ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 145

अमरचंद

अमर अथवा अमरचंद नाम के कई व्यक्तियों के उल्लेख प्राप्य हैं- १ परिमल नामक संस्कृत व्याकरण के रचयिता। २ वायड़गच्छीय जिनदत्त सूरि के शिष्य। इन्होंने कलाकलाप, काव्य-कल्पलता-वृत्ति, छंदोरत्नावली, बालभारत आदि संस्कृत ग्रंथों का प्रणयन किया। ३ विवेकविला ...

कामताप्रसाद गुरु

कामताप्रसाद गुरु का जन्म सागर में सन्‌ १८७५ ई. सं. १९३२ वि. में हुआ। १७ वर्ष की आयु में ये इंट्रेंस की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। १९२० ई. में लगभग एक वर्ष तक इन्होंने इंडियन प्रेस, प्रयाग से प्रकाशित बालसखा तथा "सरस्वती पत्रिकाओं का संपादन किया। य ...

काशिनाथ वासुदेव अभ्यंकर

महामहोपाध्याय काशिनाथ वासुदेव अभ्यंकर मराठी के साथ-साथ अर्धमागधी, प्राकृत और संस्कृत के अन्तरराष्ट्रीय ख्याति के विद्वान थे। उनका जन्म सतारा के सुप्रसिद्ध संस्कृत विद्वानों के अभ्यंकर परिवार में हुआ था। वे महामहोपाध्याय वासुदेव महादेव अभ्यंकर के ...

किशोरीदास वाजपेयी

आचार्य किशोरीदास वाजपेयी हिन्दी के साहित्यकार एवं सुप्रसिद्ध व्याकरणाचार्य थे। हिन्दी की खड़ी बोली के व्याकरण की निर्मिति में पूर्ववर्ती भाषाओं के व्याकरणाचार्यो द्वारा निर्धारित नियमों और मान्यताओं का उदारतापूर्वक उपयोग करके इसके मानक स्वरूप को ...

दामोदर पंडित

दामोदर पण्डित हिन्दी के प्रथम वैयाकरण थे। उनके द्वारा रचित उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण हिंदी-व्याकरण का पहला ग्रंथ है। इसका रचना काल १२वीं शती का पूर्वार्द्ध माना जाता है। दामोदर पण्डित बनारस के निवासी थे।

नागवर्म द्वितीय

नागवर्म द्वितीय कन्नड साहित्यकार एवं वैयाकरण थे। वे पश्चिमी चालुक्य सम्राटों के दरबार में थे। कर्णाटक भाषाभूषण, काव्यालोकन और वास्तुकोश उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

नागेश भट्ट

नागेश भट्ट संस्कृत के नव्य वैयाकरणों में सर्वश्रेष्ठ है। इनकी रचनाएँ आज भी भारत के कोने-कोने में पढ़ाई जाती हैं। ये महाराष्ट्र के ब्राह्मण थे। इनके पिता का नाम शिव भट्ट और माता का नाम सतीदेवी था। साहित्य, धर्मशास्त्र, दर्शन तथा ज्योतिष विषयों में ...

पद्मनाभदत्त

आचार्य पद्मनाभदत्त एक वैयाकरण थे। पाणिनि के उत्तरवर्ती वैयाकरणों में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। इनके द्वारा रचित सुपद्मव्याकरण का व्याकरण ग्रन्थों में स्थान महत्त्वपूर्ण है। सुपद्मव्याकरण पाणिनीय अष्टाध्यायी के अनुकरण पर रचित एक लक्षण ग्रन्थ है। ...

पुरुषोत्तमदेव (वैयाकरण)

पुरुषोत्तमदेव बहुत बड़े वैयाकरण थे। इनको देव नाम से भी पुकारा गया है। ये बंगाल के निवासी और बौद्ध धर्मावलंबी थे। बौद्धों और वैदिकों की अनबन पुरानी है। इन वातावरण के प्रभाव में पुरुषोत्तमदेव ने अष्टाध्यायी के सूत्रों में से वैदिक सूत्रों को अलग कर ...

यास्क

यास्क वैदिक संज्ञाओं के एक प्रसिद्ध व्युत्पतिकार एवं वैयाकरण थे। इनका समय महाभारत काल के पूर्व का था.शान्तिपर्व अध्याय ३४२ का सन्दर्भ इसमें प्रमाण है। इन्हें निरुक्तकार कहा गया है। निरुक्त को तीसरा वेदाङ्ग माना जाता है। यास्क ने पहले निघण्टु नामक ...

वरदराज

वरदराज संस्कृत व्याकरण के महापण्डित थे। वे महापण्डित भट्टोजि दीक्षित के शिष्य थे। भट्टोजि दीक्षित की सिद्धान्तकौमुदी पर आधारित उन्होने तीन ग्रन्थ रचे: मध्यसिद्धान्तकौमुदी, लघुसिद्धान्तकौमुदी तथा सारकौमुदी।

वागीश शास्त्री

भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत व्याकरणज्ञ, उत्कृष्ट भाषाशास्त्री, योगी एवं तांत्रिक हैं। इनका जन्म खुरई, मध्य प्रदेश में २४ जुलाई १९३४ को हुआ था। प्राथमिक शिक्षा वहीं पाकर आगे वृंदावन और बनारस में अध्ययन किया। १९५९ म ...

वासुदेव महादेव अभ्यंकर

वासुदेव महादेव अभ्यंकर सुप्रसिद्ध वैयाकरण तथा अनेक शास्त्रों के पारंगत विद्वान्‌। हिंदुस्थान की सरकार ने १९२१ में आपको "महामहोपाध्याय" की उपाधि से विभूषित किया। संकेतश्वर के शंकराचार्य जी ने भी उन्हें "विद्वद्रत्न" की पदवी प्रदान की। सतारा के प्र ...

वोपदेव

वोपदेव विद्वान्, कवि, वैद्य और वैयाकरण ग्रंथाकार थे। इनके द्वारा रचित व्याकरण का प्रसिद्ध ग्रंथ मुग्धबोध है। इनका लिखा कविकल्पद्रुम तथा अन्य अनेक ग्रंथ प्रसिद्घ हैं। ये हेमाद्रि के समकालीन थे और देवगिरि के यादव राजा के दरबार के मान्य विद्वान् रहे ...

शाकटायन

शाकटायन नाम के दो व्यक्ति हुए हैं, एक वैदिक काल के अन्तिम चरण के वैयाकरण, तथा दूसरे ९वीं शताब्दी के अमोघवर्ष नृपतुंग के शासनकाल के वैयाकरण। वैदिक काल के अन्तिम चरण ८वीं ईसापूर्व के शाकटायन, संस्कृत व्याकरण के रचयिता है हैं। उनकी कृतियाँ अब उपलब्ध ...

स्वरूपाचार्य अनुभूति

स्वरूपाचार्य अनुभूति को सारस्वत व्याकरण का निर्माता माना जाता है। बहुत से वैयाकरण इनको सारस्वत का टीकाकार ही मानते हैं। इसकी पुष्टि में जो तथ्यपूर्ण प्रमाण मिलते हैं उनमें क्षेमेंद्र का प्रमाण सर्वोपरि है। मूल सारस्वतकार कौन थे इसका पता नहीं चलता ...

अमरसिंह

अमरसिंह राव राजा विक्रमादित्य की राजसभा के नौ रत्नों में से एक थे। उनका बनाया अमरकोष संस्कृत भाषा का सबसे प्रसिद्ध कोष ग्रन्थ है। उन्होंने इसकी रचना तीसरी शताब्दी ई॰ पू॰ में की थी। अमरसिंह ने अपने से पहले के अनेक शब्दकोषकारों के ग्रन्थों से सहायत ...

गणपाठ

गणपाठ पाणिनि के व्याकरण के पाँच भागों में से एक है। इसमें २६१ शब्दों का संग्रह है। पाणिनीय व्याकरण के चार अन्य भाग हैं- अष्टाध्यायी, फिट्सूत्र, धातुपाठ तथा उणादिसूत्र। गण का अर्थ है - समूह। जब बहुत से शब्दों को एक ही कार्य करना हो तो उनमें से प्र ...

तत्वबोधिनी

तत्त्वबोधिनी ज्ञानेन्द्र सरस्वती द्वारा रचित सिद्धान्तकौमुदी का टीकाग्रन्थ है। ज्ञानेन्द्र सरस्वती के देशकाल के बारे में कुछ भी ठीक-ठीक पता नहीं है। विद्वतसमाज में यह किंवदन्ति है कि वे भट्टोजि दीक्षित के शिष्य थे। यदि यह सही है तो वे भट्टोजि दीक ...

नन्दिकेश्वरकाशिका

नन्दिकेश्वरकाशिका २७ पदों से युक्त दर्शन एवं व्याकरण का एक ग्रन्थ है। इसके रचयिता नन्दि या नन्दिकेश्वर हैं। इस ग्रन्थ में शैव अद्वैत दर्शन का वर्णन है, साथ ही यह माहेश्वर सूत्रों की व्याख्या के रूप में है। उपमन्यु ऋषि ने इस पर तत्त्वविमर्शिणी नाम ...

भीमस्वामी

भीमस्वामी संस्कृत कवि थे। छठी शताब्दी ई० के अंतिम चरण में इनकी स्थिति मानी जाती है। इनका रावणार्जुनीय काव्य प्रसिद्ध है। २७ सर्गों वाले इस काव्य में कार्तवीर्य अर्जुन तथा रावण के युद्ध का वर्णन है। भट्टिकाव्य की तरह इस काव्य में भी काव्य के बहाने ...

शिवसूत्र या माहेश्वर सूत्र

माहेश्वर सूत्र को संस्कृत व्याकरण का आधार माना जाता है। पाणिनि ने संस्कृत भाषा के तत्कालीन स्वरूप को परिष्कृत एवं नियमित करने के उद्देश्य से भाषा के विभिन्न अवयवों एवं घटकों यथा ध्वनि-विभाग, नाम, पद, आख्यात, क्रिया, उपसर्ग, अव्यय, वाक्य, लिंग इत् ...

लिंगानुशासन

लिङ्गानुशासन, पाणिनीय पंचांग व्याकरण का एक भाग है। लोक के अनुसार लिङ्ग का अनुशासन करने वाला शास्त्र लिङ्गानुशासन कहलाता है। पाणिनी प्रणीत इस शास्त्र में संस्कृत भाषा में व्यवहृत शब्दों के लिङ्ग का उपदेश किया गया है । यह शास्त्र भी छः अधिकारों में ...

सिद्धान्तकौमुदी

सिद्धान्तकौमुदी संस्कृत व्याकरण का ग्रन्थ है जिसके रचयिता भट्टोजि दीक्षित हैं। इसका पूरा नाम "वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी" है। भट्टोजि दीक्षित ने प्रक्रियाकौमुदी के आधापर सिद्धांत कौमुदी की रचना की। इस ग्रंथ पर उन्होंने स्वयं प्रौढ़ मनोरमा टीका लिखी। ...

सुपद्मव्याकरण

सुपद्मव्याकरण, आचार्य पद्मनाभदत्त द्वारा रचित एक संस्कृत व्याकरण ग्रन्थ है। पाणिनि के उत्तरवर्ती वैयाकरणों में आचार्य पद्मनाभदत्त का महत्त्वपूर्ण स्थान है।सुपद्मव्याकरण पाणिनीय अष्टाध्यायी के अनुकरण पर रचित एक लक्षण ग्रन्थ है। यह व्याकरण बंगाली व ...

कुकी-चिन-नागा भाषाएँ

कुकी-चिन-नागा भाषाएँ भारत के मिज़ो व नागा लोग तथा बर्मा के चिन लोग द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह सभी तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की सदस्य हैं लेकिन इनका आपसी सम्बन्ध अभी ज्ञात नहीं है। मिज़ो भाषा सर्वाधिक मातृभाषी रखने वाली कुकी-चि ...

हाउसा भाषा

हाउसा भाषा पश्चिमी अफ़्रीका में बोली जाने वाली एक भाषा है। यह अफ़्रो-एशियाई भाषा-परिवार की चाडी शाखा की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसे 3.5 करोड़ लोग मातृभाषा के रूप में और करोड़ों अन्य द्वितीय भाषा के रूप में बोलते हैं। शुरु में यह दक्षिणी ...

वू चीनी भाषाएँ

वू चीनी चीन के झेजिआंग प्रान्त, दक्षिणी जिआंगसु प्रान्त और शन्घाई शहर में बोलीं जाने वाली चीनी भाषा की उपभाषाओं का एक गुट है। इन भाषाओँ में प्राचीन चीनी भाषा की कुछ ऐसी चीज़ें अभी भी प्रयोग की जाती हैं जो आधुनिक चीनी की अन्य भाषाओँ में लुप्त हो च ...

असमिया भाषा उन्नति साधिनी सभा

असमिया भाषा उन्नति साधिनी सभा असमी भाषा की एक संस्था थी जिसकी स्थापना २५ अगस्त १८८८ को हुई थी। यह असम साहित्य सभा की पूर्ववर्ती संस्था थी। इसके प्रथम महासचिव श्रीराम शर्मा बोरदोलोई थे। इस संस्था के निर्माण का उद्देश्य असमिया भाषा एवं साहित्य की उ ...

असमिया साहित्य

यद्यपि असमिया भाषा की उत्पत्ति १७वीं शताब्दी से मानी जाती है किंतु साहित्यिक अभिरुचियों का प्रदर्शन १३वीं शताब्दी में कंदलि के द्रोण पर्व तथा कंदलि के रामायण से प्रारंभ हुआ। वैष्णवी आंदोलन ने प्रांतीय साहित्य को बल दिया। शंकर देव ने अपनी लंबी जीव ...

हेमकोष

हेमकोष, हेमचन्द्र बरुआ द्वारा संकलित असमिया भाषा का पहला शब्द-व्युत्पत्ति शब्दकोश है जो, संस्कृत की वर्तनियों पर आधारित है। इस शब्दकोश का पहला प्रकाशन सन 1900 में कैप्टन पी.आर. गॉर्डन, आईएससी और हेमचन्द्र गोस्वामी की देखरेख में किया गया था। यह शब ...

उर्दू की बोलियों की सूची

उर्दू की कुछ मान्यता प्राप्त बोलियाँ हैं, जिनमें दखनी, रेख्ता और आधुनिक वर्नाक्युलर उर्दू शामिल हैं। दक्षिण भारत के दक्खन क्षेत्र में दखनी बोली जाती है। यह मराठी और कोंकणी की शब्दावली के मिश्रण से अलग है, साथ ही अरबी, फारसी और चगताई से कुछ शब्दाव ...

अंजुमन ए तरक्क़ी ए उर्दू

अंजुमन ए तरक्क़ी ए उर्दू: भारत और पाकिस्तान में उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचाऔर प्रसार के लिए काम कर रहे एक प्रमुख संगठन है। "अंजुमन-ए ताराकी-उर्दू दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा उर्दू विद्वानों के प्रचारक संघ है।"

राल्फ रसेल

ग़ालिब के प्रख्यात विशेषज्ञ एवं उर्दू के विद्वान राल्फ रसेल का लंदन के ट्रिनिटी अस्पताल में रविवार १४ सितंबर को निधन हो गया। वह ९० वर्ष के थे। रसेल लंदन विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोफेसर भी रह चुके थे। उन्होंने १९६८ में मुगल शायरों मीर तकी मीर, सौ ...

विश्व उर्दू दिवस

हर साल भारत में ९ नवम्बर को विश्व उर्दू दिवस मनाया जाता है। यह दिन इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह उर्दू के प्रसिद्ध शायर मुहम्मद इक़बाल का जन्म दिवस भी है। उस दिन कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें सेमिनार, सिम्पोज़ियम, मुशायरे आदि आयोजित होत ...

हिन्दी–उर्दू विवाद

हिन्दी–उर्दू विवाद भारतीय उपमहाद्वीप में १९वीं सदी में आरम्भ हुआ भाषाई विवाद है। इस विवाद के कुछ मूल प्रश्न ये थे- उत्तरी भारत तथा उत्तरी-पश्चिमी भारत की भाषा का स्वरूप क्या हो, सरकारी कार्यों में किस भाषा/लिपि का प्रयोग हो, हिन्दी और उर्दू एक ही ...

हंसा मेहता

हंसा जीवराज मेहता भारत की एक सुधारवादी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, स्वतंत्रता सेनानी, नारीवादी और लेखिका थीं। उनके पिता मनुभाई मेहता बड़ौदा और बीकानेर रियासतों के दीवान थे। पत्रकारिता और समाजशास्त्र में उच्च शिक्षा के लिए वे १९१९ ई॰ में इंग्ल ...

किश्तवाड़ी भाषा

किश्तवाड़ी भाषा भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य के किश्तवाड़ ज़िले में बोली जाने वाली एक दार्दी भाषा है। यह कश्मीरी भाषा के बहुत समीप है और उसकी उपभाषा भी समझी जाती है।

मलवई बोली

मलवई, पंजाबी की एक उपभाषा है जो इसके मालवा क्षेत्र में बोली जाती है। फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर आदि में मलवई प्रमुखता से बोली जाती है।

बांग्ला अकादमी

बांग्ला अकादमी बांग्लादेश की सरकार द्वारा वित्तपोषित एक संस्थान है। इसका उद्देश्य बांग्ला भाषा, साहित्य एवं बांग्ला संस्कृति का विकास एवं उन्नयन करना है। यह बांग्ला भाषा के लिए राष्ट्रीय भाषा नीति का कार्यान्यवन करता है और भांग्ला भाषा में मौलिक ...

बांग्ला भाषा आन्दोलन

बांग्ला भाषा आन्दोलन तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में संघटित एक सांस्कृतिक एवं राजनैतिक आन्दोलन था। इसे भाषा आन्दोलन भी कहते हैं। आन्दोलन की मांग थी कि बांग्ला भाषा को पाकिस्तान की एक आधिकारिक भाषा की मान्यता दी जाय तथा इसका उपयोग सरकारी कामकाज में, ...

बांग्ला व्याकरण

इस लेख में बांग्ला के व्याकरण के विभिन्न पक्षों का विवेचन किया गया है। बांग्ला भाषा में दो लिंग, दो बचन, तीन पुरुष, तीन काल होते हैं। क्रिया का रूप लिंग के अनुसार नहीं बदलता, जबकि हिन्दी में बदलता है।

बांग्ला शब्दभण्डार

बांग्ला भाषा का शब्दभण्डार का मूल एवं आदि उत्स पालि एवं प्राकृत भाषाएँ हैं। बाद में बांग्ला भाषा में संस्कृत, फारसी, अरबी एवं विभिन्न भाषाओं से शब्द लिए गये।

बाङ्ला की बोलियाँ

बाङ्ला की कई बोलियाँ हैं। ये बोलियाँ सीमावर्ती बोलियों से तो मिलती-जुलती हैं किन्तु कभी-कभी वे मानक बांग्ला से इतनी अलग हैं कि मानक बांग्ला समझने वाले उनको नहीं समझ पाते। मानक बांग्ला, कोलकाता और नदिया में बोली जानेवाली बोली से जन्मी है। सुनीति क ...

अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन

अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन मराठी भाषा के लेखकों का वार्षिक साहित्यिक सम्मेलन है।प्रथम मराठी साहित्य सम्मेलन १८७८ ई में पुणे में हुआ था जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति महादेव गोविंद रानडे ने की थी।

दासबोध

दासबोध मराठी संत-साहित्य का एक प्रमुख ग्रंथ है। इसकी रचना 17वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के तेजस्वी संत श्री समर्थ रामदास ने की। इस ग्रंथ का महाराष्ट्र में बहुत अधिक सम्मान है। हिंदी भाषा जाननेवाले श्रीरामचरित मानस को जितने आदर की दृष्टि से देखते ह ...

बाल गंधाधर जांभेकर

बाल गंगाधर जांभेकर, मराठी पत्रकारिता के अग्रदूत थे। उन्होने दर्पण नामक प्रथम मराठी पत्रिका आरम्भ की। उन्होंने इतिहास और गणित से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं। रॉयल एशियाटिक सोसाइटी तथा जिऑग्राफिकल सोसाइटी में पढ़े गए शिलालेखों तथा ताम्रपत ...

वर्हाडी बोली

वर्हाडी, मराठी की एक उपभाषा है। यह विदर्भ के अधिकाँश भागों में बोली जाती है। विदर्भ में कूल ११ जिले हैं यह भाषा के अधिकांश शब्द मराठी भाषा के शब्दों से मीलते है । यह भाषा सुनने मे बेहद मधूर लगती है अखिल भारतीय वऱ्हाडी साहित्य मंच द्वारा वऱ्हाडी स ...

भारत में मराठी टीवी चैनलों की सूची

आकाशवाणी मुंबई रेनबो 107.1 FM वर्ल्डस्पेस सुरभि उपग्रह रेडियो आकाशवाणी मुंबई गोल्ड 100.7 FM आकाशवाणी मराठी SW/AM check

मराठी भाषा के समाचार पत्र

मराठी भाषा में साहित्य और संस्कृति का लंबा इतिहास रहा है। पहला भारतीय समाचार पत्र दर्पण मराठी में शुरू किया गया था। मराठी अखबारों की सूची: नवप्रभा नवाकाळ पुढारी लोकमत गोमांतक दैनिक ऐक्य प्रधान तरुण भंडारी कोंकण दर्शन देशोन्नती संध्यानंद सनातन प्र ...