ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 158

आइन्स्टाइन वलय

किसी स्रोत से आने वाला प्रकाश जब विरूपित होकर एक वलय के रूप में दिखता है जिसे आइन्स्टाइन वलय कहते हैं। ऐसा तब होता है जब स्रोत से निकला प्रकाश किसी अति-द्रव्यमान वाले आकाशीय पिण्ड से होकर गुजरता है जैसे दूसरी गैलेक्सी या कृष्ण विवर । इस अति-द्रव् ...

आभासी बिम्ब

जब वस्तु से निकलने वाली प्रकाश किरणे अभिसरित हो रहीं हों तो इस प्रकार बने प्रतिबिम्ब को प्रकाशिकी में आभासी बिंब कहते हैं। आभासी बिंब उस बिन्दु पर स्थित मालूम पड़ता है जहाँ से किरणें अभिसरित होती हुई प्रतीत होतीं हैं। । चूंकि इस स्थिति में किरणे ...

आवर्धक लेन्स

This magnificent glass show in big picture of object. आवर्धक लेन्स magnifying glass या hand lens एक उत्तल लेंस होता है जिसका उपयोग पास की वस्तुओं का आवर्धित प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिये किया जाता है। प्रायः आवर्धक लेंस को एक गोल फ्रेम में मढ़ा ...

आवर्धन

किसी वस्तु के वास्तविक आकार को बदले बिना उसको अपने वास्तविक आकार से बड़ा दिखाना आवर्धन कहलाता है। वस्तु जितने गुना बड़ी दिखती है, उसे आवर्धन कहते हैं। यदि आवर्धन १ से अधिक है तो इसका अर्थ है कि वस्तु अपने वास्तविक आकार से बड़ी दिक रही है। यदि आवर ...

कोणीय विभेदन

प्रतिविम्ब निर्माण करने वाली किसी युक्ति द्वारा किसी वस्तु की छोटी-छोटी संसरचनाओं को भी अलग-अलग कर पाने की क्षमता को कोणीय विभेदन या आकाशीय विभेदन कहते हैं। प्रकाशीय दूरदर्शी, रेडियो दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी, कैमरा, आँख आदि के लिए यह महत्वपूर्ण है। ...

गोलीय विपथन

गोलीय विपथन, प्रकाशीय प्रणालियों में पायी जाने वाली एक दोष है। यह उन प्रणालियों में देखने को मिलता है जिनमें गोलीय तल वाले प्रकाशीय उपकरण का उपयोग करते हैं। इन प्रणालियों से बनने वाली प्रतिबिम्ब की गुणवत्ता, गोलीय विपथन के कारण, अच्छी नहीं होती।

डायोप्टर

डायोपप्टर, या diopter) लेंस के प्रकाशीय शक्ति का मात्रक है। किसी लेंस की फोकस दूरी f मीटर हो तो उसकी प्रकाशीय शक्ति 1/f डायोप्टर होगी। उत्तल लेंस के लिए डायोप्टर धनात्मक होता है और अवतल लेंस के लिए ऋणात्मक।

तरंगाग्र

"किसी क्षण विषेश पर माध्यम की वह सतः जिसपर स्थित सभी कण समान कला में कम्पन करते है तरंगाग्र कहलाती है यह तीन प्रकार के होते है 1. गोलाकार 2. बेलनाकार 3.समतल

परावर्तन (भौतिकी)

जब कोई प्रकाश की किरण किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो परावर्तक पृष्ठ से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते है। Example- जल की तरंगों, ध्वनि, प्रकाश तथा अन्य विद्युतचुम्बकीय तरंगों का पर ...

प्रकाश का क्वाण्टम सिद्धान्त

तरंग सिद्धान्त के प्रतिपादन के बाद के कुछ वर्षो में कुछ बातें ऐसी भी मालूम हुई जो प्रकाश के तरंगमय स्वरूप के सर्वथा प्रतिकूल हैं। इनकी व्याख्या तरंगसिद्धांत के द्वारा हो ही नहीं सकती। इनके लिये प्लांक के क्वांटम सिद्धांत का सहारा लेना पड़ता है। क ...

प्रकाश का तरंग सिद्धान्त

न्यूटन के ही समकालीन जर्मन विद्वान हाइगेंज ने,सन् 1678 ई. में प्रकाश का तरंग सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। इसके अनुसार समस्त संसार में एक अत्यंत हलका और रहस्यमय पदार्थ ईथर भरा हुआ है: तारों के बीच के विशाल शून्याकाश में भी और ठोस द्रव्य के अंदर ...

प्रकाश का विद्युतचुम्बकीय सिद्धान्त

वैद्युत्‌ और चुंबकीय बलों की व्याख्या के लिये फैराडे ने एक प्रकार के सर्वव्यापी ईथर की परिकल्पना बनाई थी और यह बताया था कि इस ईथर की परिकल्पना बनाई थी और यह बताया था कि इसे ईथर की विकृति के कारण ही ये बल पैदा होते हें। मैक्सवेल ने इस विषय की विशद ...

प्रकाश के सिद्धान्त

प्रकाश क्या है और वह किस रूप में स्थानांतरित होता है, इन प्रश्नों के समाधान के लिये समय पर अनेक सिद्धांत बनागए थे, किंतु इस समय विद्युतचुंबकीय सिद्धांत तथा क्वांटम सिद्धांत ही सर्वमान्य हैं। प्रकाश का तरंग सिद्धान्त न्यूटन का कणिका सिद्धांत Corpu ...

प्रकीर्णन

प्रकीर्णन एक सामान्य भौतिक प्रक्रिया है जिसमें कोई विकिरण माध्यम के किसी स्थानीय अनियमितता के कारण अपने सरलरेखीय मार्ग से विचलित किया जाता है। कणों का भी प्रकीर्णन होता है। आकाश का नीला रंग एवं सूर्योदय व सूर्यास्त के सुर्य की लालिमा प्रकीर्णन के ...

प्रिज़्म

प्रकाशिकी में, प्रिज़्म एक सपाट चिकनी सतहों वाला एक पारदर्शी प्रकाशीय अवयव है जो, प्रकाश का अपवर्तन करता है। कम से कम दो सपाट सतहों के मध्य एक कोण का होना अनिवार्य है। सतहों के मध्य के कोण की सटीकता उसके अनुप्रयोग पर निर्भर करती हैं। पारंपरिक रूप ...

फोकस अनुपात

प्रकाशिकी में, किसी लेंस या दर्पण के फोकस दूरी तथा उसके प्रवेश द्वारक के व्यास के अनुपात को उसका फोकस अनुपात या एफ-संख्या कहते हैं। यह एक विमारहित संख्या है और लेंस की गति का परिचायक है। फोटोग्राफी में इसका बहुत महत्व है। N = F D {\displaystyle N ...

फोकस दूरी

किसी प्रकाशीय वस्तु की फोकस दूरी वह दूरी है जहाँ इस पर पड़ने वाली समान्तर रेखीय प्रकाश किरणें आकर मिलती हैं। फोकस दूरी, किसी प्रकाशीय तन्त्र के प्रकाश को मोड़ने की क्षमता की परिचायक है। किसी लेंस की फोकस दूरी दूसरे लेंस से कम है तो इसका अर्थ है क ...

फोटॉन

भौतिकी में फ़ोटॉन या प्रकाशाणु, प्रकाश और अन्य विद्युतचुंबकीय विकिरण के मूलभूत कण को बोला जाता है। फ़ोटोन का द्रव्यमान शून्य होता है। सारे मूलभूत कणों की तरह फ़ोटोन भी तरंग-कण द्विरूप दर्शाते हैं, यानी उनमें तरंग और कण दोनों की ही प्रवृत्ति होती ...

मरीचिका

मरीचिका एक प्रकार का वायुमंडलीय दृष्टिभ्रम है, जिसमें प्रेक्षक अस्तित्वहीन जलाश्य एवं दूरस्थ वस्तु के उल्टे या बड़े आकार के प्रतिबिंब तथा अन्य अनेक प्रकार के विरूपण देखता है। वस्तु और प्रेक्षक के बीच की दूरी कम होने पर प्रेक्षक का भ्रम दूर होता ह ...

लंबन

दो विभिन्न बिंदुओं से किसी वस्तु की ओर देखने पर जो कोणीय विचलन प्रतीत होता है, उसे लंबन कहते हैं और इन बिंदुओं को मिलानेवाली आधार रेखा उस दूरस्थ वस्तु पर जो कोण बनाती है, उससे लंबन का निरूपण होता है। आधार रेखा जितनी ही बड़ी होगी वस्तु पर कोण उतना ...

वास्तविक प्रतिबिम्ब

प्रकाशिकी में जब किसी वस्तु से निकलने वाली किरणें प्रकाशीय युक्ति/युक्तियों से निकलने के बाद वास्तव में किसी बिन्दु पर मिलतीं हैं तो उस बिन्दु पर वास्तविक प्रतिबिम्ब बनता है। जिस तल में किरणें मिल रहीं हैं, उस तल पर कोई पर्दा रखा जाय तो प्रतिबिम् ...

विवर्तन ग्रेटिंग

प्रकाशिकी में, विवर्तन ग्रेटिंग एक प्रकाशिक अवयव है जो आपतित प्रकाश को कई भागों में तोड़कर इस प्रकार विवर्तित कर देता है कि हमे अलग दिशाओं में जाती हुकई प्रकाश पुंज प्राप्त हो जाते हैं। इन पुंजों की की दिशा आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य तथा ग्रेटिं ...

वीन विस्थापन नियम

वीन विस्थापन नियम के अनुसार किसी ताप पर कृष्णिका से तापोत्सर्जन का तरंगदैर्घ्य बंटन भी आरेख में प्रदर्शित तरंगदैर्घ्य के अलावा अन्य किसी ताप पर बंटन अनिवार्य रूप समान आकार का हो। वीन विस्थापन नियम के अनुसार λ max T = b, {\displaystyle \lambda _{\ ...

स्नेल का नियम

स्नेल का नियम तरंगों के अपवर्तन से सम्बन्धित एक सूत्र है जो आपतन कोण तथा अपवर्तन कोण के बीच सम्बन्ध स्थापित करता है। यह नियम निम्नलिखित है- आपतन कोण तथा अपवर्तन कोण के ज्याओं का अनुपात दोनों माध्यमों में तरंग के फेज वेगों phase velocities के अनुप ...

केन्द्रीय बल

चिरसम्मत यांत्रिकी में, केन्द्रीय बल, किसी वस्तु पर लगने वाले उस बल को कहते हैं जिसका परिमाण केवल r पर निर्भर करता है तथा जिसकी दिशा वस्तु को मूलबिन्दु से मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है। F → = F r = F | | r | | r ^ {\displaystyle {\vec {F}}=\ ...

छल

छल या धोखा एक व्यक्ति या संगठन द्वारा जानबूझ कर किसी अन्य व्यक्ति में किसी ऐसे विश्वास को जन्म देने या प्रोत्साहित करने को कहते हैं जो सच न हो। ध्यान दें कि स्वयं को भी छला जा सकता है। कई प्रकार के छल न्याय व्यवस्थाओं में अपराध माने जाते है जबकि ...

अनैतिकता

"अनैतिक" शब्द आम तौपर व्यक्तियों या कार्यों का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है। एक व्यापक अर्थ में यह समूह या कॉर्पोरेट निकायों, विश्वासों, धर्मों, और कला के कार्यों के लिए लागू किया जा सकता है। कुछ कृत्य अनैतिक है कि कहने के लिए हैं कि कुछ ...

संरक्षण (नैतिक)

संरक्षण, संसाधनों के उपयोग, आवंटन और संरक्षण की एक नीति है। इसका प्राथमिक उद्देश्य प्राकृतिक जगत के स्वास्थ्य को बनाए रखना है: जिसमें मत्स्य, पर्यावास और जैव विविधता शामिल है। इसका द्वितीय उद्देश्य पदार्थ और ऊर्जा का संरक्षण है, जिसकी प्राकृतिक ज ...

आक्रामक यथार्थवाद

आक्रामक यथार्थवाद या आक्रामक नवयथार्थवाद एक संरचनात्मक सिद्धांत है जो जॉन मियरशाइमर से सम्बंधित नवयथार्थवाद विचारधारा से संबंधित है। इसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों के आक्रामक व्यवहार के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली की अराजक प्रकृति जिम ...

आक्रामक यथार्थवाद (अन्तर्राष्ट्रीय संबंध)

आक्रामक यथार्थवाद या आक्रामक नवयथार्थवाद एक संरचनात्मक सिद्धांत है जो जॉन मियरशाइमर से सम्बंधित नवयथार्थवाद विचारधारा से संबंधित है। इसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों के आक्रामक व्यवहार के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली की अराजक प्रकृति जिम ...

नवयथार्थवाद (अन्तर्राष्ट्रीय सम्बंध)

नवयथार्थवाद या संरचनात्मक यथार्थवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक सिद्धांत है जो कहता है कि शक्ति अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसे सबसे पहले केनेथ वाल्ट्ज ने 1979 की अपनी पुस्तक थ्योरी ऑफ़ इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में उल्लिखित किय ...

रणनीतिक यथार्थवाद

रणनीतिक यथार्थवाद अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का एक सिद्धांत है जो थॉमस शेलिंग द्वारा के अनुसंधान से सम्बंधित है। शेलिंग का मानना है कि देशों की विदेश नीति तर्कसंगत होती है, जिसका अर्थ है कि देश अपनी विदेश नीति अपनी इच्छाओं के आधापर डिजाइन करते हैं। क ...

गठबन्धन

गठबन्धन एक समान कारण के हेतु एक साथ कुछ लोगों या समूहों के एक साथ संयुक्त सहयोग दे कर कोई कार्य करना गठबन्धन कहलाता है। यह गठबन्धन अस्थाई या सुविधा अनुसार भी हो सकता है। इनके कार्य मुख्यतः या सामान्यतः एक प्रकार के होते हैं अथवा यह किसी अन्य प्रक ...

निजी सदस्य बिल

सरकार की संसदीय प्रणाली में निजी सदस्य बिल कार्यकारिणी शाखा की तरफ से काम नहीं कर रहे किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत विधेयक होता है। "निजी सदस्य बिल" वेस्ट्मिन्स्टर प्रणाली के अधिकार क्षेत्र में काम में लिया जाता है जहाँ "निजी सदस्य" ऐसा कोई भी सांसद ...

एकतन्त्र

एकतन्त्र सरकार का एक तन्त्र है, जिस में सर्वोच्च शक्ति एक व्यक्ति के हाथों में केन्द्रित होती है, जिसके निर्णय न तो बाह्य विधिक अंकुशों के अधीन होते हैं और न ही लोकप्रिय नियन्त्रण की नियमित क्रियाविधियों के अधीन होते हैं । पूर्ण राजतन्त्और तानाशा ...

गणराज्य

एक गणराज्य या गणतंत्र सरकार का एक रूप है जिसमें देश को एक "सार्वजनिक मामला" माना जाता है, न कि शासकों की निजी संस्था या सम्पत्ति। एक गणराज्य के भीतर सत्ता के प्राथमिक पद विरासत में नहीं मिलते हैं। यह सरकार का एक रूप है जिसके अंतर्गत राज्य का प्रम ...

तदर्थशाही

तदर्थशाही, अफसरशाही के विपरीत एक ऐसा शासनतन्त्र है जिसमें प्रक्रियाओं के लिये मानक विधियाँ निर्धारित नहीं की जातीं हैं और इनके बिना ही जैसे-तैसे काम चलाया जाता है। तदर्थशाही उसे भी कहते हैं जब किन्हीं दूसरो के लिए वनायें कानूनों से ही काम चलया जा ...

पूर्ण राजशाही

पूर्ण राजशाही पूर्ण राजशाही- किसी राज्य की उस शासन-प्रणाली को कहते हैं जिसमें शासक पर किसी संविधान या क़ानून का अंकुश नहीं होता। वह अपनी मनमानी के अनुसार राज करता है। उसका अपने राज्य और उसके नागरिकों पर पूरा अधिकार होता है। आमतौपर पूर्ण राजशाही म ...

संवैधानिक राजशाही

संवैधानिक राजशाही किसी राज्य की उस शासन-प्रणाली को कहते हैं जिसमें सर्वोच्च शासक राजा तो होता है लेकिन उसकी शक्तियाँ किसी संविधान या क़ानून द्वारा सीमित होती हैं, यानि वह अपनी मनमानी से राज नहीं कर सकता। राजा को बांधने वाला क़ानून लिखित या अलिखित ...

अमेरिकी साम्राज्यवाद

संयुक्त राज्य अमेरिका का दूसरे देशों के ऊपर आर्थिक, सैनिक तथा सांस्कृतिक प्रभाव अमेरिकी साम्राज्यवाद कहलाता है। यही प्रभाव अमेरिका के विदेशी भूक्षेत्रों में वृद्धि के रूप में भी दिखायी पड़ती है।

जापानी साम्राज्यवाद

यहाँ पर जापानी साम्राज्य द्वारा सन् १९४५ तक अधिकृत क्षेत्रों की सूची दी गयी है। जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में आत्मसमर्पण के बाद मुख्य जापानी भूमि एवं 3000 छोटे-छोटे द्वीपों को छोड़कर बाकी सारे क्षेत्रों से अपना अधिकार त्याग दिया।

नव-उपनिवेशवाद

विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के आन्तरिक मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किये जाने वाले हस्तक्षेप को नव-उपनिवेशवाद कहा जाता है। नवउपनिवेशवाद की धारणा के मानने वालों का सोचना है कि पूर्व में उपनिवेशी शक्तियों ने जो आर्थिक ढांचा बना रखा ...

नवसाम्राज्यवाद

नव-उपनिवेशवाद से तात्पर्य 19वीं शताब्दी के अन्तिम भाग से लेकर 20वीं शताब्दी के आरम्भिक काल तक की अवधि से है जिस अवधि में यूरोपीय शक्तियों, यूएसए एवं जापान ने अपने उपनिवेशों का जमकर विस्तार किया। इस कालावधि में जितने भूभाग पर इन शक्तियों ने कब्जा ...

साम्राज्यवाद

साम्राज्यवाद वह दृष्टिकोण है जिसके अनुसार कोई महत्त्वाकांक्षी राष्ट्र अपनी शक्ति और गौरव को बढ़ाने के लिए अन्य देशों के प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लेता है। यह हस्तक्षेप राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या अन्य किसी भी प् ...

निद्रा

नींद अपेक्षाकृत निलंबित संवेदी और संचालक गतिविधि की चेतना की एक प्राकृतिक बार-बार आनेवाली रूपांतरित स्थिति है, जो लगभग सभी स्वैच्छिक मांसपेशियों की निष्क्रियता की विशेषता लिए हुए होता है। इसे एकदम से जाग्रत अवस्था, जब किसी उद्दीपन या उत्तेजन पर प ...

सम्मोहन

सम्मोहन वह कला है जिसके द्वारा मनुष्य उस अर्धचेतनावस्था में लाया जा सकता है जो समाधि, या स्वप्नावस्था, से मिलती-जुलती होती है, किंतु सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सब इंद्रियाँ उसके वश में रहती हैं। वह बोल, चल और लिख सकता है; हिसाब लगा सकता ...

मिथ्याभास-संबंधी हँसी

मिथ्याभास-संबंधी हँसी एक प्राकार का हास्य है जिसे जो अनुचित रूप से बाहरी बातों से प्रभावित होती है। यह बेक़ाबू हँसी हो सकती है जिसे कोई सम्बंधित व्यक्ति नामुनासिब समझ सकता है। यह बदेली हुई मानसिक परिस्थियों या मानसिक रोग जैसे कि उन्माद या मनोभाजन ...

पुनर्बलन

ऐसी कोई क्रिया जो अनुक्रिया की संख्या में वृद्धि करती है पुनर्बलन कहलाती है। मानव द्वारा सीखे हुए अधिकांशतः व्यवहार की व्याख्या हम क्रियाप्रसूत अनुबन्धन के सहयोग से कर सकते हैं। क्रियाप्रसूत अनुबन्धन में पुनर्बलन की निर्णायक भूमिका है। यह नकारात् ...

कृषकवाद

कृषकवाद एक सामाजिक और राजनैतिक दार्शनिक दृष्टिकोण है जिसमें ग्रामीण समाज को नगरीय समाज से ऊँचा ठहराया जाता है। इस विचारधारा के अनुसार स्वतंत्र कृषक किसी आय लेने वाली व्यवसायी नौकर से अधिक महान है और कृषि की जीवन-पद्धति द्वारा ही आदर्श सामाजिक मूल ...

जर्मन राष्ट्रवाद

जर्मन राष्ट्रवाद यह विचार है कि जर्मन एक राष्ट्र हैं। जर्मन राष्ट्रवाद, जर्मनों और जर्मन बोलने वालों की एकता को एक राष्ट्र राज्य के रूप में बढ़ावा देता है, और जर्मनों की राष्ट्रीय पहचान पर जोर देता है और उस पर गर्व करता है। जर्मन राष्ट्रवाद की उत ...