ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 109

उत्तरायणी मेला, बागेश्वर

उत्तरायणी मेला उत्तरांचल राज्य के बागेश्वर शहर में आयोजित होता है। तहसील व जनपद बागेश्वर के अन्तर्गत सरयू गोमती व सुष्प्त भागीरथी नदियों के पावन सगंम पर उत्तरायणी मेला बागेश्वर का भव्य आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सगंम में स्नान करने ...

कुंभ एवं अर्धकुंभ मेला, हरिद्वार

उत्तराखण्ड के चारों धामों, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री के लिये प्रवेश द्वार के रूप में प्रसिद्ध हरिद्वार ज्योतिष गणना के आधापर ग्रह नक्षत्रों के विशेष स्थितियों में हर बारहवें वर्ष कुम्भ के मेले का आयोजन किया जाता है। मेष राशि में ...

गढ़वाल का पहनावा

गढ़वाल के निवासी विभिन्न प्रकार के वस्त्र पहनते हैं। निम्न परिवर्ती इनके वस्त्रों के चयन को प्रभावित करते हैं। परम्पराएं जलवायु स्थितियाँ मुख्यतः तापमान स्थानीय उपलब्ध सामग्री लोगों के कार्य करने की आदतें जाति एवं धर्म के आधापर यहाँ के लोगों के प ...

गढ़वाल का लोक नृत्य

जहां का संगीत इतना समृद्ध है, वहां का लोकनृत्य भी उसी श्रेणी का है। इनमें पुरुष व स्त्री, दोनों ही के नृत्य हैं, एवं सम्मिलित नृत्य भी आते हैं। इन लोक नृत्यों में प्रमुख हैं: लांगविर नुल्याः पान्डव नृत्य धुरंग एवं धुरिंग बरादा नटि

गढ़वाल का लोक संगीत

गढ़वाल भी समस्त भारत की तरह संगीत से अछूता नहीं है। यहां की अपनी संगीत परंपराएं हैं, व अपने लोकगीत हैं। इनमें से खास हैं: जग्गार बाजुबंद छोपाटी छुरा खुदेद पूजा लोकगीत मंगल बसंती चौन फूला एवं झुमेला

गढ़वाल की कला एवं चित्रकारी

चाँदी के समान श्वेत पर्वत शिखर कल-2 करती चमकदार सरिताएं, हरी भरी घाटियाँ एवं यहाँ की शीत जलवायु ने शान्ति एवं स्वास्थय लाभ हेतु एक विशाल संख्या में पर्यटकों को गढ़वाल के पर्वतों की ओर आकर्षित किया है। यह एक सौन्दर्यपूर्ण भूमि है जिसने महर्षि बाल् ...

गौचर मेला

भारत मेलों एवं सांस्कृतिक आयोजनों का देश रहा है। मेले किसी भी समाज के न सिर्फ लोगों के मिलन के अवसर होते है वरन संस्कृति, रोजमर्रे की आवश्यकता की पूर्ति के स्थल व विचारों और रचनाओं के भी साम्य स्थल होते हैं। पर्वतीय समाज के मेलों का स्वरूप भी अपन ...

देवीधूरा मेला

माँ बाराही धाम, लोहाघाट लोहाघाट-अल्मोड़ा मार्ग पर लोहाघाट से लगभग 45 कि.मी की दूरी पर स्थित है। यह स्थान सुमद्रतल से लगभग 6500 फिट की ऊँचाई पर स्थित है। महाभारत में पाण्डवों के अज्ञातवास से लेकर अनेक पौराणिक धार्मिक एवं ऐतिहासिक घटनाओं से जुडा हु ...

नैनीताल महोत्सव

उत्तर भारत की प्रख्यात पर्यटक नगरी नैनीताल में नगर पालिका परिषद नैनीताल के द्वारा वर्ष 1952 से माह अक्टूबर में शरदोत्सव का आयोजन प्रतिवर्ष किया गया। वर्ष 1970-71 से पर्यटन विभाग द्वारा इस आयोजन को अपनी ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की गयी। तद्दोपरान ...

पिरान कलियर उर्स

भारत के उत्तरांचल राज्य के रुड़की शहर में पिरान कलियर उर्स का आयोजन होता है। मेले का आयोजन रूडकी के समीप ऊपरी गंग नहर के किनारे जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिरान कलियर गांव में होता है। इस स्थान पर हजरत मखदूम अलाउदीन अहमद ‘‘साबर ...

बसंत पंचमी मेला, कोटद्वार

बसन्त पंचमी हिन्दू समाज का प्रमुख पर्व है, परिवर्तन व आशा-उमंग के इस पर्व का विभिन्न धार्मिक स्थलों पर उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। जनपद पौडी में कोटद्वार के समीप कण्वाश्रम ऐतिहासिक, सांस्कृतिक महत्व का स्थल है। यहॉ पर प्रति वर्ष बसन्त पंचमी पर्व ...

बैकुण्ठ चतुर्दशी मेला, श्रीनगर

उत्तराखण्ड के गढ़वाल अंचल में श्रीनगर में बैकुंठ चतुर्दशी का मेला प्रतिवर्ष लगा करता है। विभिन्न पर्वों की भांति वैकुण्ठ चतुर्दशी वर्षभर में पडने वाला हिन्दू समाज का महत्वपूर्ण पर्व है। सामान्यतः दीपावली तिथि से 14 वे दिन बाद आने वाले साल का यह प ...

माघ मेला, उत्तरकाशी

माघ मेला उत्तरकाशी इस जनपद का काफी पुराना धार्मिक/सांस्कृति तथा व्यावसायिक मेले के रूप में प्रसिद्ध है। इस मेले का प्रतिवर्ष मकर संक्राति के दिन पाटा-संग्राली गांवों से कंडार देवता के साथ -साथ अन्य देवी देवताओं की डोलियों का उत्तरकाशी पहुंचने पर ...

धारचूला (देहात), धारचुला तहसील

धारचूला, धारचुला तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथोरागढ जिले का एक गाँव है।धारचूला एक छोटा सा सुदूर क़स्बा है जो हिमालय से होकर गुज़रने वाले एक प्राचीन व्यापार- मार्ग से जुड़ा हुआ है।नगर चारों ओर से पहाड़ियों से घ ...

आगर, बाराकोट तहसील

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आली मज्याडी, आदिबद्री तहसील, उत्तराखण्ड

आली, पूर्व नाम आसौं आली आदिबद्री तहसील में आदिबद्री एन एच 109 सड़क पर हनुमान मंदिर से नोटी नंदासैण वाली सड़क पर 22 कि.मी की दूरी पर बसा है। यह सड़क जंगलों के बीच से होकर जाती है यह गाँव चारो तरफ से जंगल और ऊपर से आली बुग्याल जिसको यहाँ के ग्रामवा ...

काकड, बाराकोट तहसील

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काकडी, बाराकोट तहसील

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कालीमठ

कालीमठ भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित एक गाँव है। राष्ट्रीय राजमार्ग १०७ यहाँ से गुज़रता है। कालीमठ में महाकवि कालिदास का जन्म हुआ था।

किमोठा, पोखरी तहसील

किमोठा, पोखरी तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत गढ़वाल मण्डल के चमोली जिले का एक गाँव है। वर्ष 1802 में जब गोर्खाओं ने गढ़वाल पर आक्रमण किया, तो गोर्खा राजा भी किमोठियों की विद्वता से बेहद प्रभावित हुआ और गांव को ताम्रपत्र दिया, जो आ ...

गणाई गंगोली

गणाई गंगोली भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथौरागढ़ जनपद का एक गाँव तथा बाजार है, जो इसी नाम की तहसील का मुख्यालय भी है। अल्मोड़ा-बेरीनाग-डीडीहाट राज्य राजमार्ग ३ पर सेराघाट से १० किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणाई गंगोली कुल्य ...

चमौली, बाराकोट तहसील

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काला चौना, चौखुटिया तहसील

काला चौना रामगंगा नदी के पूर्वी छोपर चौखुटिया ब्लॉक के तल्ला गेवाड़ में भारतवर्ष के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के अल्मोड़ा जिले में स्थित कनौंणियॉ बिष्ट नाम से विख्यात कुमॉऊनी हिन्दू राजपूतों के ऐतिहासिक गॉवों में से एक गाँव है।

जैती

जैती अथवा जैंती गॉव तहसील मुनस्‍यारी, जिला पिथौरागढ़, उत्‍तराखण्‍ड का एक खूबसूरत गॉव है। इस गॉव की खास विशेषता यह है कि इसके दोनों ओर स्‍वच्‍छ कल-कल कर बहती नदियां है, सामने विशाल हिमालय पर्वत श्रंखला की पंचचूली चोटी और बाई ओर नन्‍दा देवी और त्रि ...

डांग, चौखुटिया तहसील

डांग, चौखुटिया तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के अल्मोड़ा जिले का एक गाँव है। यह गाँव रामगंगा नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यह कनौंणियॉं बिष्ट नामक उपनाम से विख्यात कुमांऊॅंनी हिन्दू राजपूतों का पुश्तैनी गाँव है। ...

दयारतोली, बाराकोट तहसील

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पाली पल्याल, गंगोलीहाट तहसील

पाली पल्याल, गंगोलीहाट तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथोरागढ जिले का एक गाँव है। पाली पल्याल गाँव के बारे मे गाँव वालों मे एक कहावत प्रचलित है कि इस गाँव मे एकमात्र पल्याल जाति के ही लोग रह सकते है यह सच इसलिए भी ...

पुनियाल, बाराकोट तहसील

अगर आप पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के ग़िज़र ज़िले में इसी नाम की तहसील पर जानकारी ढूंढ रहें हैं, तो पुनियाल वाला लेख देखें पुनियाल, बाराकोट तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के चम्पावत जिले का एक गाँव है।

पोंथिग, कपकोट तहसील

पोंथिग, कपकोट तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के बागेश्वर जिले का एक गाँव है। यहाँ माँ नन्दा भगवती का भव्य मन्दिर भी है। यहाँ हर साल माँ के दरबार में पूजा का आयोजन होता है। माँ पर भक्तों की आस्था, विश्वास और श्रद्धा के ...

बयोली, बाराकोट तहसील

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बाराकोट तहसील

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भेटी, घाट तहसील

भेटी, घाट तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत गढ़वाल मण्डल के चमोली जिले का एक गाँव है! यह एक कृषि प्रदान गाव है, यहां के 75%लोग कृषि करते है,

डडोली मल्ली-चौथान-१, थलीसैंण तहसील

डडोली मल्ली-चौथान-१, थलीसैंण तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत गढ़वाल मण्डल के पौड़ी जिले का एक गाँव है। जो प्रक्रति की देंन है यहाँ पर 12 महीने ठण्ड ज्यादा रहती है और यहाँ का मौसम बहुत सुन्दर रहता है। यहाँ माता भागवती का बहुत पुराना ...

मिलम, भारत

मिलम भारत के उत्तराखण्ड राज्य के पिथौरागढ़ जनपद की जोहार घाटी में भारत-चीन सीमा के समीप स्थित अंतिम ग्राम है। यह ग्राम ३० २६ के अक्षांशों तथा ८० ९ देशान्तरों पर समुद्र तल से ११४०० फीट ऊंचाई पर ऊंटा धुरा दर्रे से १३ मील की दूरी पर स्थित है। मिलम ह ...

मौराडी, बाराकोट तहसील

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सतखोल, नैनीताल तहसील

सतखोल, विकास खंड रामगढ, तहसील व् जिला नैनीताल, उत्तराखंड राज्य अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल एक गाँव है। क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में सतखोल का नाम प्रमुखता से आता है. सतखोल कुमाऊँ की पहाड़ियों में 2256 मीटर 7400 फीट की ऊँचाई पर, नैनीताल से 50 किमी ...

सल्ला रौतेला, अल्मोडा तहसील

{{Infobox Indian Jurisdictions |type = गाँव |native_name = सल्ला रौतेला, अल्मोडा तहसील |district = अल्मोड़ा |official_languages = हिन्दी,संस्कृत, |state_name = उत्तराखण्ड |website = www.uttara.gov.in |area_telephone = |postal_code = |climate = |p ...

सुतेडा, बाराकोट तहसील

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स्यांकुरी, धारचुला तहसील

स्यांकुरी, धारचुला तहसील में भारत के उत्तराखण्ड राज्य के अन्तर्गत कुमाऊँ मण्डल के पिथोरागढ जिले का एक गाँव है। नेपाल सीमा से लगे गाँवों में यह गाँव भौगोलिक रूप से क्षेत्र के मध्य में स्थित है। धारचूला नगर से रांथी, जुम्मा के बाद तीसरा गाँव है। वि ...

ज्योलिकोट

ज्योलिकोट उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में स्थित है। ज्योलिकोट की खुबसूरती पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। यहां पर दिन के समय गर्मी और रात के समय ठंड पडती है। आसमान आमतौपर साफ और रात तारों भरी होती है। कहा जाता है कि बहुत पहले श्री अरबिंदो और ...

त्रिऋषि सरोवर

नैनीताल के सम्बन्ध में एक और पौराणिक कथा प्रचलित है। स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में एक समय अत्रि, पुस्त्य और पुलह नाम के ॠषि गर्गाचल की ओर जा रहे थे। मार्ग में उन्हे#े#ं यह स्थान मिला। इस स्थान की रमणीयता मे वे मुग्ध हो गये परन्तु पानी के अभाव से ...

रामगढ़, उत्तराखण्ड

भवाली से भीमताल की ओर कुछ दूर चलने पर बायीं तरफ का रास्ता रामगढ़ की ओर मुड़ जाता है। यह मार्ग सुन्दर है। इस भुवाली - मुक्तेश्वर मोटर-मार्ग कहते हैं। कुछ ही देर में २३०० मीटर की ऊँचाई वाले गागर नामक स्थान पर जब यात्रीगण पहुँचते हैं तो उन्हें हिमाल ...

सात ताल, नैनीताल

कुमाऊँ अंचल के सभी तालों में सातताल का जो अनोखा और नैसर्गिक सौन्दर्य है, वह किसी दूसरे ताल का नहीं है। इस ताल तक पहुँचने के लिए भीमताल से ही मुख्य मार्ग है। भीमताल से सातताल की दूरी केवल ४ कि॰मी॰ है। नैनीताल से सातताल २१ कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित ह ...

हनुमानगढ़ी

नैनीताल में हनुमानगढ़ी सैलानी, पर्यटकों और धार्मिक यात्रियों के लिए विशेष, आकर्षण का केन्द्र हैै। यहाँ से पहाड़ की कई चोटियों के और मैदानी क्षेत्रों के सुन्हर दृश्य दिखाई देते हैं। हनुमानगढ़ी के पास ही एक बड़ी वेद्यशाला है। इस वेद्यशाला में नक्षर ...

बरपटिया जनजाति

ज्येष्ठरा/बरपटिया जनजाति उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी ब्लॉक के मूल निवासी है जिन्हें ज्येष्ठरा भी कहा जाता है। ज्येष्ठरा का अर्थ होता है ज्येष्ठ या श्रेष्ठ अर्थात् जनजाति में श्रेष्ठ तथा बरपटिया का अर्थ होता है बारह पट्टी का ऊनी कोट ...

उत्तराखण्ड के मण्डल

उत्तराखण्ड के मण्डल भारत के उत्तराखण्ड राज्य के दो मण्डलों को कहते हैं। उत्तराखण्ड में दो मण्डल है: कुमाऊँ और गढ़वाल जो क्रमशः राज्य के पूर्वी और पश्चिमी भाग में हैं। देहरादून हरिद्वार पौड़ी गढ़वाल रुद्रप्रयाग उत्तरकाशी टिहरी गढ़वाल चमोली इन दोनो ...

ओड़िआ लिपि

ओड़िआ लिपि, ब्राह्मी लिपि से व्युत्पन्न लिपि है जिसका प्रयोग ओड़िआ भाषा लिखने में होता है। इस लिपि के वर्णों का रूप देखकर ऐसा भ्रम हो सकता है कि इस पर तमिल, मलयालम आदि दक्षिण भारतीय लिपियों का प्रभाव है, किन्तु ऐसा है नहीं। ओड़िआ लिपि, देवनागरी ल ...

किसान (जनजाति)

किसान जनजाति, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहाऔर झारखण्ड प्रदेशों की निवासी जनजाति है। ये लोग परम्परागत रूप से कृषि कार्य करते हैं। ये लोग मुख्यतः कुड़ुख भाषा, सुन्दरगढ़ी उड़िया, और हिन्दी बोलते हैं।

किब्बनहल्ली

किब्बनहल्ली भारत के कर्नाटक राज्य के तुमकूर ज़िले में स्थित एक गाँव है। यह तिपटूर तालुका के अंतर्गत आता है। राष्ट्रीय राजमार्ग ७३ यहाँ से गुज़रता है।

कूडली

कूडली भारत के कर्नाटक राज्य के शिमोगा ज़िले में स्थित एक गाँव है। यह तुंगा नदी और भद्रा नदी का संगमस्थल होने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के बाद मिली-जुली नदी तुंगभद्रा नदी कहलाती है। कूडली का 12वीं शताब्दी का होयसल शैली में बना रामेश्वर मंदिर भी प्र ...