ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 179

जुरैसिक कल्प

मध्यजीवी महाकल्प के अंर्तगत तीन कल्प हैं, जिनमें जुरैसिक का स्थान मध्य में है। ब्रौंन्यार ने सन्‌ 1829 में आल्प्स पर्वत की जुरा पर्वत श्रेणी के आधापर इस प्रणाली का नाम जुरैसिक रखा। विश्व के स्तरशैल विद्या में इस प्रणाली का विशेष महत्व है, क्योंकि ...

टोनियाई कल्प

टोनियाई कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 100.0 करोड़) वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 85.0 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह नूतनप्राग्जीवी महाकल्प का पहला कल्प था। इस के बाद क्रायोजेनियाई कल्प आरम्भ हुआ और इस से पहले मध्यप्राग्जीवी मह ...

ट्राइऐसिक कल्प

ट्राइएसिक पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 25 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 20 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह मध्यजीवी महाकल्प का सर्वप्रथम कल्प था। इसके बाद जुरैसिक कल्प आया और इस से पहले पुराजीवी का अंतिम कल्प, पर्मियाई कल्प, च ...

डिवोनी कल्प

मत्स्य काल या डिवोनी कल्प भूवैज्ञानिक काल है जो पुराजीवी महाकल्प के सिल्युरी युग के अन्त से आरम्भ होकर) कार्बनी कल्प के आरम्भ तक फैला हुआ है। इस कल्प का नाम इंग्लैण्ड के डेवन प्रदेश के नाम पर पड़ा है जहाँ सबसे पहले इस काल के शैलों का अध्ययन किया ...

नियोजीन कल्प

नियोजीन कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था जो आज से 2.303 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 25.88 लाख वर्ष पहले अंत हुआ। यह दृश्यजीवी इओन के नूतनजीवी महाकल्प का एक कल्प था। इस से पहले पेलोयोजीन कल्प आया और इसके बाद चतुर्थ कल्प आरम्भ हुआ, ...

पर्मियाई कल्प

पर्मियाई कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 29.8 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 25.217 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह पुराजीवी महाकल्प का अंतिम कल्प था। इस से पहले पुराजीवी महाकल्प का सिल्यूरियाई कल्प आया था। पर्मियाई कल्प के अ ...

पेलियोजीन कल्प

पेलोयोजीन पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था जो आज से 6.6 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 2.303 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह दृश्यजीवी इओन के नूतनजीवी महाकल्प का आरम्भिक कल्प था और इसके बाद उसी महाकल्प का नियोजीन कल्प आया। इस से पहले मध्यजीव ...

राएसियाई कल्प

राएसियाई कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 230 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 205 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह पुराप्राग्जीवी महाकल्प का एक कल्प था। इस से पहले साएडेरियाई कल्प चल रहा था और इसके बाद ओरोसिरियाई कल्प आरम्भ हुआ। ...

साएडेरियाई कल्प

साएडेरियाई कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 250 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 230 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह पुराप्राग्जीवी महाकल्प और प्राग्जीवी इओन दोनों का सबसे पहला कल्प था। इसके बाद में राएसियाई कल्प आया। साएडेरियाई ...

सिल्यूरियाई कल्प

सिल्यूरियन एक भूगर्भीय युग एवं प्रणाली का नाम है जो ऑडोविशन कल्प के अन्त से आरम्भ होकर डिवोनी कल्प के आरम्भ तक विस्तृत है। सिल्यूरियन प्रणाली का नामकरण मरचीसन Murchison ने सन्‌ १८३५ में इंग्लैंड के वेल्स प्रांत के आदिवासियों के नाम के आधापर किया। ...

स्टाथेरियाई कल्प

स्टाथेरियाई कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 180 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 160 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह पुराप्राग्जीवी महाकल्प का अंतिम कल्प था। इस से पहले ओरोसिरियाई कल्प चल रहा था और इसके बाद मध्यप्राग्जीवी महाकल ...

स्टेनियाई कल्प

स्टेनियाई कल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक कल्प था, जो आज से 120 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 100 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। यह मध्यप्राग्जीवी महाकल्प का अंतिम कल्प था। इस से पहले एक्टेशियाई कल्प था और इस के बाद नूतनप्राग्जीवी महाकल्प आरम्भ ...

ज्वालामुखीयता

ज्वालामुखीयता पृथ्वी या अन्य किसी स्थलीय ग्रह या प्राकृतिक उपग्रह पर सबसी ऊपरी सतह में बनी दरार या छिद्र से नीचे से पिघले पत्थर या अन्य सामग्री के लावा और गैसों के रूप में उलगाव को कहते हैं। इनमें वह सारी परिघटनाएँ आती हैं जिनमें भूपर्पटी और भूप् ...

इयोआर्कियाई महाकल्प

इयोआर्कियाई महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में आर्कियाई इओन का एक महाकल्प था, जो आज से 400 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 360 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस महाकल्प से पहले हेडियाई इओन चल रहा था और इसके बाद पेलियोआर्कियाई महाकल्प आरम्भ हुआ। इस स ...

नियोआर्कियाई महाकल्प

नियोआर्कियाई महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में आर्कियाई इओन का एक महाकल्प था, जो आज से 280 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 250 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस महाकल्प में ऑक्सीजन प्रकाश-संश्लेषण आरम्भ हुआ, जिसमें कुछ जीव वायुमण्डल में ऑक्सीजन छोड ...

पेलियोआर्कियाई महाकल्प

पेलियोआर्कियाई महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में आर्कियाई इओन का एक महाकल्प था, जो आज से 360 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 320 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। इस महाकल्प से पहले इयोआर्कियाई महाकल्प चल रहा था और इसके बाद मीसोआर्कियाई महाकल्प आरम्भ ...

मीसोआर्कियाई महाकल्प

मीसोआर्कियाई महाकल्प पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में आर्कियाई इओन का एक महाकल्प था, जो आज से 320 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 280 करोड़ वर्ष पहले अंत हुआ। पृथ्वी पर पाये गये सबसे प्राचीन स्ट्रोमैटोलाइट जीवाश्म इसी युग में उत्पन्न हुए थे। पृथ्वी ...

अतिनूतन युग

अतिनूतन युग या प्लायोसीन युग पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास का एक भूवैज्ञानिक युग है जो आज से लगभग 53.33 वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 25.88 लाख वर्ष पहले तक चला। यह नियोजीन कल्प का द्वितीय और अंतिम युग था। इस से पहले मध्यनूतन युग चल रहा था और इसके बाद चत ...

अत्यंतनूतन युग

अत्यंतनूतन पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास में एक भूवैज्ञानिक युग था जो आज से लगभग २५.८८ लाख वर्ष पहले शुरू हुआ और आज से ११,७०० वर्ष पहले समाप्त हुआ। यह चतुर्थ कल्प का पहला युग था जो स्वयं नूतनजीवी महाकल्प का वर्तमान भूवैज्ञानिक कल्प है। इस युग में ...

आदिनूतन युग

आदिनूतन युग या इयोसीन युग पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास का एक भूवैज्ञानिक युग है जो आज से लगभग 5.6 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 3.39 करोड़ वर्ष पहले तक चला। यह पेलियोजीन कल्प का भाग था। इस से पहले पेलियोसीन युग था और इसके बाद ओलिगोसीन युग, शुरु हु ...

ओलिगोसीन युग

ओलिगोसीन युग पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास का एक भूवैज्ञानिक युग है जो आज से लगभग 3.39 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 2.3 करोड़ वर्ष पहले तक चला। यह पेलियोजीन कल्प का भाग था। इस से पहले इयोसीन युग था और इसके बाद पेलियोजीन कल्प समाप्त हुआ और नियोजीन ...

उत्तर चाकमय युग

उत्तर चाकमय युग, जिसे ऊपरी चाकमय युग भी कहते हैं, मध्यजीवी महाकल्प के चाकमय कल्प के दो भूवैज्ञानिक युगों में से एक है, जो वार्तमान से 10 करोड़ वर्ष पूर्व से लेकर 6.6 करोड़ वर्ष पूर्व तक चला। उत्तर चाकमय से पहले पूर्व चाकमय युग चल रहा था और इसके ब ...

पूर्व चाकमय युग

पूर्व चाकमय युग, जिसे निचला चाकमय युग भी कहते हैं, चाकमय कल्प के दो भूवैज्ञानिक युगों में से एक है, जो वार्तमान से 14.6 करोड़ वर्ष पूर्व से लेकर 10 करोड़ वर्ष पूर्व तक चला। इस कालखंड में कई नई डायनासौर जातियाँ अस्तित्व में आई। इसी युग में सपुष्पक ...

उत्तर जुरैसिक युग

उत्तर जुरैसिक युग, जो ऊपरी जुरैसिक युग भी कहलाता है, जुरैसिक कल्प के तीन भूवैज्ञानिक युगों की शृंखला का अंतिम युग था। यह आज से लगभग 16.3 करोड़ वर्ष पूर्व मध्य जुरैसिक युग की समाप्ति के साथ आरम्भ हुआ। इसका अन्त आज से लगभग 14.5 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ ...

पूर्व जुरैसिक युग

पूर्व जुरैसिक युग, जिसे निचला जुरैसिक युग भी कहते हैं, जुरैसिक कल्प के तीन भूवैज्ञानिक युगों की शृंखला का सर्वप्रथम युग था जो आज से 20.13 करोड़ वर्ष पूर्व ट्राइऐसिक-जुरैसिक विलुप्ति घटना के तुरंत बाद आरम्भ हुआ और आज से लगभग 17.41 करोड़ वर्ष पूर्व ...

मध्य जुरैसिक युग

मध्य जुरैसिक युग जुरैसिक कल्प के तीन भूवैज्ञानिक युगों की शृंखला का दूसरा युग था। यह आज से लगभग 17.4 करोड़ वर्ष पूर्व पूर्व जुरैसिक युग की समाप्ति के साथ आरम्भ हुआ और इसका अन्त आज से लगभग 16.3 करोड़ वर्ष पूर्व उत्तर जुरैसिक युग के आरम्भ होने पर ह ...

नूतनतम युग

होलोसीन ईपॉक या नूतनतम युग भूवैज्ञानिक युग है जो अत्यंतनूतन युग के पश्चात आरम्भ हुआ। वर्तमान युग होलोसीन ईपॉक ही है। मौजूदा ईपॉक का नाम होलोसीन ईपॉक है, जो 11700 साल पहले शुरू हुआ था। इस होलोसीन ईपॉक को तीन अलग-अलग कालों में बांटा गया है- अपर, मि ...

पेलियोसीन युग

पेलियोसीन युग, जिसे पुरानूतन युग भी कहते हैं, पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास का एक भूवैज्ञानिक युग है जो आज से लगभग 6.6 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 5.6 करोड़ वर्ष पहले तक चला। यह पेलियोजीन कल्प और नूतनजीवी महाकल्प का सर्वप्रथम युग था। इस से पहले म ...

मध्यनूतन युग

मध्यनूतन युग पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास का एक भूवैज्ञानिक युग है जो आज से लगभग 2.303 करोड़ वर्ष पहले आरम्भ हुआ और 53.33 लाख वर्ष पहले तक चला। यह नियोजीन कल्प का आरम्भिक युग था। इस से पहले पेलियोजीन कल्प का ओलिगोसीन युग था और इसके बाद अतिनूतन यु ...

उत्सर्जन व्यापार

इन्हें भी देखें: Carbon emission trading, Personal carbon trading, एवं carbon offset उत्सर्जन व्यापार एक प्रशासनिक दृष्टिकोण है जिसका प्रयोग प्रदूषकों के उत्सर्जन में कटौती को प्राप्त करने पर आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करके प्रदूषण को नियंत्रित करन ...

वायु गुणवत्ता नियम

वायु गुणवत्ता नियम पर्यावरण में वायु द्वारा हो रहे प्रदूषण और उसके हानिकारक प्रभाव को देखते हुए बनाया गया है। इसका उद्देश्य हर जगह पर वायु की गुणवत्ता को परख कर उसे सुधारने हेतु आवश्यक निर्णय लेना है। इससे स्वास्थ्य पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव ...

इन्द्रधनुष

आकाश में संध्या समय पूर्व दिशा में तथा प्रात:काल पश्चिम दिशा में, वर्षा के पश्चात् लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला, तथा बैंगनी वर्णो का एक विशालकाय वृत्ताकार वक्र कभी-कभी दिखाई देता है। यह इंद्रधनुष कहलाता है। वर्षा अथवा बादल में पानी की सूक ...

भारत के चरम बिंदुओं की सूची

भारत के चरम बिंदुओं में वे निर्देशांक शामिल हैं जो भारत में किसी भी अन्य स्थान की तुलना में अधिक उत्तरी, दक्षिणी, पूर्व या पश्चिमि में स्थित हैं ; और देश में सबसे अधिक या सबसे कम ऊंचाई के है। भारत द्वारा दावा किया जाने वाला सबसे उत्तरी बिंदु, भार ...

दृश्यता

मौसम विज्ञान में दृश्यता उस दूरी का माप होता है जिस तक कोई वस्तु या प्रकाश स्पष्ट रूप से देखा जा सके। अक्सर यह वायु तथा जल के लिए प्रयोग होता है। मसलन विमानों के लिए वायु की दृश्यता बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसी तरह कोहरे में वाहन चलाने के लिए दृश ...

ग्रीष्म ऋतु

ग्रीष्म ऋतु, वर्ष की छह ऋतुओं में से एक ऋतु है, जिसमें वातावरण का तापमान प्रायः उच्च रहता है। साल की अन्य प्रमुख ऋतु हैं - शीत ऋतु, वर्षा ऋतु, वसन्त ऋतु। भारत में यह अप्रैल से जुलाई तक होती है। अन्य देशों में यह अलग समयों पर हो सकती है। ज्येष्ठ औ ...

वर्षा

वर्षा एक प्रकार का संघनन है। पृथ्वी के सतह से पानी वाष्पित होकर ऊपर उठता है और ठण्डा होकर पानी की बूंदों के रूप में पुनः धरती पर गिरता है। इसे वर्षा कहते हैं। ।।।।।

वर्षा ऋतु

वर्षा ऋतु, वर्ष की एक ऋतु है, जिसमें वातावरण का तापमान तथा आर्द्रता प्रायः उच्च रहते हैं। साल की अन्य प्रमुख ऋतु हैं - गृष्म ऋतु, शीत ऋतु, वसन्त ऋतु। भारत में यह जुलाई से अक्टूबर तक होती है। अन्य देशों में यह अलग समयों पर हो सकती है।

शरद ऋतु

तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में शरद ऋतु का गुणगान करते हुए लिखा है - बरषा बिगत सरद ऋतु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई॥ फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई॥ अर्थात हे लक्ष्मण! देखो वर्षा बीत गई और परम सुंदर शरद ऋतु आ गई। फूले हुए कास से सार ...

जलभंवर

आम तौपर जलभ्रम या जल भंवर, समुद्री ज्वार द्वारा निर्मित पानी का एक चक्करदार हिस्सा होता है। अधिकांश भंवर अधिक शक्तिशाली नहीं होते हैं। अधिक शक्तिशाली भंवर को सामान्य तौपर अंग्रेज़ी में मेल स्ट्रोम्स कहा जाता है। ऐसे किसी भी भंवर के लिए वोर्टेक्स ...

आँधी

आँधी मौसम से संबंधित धटना है जिसमें तेज़ हवाओं के के साथ धूल और गुबार उड़ कर दृश्यता को कम कर देते हैं। कभी कभी आँधी झंझावाती और चक्रवाती तूफानों के पहले हिस्से को भी कहा जाता है जिसमें वर्षा नहीं होती।अब

उच्च दाब क्षेत्र

उच्च दाब क्षेत्र या प्रति चक्रवात उस जगह को कहते हैं, जहाँ पृथ्वी के अन्य स्थानों की तुलना में अधिक वायु दाब होता है। इस कारण वहाँ प्रति चक्रवात बनने लगता है।

कपासी वर्षी बादल

कपासी वर्षी बादल लम्बवत रचना वाले बादल होते हैं अर्थात इनका विस्तार ऊंचाई में अधिक होता है। इस वज़ह से ये पर्वत सदृश या लम्ब्वत स्तम्भ के रूप में द्रष्टिगत होते हैं। इसके साथ वर्षा ओला तथा तड़ित झंझा की अधिक सम्भावना रहती है। यह मुसलाधार वर्षा कर ...

गरज

गरज या गड़गड़ाहट मुख्य रूप से बिजली के चमकते समय होती है। यह आकाशीय बिजली से निकालने वाले ध्वनि को कहते हैं। यह दूरी और बिजली के प्रकापर निर्भर करता है। इसकी दूरी मापने के लिए इसके चमक और आवाज होने के बीच की दूरी को गिना जाता है। यह अचानक बढ़े दा ...

निम्न दाब क्षेत्र

निम्न दाब क्षेत्र या कम दाब का क्षेत्र उस जगह को कहते हैं, जहाँ वायु मण्डल का दाब आस पास के क्षेत्र से कम हो जाता है। जब आसपास के क्षेत्र में दाब अधिक होता है, तो वहाँ की हवा उस निम्न दाब के क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसके साथ कई बार बादल भी आ ज ...

पक्षाभ बादल

पक्षाभ बादल सबसे अधिक ऊँचाई पर लघु हिमकणों द्वारा निर्मित उच्च मेघ या बादल हैं जो प्रायः छितराये रूप में रेशम की तरह दिखते हैं। इनका निर्माण छोटे-छोटे हिमकणों द्वारा होता हैं इसलिए इनसे होकर जब सूर्य की किरणें गुजरती हैं तो रंग श्वेत हो जाता हैं, ...

पक्षाभ स्तरी बादल

प्रायः श्वेत रंग के होते हैं जो कि आकाश में एक पतली दूधिया चादर के समान फैलें रहतें हैं। इनके आगमन पर सूर्य तथा चन्द्रमा के चारों ओर प्रभामण्डल बन जाते हैं, जो निकट भविष्य में चक्रवात के आगमन की सूचना देतें हैं। इनसे सूर्य तथा चंद्रमा की बाह्य रे ...

पवन-वेग-मापी

Dr Manoj kumawat machiwal kajipura wale ke anushar paribhasa:-जिस उपकरण से पृथ्वीतल पर के पवन का वेग नापा जाता है, उसे पवन-वेग-मापी कहते हैं। भिन्न-भिन्न प्रकार के पवन-वेग-मापियों से पवन के बल एवं वेग के मापन को पवन-वेग-मापन कहते हैं। मौसमविज्ञान ...

बोफर्ट मापक्रम

बोफर्ट मापक्रम पवनवेग और समुद्र तथा स्थल की दशाओं के बीच सम्बन्ध बताने वाला एक आनुभविक तालिका है। इसका पूरा नाम बोफर्ट पवनवेग मापक्रम है। यह मापक्रम 1805 में फ्रांसिस बोफर्ट द्वारा सुझाया गया था। वे जो आयरिश रॉयल नेवी में अफसर थे।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत मौसम विज्ञान प्रक्षेण, मौसम पूर्वानुमान और भूकम्प विज्ञान का कार्यभार सँभालने वाली सर्वप्रमुख एजेंसी है। मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इस विभाग के ...

मौसम का पूर्वानुमान

मौसम का पूर्वानुमान का अर्थ है किसी स्थान के वायुमंडल की भविष्य में स्थिति की भविष्यवाणी करना। मनुष्य हजारों वर्षों से अनौपचारिक रूप से मौसम की भविष्यवाणी करते रहा है और औपचारिक रूप से कम से कम उन्नीसवीं शती से मौसम की भविष्यवाणी कर रहा है।