत के सबसे प्राचीन दुर्गों में से एक है। यह बिहार के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से लगभग 55 और डेहरी आन सोन से 43 किलोमीटर की दूरी पर सोन नदी के बहाव वाली ...

सिंहगढ़

सिंहगढ़, सिंहगड,भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्पर स्थित एक दुर्ग है जो पुणे से लगभग ३० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दुर्ग को पहले कोंढाना के नाम से भी जाना जाता था। यह दुर्ग समुदतल से लगभग ४४०० फूट ऊँचाई पर स्थि ...

हरिशचंद्रगढ़

हरिशचन्द्रगढ़ भारत के अहमदनगर जिले का एक पर्वतीय दुर्ग है। इसका इतिहास मलशेज घाट और कोठाले ग्राम से जुड़ा है। दुर्ग का इनकी एवं निकटवर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा में बड़ा हाथ रहा है।

काशी का विस्तार

मत्स्य पुराण के अनुसार यह क्षेत्र पश्चिम की ओर ढाई योजन तकथा। स्कंद पुराण के अनुसार उस क्षेत्र का विस्तार चारों ओर चार कोस था। लिंग पुराण में इस क्षेत्र का विस्तार कुछ और बढ़ाकर कहा गया है। इसके अनुसार कृतिवास से आरंभ होकर यह क्षेत्र एक-एक कोस चा ...

केदार घाट

कॆदार घाट गंगा किनारे एक बहुत ही रमणीक घाट है। यह घाट विजयानगरम घाट कॆ साथ मॆ है। इसकॆ समीप मॆ चौकी घाट पर शीतल जलधारा निकलती है। यहाँ हररोज शाम को गंगा आरती हॊती है। पंचगंगा नहान का असी घाट के बाद दूसरा नहान का पङाव है। इस घाट पर दक्षिण भारतीयॊ ...

तुलसी घाट

तुलसी घाट का पुराना नाम "लोलार्क घाट" था।यहाँ भगवान सूर्य का मंदिर है,जहाँ संतान प्राप्ति हेतु महिलायें लोलार्क कुंड में स्नान करती है ।संत तुलसी दास जी के नाम पर सोलहवीं सदी इसका नाम बदल दिया। भाद्रपद महिने में यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है। संत त ...

दशाश्वमेघ घाट

यह एक काशी का सुप्रसिद्ध घाट है |हिंदू लोग इसे परम पवित्र मानते हैं | यहीं ब्रह्मा ने दशाश्वमेघ यज्ञों का अनुष्ठान किया था | कहा जाता है की काशी के सुप्रसिद्ध देवदास ने इस स्थान से देवतायों को खदेड़ दिया | तब महादेव ओर पार्वती दोनों ने मंदराचल का ...

दुर्गा कुंड, वाराणसी

बनारस में अस्‍सी रोड से कुछ ही दूरी पर आनन्‍द बाग के पास दुर्गा कुण्‍ड नामका स्थान है। यहां आदि शक्ति का दुर्गा मंदिर भी है। यह मंदिऔर कुंड का निर्माण १८ वी सदीमें बंगाल की महारानी ने करवाया था। यह कुंड पहले गंगा नदी से जूडा हुआ था। माना जाता है ...

नदेसर मस्जिद

नदेसर मस्जिद: ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राचीन व धार्मिक नगरी काशी में कई मस्जिदें ऐसी हैं जिनकी चर्चा हर खास-ओ-आम की जुबान पर रहती है। इनमें नदेसर जामा मस्जिद भी प्रमुख है। इसकी ऊंची मीनार आकर्षण का केंद्र है। इस इलाके से गुजरने वाले प्रत्येक शख्स ...

अन्नपूर्णा मंदिर, वाराणसी

बनारस में काशी विश्‍वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर माता अन्‍नपूर्णा का मंदिर है। इन्‍हें तीनों लोकों की माता माना जाता है। कहा जाता है कि इन्‍होंने स्‍वयं भगवान शिव को खाना खिलाया था। इस मंदिर की दीवाल पर चित्र बने हुए हैं। एक चित्र में देवी कलछी प ...

केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी

बनारस में केदार घाट के पास केदारेश्‍वर मंदिर है। यह मंदिर 17वीं श्‍ाताब्‍दी में औरंगजेब के कहर से बच गया था। इसी के समीप गौरी कुण्‍ड है। इसी को आदि मणिकार्णिका या मूल मणिकार्णिका कहा जाता है। मणिकार्णिका घाट के समीप विष्‍णु चरणपादुका है। इसे मार् ...

मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट वाराणसी में गंगानदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध घाट है। एक मान्यता के अनुसार माता पार्वती जी का कर्ण फूल यहाँ एक कुंड में गिर गया था, जिसे ढूढने का काम भगवान शंकर जी द्वारा किया गया, जिस कारण इस स्थान का नाम मणिकर्णिका पड़ गया। एक द ...

मान मंदिर घाट

मान मंदिर घाट वाराणसी में स्थित एक गंगा घाट है। इस घाट को जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने १७७० में बनवाया था। इसमें नक्काशी अरजा लीदार अलंकृत झरोखे बने हैं। इसके साथ ही उन्होंने वाराणसी में यंत्र मंत्र वेधशाला भी बनवायी थी जो दिल्ली, जयपुर, उज ...

मानमन्दिर घाट

गंगा तट पर बसी एक बहुत ही मनोरम नगरी काशी के सभी घाट रमणीक है। यहाँ कुछ एक घाटों का विशेष महत्व है, जिनमें से मान-मंदिर घाट एक है। इस घाट को जयपुर के महाराजा जय सिंह द्वितीय ने सन॒ १७७० बनवाया था। इन्हें खगोल शास्त्र में विशेष लगाव था, इस कारण इन ...

मीर घाट

काशी भागीरथी गंगा के तट पर एक अद्भुत नगरी है। यहाँ के सभी घाट अत्यंत ही मनोरम है। गंगा तट पर मीर घाट अधिक उल्लेखनीय है, इसी घाट पर शक्ति पीठ विशालाक्षी एवं बाबा विश्वनाथ मंदिर स्थित है, जिसकी स्थापना स्वामी करपात्री ने की थी। संध्या काल में चन्द् ...

लोलार्क कुंड

लोलार्क कुण्ड उत्तर प्रदेश के प्राचीन नगर बनारस में तुलसीघाट के निकट स्थित एक कुण्ड है। मान्यता अनुसार यह अति प्राचीन है तथा इस कुण्ड का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। कालान्तर में इन्दौर की रानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर ने इस कुण्‍ड के चारों तरफ कीम ...

विशालाक्षी मंदिर, बनारस

काशी विश्‍वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर काशी विशालाक्षी मंदिर है। यह पवित्र 51 शक्‍ितपीठों में से एक है। कहा जाता है कि यहां शिव की पत्‍नी सती का आंख गिरा था।

साक्षी गणेश मंदिर, बनारस

साक्षी गणेश मंदिर, वाराणसी में स्थित है। पंचकरोशी यात्रा को पूरा कर तीर्थयात्री साक्षी गणेश मंदिर को देखने जरुर आते हैं। इस मंदिर के दर्शन के बाद ही वे अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।

सिंधिया घाट

सिंधिया घाट जिसे शिन्दे घाट भी कहते हैं, वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के उत्तरी ओर लगा हुआ है। इस घाट का निर्माण १५० वर्ष पूर्व हुआ था और इससे लगा हुआ शिव मंदिर आंशिक रूप से नदी के जल में डूबा हुआ है। इस घाट के ऊपर काशी के अनेकों प्रभावशाली लोगों द ...

हनुमान घाट

काशी के घाटों में "हनुमान घाट" विशेष रूप से साधु-महात्मा लोगों का घाट है। इस घाट के ऊपरी भाग में बहुत ही पुरातन बड़ा हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर में हनुमान जी के अतिरिक्त राम दरबार नवॻह एवं एक अश्व भी स्थापित है, जो राम जी के अश्वमेध विजय के ...

सिकंदरा, आगरा

सिकंदरा आगरा से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण स्थान अकबर का मकबरा है। इसका निर्माण कार्य स्‍वयं अकबर ने शुरु करवाया था। यह मकबरा हिंदू, ईसाई, इस्‍लामिक, बौद्ध और जैन कला का सर्वोत्‍तम मिश्रण है। लेकिन इसके पूरा होने से ...

बैजनाथ, उत्तराखण्ड

बैजनाथ उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में गोमती नदी के किनारे एक छोटा सा नगर है। यह अपने प्राचीन मंदिरों के लिए विख्यात है, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के रूप में मान्यता प्राप्त है। बैजन ...

ओड़िशा में पर्यटन

ओडिशा में पर्यटन, भारत सुंदर स्थानों, विदेशी संस्कृतियों, गर्म और दोस्ताना लोगों का एक अद्वितीय संयोजन है। ५०० किलोमीटर लंबे समुद्र तट, विशाल पर्वतों, शांत झीलों और नदियों के साथ, ओडिशा भारत की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। ओडिशा भारत के प्रमु ...

खण्डगिरि

उड़ीसा में भुवनेश्वर से सात मील दूर पश्चिमोत्तर में उदयगिरि के निकट की पहाड़ी खण्डगिरि कहलाती है। खण्डगिरि का शिखर 123 फुट उँचा है, जो आस-पास की पहाड़ियों में सबसे ऊँचा है। कलिंग नरेश खारवेल का प्रसिद्ध हाथी गुम्फा अभिलेख खण्डगिरि से कुछ ही दूरी ...

गुंडिचा मंदिर

गुंडिचा मन्दिर को गुंडिचा घर के नाम से भी जाना जाता है, यह उड़ीसा राज्य के पुरी शहर का लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है। गुंडिचा मन्दिर भगवान जगन्नाथ मन्दिर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गुंडिचा मन्दिर को कलिंग वास्तुकला में बनाया गया है और भ ...