ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 131

अभय छजलानी

अभय छजलानी एक वरिष्ठ पत्रकार है। इनका जन्म 4 अगस्त 1934 को इंदौर में हुआ। 1955 में पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। 1963 में कार्यकारी संपादक का कार्यभार संभाला बाद में लंबे अरसे तक नईदुनिया के प्रधान संपादक भी रहे। वर्ष 1965 में उन्होंने प ...

नवलखा

नवलखा, मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भीतर एक आवासीय इलाका है। कहा जाता है की इस क्षेत्र का नाम ऐसा इसलिये हैं क्योंकि एक समय में यहाँ नौ लाख पेड हुआ करते थे।

भारतीय प्रबंध संस्थान, इंदौर

भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर के अलावा पांच अन्य स्थानों में स्थित है। यह प्रबंधन शिक्षा का उच्च श्रेणी का संस्थान है। इन्हें सम्मिलित रूप से भारतीय प्रबंधन संस्थान कहा जाता है। साँचा:इंदौर

राव राजा नन्दलाल चौधरी

राव राजा नन्दलाल चौधरी इन्दौर के कम्पेल क्षेत्र के शासक थे। इन्हे इन्दौर शहर के संस्थापक के रूप मे जाना जाता है। सन १७०० में मुग़ल शासक आलमगीर की मुहर की सनद से राव नंदलाल जी को उनके पिता राव चूड़ामण जी की मृत्यु के बाद यहां का शासक घोषित किया गय ...

सरवटे बस स्टैंड

सरवटे बस स्टैंड,मध्यप्रदेश के शहर इंदौर से विशेष रूप से खंडवा, बुरहानपुर, बडवानी, खरगोन आदि. जिलों और राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्और छत्तीसगढ़ आदि के लिए बसें प्रदान करता है.

सी२१ मॉल, इंदौर

C21 मॉल या सेंचुरी 21 मॉल, भारत के इंदौर शहर में एक शॉपिंग मॉल है। यह विजय नगर, इंदौर में एक दूसरे से सटे स्थित जुड़वां मॉल मल्हार मेगा और सी 21 का दूसरा हिस्सा है।

दुलियाजान

दुलियाजान असम के सुदूर पूर्व में बसा एक औद्योगिक नगरी है. यह डिब्रूगढ़ जिले के अंतर्गत आता है और यह डिब्रूगढ़ शहर से पूर्व में ४५ कि.मि. की दूरी पर स्थित है. तिनसुकिया इसके उत्तर में २८ कि.मि. की दूरी पर स्थित है. यह नगर आयल इंडिया लिमिटेड का हेड ...

नामरूप

नामरूप असम के पूर्वोत्तर भाग में पाटकाई पर्वत श्रृंखला की तलहटी के पास स्थित एक छोटा सा शहर है। पाटकाई पर्वत श्रृंखला जो की असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है, पूर्वांचल रेंज की कड़ी है जो म्यांमार से जुड़ी हुयी है। दिल्ली या दिसांग नदी इस ...

अलीगढ नगर निगम

अलीगढ़ नगर निगम 1996 में नगर पालिका से नगर निगम बना। ये तीन मंजिल बना हुआ है भूतल पर गृहकर,स्वास्त्य, विभाग है प्रथम तल पर मुख्य कार्यालय एवं लेखाधिकारी कार्यालय बने हुए हैं धोती तल पर निर्माण विभाग का कार्यालय बना हुआ है एवं संपत्ति कार्यालय नजू ...

राजा नवलराय

नवल राय, अवध के नवाब सफदरजंग के प्रधानमन्त्री व सेनानायक थे। नवल राय, इटावा के ग्राम पारसना के क़ानूनगो परिवार के कायस्थ थे। सफदर जंग ने उसे शायद एक क्लर्क नियुक्त किया था, लेकिन वह असामान्य व्यापार क्षमता, सैन्य प्रतिभा, ईमानदारी और जीतने वाला व ...

आगरा का इतिहास

आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1504 ई. में बसाया था। आगरा मुगल साम्राजय की चहेती जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा। आज भी आगरा मुग़लकालीन इमारतों जैसे - ताज महल, किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन-स्थल ...

आगरा के दर्शनीय स्थल

यमुना नदी के तट पर स्थित आगरा शहर ऐतिहासिक स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। सन् 1506 में सिकन्दर लोदी ने मुगलों का राज्य स्थापित किया था। मुगलों के शासन के दौरान खूबसूरत स्मारक स्थापित किगए थे जिन्हें देखने आज भी पर्यटक आगरा आते हैं। आगरा में हस्तशिल ...

आगरा जिले की तहसीलें

आगरा जिले में २२ तहसीलें हैं। फतेहपुर सीकरी एतमादपुर पिनहट बिचपुरी आगरा जगनेर अज़ीज़पुर शम्साबाद खंदोली बाह फ़तेहाबाद खैरागढ़ बरोली अहीर तनटपुर अछनेरा खंडवा किरौली सरोखीपुरा नैनना जट रुनकता सैयां जैतपुर कलां

एतमादुद्दौला का मकबरा

सम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता की स्मृति में आगरा में यमुना के किनारे एतमादुद्दौला का मकबरा बनवाया था। यह उसके पिता गियास-उद-दीन बेग़, जो जहांगीर के दरबार में मंत्री भी थे, की याद में बनवाया गया था। मुगल काल के अन्य मकबरों से अपेक्षाकृत छोटा होने ...

चीनी का रोजा

आगरा स्थित चीनी का रोजा शाहजहाँ के मंत्री, अल्लामा अफज़ल खान शकरउल्ला शिराज़, को समर्पित है और अपने पारसी शिल्पकारी वाले चमकीले नीले रंग के गुम्बद के लिये दर्शनीय है। यह मकबरा शिराज के अल्‍लमा अफजल खल मुल्‍लाह शुक्रुल्‍लाह को समर्पित है। शुक्रुल् ...

जामा मस्जिद (आगरा)

आगरा की जामा मस्जिद एक विशाल मस्जिद है, जो शाहजहाँ की पुत्री, शाहजा़दी जहाँआरा बेगम़ को समर्पित है। इसका निर्माण १६४८ में शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा बेगम़ ने करायी थी जो यह अपने मीनार रहित ढाँचे तथा विषेश प्रकार के गुम्बद के लिये जानी जाती है। जाम ...

मिढाकुर गाँव, आगरा प्रखंड (आगरा)

मिढाकुर आगरा प्रखंड, आगरा, उत्तर प्रदेश स्थित एक गाँव है। इस गाँव का प्राचीन नाम मीर आकुर था । बादशाह अकबर के ज़माने में यहॉं हाथी ठहरते थे इस लिये घास की मंडी लगती थी।यहाँ घास का दरोग़ा भी रहता था.फ़ारसी में मीर का अर्थ हेता है दरोग़ा और आकुर कह ...

मुसम्मन बुर्ज

आगरा का किला में स्थित खूबसूरती से तराशी गई यह इमारत दीवान-ए-खास के पास स्थित है। यही वह जगह है जहां औरंगजेब की कैद में शाहजहां ने अपनी जिंदगी के आखिरी सात साल बिताए। माना जाता है कि यहां से ताज का सबसे सुंदर नजारा दिखाई पड़ता है जो अधिक प्रदूषण ...

मेहताब बाग

आगरा स्थित मेहताब बाग, यमुना के ताजमहल से विपरीत दूसरे किनारे पर है। यहां एक काला ताजमहल बनना तय हुआ था, जिसमें कि शाहजहां की कब्र बननी थी। किंतु धन के अभाव एवं औरंगज़ेब की नीतियों के कारण वह बन नहीं पाया। यमुना नदी की विपरीत दिशा में बना मेहताब ...

रामबाग

भारत का सबसे पुराना मुग़ल उद्यान, आरामबाग, मुग़ल शासक बाबर ने सन् १५२८ में बनवाया था। यह उद्यान आगरा शहर में ताजमहल से २.३४ किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है।

रामगढ़ ताल

रामगढ़ ताल, गोरखपुर शहर के अन्दर स्थित एक विशाल तालाब है। यह ७२३ हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका परिमाप लगभग १८ किमी है।

गोपालपुरा, माधौगढ़ तहसील

उरई माधौगढ़ तहसील की गोपालपुरा रियासत का किला स्थापत्य की दृष्टि से बेजोड़ है। आज भी यह किला अपने अतीत के वैभव की याद दिलाता है। जालौन जिले में कछवाह क्षत्रियों की रामपुरा और गोपालपुरा में 2 रियासतें थीं। कछवाहों के इतिहास पुस्तक के लेखक जगदीश सि ...

मड़ियाहूँ

यह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के जौनपुर जिले में स्थित एक कस्बा है। यह नगर पंचायत और तहसील भी है।यह जौनपुऔर जंघई से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा है। सड़कमार्ग द्वारा जौनपुर इलाहाबाद वाराणसी प्रतापगढ़ लखनऊ से जुड़ा है। सबसे नजदीक एअरपोर्ट बाबतपुर है जो 3 ...

शाहगंज

शाहगंज भारत राज्य उत्तर प्रदेश का जौनपुर जिले का एक शहर है जो एक नगरपालिका बोर्ड है। शाहगंज के चेयरमैंन श्रीमती गीता जायसवाल, अधिशाषी अधिकारी लालचंद भारतीय, प्रभारी अधिशाषी अधिकारी राजस्व निरीक्षक सुरेंद्र कुमार शर्मा हैं।

झांसी का किला

उत्तर प्रदेश राज्य के झाँसी में बंगरा नामक पहाड़ी पर १६१३ इस्वी में यह दुर्ग ओरछा के बुन्देल राजा बीरसिंह जुदेव ने बनवाया था। २५ वर्षों तक बुंदेलों ने यहाँ राज्य किया उसके बाद इस दुर्ग पर क्रमश मुगलों, मराठों और अंग्रजों का अधिकार रहा। मराठा शासक ...

कमसार

कमसार भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर में स्थित है। कमसार २५ स्थानों से मिलकर बना है। यह इस प्रकार है -उसिया, बहुअरा, रकसहा, मिर्चा, जबुरना, कुसी, भकसी, गोरसरा, मनिया, खजुरी, देवैथा, फूफूआओ, सरईला, अखिनी, चितरकोनि, बारा,दिलदार नगर गाव, ...

बरेली जंक्शन रेलवे स्टेशन

बरेली जंक्शन रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश राज्य के बरेली नगर में स्थित एक रेलवे स्टेशन है। भारत की राजधानी, नई दिल्ली से लगभग २५० किमी की दूरी पर स्थित बरेली जंक्शन उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहाँ से दिल्ली, मुंबई, चे ...

बरेली सिटी रेलवे स्टेशन

बरेली सिटी रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश के बरेली नगर में स्थित एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है। इसका कोड BC है, और यह उत्तर-पूर्वी रेलवे अंचल के इज़्ज़तनगर मण्डल के अंतर्गत आता है। स्टेशन में ४ प्लेटफार्म हैं। इसमें पानी और स्वच्छता सहित सुविधाएं शामिल हैं।

सिविल लाइन्स, बरेली

सिविल लाइन्स भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बरेली नगर में स्थित एक आवासीय तथा वाणिज्यिक क्षेत्र है। यह बरेली नगर के केंद्र में स्थित है, और स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार का काम करता है।

सी॰ बी॰ गंज

सी॰ बी॰ गंज या कलट्टर बक गंज उत्तर प्रदेश राज्य के बरेली नगर में स्थित एक आवासीय क्षेत्र है। ब्रिटिश प्रशासक एवं वन संरक्षक सर पीटर हेनरी कलट्टरबक के नाम पर नामित यह क्षेत्र रामपुर रोड पर बरेली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र की बिलकुल सीमा पर स्थित ह ...

सैयद अमीरमाह बहराइची

सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी के नाम के कारण कौन है जो बहराइच के नाम से परिचित नहीं। तारीख के हरदोर में बहराइच का उल्लेख मिलता है। बुद्ध के ज़माने के आसार गवाही आज भी जिले के कुछ खंडहर से मिलती है। भारत में मुसलमानों के आगमन और सुल्तान महमूद गज़नवी के ह ...

अवंतिकापुरी, उत्तर प्रदेश

अवंतिकापुरी,धाम उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला के निकट रानी की सराय मेें स्थित है। । कहा जाता है कि राजा जन्मेजी ने पृथ्वी पर से सभी साँपों को मारने के लिए इस जगह पर एक यज्ञ का आयोजन किया था। यहाँ स्थित मंदिऔर सरोवर भी काफी प्रसिद्ध है। ...

मेहनगर

मेहनगर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला के मुख्यालय, मऊ के निकट स्थित है। यह स्थान जिला मुख्यालय के पूर्व-दक्षिण से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां एक किला है, जिसमें एक विशाल सरोवर और स्मारक स्थित है। इनका निर्माण राजा हरिबंस ने करवाया था। ...

कोटवन

कोटवन मथुरा जिले, उत्तर प्रदेश, भारत का एक गाँव है। यह हिन्दूमत की मान्यता के अनुसार वह स्थान है जहाँ कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और ब्रज भूमि के मुख्य स्थानों में से एक है। यह गाँव आगरा से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

जतीपुरा

जतीपुरा मथुरा जिले में एक कस्बा एवं पंचायत है। यह गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में आता है। जतीपुरा में गिरिराज मुखारविन्द का बडा मन्दिर है. जतिपुरा गोवर्धन बस स्टैंड से मात्र 5 किलोमीटर दुर है. जतीपुरा का प्राचीन नाम गोपालपुर गोपाल,भगवान श्रीकृष्ण का ए ...

द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा

मथुरा का द्वारिकाधीश मंदिर नगर के राजाधिराज बाज़ार में स्थित है। यह मन्दिर अपने सांस्कृतिक वैभव कला एवं सौन्दर्य के लिए अनुपम है। श्रावण के महीने में प्रति वर्ष यहाँ लाखों श्रृद्धालु सोने–चाँदी के हिंडोले देखने आते हैं। मथुरा के विश्राम घाट के नि ...

पूंछरी का लौठा

पूंछरी का लौठा गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्थलों में से एक है। अन्य प्रमुख स्थल हैं- जतीपुरा, आन्यौर, मुखारविंद मंदिर, राधाकुंड, मानसी गंगा, कुसुम सरोवर, दानघाटी इत्यादि। पूंछरी का लौठा राजस्थान राज्य में आता है।

बलदेव (कस्बा)

बलदेव मथुरा का एक उप नगर है, जिसका कि लगभग एक घंटे का रास्ता है। बलदेव बस अथवा कार से जाया जा सकता है। यह मथुरा जिला मुख्यालय से २० किलोमीटर दूर है। जो कि दक्षिण पूर्व मैं मथुरा सादाबाद रास्ते पर महावन तहसील से ८.५ किलोमीटर स्थित है यहाँ प्राइवेट ...

बाजना, भारत

बाजना की औसत ऊंचाई 183 मीटर 600 फुट है। बाजना नगर पंचायत 1.343 से अधिक घरों की कुल प्रशासन है जो कि बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी और सीवरेज की आपूर्ति कराती है। इसे नगर पंचायत की सीमा के भीतर सड़कों का निर्माण करने और अपने अधिकार क्षेत्र में आने वा ...

मथुरा का सिंह स्तम्भशीर्ष

मथुरा का सिंह स्तम्भशीर्ष, एक स्तम्भशीर्ष है जो उत्तर प्रदेश के मथुरा से प्राप्त हुआ है। यह भारतीय-सिथियन शैली शैली का बलुआ-पत्थर से निर्मित स्तम्भशीर्ष है जिस पर सिंह की मूर्ति बनी है। यह पहली शताब्दी ई में निर्मित है। इसका निर्माण राजूवुल के शा ...

मधुवन

मधुवन वृन्दावन स्थित यमुना नदी के दुसरे किनारे पर वृन्दावन माँट मार्ग पर यमुना एक्सप्रेसवे और यमुना के मध्य वृन्दावन यमुना पुल से लगभग 3 किलोमीटर उत्तर पूर्व स्थित एक छोटा सा अर्ध चन्द्राकार वन है जिसमें अति प्राचीन सिद्धपीठ राधारानी मंदिर एवं मा ...

राधाकुंड

मथुरा से राजकीय बस सेवा द्वारा पहुंचा जा सकता है| ५ किलोमीटर दूर बसे गोवर्धन के लिये प्राइवेट एवं राजकीय बस सुविधा उपलब्ध है जहाँ से ताँगे, औटो कर के राधाकुंड पहुंचा जा सकता है|

कुतुबपुर दताना

कुतुबपुर दताना, रवा राजपूत का गाँव है जो कि बुढ़ाना तहसील, मुज़फ्फरनगर जिला, उत्तर प्रदेश से ८ किमी पूर्व में स्तिथ है। गाँव का डाकघर ३ किमी दूर एक कुरथल नामक गाँव में पड़ता है। दताना गाँव बुढ़ाना तहसील के अंतर्गत पड़ता है। गाँव के निर्देशांक २९. ...

बरनावा

बरनावा या वारणावत मेरठ से ३५ किलोमीटर दूऔर सरधना से १७ कि.मी बागपत जिला में स्थित एक तहसील है। इसकी स्थापना राजा अहिबरन ने बहुत समय पूर्व की थी। यहां महाभारत कालीन लाक्षाग्रह चिन्हित है। लाक्षाग्रह नामक इमारत के अवशेष यहां आज एक टीले के रूप में द ...

मेरठ षड्यंत्र मामला

मेरठ षड्यंत्र मामला एक विवादास्पद अदालत का मामला था। मार्च १९२९ में ब्रिटिश सरकार ने ३१ श्रमिकनेताओ को बंदी बना लिया तथा मेरठ लाकर उन पर मुक़दमा चलाया। इन पर आरोप लगाया गया कि ये सम्राट को भारत की प्रभुसत्ता से वंचित करने का प्रयास कर रहे थे। इसस ...

महामाया मंदिर, मोदीनगर

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिला के मोदीनगर कस्बे में सीकरी खुर्द ग्राम में स्थित है। इस मंदिर की स्थानीय लोगों में बहुत मान्यता है। सीकरी गांव स्थित देवी माता का मंदिर काफी प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक वर्ष नवरात्रों में माता का भव्य दरबार लगता है। ...

मोदी उद्योग साम्राज्य

मोदी उद्योग साम्राज्य या उद्योग गृह भारत के प्रसिद्ध मोदी उद्योगपतियों का समूह है। इसकी स्थापना १९२९ में मोदीनगर में रायबहादुर गूजरमल मोदी ने रखी थी। उनकी मृत्यु उपरांत इसे उनके छोटे भाई केदारनाथ मोदी एवं चार पुत्र देख रहे हैं।

मोदीनगर

मोदीनगर की स्थिति यह २६.८६ उत्तर अक्षांश एवं ८०.९१ पूर्व रेखांश में है। यह शहर गाजियाबाद के उत्तर-पश्चिम में राष्ट्रीय राजमार्ग- ५८ पर मेरठ व गाजियाबाद के ठीक बीच में स्थित है। इससे लगा तीसरा शहर है हापुड़। राजमार्ग के समानांतर ही उत्तर रेलवे का ...

क्वींस कालेज

क्वींस कॉलेज वाराणसी में स्थित एक राजकीय इन्टर कालेज है। इसकी स्थापना अंग्रेज शासन में हुई। पहले यह संस्कृत क्वींस कालेज के नाम से जाना जाता था। वर्तमान संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, क्वींस संस्कृत कालेज का प्रवर्धित रूप है जो इससे अलग एक मा ...

नारायण राजवंश

नारायण वंश १००० ई से १९४८ तक बनारस पर शासन करने वाला वंश था। यह भूमिहार ब्राह्मण परिवार था। रामनगर किला तथा इसका संग्रहालय १८वीं शताब्दी से ही काशीनरेश का निवास तथा इस राजवंश के इतिहास का निक्षेपस्थल रहा है। आज भी काशीनरेश बनारस के लोगों के लिये ...