ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 117

गारो भाषा

गारो भाषा या आचिक भाषा पूर्वोत्तर भारत के मेघालय राज्य के गारो पहाड़ियाँ ज़िले तथा असम व त्रिपुरा के कुछ भागों में बोली जाने वाली एक भाषा है। इसे बांग्लादेश के कुछ पड़ोसी क्षेत्रों में भी बोला जाता है। गारो भाषा का कोच एवं बोडो भाषाओ से, जो कि ति ...

ज़ेमे भाषाएँ

ज़ेमे भाषाएँ पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य के पश्चिमोत्तरी भाग में नागा समुदाय की एक शाखा द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार की एक शाखा है लेकिन उस विशाल भाषा-परिवार के अंतर्गत इसका आगे का श्रेणीकरण अभी अज् ...

डिमाश भाषा

डिमासा भाषा, तिब्बती-बर्मी परिवार की एक भाषा है जो डिमासा लोगों द्वारा बोली जाती है जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम में निवास करते हैं। कछार बर्मन और कछार होजाइ प्रथम भाषा के रूप में डिमासा बोलते हैं।

तिवा भाषा

तिवा भाषा या लालुंग भाषा पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में तिवा समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक ब्रह्मपुत्री भाषा है। सन् २००१ की जनगणना में इसे १.७१ लाख लोगों के तिवा समुदाय में से लगभग २७,००० लोग बोलते थे।

तुजिया भाषा

तुजिया भाषा मध्य चीन में बसने वाले तुजिया लोगों द्वारा बोले जानी वाली तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक भाषा है। इसकी दो उपभाषाएँ हैं: उत्तरी और दक्षिणी। दोनों ही सुरभेदी भाषाएँ हैं, जिनमें बोलते समय लगागए सुर के अनुसार शब्दों का अर्थ अलग होता है। ...

नाशी भाषा

नाशी भाषा, जिसे लोमी, मोसो और मोसू भी कहा जाता है, दक्षिणी चीन में बसने वाले नाशी लोगों द्वारा बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषा या भाषाओँ का समूह है। सन् २०१० में नाशी बोलने वालों की आबादी लगभग ३ लाख अनुमानित की गई थी। तिब्बती-बर्मी परिवार में य ...

नोसू भाषा

नोसू, जिसे उत्तरी यी, लिआंगशान यी और सिचुआन यी भी कहा जाता है, दक्षिणी चीन में बसने वाले यी लोगों द्वारा बोली जाने वाली तिब्बती-बर्मी भाषाओँ की सदस्य यी भाषाओँ की मानक भाषा है। सारी यी बोलियों में यह अकेली है जिसे पाठशालाओं में लिखित रूप से पढ़ाय ...

बोड़ो भाषा

बोड़ो या बड़ो एक तिब्बती-बर्मी भाषा है जिसे भारत के उत्तरपूर्व, नेपाल और बांग्लादेश मे रहने वाले बोडो लोग बोलते हैं। बोडो भाषा भारतीय राज्य असम की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। भारत में यह विशेष संवैधानिक दर्जा प्राप्त २२ अनुसूचित भाषाओं में से ए ...

बोड़ो-कोच भाषाएँ

बोड़ो-कोच भाषाएँ पूर्वी भारत में बोली जाने वाली कुछ भाषाओं का एक परिवार है। यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक शाखा है। इसकी स्वयं तीन शाखाएँ हैं: बोड़ो-गारो भाषाएँ, कोच भाषाएँ और देओरी भाषा।

बोड़ो-गारो भाषाएँ

इसकी दो प्रमुख शाखाएँ हैं: गारो - गारो, मेगम बोड़ो - बोड़ो, डिमासा, तिवा लालुंग, त्रिपुरी, कछारी, मोरान विलुप्त, हाजोंग बोड़ो को असम में सरकारी दर्जा प्राप्त है। त्रिपुरी कोकबरोक त्रिपुरा की एक आधिकारिक भाषा है। मेगम पर खसिक भाषाओं का गहरा प्रभाव है।

ब्रह्मपुत्री भाषाएँ

ब्रह्मपुत्री भाषाएँ या साल भाषाएँ तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक उपशाखा की बोलियाँ हैं जो पूर्वी भारत और बर्मा व बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में बोली जाती हैं।

अल्ताई भाषा

अल्ताई भाषा रूस के साइबेरिया क्षेत्र के अल्ताई गणतंत्और अल्ताई क्राय विभागों में बसने वाले अल्ताई लोगों की मातृभाषा हैं जो तुर्की भाषा-परिवार की सदस्य है। सन् १९९२ में इसे मातृभाषा के रूप में बोलने वालों की संख्या २०,००० अनुमानित की गई थी जबकि सन ...

क़शक़ाई भाषा

क़शक़ाई या ग़शग़ाई एक तुर्की भाषा है जो क़शक़ाई समुदाय के लोग बोलते हैं। यह समुदाय मुख्य रूप से ईरान के फ़ार्स क्षेत्र में बसा हुआ है। क़शक़ाई बोली अज़ेरी भाषा के बहुत क़रीब है और कभी-कभी उस भाषा की उपभाषा कहलाती है। अधिकतर क़शक़ाई लोग क़शक़ाई भा ...

ख़कास भाषा

ख़कास​ रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित ख़कासिया गणतंत्र में ख़कास लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। ख़कास लोगों की आबादी लगभग ७५,००० है, जिनमें से २०,००० ख़कास​ भाषा बोलते हैं। सभी ख़कास​ बोलने वाले द्विभाषीय हैं और ख़कास​ के साथ- ...

गागाउज़ भाषा

गागाउज़ एक तुर्की भाषा है जो मोल्दोवा के गागाउज़िया क्षेत्र की सरकारी भाषा है और जिसे मुख्य रूप से गागाउज़ समुदाय के लोग बोलते हैं। ध्यान दें कि एक अन्य बालकनी गागाउज़ तुर्की नामक भाषा भी है लेकिन भाषावैज्ञानिक इन दोनों को भिन्न मानते हैं।

तातार भाषा

तातार भाषा रूस के तातारस्तान और बश्कोरतोस्तान के तातार लोगों द्वारा बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। मध्य एशिया, युक्रेन, पोलैंड, तुर्की, फ़िनलैंड और चीन में भी कुछ तातार समुदाय इसे बोलते हैं। ध्यान दें कि युक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र में एक क्री ...

तुर्किस्तान

तुर्किस्तान मध्य एशिया के एक बड़ा भूभाग का पारम्परिक नाम है जहाँ तुर्की भाषाएँ बोलने वाले तुर्क लोग रहते हैं। इस नाम द्वारा परिभाषित इलाक़े की सीमाएँ समय के साथ बदलती रहीं हैं और इसका प्रयोग भी तुर्किस्तान से बाहर रहने वाले लोग ही अधिक करते थे। आ ...

तूवी भाषा

तूवी भाषा रूस के तूवा गणराज्य में बोली जाने वाली एक तुर्की भाषा है। इसके मातृभाषी तूवा के आलावा चीन, मंगोलिया और रूस के अन्य भागों में भी पाए जाते हैं। इसे मातृभाषा बोलने वालों की संख्या लगभग २.५ लाख अनुमानित की गई है। हालांकि यह एक तुर्की भाषा ह ...

महमूद काश्गरी

महमूद काश्गरी ११वीं सदी ईसवी के काल में तुर्की भाषाओँ के एक विद्वान और कोशकर्मी थे। वे मध्य एशिया के काश्गर शहर के निवासी थे। उन्होंने १०७४ ईसवी में तुर्की भाषाओँ का पहला सम्पूर्ण शब्दकोश तैयार किया, जिसका नाम दीवान-उ-लुग़ात​-उत-तुर्क था। यह उन्ह ...

साइबेरियाई तुर्की भाषाएँ

साइबेरियाई तुर्की भाषाएँ या पूर्वोत्तरी तुर्की भाषाएँ तुर्की भाषा-परिवार की छह शाखाओं में से एक हैं।

आदि-द्रविड़ भाषा

परिभाषा के अनुसार आदि भाषाएँ परिकल्पित भाषाएँ हैं, जिन्हें भाषाविदों के द्वारा पुनः निर्मित किया गया है और इसीलिए किसी भी आदी भाषा के ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। प्रोटो-द्रविड़ियन के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। द्रविड़ भाषाओं में तुलनात्मक ...

कुड़ुख

कुड़ुख या कुरुख एक भाषा है जो भारत, नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश में बोली जाती है। भारत में यह बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल के उराँव जनजातियों द्वारा बोली जाती है। यह द्रविण परिवार से संबन्धित है। इसको उराँव भाषा भी कहते ...

माल्टो भाषा

मालटो या पहाड़िया पूर्व भारत के बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल व उड़ीसा राज्यों और बंग्लादेश के कुछ छोटे क्षेत्रों में बोली जाने वाली एक उत्तरी द्रविड़ भाषा है। इसकी कुमारभाग पहाड़िया और सौरिया पहाड़िया नामक दो उपभाषाएँ हैं जिन्हें कुछ भाषावैज्ञानिक ...

खो-ब्वा भाषाएँ

खो-ब्वा भाषाएँ, जो बुगुनी भाषाएँ और कमेंगी भाषाएँ भी कहलाती हैं, भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के कुछ भागों में बोली जाने वाली भाषाओं का एक छोटा भाषा-परिवार है। इस परिवार का नाम इसकी सभी सदस्य भाषाओं में पाए जाने वाले दो शब्दों पर रखा गया है - खो ...

दिगारो भाषाएँ

दिगारो भाषाएँ या दिगारू भाषाएँ या उत्तरी मिश्मी भाषाएँ भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य और तिब्बत में मिश्मी समुदाय द्वारा बोली जाने वाली कुछ भाषाओं का एक छोटा भाषा-परिवार है। इस बात पर विवाद है कि यह तिब्बती-बर्मी भाषा-परिवार की एक शाखा है या स्वयं ...

अहीर्वती

अहीर्वती एक इंडो-आर्यन भाषा है, जिसे हरियाणा-राजस्थानी भाषा के रूप में वर्गीकृत किया गया है और अहीरवाल, दिल्ली, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ में बोली जाती है। और गुड़गांव, हरियाणा, अलवर और कोटपुटली राजस्थान के। प्रसिद्ध इतिहासकार रॉबर्ट वान रसेल अहिरवती क ...

ओइरत भाषा

ओइरत मंगोल भाषा-परिवार की एक सदस्य है। विद्वानों में मतभेद है कि यह एक अलग भाषा है या फिर मंगोल भाषा की एक मुख्य उपभाषा है। यह मंगोलिया के सुदूर पश्चिमी इलाक़ों, चीन के सुदूर पश्चिमोत्तरी शिन्जियान्ग प्रान्त और रूस में कैस्पियन सागर के तट पर बोली ...

ऊग्रिक भाषाएँ

ऊग्रिक भाषाएँ यूराली भाषा-परिवार की एक शाखा हैं। यह स्वयं तीन उपशाखाओं में विभाजित है: हंगेरियाई, ख़ान्ती और मान्सी। माना जाता है कि इन सभी की सांझी पूर्वज आदि-ऊग्रिक भाषा पश्चिमी साइबेरिया में दक्षिणी यूराल पर्वतों से पूर्व में 3000 ईसापूर्व से ...

फ़िनो-ऊग्रिक भाषाएँ

फ़िनो-ऊग्रिक भाषाएँ यूराली भाषा-परिवार की उन सभी भाषाओं का समूह है जो सामोयेदी भाषाएँ नहीं हैं। इनमें तीन सर्वाधिक बोली जाने वाली यूराली भाषाएँ - हंगेरियाई, फ़िनिश और एस्टोनियाई - सम्मिलित हैं। इन भाषा-समूह को दो शाखाओं में विभाजित करा जाता है - ...

मरी भाषा

मरी भाषा क़रीब ५ लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली यूराली भाषा-परिवार की एक भाषा है जो मुख्य रूप से रूस के मरी ऍल गणतंत्र में बोली जाती है। मरी ऍल से बाहर यह कुछ हद तक रूस के तातारस्तान, उदमूर्तिया और पेर्म क्षेत्रों में भी बोली जाती है। मरी सिरिलि ...

सामोयेदी भाषाएँ

सामोयेदी भाषाएँ उत्तरतम यूरेशिया में यूराल पर्वतों के पूर्व और पश्चिम में बोली जाने वाली भाषाओं का एक समूह है, जिन्हें लगभग 25.000 लोग बोलते हैं। यह यूराली भाषा-परिवार की एक शाखा है और सभी सामोयेदी भाषाएँ एक ही आदि-सामोयेदी भाषा से उत्पन्न हुई है ...

चार्ल्स फिल्मोर

चार्ल्स. जे. फिल्मोर का जन्म सन् 1929 ई. में हुआ था जो कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बेर्किले में भाषाविज्ञान विभाग में प्रोफेसर थे। इन्होंने सन् 1961 ई. में मिशिगन विश्वविद्यालय से पी-एच.डी की उपाधि ग्रहण की। लगभग दस वर्षों तक ये ओव्यो स्टेट युनिव ...

विलियम लेबाव

विलियम लेबाव का जन्म 4 दिसम्बर 1927 को रदरफोर्ड, न्यू जर्सी में हुआ था। भाषायी परिवर्तन और विभिन्नता Linguistic Change and Diversity का अध्ययन करना इनका प्रमुख कार्य है। अपने लंबे एवं प्रतिष्ठित करियर में इन्होंने भाषाविज्ञान के अध्ययन को एक सैद् ...

भाषा सम्पर्क

भाषा सम्पर्क उस स्थिति को कहते हैं जब दो अलग भाषाओं या उपभाषाओं के बोलने वाले आपसी सम्पर्क में आएँ और संचार या वार्तालाप करें। यह विश्व में एक सर्वव्यापी स्थिति है: बहुभाषिकता पूरे इतिहास में देखी गई है और आधुनिक दुनिया में अधिकतर लोग बहुभाषीय है ...

भोलानाथ तिवारी

डॉ० भोलानाथ तिवारी हिन्दी के कोशकार, भाषावैज्ञानिक एवं भाषाचिन्तक थे। हिंदी के शब्दकोशीय और भाषा-वैज्ञानिक आयाम को समृद्ध और संपूर्ण करने का सर्वाधिक श्रेय डॉ॰ तिवारी को मिलता है।

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव

प्रो॰ रवींद्रनाथ श्रीवास्तव का जन्म 9 जुलाई 1936 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ। उनकी प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा गाँव में ही संपन्न हुई। वे वस्तुतः विज्ञान के विद्‍यार्थी थे। लेकिन उन्होंने साहित्य की ओर अपना कदम बढ़ाया। साहित्य से उनकी रुचि भ ...

लियोनार्ड ब्लूमफ़ील्ड

लिओनार्ड ब्लूमफिल्ड अमेरिका के भाषावैज्ञानिक थे जिन्होने १९३० तथा १९४० के दशक में अमेरिका में संरचनात्मक भाषावविज्ञान की नींव रखी।

लेखनवर्तनी

लेखनवर्तनी या लेखनविधि किसी भाषा को लिखने के स्थापित मानकों को कहते हैं। इसमें विराम, अर्ध-विराम, प्रश्नचिन्ह, शब्दों के बीच में प्रयोग होने वाली जगह या अन्य चिन्ह, इत्यादि आते हैं।

एट चिह्न

एट चिह्न या एट प्रतीक, जिसे हिन्दी में भी अंग्रेजी के समान ही एट पुकारा जाता है, औपचारिक रूप से लेखांकन और वाणिज्यिक चालान में प्रयुक्त होने वाला एक संकेताक्षर है जिसका अर्थ "की दर पर" होता है । हाल के वर्षों में इसका अर्थ "पर स्थित" का द्योतक भी ...

चकमा लिपि

चाकमा लिपि, ब्राह्मी लिपि से व्युत्पन्न एक लिपि है जिसका उपयोग चाकमा भाषा को लिखने के लिए किया जाता है। इसे चाकमा भाषा में अझापात कहा जाता है। तञ्चङ्ग्या भाषा लिखने के लिए भी इसी लिपि का उपयोग होता है। यह बर्मी भाषा की लिपि से मिलती-जुलती लिपि है ...

फ़ोनीशियाई वर्णमाला

फ़ोनीशियाई वर्णमाला फ़ोनीशिया की सभ्यता द्वारा अविष्कृत वर्णमाला थी जिसमें हर वर्ण एक व्यंजन की ध्वनी बनता था। क्योंकि फ़ोनीशियाई लोग समुद्री सौदागर थे इसलिए उन्होंने इस अक्षरमाला को दूर-दूर तक फैला दिया और उनकी देखा-देखी और सभ्यताएँ भी अपनी भाषा ...

मेइतेइ मायेक लिपि

मेइतेइ लिपि या मेइतेइ मायेक १८वीं सदी तक मणिपुरी भाषा के लिये इस्तेमाल होने वाली एक लिपि थी। धीरे-धीरे मणिपुरी लिखने के लिये इसका स्थान बंगाली लिपि ने ले लिया। २०वीं सदी के अन्त में इसे फिर से प्रयोग में लाने के लिये कुछ प्रयास किए जा रहे थे।

वारंग क्षिति

वारंग क्षिति एक आबूगीदा लिपि है जिसका प्रयोग भारत के झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, छत्तीसगढ़ और असम राज्यों में बोली जाने वाली हो भाषा को लिखने के लिए किया जाता है।

हकलाना

हकलाना मानव वाक-शक्ति में एक प्रकार की वाक बाधा होती है जिसमें बोलने वाले न चाह कर भी शब्दों की ध्वनियाँ दोहराता है, उन्हें खींचता है और कभी-कभी अटककर आवाज़ निकालने में असमर्थ हो जाता है। अक्सर देखा गया है कि हकलाने वाले बहुत बुद्धिमान होते हैं औ ...

संज्ञान

संज्ञान कुछ महत्वपूर्ण मानसिक प्रक्रियाओं का सामूहिक नाम है, जिनमें ध्यान, स्मरण, निर्णय लेना, भाषा-निपुणता और समस्याएँ हल करना शामिल है। संज्ञान का अध्ययन मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, भाषाविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान और विज्ञान की कई अन्य शाखाओं के लि ...

मधु (शब्द)

अगर आप शहद पर लेख ढूंढ रहे हैं तो मधु देखिये मधु बहुत सी हिन्द-आर्य भाषाओँ में प्रयोग होने वाले शब्द है जिसका अर्थ शहद या मीठा होता है। इसका एक अन्य अर्थ शराब भी होता है, विशेषकर शहद से बनने वाली शराब, जिसे अंग्रेज़ी में मीड कहते हैं। यह संस्कृत ...

अघोष

स्वनविज्ञान और स्वनिमविज्ञान में अघोष वह ध्वनियाँ होती हैं जिनमें स्वर-रज्जु में कम्पन नहीं होता है। इसके विपरीत घोष वह ध्वनियाँ होती हैं जिनमें स्वर-रज्जु में कम्पन होता है। उदाहरण के लिए "प" एक अघोष ध्वनि है जबकि "ब" एक घोष ध्वनि है। इसी तरह "स ...

कण्ठद्वार

कण्ठद्वार स्वर रज्जुओं के बीच के बीच में स्थित खुले भाग को कहते हैं। बोलते समय स्वर रज्जुओं में कम्पन होती है, जिस से ध्वनि उत्पन्न होती है। कण्ठद्वार को बढ़ाकर या सिकोड़कर ध्वनियाँ बदलती हैं। प्रमुख रूप से केवल कण्ठद्वार के प्रयोग द्वारा उत्पन्न ...

घोष (स्वनविज्ञान)

स्वनविज्ञान और स्वनिमविज्ञान में घोष वह ध्वनियाँ होती हैं जिनमें स्वर-रज्जु में कम्पन होता है, जबकि अघोष वह ध्वनियाँ होती हैं जिनमें यह कम्पन नहीं होता। उदाहरण के लिए "प" एक अघोष ध्वनि है जबकि "ब" एक घोष ध्वनि है। इसी तरह "स" और "श" दोनों अघोष है ...

अलोहा

अलोहा हवाईवी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ "प्रेम," "शांति," "करुणा" और "दया" का मिश्रण है। १९वीं शताब्दी के मध्य से हवाई में इसका अर्थ "नमस्ते" और "अल्विदा" के लिए भी हो रहा है। हवाई राज्य को "अलोहा राज्य" का सूत्र-नाम भी दिया गया है।